Chapter Chapter 6. नियुक्तिकरण Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 1 - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Business Study All Chapters:
Chapter 6. नियुक्तिकरण
1. पेज 1
अध्याय - 6
नियुक्तिकरण
नियुक्तिकरण - नियुक्तिकरण से अभिप्राय योग्य एंव कुशल व्यक्तियों को काम पर लगाने से है |
नियुक्तिकरण का महत्व -
1. यह विभिन्न पदों के लिए योग्य कर्मचारी खोजने में सहायता करता है |
2. यह सही व्यक्ति को सही काम पर लगाकर बेहतर निष्पादन को सुनिश्चित करता है |
3. उचित तथा अच्छा नियुक्तिकरण संगठन के निरंतर विकास को सुनिश्चित करता है |
4. यह संगठन में जरुरत के अनुसार कर्मचारियों को नियुक्त कर अधिक श्रम लागत को कम करने तथा मानव संसाधन का पूर्ण प्रयोग करने में सहायता करता है |
5. यह कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने में सहायता करता है |
नियुक्तिकरण प्रक्रिया के चरण -
1. मानव शक्ति आवश्कताओं का आकलन - सबसे पहले यह पता लगाया जाता है की संगठन में कितनी संख्या में कर्मचारी काम कर रहे है तथा किस पद पर काम कर रहे हैं | उसके बाद यह निर्णय लिया जाता है की संगठन में और कितने कर्मचारियों की आवश्यकता है |
2. भर्ती - भर्ती संभावित कर्मचारियों को संगठन में नौकरी के लिए आवेदन देने के लिए प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया है | इसके अंतर्गत विभिन्न स्रोतों से आवश्यक कर्मचारियों की खोज की जाती है तथा उन्हें संगठन में नोकरी के लिए आवेदन पत्र भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है |
3. चयन - इसमें नौकरी के लिए आनेदन देने वाले व्यक्तियों में से विभिन्न कार्यो के लिए योग्य व्यक्तियों को चुना जाता है | यह परीक्षाओं, डॉक्टरी जांच आदि के माध्यम से किया जाता है |
4. अनुस्थापन तथा अभिविन्यास - सही व्यक्ति को सही कार्य पर लगाने की प्रक्रिया को अनुस्थापन कहते है | जब भी किसी नए कर्मचारी का चयन किया जाता है तो उसे काम पर लगाया जाता है | अतः नए कर्मचारी को काम पर लगाना ही अनुस्थापन है |
नए कर्मचारी को संगठन से परिचित करने की प्रक्रिया को अभिविन्यास कहते है | जब किसी नए कर्मचारी का चयन किया जाता है तो उसे संगठन के साथी कर्मचारियों, पर्यवेक्षकों आदि से निल्वाया जाता है तथा परिचय करवाया जाता है |
5. प्रशिक्षण तथा विकास - प्रशिक्षण कर्मचारिओं के कौशल, कार्य करने की क्षमता तथा योग्यता बढाने प्रक्रिया है | यह कर्मचारियों के ज्ञान एंव कौशल को बढाने में सहायता करती है | प्रशिक्षण थोड़े समय तक चलने वाली प्रक्रिया है | विकास से अभिप्राय व्यक्ति के पूर्ण विकास से है | यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है |
6. निष्पादन मूल्यांकन - निष्पादन मूल्यांकन का अर्थ है यह मापना की कर्मचारियों को जो काम सौपा गया था उसे उसने पूरा किया है या नहीं | यह देखना की यदि पूरा किया है तो कितने अच्छे से किया है इसी के आधार पर कर्मचारियों को पद्दोनिती दी जाती है |