Chapter Chapter 10. वित्तीय बाज़ार Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 2 - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Business Study All Chapters:
Chapter 10. वित्तीय बाज़ार
2. पेज 2
मुद्रा बाज़ार के विभिन्न प्रपत्र में अंतर
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अंतर का आधार |
खजाना बिल |
कॉमर्शियल पेपर |
माँग मुद्रा/अल्प-सुचान ऋण |
जमा-प्रमाण पत्र |
वाणिज्यिक बिल |
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(1) निर्गमन |
रिज़र्व बैंक द्वारा |
अच्छी साख वाली कंपनियों द्वारा |
वाणिज्यिक बैंकों द्वारा |
बैंकों द्वारा |
मुख्यतः बैंकों द्वारा |
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(2) अवधि |
इसकी अवधि 14 दिन, 91 दिन, 182 दिन, 364 दिन की होती हैं | |
15 दिन,12 महीने की | |
1 से 15 दिन की अवधि होती हैं | |
91 दिन से व1 वर्ष की | |
90 दिन की | |
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(3) तरलता |
अत्यधिक |
खजाना बिल की तुलना में कम तरल |
सर्वाधिक तरलता |
माँग मुद्रा व कॉमर्शियल पेपर के बाद यह अधिक तरल हैं | |
जमा-प्रमाण पत्र के बाद इसकी तरलता अधिक हैं | |
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(4) जारी किसको किया जाता है |
वित्तियों संस्थाओं और जनता को |
बैंक, बीमा कंपनियों को, यूनिट ट्रस्ट और फर्मों को| |
बैंकों को | |
व्यक्तिओं ,संघों, कंपनियों और निगमों को | |
बैंक को | |
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(5)अधिकतम राशि |
रुपए 25000 |
रुपए 500000 |
रुपए 10 लाख |
रुपए 5 लाख से रुपए 25 लाख तक |
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(6) जारी करने की विधि |
अंकित मूल्य से कम मूल्य पर और भुगतान अंकित मूल्य पर | |
कटौती व निश्चित ब्याज दर पर | |
RBI का चैक जारी कर ऋण दिया जाता हैं ,जिस पर एक ब्याज दर जिसे कोल मनी कहते हैं दिया जाता हैं| |
कटौती पर |
विक्रेता द्वारा लिखा जाता हैं और क्रेता द्वारा स्वीकार किया जाता हैं | |
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(7) हस्तांतरण |
इसका हस्तांतरण संभव नहीं | |
इसका भी हस्तांतरण नहीं किया जा सकता हैं | |
संभव नहीं | |
बेचान के द्वारा हस्तांतरण संभव | |
आसानी से हस्तांतरण किया जा सकता हैं | |
पूंजी बाज़ार : पूंजी बाज़ार से अभिप्राय उस दीर्घकालीन प्रतिभूतियों के बाज़ार से हैं जिनका भुगतान एक वर्ष से अधिक समय के में किया जाता हैं |
पूंजी बाज़ार के प्रकार
(1) प्राथमिक बाज़ार : इसके द्वारा बाज़ार की नई व पुरानी दोनों प्रकार की कम्पनियां पूंजी प्राप्त कर सकती हैं |
प्राथमिक बाज़ार के अंतर्गत पूंजी एकत्रित करने की विधियाँ ;
(i) पब्लिक निर्गमन : इसमें कम्पनियाँ प्रविवरण-पत्र जारी करके जनता को प्रपत्र खरीदने के लिए आमंत्रित करती हैं |
(ii) निजी प्लेसमेंट : इसके अंतर्गत कंपनी प्रतिभूतियों को जनता को बेचने के बजाये अपने वित्तीय संस्थाओं या दलालों को बेचती हैं जो आगे अपने विशेष ग्राहकों को बेचने हैं |
(iii) स्वत्व निर्गमन : इसका प्रयोग उन कंपनियों द्वारा किया जाता हैं जो पहले भी प्रतिभूतियों का निर्गमन किया हो | इसके द्वारा सबसे पहले अपने पुराने अंशधारियों को अंश निर्गमन किए जाते हैं | जिसें स्वत्व निर्गमन कहते हैं |
(iv) इलेक्ट्रोनिक-प्राथमिक सार्वजनिक प्रस्ताव : इसकें अंतर्गत कंपनी शेयर बाज़ार से समझौत कर इलेक्ट्रोनिक माध्यम द्वारा प्रतिभूतियों का निर्गमन करती हैं | यह सभी कार्य सेबी द्वारा अधिकृत दलाल द्वारा किए जाते हैं |
(2) गौण बाज़ार : इसके द्वारा केवल पुरानी कम्पनियाँ ही प्रतिभूतियों में व्यवहार कर सकती हैं |
प्राथमिक बाज़ार व गौण बाज़ार में अंतर
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अंतर का आधार |
प्राथमिक बाज़ार |
गौण बाज़ार |
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(1) निर्गमन |
इसमें नई प्रतिभूतियों का निर्गमन किया जाता हैं | |
इसमें केवल पुरानी प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय होता हैं | |
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(2) क्रय-विक्रय |
इसमें केवल प्रतिभूतियों का क्रय किया जाता हैं | |
इसमें प्रतिभूतियों का क्रय और विक्रय दोनों किया जाता हैं | |
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(3) तरलता |
इससें तरलता उत्पन्न नहीं होती हैं | |
इससें तरलता उत्पन्न होती हैं | |
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(4) मूल्य निर्धारण |
प्रतिभूतियों का मूल्य कंपनी द्वारा निर्धारित होता हैं | |
इसकें अंतर्गत प्रतिभूतियों का मूल्य माँग व पूर्ति द्वारा निर्धारित किया जाता हैं | |
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(5) पक्षकार |
प्रतिभूति जारी करते वाली कंपनी व क्रेता | |
निवेशक आपस में क्रय-विक्रय करने हैं | |
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(6) विशेष स्थान |
इस बाजार का कोई विशेष स्थान नहीं हैं | |
इसकें लिए विशेष स्थान स्टॉक एक्सचेंज हैं | |
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(7) प्राथमिक क्रियाएं |
यह गौण बाज़ार से पहले आता हैं | |
यह प्राथमिक बाज़ार के बाद में आता हैं | |