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Chapter Chapter 6. नियुक्तिकरण Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study

Chapter Chapter 6. नियुक्तिकरण Business Study Class 12 cbse notes पेज 3 in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 6. नियुक्तिकरण Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study

कक्षा 12 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 6. नियुक्तिकरण को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पेज 3 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 6. नियुक्तिकरण

3. पेज 3

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प्रशिक्षण की विधियाँ

प्रशिक्षण की आवश्यकता सभी प्रकार के संगठन में होती हैं इसलिए प्रत्येक संगठन अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए विभिन्न प्रकार की विधियों का उपयोग करती हैं ; जैसे :- (i) कार्य पर प्रशिक्षण, (ii) कार्य से परे प्रशिक्षण |

(A) कार्य पर प्रशिक्षण : इस विधि के अंतर्गत प्रशिक्षार्थियों को एक मशीन व प्रयोगशाला में किसी विशेष कार्य को करने के लिए कहा जाता हैं | प्रशिक्षार्थियों को विशेषज्ञों के अंतर्गत कार्य करना, मशीन का उपयोग करना व कार्य का क्रम आदि को सिखाया जाता हैं |

कार्य पर प्रशिक्षण की मुख्य विधियाँ ;

(1) अभिविन्यास प्रशिक्षण अभिविन्यास से अभिप्राय संगठन के नए कर्मचारियों को संगठन के अन्य पूर्व कर्मचारियों से और संगठन से परिचित करने से हैं | अभिविन्यास प्रशिक्षण के द्वारा  नए व पूर्व कर्मचारियों में टीम भावना का विकास होता हैं जिससें वे एक साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं | अभिविन्यास के द्वारा नए कर्मचारी अपने अधिकार व उत्तरदायित्व को अच्छी प्रकार समझ पाते हैं |

(2) नवसीखुआ कार्यक्रम : इसके द्वारा कर्मचारी उच्च-स्तरीय कौशल प्राप्त करने के लिए एक विशेषज्ञ के अधीन काम करते हैं जो उन्हें कार्य के सैद्धांतिक व व्यावहारिक  दोनों पहलुओं की जानकारी दी जाती हैं |

(3) संयुक्त प्रशिक्षण : संयुक्त प्रशिक्षण में प्रशिक्षार्थीयों को तकनीकी व व्यावसायिक संस्था दोनों के द्वारा संयुक्त रूप से अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता हैं ताकि कर्मचारियों को सौद्धंतिक व व्यावहारिक दोनों ही प्रकार का ज्ञान दिया जा सकें |

(B) कार्य से परे प्रशिक्षण : इस विधि का उपयोग उस संगठन के द्वारा किया जिसको केवल योग्य कर्मचारियों की आवाश्यकता हो, जो अपने संगठनात्मक वातावरण में केवल अधिक कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता को महसूस करता हैं | इस विधि में प्रशिक्षार्थियों को कार्य से अलग हट कर प्रशिक्षण दिया जाता हैं |

कार्य से परे प्रशिक्षण की मुख्य विधियाँ

(1) प्रकोष्ठशाला प्रशिक्षण : इस विधि में कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के उद्येश्य से एक अलग से प्रशिक्षण केंद्र की स्थापन की जाती हैं | जिसमें कर्मचारियों के कार्य की देख-रेख एक अनुभवी व प्रशिक्षित प्रशिक्षक के द्वारा की जाती हैं |

कर्मचारी विकास : कर्मचारी विकास से अभिप्राय उस प्रक्रिया से हैं जिसके अंतर्गत संगठन के अधिकारीयों व अधीनस्थों को उसके वर्तमान व भविष्य दोनों ही प्रकार की जिम्मेदारियों को  प्रभावपूर्णता से पूर्ण करने के लिए तैयार किया जाता हैं |

कर्मचारी विकास की विशेषताएं

(i) प्रबंधकों से सम्बंधित

(ii) कर्मचारियों के सम्पूर्ण विकास पर जोर |

(iii) प्रशिक्षण के पर शिक्षण पर जोर |

(iv) प्रबंधकों को अधिक चुनैती पूर्ण कार्यों के लिए तैयार करना |

(v) छिपी हुई प्रतिभा को उजागर करना |

 कर्मचारी विकास की आवश्यकता

(i) प्रबंधकों को अधिक उत्तरदायित्व के काबिल बनाना |

(ii) प्रबंधकों की पदोन्नति का रास्ता बनाना |

(iii) संगठन की कार्यकुशलता को अधिक करना |

(iv) प्रबंधकों के बाजार मूल्य में वृद्धि करना |

(v) प्रबंधकों को प्रभावी निर्णय लेने योग्य बनाना |

प्रशिक्षण एवं विकास में अंतर

 अंतर का आधार

प्रशिक्षण

विकास

 (i) अर्थ

 ज्ञान व कौशल वृद्धि की प्रक्रिया |

 सीखने की प्रक्रिया |

 (ii) उद्येश्य

 इसका उद्येश्य कार्य सम्बंधित  विशेष  कौशल में वृद्धि करना हैं |

 इसका उद्येश्य व्यक्ति के   सम्पूर्ण व्यक्तित्त्व में वृद्धि   करना  हैं |

 (iii) क्षेत्र

 प्रशिक्षण का क्षेत्र संकुचित हैं और   यह  विकास का ही एक भाग |

 विकास का क्षेत्र प्रशिक्षण से   अधिक विस्तृत हैं |

 (iv) प्रकृति

 प्रशिक्षण कार्य से संबंधित हैं |

 विकास का सम्बन्ध व्यक्ति हैं |

 (v) जॉब

 यह जॉब प्रधान हैं |

 यह जॉब नहीं अपितु कैरियर   प्रधान हैं |

     

 

 

 

 

 

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