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Chapter Chapter 10. वित्तीय बाज़ार Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 2 - CBSE Study

Chapter Chapter 10. वित्तीय बाज़ार Business Study Class 12 cbse notes पेज 2 in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 10. वित्तीय बाज़ार Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 2 - CBSE Study

कक्षा 12 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 10. वित्तीय बाज़ार को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पेज 2 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 10. वित्तीय बाज़ार

2. पेज 2

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मुद्रा बाज़ार के विभिन्न प्रपत्र में अंतर

अंतर का आधार 

खजाना बिल

कॉमर्शियल पेपर 

माँग मुद्रा/अल्प-सुचान ऋण

जमा-प्रमाण पत्र 

वाणिज्यिक बिल 

(1) निर्गमन

रिज़र्व बैंक द्वारा

अच्छी साख वाली कंपनियों द्वारा

वाणिज्यिक बैंकों द्वारा

बैंकों द्वारा

मुख्यतः बैंकों द्वारा

(2) अवधि

इसकी अवधि 14 दिन, 91 दिन, 182 दिन, 364 दिन की होती हैं |

15 दिन,12 महीने की |

1 से 15 दिन की अवधि होती हैं |

91 दिन से व1 वर्ष की |

90 दिन की |

(3) तरलता

अत्यधिक

खजाना बिल की तुलना में कम तरल

सर्वाधिक तरलता

माँग मुद्रा व कॉमर्शियल पेपर के बाद यह अधिक तरल हैं |

जमा-प्रमाण पत्र के बाद इसकी तरलता अधिक हैं |

(4) जारी किसको किया जाता है

वित्तियों संस्थाओं और जनता को

बैंक, बीमा कंपनियों को, यूनिट ट्रस्ट और फर्मों को|

बैंकों को |

व्यक्तिओं ,संघों,  कंपनियों और निगमों को |

बैंक को |

(5)अधिकतम राशि

रुपए 25000

रुपए 500000

रुपए 10 लाख

 रुपए 5 लाख से रुपए 25 लाख तक

_

 

(6) जारी करने की विधि

अंकित मूल्य से कम मूल्य पर और भुगतान अंकित मूल्य पर |

कटौती व निश्चित ब्याज दर पर |

RBI का चैक जारी कर ऋण दिया जाता हैं ,जिस पर एक ब्याज दर जिसे कोल मनी कहते हैं दिया जाता हैं|

कटौती पर

विक्रेता द्वारा लिखा जाता हैं और क्रेता द्वारा स्वीकार किया जाता हैं |

(7) हस्तांतरण

इसका हस्तांतरण संभव नहीं |

इसका भी हस्तांतरण नहीं किया जा सकता हैं |

संभव नहीं |

बेचान के द्वारा हस्तांतरण संभव |

आसानी से हस्तांतरण किया जा सकता हैं |

 

पूंजी बाज़ार : पूंजी बाज़ार से अभिप्राय उस दीर्घकालीन प्रतिभूतियों के बाज़ार से हैं जिनका भुगतान एक वर्ष से अधिक समय के में किया जाता हैं |

पूंजी बाज़ार के प्रकार

(1) प्राथमिक बाज़ार : इसके द्वारा बाज़ार की नई व पुरानी दोनों प्रकार की कम्पनियां पूंजी प्राप्त कर सकती हैं |

प्राथमिक बाज़ार के अंतर्गत पूंजी एकत्रित करने की विधियाँ ;

(i) पब्लिक निर्गमन : इसमें कम्पनियाँ प्रविवरण-पत्र जारी करके जनता को प्रपत्र खरीदने के लिए आमंत्रित करती हैं |

(ii) निजी प्लेसमेंट : इसके अंतर्गत कंपनी प्रतिभूतियों को जनता को बेचने के बजाये अपने वित्तीय संस्थाओं या दलालों को बेचती हैं जो आगे अपने विशेष ग्राहकों को बेचने हैं |

(iii) स्वत्व निर्गमन : इसका प्रयोग उन कंपनियों द्वारा किया जाता हैं जो पहले भी प्रतिभूतियों का निर्गमन किया हो | इसके द्वारा सबसे पहले अपने पुराने अंशधारियों को अंश निर्गमन किए जाते हैं | जिसें स्वत्व निर्गमन कहते हैं |

(iv) इलेक्ट्रोनिक-प्राथमिक सार्वजनिक प्रस्ताव : इसकें अंतर्गत कंपनी शेयर बाज़ार से समझौत कर इलेक्ट्रोनिक माध्यम द्वारा प्रतिभूतियों का निर्गमन करती हैं | यह सभी कार्य सेबी द्वारा अधिकृत दलाल द्वारा किए जाते हैं |

(2) गौण बाज़ार : इसके द्वारा केवल पुरानी कम्पनियाँ ही प्रतिभूतियों में व्यवहार कर सकती हैं |

प्राथमिक बाज़ार व गौण बाज़ार में अंतर

अंतर का आधार

प्राथमिक बाज़ार

गौण बाज़ार

(1) निर्गमन

इसमें नई प्रतिभूतियों का निर्गमन किया जाता हैं |

इसमें केवल पुरानी प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय होता हैं |

(2) क्रय-विक्रय

इसमें केवल प्रतिभूतियों का क्रय किया जाता हैं |

इसमें प्रतिभूतियों का क्रय और विक्रय दोनों किया जाता हैं |

(3) तरलता

इससें तरलता उत्पन्न नहीं होती हैं |

इससें तरलता उत्पन्न होती हैं |

(4) मूल्य निर्धारण

प्रतिभूतियों का मूल्य कंपनी द्वारा निर्धारित होता हैं |

इसकें अंतर्गत प्रतिभूतियों का मूल्य माँग व पूर्ति द्वारा निर्धारित किया जाता हैं |

(5) पक्षकार

प्रतिभूति जारी करते वाली कंपनी व क्रेता |

निवेशक आपस में क्रय-विक्रय करने हैं |

(6) विशेष स्थान

इस बाजार का कोई विशेष स्थान नहीं हैं |

इसकें लिए विशेष स्थान स्टॉक एक्सचेंज हैं |

(7) प्राथमिक क्रियाएं

यह गौण बाज़ार से पहले आता हैं |

यह प्राथमिक बाज़ार के बाद में आता हैं |

 
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