Chapter Chapter 12. उपभोक्ता संरक्षण Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 4 - CBSE Study
कक्षा 12 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 12. उपभोक्ता संरक्षण को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पेज 4 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।
CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Business Study All Chapters:
Chapter 12. उपभोक्ता संरक्षण
4. पेज 4
तीन स्तरीय न्यायिक तंत्र अथवा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उपचार एजेंसियां
A. जिला फोरम : एक राज्य में प्रत्येक जिले में एक या अधिक जिला फोरम स्थापित कर होती है | जिला फोरम की मुख्य विशेषता :
(i) जिला फोरम के सदस्य - एक अध्यक्ष सहित तीन अध्यक्ष ( जिसमें एक महिला सदस्य अनिवार्य होती हैं ) | अध्यक्ष की नियुक्ति जिला न्यायाधीश करता हैं |
(ii) इसके अंतर्गत रुपए 20 लाख तक के विवादों का समाधान किया जाता हैं |
(iii) वस्तु के दोषपूर्ण होने की स्थिति में जिला फोरम निम्न आदेश दे सकती हैं ;
(a) वस्तु के दोष को दूर करने का |
(b) उपभोक्ता को वस्तु का मूल्य लौटना |
(c) क्षति के लिए उपभोक्ता को हर्जाने का भुगतान करना |
(iv) यदि पक्षकार जिला फोरम के निर्णय से संतुष्ट नहीं तो वह 30 दिन के अंदर राज्य आयोग के समक्ष अपील कर सकता हैं |
B. राज्य आयोग : राज्य आयोग दवारा स्थापित किया जाता हैं | इसकी विशेषताएं निम्न हैं ;
(i) राज्य आयोग के सदस्य - एक अध्यक्ष सहित तीन सदस्य (एक महिला सदस्य ) न्यायाधीश की योग्यता वाले व्यक्ति को अध्यक्ष नियुक्त किया जाता हैं |
(ii) इसमें रुपए 20 लाख से अधिक तथा रुपए 1 करोड़ तक के विवादों का समाधान जाता किया हैं |
(iii) इसके अंतर्गत भी पक्षकार असंतुष्टि की स्थिति में 30 दिन के अंदर राष्ट्रीय आयोग में अपील कर सकता हैं |
C. राष्ट्रीय आयोग : केंद्रीय सरकार दवारा स्थापित किया जाता हैं | इसकी विशेषताएं ;
(i) राष्ट्रीय आयोग के सदस्य - एक अध्यक्ष सहित पाँच सदस्य ( एक महिला सदस्य ) | राज्य आयोग के समान अध्यक्ष की नियुक्ति |
(ii) इसके अंतर्गत रुपए 1 करोड़ या उससे अधिक मूल्य के विवादों का समाधान किया जाता हैं|
(iii) इसमे भी राज्य आयोग के समान एक या अधिक आदेश दिए जाते हैं |
(iv) पक्षकारों की असहमति की स्थिति में, पक्षकारों दवारा 30 दिन के अंदर उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की जा सकती हैं |
उपभोक्ता संगठनों तथा गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका
(1) उपभोक्ताओं को शिक्षा प्रदान करना : उपभोक्ताओं को करने के लिए उपभोक्ता संगठन के निम्न प्रयास ;
(i) उपभोक्तावाद की शिक्षा देना |
(ii) पत्रिकाओं, पुस्तकों और लेख के दवारा उपभोक्ता अधिकारों की प्रति जागरूक करना |
(iii) सम्मलेन, गोष्ठियां व कार्य शालाएं दवारा शिक्षित करना |
(2) उपभोक्ताओं के लिए मुक़दमा दायर करना : उपभोक्ता संगठन पीड़ित उपभोक्ताओं को उनकी शिकायत दायर कराने में मदद करता हैं |
(3) मिलावट आदि के विरुद्ध आवाज उठाना : उपभोक्ता संगठन बाजार में हो रही वस्तुओं में मिलावट, जमाखोरी, चोर बाजारी और कम तोल आदि के विरुद्ध आवाज उठता है अतः यह उपभोक्ता संरक्षण में अहम भूमिका निभाता है |
(4) शैक्षणिक संस्थाओ की सहायता करना : शैक्षणिक संस्थाओ द्वारा उपभोक्ता संरक्षण के लिए किस प्रकार के पाठ्यक्रम तैयार किये जाये का निर्णय लिया जाता है |
(5) उपभोक्ता संगठनों के जाल को विस्तृत करना : उपभोक्ता संगठन अपनी संख्या में वृद्धि करने के लिए सभी क्षेत्रो में, राज्यों में, जिलो ने अपने संघ की स्थापना करता है |
(6) सरकार की सहायता करना : उपभोक्ता संगठन अनुचित व्यापार व्यवहार की जानकारी सरकारी एजेंसी को देकर सरकार को उन पर कार्यवाही करने में मदद करता है |