Chapter Chapter 11. विपणन Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 4 - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Business Study All Chapters:
Chapter 11. विपणन
4. पेज 4
विज्ञापन
विज्ञापन : विज्ञापन से अभिप्राय बाजार के संभावित उपभोक्ताओं को किसी विशेष वस्तु व सेवा की जानकारी देकर उसे खरीदने के लिए प्रेरित करना हैं |
विज्ञापन की विशेषताएं
(i) एक कम्पनी द्वारा उसके उपभोक्ताओं को दी जाने वाली केवल वह सूचना विज्ञापन कहलाती हैं जिस पर कंपनी ने कुछ व्यय किया हो |
(ii) विज्ञापन के अंतर्गत उपभोक्ताओं को वस्तु की सूचनाएं किसी माध्यम ( जैसे टीवी, अखबार, पत्रिका और रेडिओ आदि ) के द्वारा दी जाती हैं अर्थात अव्यक्तिगत माध्यमों के द्वारा |
(iii) विज्ञापन संदेश्वाहन का एक ऐसा साधन है जो सूचना को तीव्र गति से और अधिक दूरी तक संवाहित करता हैं |
विज्ञापन की भूमिक
(i) विज्ञापन के माध्यम से एक कंपनी को अपने नए उत्पाद को बाजार से परिचित करना सरल होता हैं |
(ii) विज्ञापन के माध्यम से निर्माता अपने वस्तु के बाजार का क्षेत्र में वृद्धि कर सकता हैं |
(iii) विज्ञापन लोगों को नई-नई वस्तुओं की जानकारी उपलब्ध करता हैं| जिससें वह नई-नई वस्तु को उपयोग करना सीखते हैं और उनका जीवन स्तर बेहतर होता हैं |
(iv) विज्ञापन रोजगार के नये-नये अवसर उपलब्ध करता हैं |
(v) विज्ञापन से प्रेरित होकर उपभोक्ता वस्तुओं की अधिक माँग करता हैं | जिससें वस्तु की प्रति इकाई लागत कम होती है और वस्तु की कीमत में कमी होती हैं |
(vi) विज्ञापन से जागरुक उपभोक्ताओं का विक्रेताओं द्वारा शोषण का डर खत्म होता हैं |
विज्ञापन के आलोचनाएँ
(i) विज्ञापन से हुए खर्चे वस्तु की लागतों में वृद्धि करते हैं, जिससें वस्तु की कीमत में वृद्धि होती हैं |
(ii) कई बार विज्ञापन अधिक बड़ा-चड़ा कर दिखाए जाते हैं | जो उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं और सामाजिक दृष्टि से अनुचित हैं |
(iii) विज्ञापन कभी-कभी घटिया वस्तुओं का प्रचार कर, उन वस्तुओं को लेने के लिए उपभोक्ताओं को प्रेरित करता हैं |
(iv) कई बार विज्ञापन के रुचिकर न होने की स्थिति में वे अभ्रद प्रतीत होते हैं | और कई बार यहउपभोक्ताओं के भावनओं को ठेस पहुचाते हैं |
व्यक्तिगत विक्रेय
व्यक्तिगत विक्रेय :इसके अंतर्गत ग्राहकों को वस्तुओं अथवा सेवाओं का विक्रेय, विक्रेता तथा ग्राहक के बीच व्यक्तिगत संपर्क स्थापित करके किया जाता हैं |
व्यक्तिगत विक्रेय की विशेषताएं ;
(i) वस्तुओं एवं सेवाओं का विक्रय विक्रयकर्ता द्वारा |
(ii) व्यक्तिगत विक्रेय द्वारा विक्रेयकर्ता और क्रेता के बीच व्यक्तिगत सम्बन्ध स्थापित हो जाते हैं |
(iii) व्यक्तिगत विक्रेय द्वारा वस्तु की जानकारी से संबंधित समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाता है |
(iv) व्यक्तिगत विक्रेय की द्वारा क्रेता को अतिरिक्त सूचना की प्राप्ति भी होती हैं |
एक अच्छे विक्रेयकर्ता की विशेषताएं
(i) एक अच्छे विक्रेयकर्ता की यह विशेषता है कि वह शारीरिक रूप से तंदुरुस्त हो और अधिक परिश्रमि हो |
(ii) एक अच्छा विक्रेयकर्ता अपने ग्राहकों से मित्रीपूर्ण व सहनशीलता के साथ व्यवहार करता हैं |
(iii) एक अच्छे विक्रेयकर्ता को अपने उत्पाद की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए | ताकि वह ग्राहकों को उत्पाद के बारें में सभी आवश्यक सूचना दे सकें |
(iv) विक्रेयकर्ता को अपने व्यवहार में ईमानदारी व कुशलता को लाना चाहिए |
(v) विक्रेयकर्ता को उपभोक्ता के साथ विनम्रता के व्यवहार करता चाहिए |
(vi) विक्रेयकर्ता में उपभोक्ता को प्रोत्साहित करके उनके विश्वास को जितने की क्षमता होनी चाहिए |
विज्ञापन एवं व्यक्तिगत विक्रय में अंतर
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अंतर का आधार |
विज्ञापन |
व्यक्तिगत विक्रय
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(1)प्रारूप |
यह अव्यक्तिगत है |
यह संवर्द्धन का व्यक्तिगत प्रारूप हैं | |
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(2) समय |
विज्ञापन के द्वारा कम समय में अधिक लोगों को वस्तु जानकारी दी जा सकती हैं | |
इसके द्वारा अधिक समय में केवल कुछ लोगों को वस्तु की जानकारी दी जा सकती हैं | |
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(3) पंहुच |
विज्ञापन की पंहुच अधिक लोगों तक होती हैं | |
इसकी पंहुच कम लोगों तक होती हैं | |
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(4) लागत |
विज्ञापन प्रक्रिया कम खर्चीली हैं | |
व्यक्तिगत विक्रय अधिक खर्चीली प्रक्रिया हैं | |
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(5) माध्यम |
विज्ञापन के अंतर्गत टीवी, रेडियो और समाचार-पत्र आदि माध्यमों का उपयोग किया जाता हैं | |
इसमें केवल व्यक्तिगत विक्रेता ही माध्यम होता हैं |
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(6) प्रतिपुष्टि |
विज्ञापन में तुरंत प्रतिपुष्टि नहीं प्राप्त होती हैं | |
व्यक्तिगत विक्रय में तुरंत प्रतिपुष्टि प्राप्त होती हैं | |
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(7) लोचकता |
विज्ञापन में लोचकता का अभाव होता हैं | |
यह लोचकता पूर्ण होता हैं | |
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(8) भूमिका |
यह ग्राहक में वस्तु के प्रति रूचि उत्पन्न करता हैं | |
यह वस्तु को खरीदने के लिए प्रेरित करता हैं | |
विक्रय संवर्द्धन
विक्रय संवर्द्धन से अभिप्राय उस प्रक्रियाओं से है जो क्रेता को वस्तुएं तुरंत क्रय करने के लिए प्रेरित करती है; जैसे छूट, कटौती, गिफ्ट, लक्की ड्रा, और नमूने आदि |
विक्रय संवर्द्धन की विधियाँ
(1) छूट : वस्तुओं को घटें हुए मूल्यों पर बेचना |
(2) वापसी : उत्पाद मूल्य का कुछ अंश, खरीद का प्रमाण दिखाकर ग्राहक को वापस कर दिया जाता हैं |
(3) कटौती : उत्पाद को उसके सूचित मूल्य से कम मूल्य पर बेचना कटौती कहलाता हैं | जैसे :-किसी दीवार घड़ी को 40% की कटौती पर बेचना |
(4) मात्रा गिफ्ट : इसके अंतर्गत उत्पाद की ही कुछ मात्रा गिफ्ट के रूप में दी जाती हैं |
(5) लक्की ड्रा : इसके अंतर्गत निश्चित समय के अंदर माल खरीदने वाले क्रेताओं में से विजेताओं को उपहार बांटे जाते हैं | विजेताओं का चयन ड्रा के माध्यम से होता हैं |
(6) उत्पाद संयोग : इस विधि के अंतर्गत मुख्य उत्पाद के साथ कोई अन्य उत्पाद गिफ्ट के रूप में दिया जाता हैं | जैसे :- कॉलगेट टूथ पेस्ट के टूथ ब्रश फ्री |
(7) तत्काल ड्रा एवं उपहार देना : इसके अंतर्गत किसी वस्तु को खरीदने पर उसी समय एक कार्ड खुरचने के लिए कहा जाता हैं ओर उस पर लिखी वस्तु उपहार में दी जाती हैं |
(8) प्रयोग करने योग्य लाभ : इसके अंतर्गत विक्रेता की ओर से क्रेताओं को कूपन बांटें जाते हैं | जो क्रेता को अन्य ख़रीद पर कूपन में लिखे मूल्य जितनी छूट प्रदान करती हैं |
(9) 0% पर पूरा वित्त प्रदान करना : इस विधि के द्वारा वस्तु को बिना ब्याज के किस्तों में उपलब्ध कराया जाता हैं |
(10) नमूने : इसमें उपभोक्ताओं को वस्तु के नमूने बांटें जाते हैं | ताकि वे वस्तुओं को खरीदने के लिए प्रेरित हो |
(11) प्रतियोगिताएं : कुछ कम्पनियाँ अपने उत्पाद को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन करने हैं, और विजेता को ईनाम दिया जाता हैं |
प्रचार/जन-संपर्क/सार्वजनिक संबंध
प्रचार/जन-संपर्क/सार्वजनिक सम्बन्ध से अभिप्राय उस सन्देश प्रवाह से है जो बिक्री रहित होता हैं | जिसका प्रवाह व्यवसाय से ग्राहकों की ओर होता हैं |
सार्वजनिक सम्बन्ध की विशेषताएं
(1) व्यवसाय द्वारा जनता से अच्छे सार्वजनिक सम्बन्ध स्थापित करना, व्यवसाय को जनता का सहयोग प्रदान करता हैं |
(2) अच्छे सार्वजनिक सम्बन्ध एक व्यवसाय के सभी पक्षकारों ( जैसे :- ग्राहक, कर्मचारी, अंशधारी, पूर्तिकर्ता आदि ) की संतुष्टि में वृद्धि करता हैं |
(3) एक व्यवसाय को अपने संबंधित पक्षकारों से अच्छे सम्बन्ध स्थापित करने की आवश्यकता होती हैं | ताकि व्यवसाय लम्बे समय तक जीवित रहें सकें |
(4) यदि एक व्यवसाय अपने साख को अच्छा रखना चाहता है तो उसे अपने पक्षकारों से लागातार संवाद करते रहना चाहिए |
(5) आज के समय में जन सम्पर्क भी एक विशिष्ट क्रिया बन चुका हैं जिसके लिए प्रत्येक बड़े संगठन सार्वजनिक सम्बन्ध विभाग की स्थापना करते हैं |
सार्वजनिक सम्बन्ध स्थापित करने की विधियाँ
(1) घटनाएँ : कम्पनियाँ समय-साम्य पर घटनाओं के रूप में कई सम्मलेन जैसे :- नए कार्यालय, फैक्टरी भवन, आदि के उद्धघाटन का आयोजन करना |
(2) सामाचार : कम्पनिओं द्वारा समय-समय पर कई सूचनाएं सार्वजनिक सम्बन्ध विभाग को दी जाती हैं जो की उसके द्वारा सामाचार पत्र में छपवाये जाते हैं | इससे जनता को कंपनी के बारें में जानकारियाँ प्राप्त होती रहती हैं |
(3) भाषण : सार्वजनिक सम्बन्ध विभाग के अधिकारीयों द्वारा कंपनी के विभिन्न पक्षकारों को कंपनी के प्रगति से अवगत किया जाता हैं |
(4) सार्वजनिक सेवा क्रियाएं : कंपनी सार्वजनिक सेवा क्रियाओं से जुड़ कर जनता की संतुष्टि में वृद्धि करने का कार्य करता हैं | जिससें जनता के बीच कंपनी की छवि में सुधार होता हैं |