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Chapter Chapter 2. प्रबंध के सिद्धांत Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study

Chapter Chapter 2. प्रबंध के सिद्धांत Business Study Class 12 cbse notes पेज 3 in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 2. प्रबंध के सिद्धांत Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study

कक्षा 12 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 2. प्रबंध के सिद्धांत को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पेज 3 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 2. प्रबंध के सिद्धांत

3. पेज 3

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टेलर का वैज्ञानिक प्रबंध -

टेलर का परिचय - एफ. डब्लू टेलर (1856-1915) मिड्वेल स्टील वकर्स में कम समय में ही मुख्य अध्यक्ष के पद पर पहुंचे | उन्होंने यह जाना की कर्मचारी अपनी क्षमता से कम काम कर रहे है तथा प्रबंधको और श्रमिको की एक दुसरे के प्रति नकारात्मक सोच है | इसीलिए उन्होंने विभिन्न प्रयोगों के आधार पर वैज्ञानिक प्रबंध की तकनीको का विकास किया इसलिए उन्हें 'वैज्ञानिक प्रबंध का' जनक माना जाता है|

वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांत -

1. विज्ञान न की अंगूठा टेक नियम - इस सिद्धांत के अनुसार कार्य करने के लिए पुरानी तकनीको का ही नहीं प्रयोग करते रहना चाहिए बल्कि हर समय नए - नए प्रयोगों द्वारा नई तकनीको की खोज कर कार्य को सरल बनाना चाहिए तथा प्रबंधको द्वारा लिए गए निर्णय तथ्यों पर और हर कार्य वैज्ञानिक जाँच पर आधारित होने चाहिए न की निजी विचार और अंगूठा टेक नियमो पर |

2. मैत्री न की विवाद - इस सिद्धांत के अनुसार संगठन के अन्दर ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जिससे कर्मचारी तथा प्रबंध की एक दुसरे के प्रति सकारात्मक सोच पैदा हो और वे एक - दुसरे को अपना पूरक समझे | इसके लिए कर्मचारी तथा प्रबंध के बीच टीम भावना का विकास करना चाहिए |

3. सहयोग न की व्यक्तिवाद - इस सिद्धांत के अनुसार प्रबंध तथा श्रमिको के बीच प्रतियोगिता के स्थान पर सहयोग की भावना होनी चाहिए ताकि कार्य को आसानी से किया जा सके | उन्हें समझना चाहिए कि दोनों को एक - दुसरे की जरूरत है | इसके लिए यदि कर्मचारियों की तरफ से कोई सुझाव आता है तो प्रबंध को उसे सुनना चाहिए तथा कर्मचारियों को प्रबंधक द्वारा लिए गए निर्णयों का सम्मान करना चाहिए |

4. अधिकतम कार्यक्षमता तथा श्रमिको का विकास - टेलर के अनुसार कर्मचारियों को उनकी योग्यता, कार्य करने की क्षमता तथा उनकी कुशलता के अनुसार कार्य सौपना चाहिए तथा उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए समय - समय पर उन्हें प्रशिक्षण देते रहना चाहिए |

वैज्ञानिक प्रबंध की पद्धितियां वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांत को व्यवहार में लेन के लिए टेलर ने वौज्ञानिक प्रबंध की पद्धितियों का विकास किया | जो निम्नलिखित ;

(1) क्रियात्मक फोरमैनशिपयह पद्धति पूर्ण रूप से विशिष्टीकरण के सिद्धांत पर आधारित है | इस पद्धति में संगठन के सभी कार्यों को छोटे-छोटे भागों में बाँट कर, विशेषज्ञों को सौप दिया जाता हैं ताकि विशिष्टीकरण का लाभ प्राप्त किया जा सकें | टेलर के अनुसार कार्य का दो भागों में बाँटा गया ;(i) नियोजन विभाग तथा (ii) उत्पादन विभाग | नियोजन विभाग को नियोजन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अधिकारी के तथ उत्पादन विभाग को उत्पादन अधिकारी को सौपा जाता हैं | जिसकें अंतर्गत चार-चार अन्य विशेषज्ञों को नियुक्त किया जाता हैं | जो कि अपने कार्य के विशेषज्ञ होते हैं |

(i) नियोजन विभाग के विशेषज्ञ व कार्य ;

(a) कार्यमार्ग लिपिक : विशेषज्ञ का कार्य, कार्य का क्रम निश्चित करना |

(b) संकेत कार्ड लिपिक : इसका कार्य सन्देश कार्ड तैयार कर उन्हें टोली नायकों को सौंपना है तथा कार्य की प्रकृति, विधि, प्रयोग की सामग्री व मशीनों की सूचना देता हैं |

(c) समय एवं लागत लिपिकयह लिपिक निश्चित करता हैं कि एक विशेष कार्य को करने में कितना समय लगेगा तथा कितनी लागत खर्च होगी |

(d) अनुशासन अधिकारी : यह कार्य के द्वारा उसकी व्यवस्था की निगरानी करता हैं | अर्थात यह देखना की कार्य व्यवस्थित ढंग से हो रहा है या नहीं |

(ii) उत्पादन विभाग के विशेषज्ञ एवं उनके कार्य ;

(a) टोली नायकश्रमिकों के टोली के नेता को टोली नायक कहते हैं | जिनका मुख्य कार्य यह निश्चित करना हैं कि उत्पादन के प्रत्येक साधन प्रयोग की अवस्था में हो |

(b) गति नायकगति नायक का कार्य यह देखना होता हैं कि श्रमिक अपना कार्य निर्धारित समय में करें |

(c) मरम्मत नायक मरम्मत नायक का कार्य यह देखना होता है कि सभी मशीनें व औजारों काम करने योग्य अवस्था में हो |

(d) निरीक्षक : निरीक्षक नियंत्रण के अंतर्गत किये जाने वाले कार्यों को करता है ; जैसे :- कार्य की जाँच करना, प्रमापों को वास्तविक कार्यों से मिलाना, सुधारात्मक कार्यवाही करना आदि |

(2) कार्य का प्रमापीकरण : इसके अंतर्गत कार्यों को एक ही गुणवत्ता लेन के लिए विभिन्न क्रियाओं के सम्बन्ध में प्रमापों का निर्धारण किया जाता हैं; जैसे- किसी कार्य में लगने वाला अधिकतम समय का निर्धारण करना |

प्रमापीकरण का उद्येश्य

(i) उत्पादों को निश्चित प्रकार, आकार व विशेषता को बनाये रखने के लिए |

(ii) उत्पादों का एक-दूसरें के स्थान पर प्रयोग को संभव बनाना |

(iii) लोगों व मशीनों के प्रमाप निश्चित करना |

(3) सरलीकरण सरलीकरण से अभिप्राय अनावश्यक कार्यों कि समाप्ति से हैं; जैसे:- उत्पाद का अनावश्यक वजन, गुण, आकार व प्रकार आदि से हैं |

सरलीकरण के उद्येश्य

(i) श्रमिकों का ध्यान आवश्यक कार्य की ओर केन्द्रित करना |

(ii) मशीनों में मितव्यता लाना |

(iii) श्रमिक लागत में कमी करना |

(4) कार्यपद्धति अध्ययन :  इसके अंतर्गत किसी विशेष कार्य को करने के लिए सर्वोतम विधि की पहचान की जाती हैं | जिससें कि उत्पादन लागत को न्यूनतम व उत्पाद की गुणवत्ता को अधिकतम किया जा सकें |

(5) गति अध्ययन इस अध्ययन का मुख्य उद्येश्य उन अनावश्यक हरकतों को समाप्त करना है जो किसी कार्य की प्रक्रिया की गति को धीमा करती हैं | जिससें कर्मचारियों की योग्यता का सही उपयोग किया जा सकें |

(6) समय अध्ययनइसका अभिप्राय यह निर्धारित करना है कि किसी कार्य को करने में कितना प्रमापित समय की आवश्यकता होगी, ताकि समय की बर्बादी को कम किया जा सकें और अतिरिक्त समय का उपयोग नवप्रवर्तन में किया जा सकें |

(7) थकान अध्ययन : थकान अध्ययन के अंतर्गत एक विशेष काम के दौरान आराम की अवधि व उसकी आवृति का निर्धारण किया जाता हैं | आराम की व्यवस्था से कर्मचारियों की कार्यकुशलता का स्तर बना रहता है और उन्हें पुनः शक्ति प्राप्त होती हैं |

(8) विभेदात्मक मजदूरी पद्धति यह पद्धति कर्मचारियों को प्रेरित करने के उद्येश्य से अपनाई गई हैं | इस पद्धति के अनुसार प्रत्येक कर्मचारियों को वेतन उनकी कार्य करने की दर के हिसाब से देनी चाहिए | जो श्रमिक प्रमापित माप से कम कार्य करता हैं उसको कम मजदूरी और जो श्रमिक प्रमाप के समान कार्य करता है उसे सामान्य वेतन और अधिक कार्य करने वाले को अधिक वेतन दिया जाना चाहिए |

(9) मानसिक क्रांति मानसिक क्रांति से अभिप्राय श्रमिक व अधिकारी वर्ग की  मानसिक स्थिति में परिवर्तन से हैं | अर्थात श्रमिकों कि सोच अधिकारीयों के प्रति बदलने की और अधिकारों की सोच श्रमिकों के प्रति बदलने की | दोनों पक्षों में सहयोग, मित्रता व सभागिता की भावना का होना |  

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