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Chapter Chapter 2. प्रबंध के सिद्धांत Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 2 - CBSE Study

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Chapter Chapter 2. प्रबंध के सिद्धांत Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 2 - CBSE Study

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Class 12 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 2. प्रबंध के सिद्धांत

2. पेज 2

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फेयोल के प्रबंध के सिद्धांत -

फेयोल का परिचय - हेनरी फेयोल (1841-1925) ने खान इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त कर एक कोयला खान कंपनी में इंजीनियर के रूप में काम करना शुरू किया |1888 में वे मुख्य कर्यपाल के पद पर पहुँच गए | उस समय कंपनी दिवालियापन की स्थति में थी, उन्होंने इस चुनोती को स्वीकार कर प्रबंधकीय तकनीको को लागू किया | जिससे कम्पनी की स्थति बहुत मजबूत हो गई | निम्न योगदानो के कारण उन्हें प्रबन्ध सिधान्तो का जनक माना जाता है | फेयोल के सिधांत निम्न है -

1. कार्य का विभाजन - इस सिद्धांत के अनुसार कार्यो को छोटे-छोटे भागो में बाँट कर उन्हें योग्य एंव अनुभवी व्यक्तियों को सोंप देना चाहिए ताकि जटिल कार्य सरल हो जाए तथा व्यक्ति एक ही कार्य को बार-बार करके उसका विशेषज्ञ बन जाए | जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी |

2. अधिकार एंव उतरदायित्व - अधिकार एंव उतरदायित्व एक दुसरे से सम्बंधित है | अधिकार का अर्थ निर्णय लेने की शक्ति से है उतरदायित्व का अर्थ जवाबदेही से है |अधिकार के साथ ही उतरदायित्व उत्तपन होता है |

3. अनुशासन - कर्मचारियों द्वारा संगठन के नियमो का पालन करना अनुशासन कहलाता है | इस सिद्धांत के अनुसार उच्च अधिकारियो तथा कर्मचारियों दोनों को ही संगठन द्वारा बनाये गए नियमो का पालन करना चाहिए | संगठन में अनुशासन बनाए रखने के लिए सभी स्तरों पर अच्छे पर्यवेक्षक नियुक्त करने चाहिए |

4. आदेश की एकता - इस सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी को एक समय पर केवल एक ही अधिकारी से आदेश प्राप्त होने चाहिए तथा उसे केवल उसी अधिकारी के प्रति जवाबदेह होना चाहिए | इससे कर्मचारियों और अधिकारियो के बीच सम्बंध स्पष्ट होते है | 

5. निर्देश की एकता - निर्देश की एकता सिद्धांत के अनुसार एक ही तरह के कार्यो को एक ही समूह में रखना चाहिए तथा उनका एक ही अध्यक्ष एंव एक ही योजना होना चाहिए | इससे विभिन्न कार्यो में एकता तथा समन्वय स्थापित करने में सहायता मिलती है |

6. सामूहिक हितो के लिए व्यक्तिगत हितो का समर्पण - इस सिद्धांत के अनुसार संगठन हितो को कर्मचारियों के हितो की तुलना में ऊपर मानना चाहिए और पहले संगठन के हितो को प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि व्यवसाय कर्मचारियों से अधिक जरुरी होते है |

7. कर्मचारियों का पारिश्रमिक - इस सिद्धांत के अनुसार कर्मचारियों को उचित वेतन दिया जाना चाहिए ताकि उनका जीवन स्तर अच्छा बना रहे लेकिन साथ ही साथ यह संगठन की क्षमता के अन्दर होना चाहिए ताकि संगठन को किसी भी प्रकार की हानि न हो |    

8. केंद्रीकरण एंव विकेंद्रीकरण - केंद्रीकरण के अंतर्गत सभी महत्वपूर्ण निर्णय उच्च अधिकारियो द्वारा लिए जाते है अर्थात निर्णय लेने का अधिकार केन्द्रित होता है | जबकि विकेंद्रीकरण के अंतर्गत निर्णय लेने का अधिकार एक से अधिक व्यक्तियों के पास होता है एंव निम्न स्तर तक फैला होता है | फेयोल के अनुसार किसी भी संगठन में केंद्रीकरण तथा विकेंद्रीकरण के बीच संतुलन होना चाहिए | 

9. सोपान श्रृंखला - सोपान श्रृंखला से अभिप्राय एक औपचारिक अधिकार रेखा से है जो संगठन द्वारा जान बुझकर खीची जाती है जो उच्च अधिकारी से निम्न अधिकारी तक एक सीधी रेखा में फैली होती है | यह श्रृंखला संदेशो को ऊपर से नीचे पहुँचाने में सहायता करती है | उच्च स्तर द्वारा दिए गए निर्देश तथा आदेश मध्य स्तर से होते हुए निम्न स्तर तक पहुँचते है जिससे आदेश की एकता आती है | जरुरत पड़ने पर एक ही स्तर के कर्मचारी समतल पट्टी की सहायता से संपर्क करते है |   

10. उचित व्यवस्था - उचित व्यवस्था का अर्थ है सही व्यक्ति को सही काम सौपना तथा सही वस्तु को सही स्थान पर रखना | इससे भौतिक संसाधनों तथा मानव संसाधनों का उचित प्रयोग होता है और संसाधनों की बर्बादी कम होती है | अतः फेयोल के अनुसार संगठन में उचित व्यवस्था होनी चाहिए |

11. समता - इस सिद्धांत के अनुसार प्रबंधको को कर्मचारियों के साथ एक समान, निष्पक्ष तथा मैत्रीपूर्ण व्यवहार करना चाहिए | प्रबंधको को कर्मचारियों के साथ किसी भी तरह की जाति, धर्म तथा लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए | यदि प्रबंधक कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार करते है तथा किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करते है तो कर्मचारी अपने कार्य को पूरी निष्ठा के साथ करते है |

12. कर्मचारियों के कार्यकाल में स्थायित्व - इस सिद्धांत के अनुसार कर्मचारियों के कार्यकाल में स्थायित्व होना चाहिए | कर्मचारियों को बार - बार उनके पद से नहीं हटाना चाहिए | कर्मचारियों को बार - बार उनके पद से हटाने से उनमे असुरक्षा की भावना पैदा हो जाती है जिससे वे अपने कार्यो पर सही से ध्यान नहीं दे पाते है इसलिए उन्हें कार्य की सुरक्षा का विशवास दिलाया जाना चाहिए ताकि उनका अधिकतम योगदान मिल सके |

13. पहल - पहल क्षमता का अर्थ है स्वंय अभीप्रेरणा की दिशा में पहला कदम उठाना | इस सिद्धांत के अनुसार संगठन में कर्मचारियों को पहल करने का अवसर प्रदान करना चाहिए अर्थात कर्मचारियों को योजना बनाने, सुझाव देने व उनको लागू करने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए | इससे कर्मचारी प्रेरित होते है |

14. सहयोग की भावना - इस सिद्धांत के अनुसार प्रबंधको को कर्मचारियों में टीम भावना, एकता तथा सहयोग की भावना का विकास करने पर बल देना जाना चाहिए | प्रबंधको को सामूहिक कार्यो को बढ़ावा देना चाहिए |

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