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Chapter Chapter 10. वित्तीय बाज़ार Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study

Chapter Chapter 10. वित्तीय बाज़ार Business Study Class 12 cbse notes पेज 3 in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 10. वित्तीय बाज़ार Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study

कक्षा 12 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 10. वित्तीय बाज़ार को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पेज 3 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 10. वित्तीय बाज़ार

3. पेज 3

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पूंजी बाज़ार व मुद्रा बाज़ार में अंतर

अंतर का आधार

पूंजी बाज़ार

मुद्रा बाज़ार

(i) भागीदारी

वित्तीय संस्थाएं, कम्पनियाँ, साधारण जनता |

RBI,वित्तीय संस्थाएं, वित्तीय कम्पनियाँ |

(ii) विनियोग राशि

इन प्रतिभूतियों का अंकित मूल्य रुपए 10, रुपए 100 होता हैं |

ये प्रपत्र अधिक राशि के होते हैं | रुपए 10 लाख |

(iii) अवधि

इस बाज़ार में एक वर्ष से अधिक की अवधि वाली प्रतिभूतियों में व्यवहार किया जाता हैं |

इसमें एक वर्ष से कम की अवधि वाली प्रतिभूतियों में व्यवहार किया जाता हैं |

(iv) संबंधित प्रपत्र

समता अंश, पूर्वाधिकार अंश, ऋण-पत्र, बांड आदि |

अल्पसुचना ऋण, खजाना बिल, वाणिज्यिक बिल, कॉमर्शियल पेपर, जमा प्रमाण-पत्र आदि |

(v) तरलता

कम होती हैं |

अधिक तरलता होती हैं |

(vi) जोखिम तत्व

अधिक जोखिम

पूंजी बाज़ार की तुलना में कम जोखिम |

 

शेयर बाज़ार पर ट्रेडिंग कार्यविधि एवं सेबी

शेयर बाज़ार :- शेयर बाज़ार से अभिप्राय उस संगठित बाज़ार से हैं जहाँ विभिन्न संस्थायों (सरकारी व गैर-सरकारी दोनों ), कम्पनियों द्वारा प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय किया जाता हैं | जैसे :- अंश, ऋणपत्र, बंधपत्रों आदि |

शेयर बाज़ार की विशेषताएं ;

(1) शेयर बाज़ार विभिन्न प्रतिभूतियों के क्रय-विक्रय आदि का प्रबंध व नियंत्रण करता हैं |

(2) शेयर बाज़ार प्रतिभूतियों में व्यवहार करने के लिए निश्चित शर्तों का पालन करता हैं |

(3) इसमें केवल अधिकृत सदस्यों के माध्यम से ही प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय होता हैं |

शेयर बाज़ार के कार्य

(1) वर्तमान प्रतिभूतियों में तरलता पैदा करना : शेयर बाज़ार नियमित रूप से प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय करता हैं | इसलिए बाज़ार में कभी-भी प्रतिभूतियों में निवेश किया जा सकता हैं और कभी-भी इनको बेचा जा सकता हैं |

(2) मूल्य निर्धारण में मददगार शेयर बाज़ार प्रतिभूतियों की माँग व पूर्ति को ध्यान में रखकर इसके मूल्य को निर्धारित करने का कार्य करता हैं |

(3) आर्थिक विकास में सहायक : शेयर बाज़ार दो प्रकार से आर्थिक विकास में सहायक हैं ;

पहला, प्रतिभूतियों के मूल्य में परिवर्तन से लाभ द्वारा |

दूसरा, तरलता द्वारा |

(4) व्यवहारों की सुरक्षा : शेयर बाज़ार निवेशकों के हित की रक्षा करता हैं प्रत्येक शेयर बाज़ार अपने नियमों व विनियमों के अनुसार व्यवहार करता हैं |

शेयर बाज़ार पर ट्रेडिंग कार्यविधि

(1) ब्रोकर का चयन : सर्वप्रथम सेबी ब्रोकर का चयन करता हैं क्योंकि प्रतिभूतियों का कार्य ब्रोकर्स के माध्यम से किया जाता हैं | ब्रोकर एक व्यक्ति, साझेदार फर्म, अथवा कंपनी हो सकती हैं |

(2) डिपाजिटरी के पास डीमेट खाता खोलना : प्रतिभूतियों में ऑनलाइन व्यवहार करने के लिए डीमेट खाते की आवश्यकत होती हैं जो कि डिपाजिटरी पार्टिसिपेंट के माध्यम से खोला जाता हैं |

(3) आदेश देना : डीमेट खाता खुल जाने के बाद क्रेता प्रतिभूति क्रय करने का आदेश फोन या ई-मेल के द्वारा देता हैं | प्रतिभूति के मूल्य बताता हैं |

(4) आदेश पूरा करना : निवेशक के आदेशानुसार ब्रोकर प्रतिभुतियों में व्यवहार करता हैं इसके बाद प्रंसविदा नोट जिसमें प्रतिभूतियों का नाम, संख्या, मूल्य आदि जानकारी होती हैं तैयार किया जाता हैं |

(5) निपटारा : यह निपटारे से अभिप्राय प्रतिभूतियों को विक्रेता के डीमेट खाते से क्रेता के डीमेट खाते  में हस्तांतरित करने से हैं |

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