Chapter Chapter 6. नियुक्तिकरण Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 2 - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Business Study All Chapters:
Chapter 6. नियुक्तिकरण
2. पेज 2
भर्ती - यह वह प्रक्रिया है जिसमें संभावित कर्मचारियों को प्रेरित किया जाता है की वो संगठन में कार्य करने के लिए आवेदन दे | इसके अंतर्गत विभिन्न स्रोतों से आवश्यक कर्मचारियों की खोज की जाती है तथा उन्हें संगठन में नोकरी के लिए आवेदन पत्र भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है |
भर्ती के स्रोत -
1. आंतरिक स्रोत
2. बाह्य स्रोत
भर्ती के आंतरिक स्रोत - भर्ती के आंतरिक स्रोत का अर्थ है संगठन के अन्दर से कर्मचारियों को प्रेरित करना की वो नौकरी के लिए आवेदन करे |
भर्ती के आंतरिक स्रोत की विधियाँ -
(क) स्थानांतरण - इसमें कर्मचारियों को एक जगह से दूसरी जगह भेजना शामिल है जैसे यदि संगठन के एक विभाग में कर्मचारियों की कमी है तो दुसरे विभाग से कर्मचारियों को वहां भेजना या कर्मचारी को एक कार्य से हटाकर दुसरे कार्य पर लगाना |
(ख) पदोन्नति - पदोन्नति का अर्थ है कर्मचारी को निम्न पद से उच्च पद पर भेजना | पदोन्नति में कर्मचारियों को ऐसे पद पर भेजा जाता है जो अधिक सुविधाजनक हो, जहाँ अधिक वेतन हो तथा अधिक जिम्मेदारी हो |
(ग) अस्थाई अलगाव (ले-आफ) - अस्थाई रूप से अलग किए गए कर्मचारियों को वापस कम पर बुलाना अस्थाई अलगाव कहतें है | कभी - कभी कुछ कर्मचारियों को थोड़े समय के लिए संगठन से अलग कर दिया जाता है तथा कुछ समय बाद यदि किसी पद पर कर्मचारी की जरुरत होती है तो उन्हें वापस बुला लिया जाता है इसे ही ले - आफ कहते है |
आंतरिक स्रोत के लाभ -
1. कर्मचारी अपने कार्य निष्पादन में सुधार करने के लिए प्रेरित होते है |
2. यह एक आसन प्रक्रिया है |
3. कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर समय बर्बाद नहीं होता है |
4. यह सस्ती प्रक्रिया है |
आंतरिक स्रोत की सीमाएं -
1. संगठन में नए विचार तथा नई प्रतिभाएं नहीं आ पाती |
2. कर्मचारियों के बीच प्रतियोगिता बढ़ जाती है |
3. हो सकता है कर्मचारी अपने कार्य को सही से न करे यदि उन्हें पता है की कुछ समय बाद उनकी पदोनती अवश्य हो जाएगी |
4. कर्मचारियों की लगातार स्थानांतरण से उत्पादन क्षमता घट जाती है |
5. नई संस्था भर्ती के आंतरिक स्रोतों का प्रयोग नहीं कर सकती |
बाह्य स्रोत - जब कंपनी रिक्त पदों के लिए बाहर से आवेदन प्राप्त करती है तो उसे भर्ती के बाह्य स्रोत कहते है |
भर्ती के बाह्य स्रोत की विधियाँ -
(क) प्रत्यक्ष भर्ती - संगठन के सूचना बोर्ड पर रिक्त पद से सम्बंधित जरुरी सूचना का विवरण दिया जाता है | नौकरी के इच्छुक एक निश्चित तिथि पर वहां एकत्रित होते है तथा वहीँ उनका चयन किया जाता है |
(ख) प्रतीक्षा सूचि - अनेक बड़े व्यवसायिक उपक्रम अपने कार्यालय में प्रतीक्षा सूची रखते है , आवश्यकता पड़ने पर उनको बुलाया जा सकता है |
(ग) विज्ञापन - यह भर्ती का ऐसा स्रोत है जिसमे पत्र - पत्रिकाओं में खाली पद से सम्बंधित जरुरी विवरण दे कर भर्ती की जाती है |
(घ) रोजगार कार्यालय - नौकरी तलाशने वाले इन कार्यालयों में अपना नाम दर्ज कराते है तथा जिन संगठनो को कर्मचारियों की आवश्यकता होती है इन रोजगार कार्यालयों से संपर्क करते है |
(ङ) महाविद्यालय से भर्ती - बड़े संगठन विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थाओं के साथ विभिन्न नौकरियों की भर्ती के लियें सम्पर्क रखते है |
(च) सिफारिशे - वर्तमान कर्मचारियों द्वारा सिफारिश किए गए आवेदक, अथवा उनके अपने मित्र तथा सम्बन्धी, भर्ती का अच्छा स्रोत सिद्ध होते है |
(छ) इन्टरनेट द्वारा भर्ती - कुछ संस्थाओं ने कुछ विशेष वेबसाईट विशेष रूप से बनाएँ है जो कार्य पाने के इच्छुक व्यक्तियों को नौकरी से सम्बन्षित सूचनाएं देते है |
भर्ती के बाह्य स्रोतों के लाभ -
1. यह संगठन में योग्य कर्मचारी को आवेदन देने का अवसर प्रदान करती है |
2. प्रबंधको के पास विस्तृत विकल्प उपलब्ध होते है |
3. संगठन में नए विचार तथा नए कौशल का समावेश होता है |
4. कर्मचारियों में प्रतियोगिता की भावना का विकास होता है |
5. रोजगार के नए अवसरों में वृद्धि होती है |
भर्ती के बाह्य स्रोतों की सीमाएं -
1. इससे वर्तमान कर्मचारियों में असंतोष की भावना उत्पन्न होने लगती हैं |
2. यह एक महँगी प्रक्रिया है क्योंकि विज्ञापन आदि पर अधिक खर्च होता है |
3. यह एक जटिल तथा लम्बी प्रक्रिया है |
4. कर्मचारियों के प्रशिक्षण आदि पर काफी धन तथा समय बर्बाद होता है |