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Chapter Chapter 11. विपणन Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 4 - CBSE Study

Chapter Chapter 11. विपणन Business Study Class 12 cbse notes पेज 4 in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 11. विपणन Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 4 - CBSE Study

कक्षा 12 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 11. विपणन को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पेज 4 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 11. विपणन

4. पेज 4

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विज्ञापन

विज्ञापन : विज्ञापन से अभिप्राय बाजार के संभावित उपभोक्ताओं को किसी विशेष वस्तु व सेवा की जानकारी देकर उसे खरीदने के लिए प्रेरित करना हैं |

विज्ञापन की विशेषताएं

(i) एक कम्पनी द्वारा उसके उपभोक्ताओं को दी जाने वाली केवल वह सूचना विज्ञापन कहलाती हैं जिस पर कंपनी ने कुछ व्यय किया हो |

(ii) विज्ञापन के अंतर्गत उपभोक्ताओं को वस्तु की सूचनाएं किसी माध्यम ( जैसे टीवी, अखबार, पत्रिका और रेडिओ आदि ) के द्वारा दी जाती हैं अर्थात अव्यक्तिगत माध्यमों के द्वारा |

(iii) विज्ञापन संदेश्वाहन का एक ऐसा साधन है जो सूचना को तीव्र गति से और अधिक दूरी तक संवाहित करता हैं |

विज्ञापन की भूमिक

(i) विज्ञापन के माध्यम से एक कंपनी को अपने नए उत्पाद को बाजार से परिचित करना सरल होता हैं |

(ii) विज्ञापन के माध्यम से निर्माता अपने वस्तु के बाजार का क्षेत्र में वृद्धि कर सकता हैं |

(iii) विज्ञापन लोगों को नई-नई वस्तुओं की जानकारी उपलब्ध करता हैं| जिससें वह नई-नई वस्तु को उपयोग करना सीखते हैं और उनका जीवन स्तर बेहतर होता हैं |

(iv) विज्ञापन रोजगार के नये-नये अवसर उपलब्ध करता हैं |

(v) विज्ञापन से प्रेरित होकर उपभोक्ता वस्तुओं की अधिक माँग करता हैं | जिससें वस्तु की प्रति इकाई लागत कम होती है और वस्तु की कीमत में कमी होती हैं |

(vi) विज्ञापन से जागरुक उपभोक्ताओं का विक्रेताओं द्वारा शोषण का डर खत्म होता हैं |

विज्ञापन के आलोचनाएँ

(i) विज्ञापन से हुए खर्चे वस्तु की लागतों में वृद्धि करते हैं, जिससें वस्तु की कीमत में वृद्धि होती हैं |

(ii) कई बार विज्ञापन अधिक बड़ा-चड़ा कर दिखाए जाते हैं | जो उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं और सामाजिक दृष्टि से अनुचित हैं |

(iii) विज्ञापन कभी-कभी घटिया वस्तुओं का प्रचार कर, उन वस्तुओं को लेने के लिए उपभोक्ताओं को प्रेरित करता हैं |

(iv) कई बार विज्ञापन के रुचिकर न होने की स्थिति में वे अभ्रद प्रतीत होते हैं | और कई बार  यहउपभोक्ताओं के भावनओं को ठेस पहुचाते हैं |

व्यक्तिगत विक्रेय

व्यक्तिगत विक्रेय :इसके अंतर्गत ग्राहकों को वस्तुओं अथवा सेवाओं का विक्रेय, विक्रेता तथा ग्राहक के बीच व्यक्तिगत संपर्क स्थापित करके किया जाता हैं |

व्यक्तिगत विक्रेय की विशेषताएं ;

(i) वस्तुओं एवं सेवाओं का विक्रय विक्रयकर्ता द्वारा |

(ii) व्यक्तिगत विक्रेय द्वारा विक्रेयकर्ता और क्रेता के बीच व्यक्तिगत सम्बन्ध स्थापित हो जाते हैं |

(iii) व्यक्तिगत विक्रेय द्वारा वस्तु की जानकारी से संबंधित समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाता है |

(iv) व्यक्तिगत विक्रेय की द्वारा क्रेता को अतिरिक्त सूचना की प्राप्ति भी होती हैं |

एक अच्छे विक्रेयकर्ता की विशेषताएं

(i) एक अच्छे विक्रेयकर्ता की यह विशेषता है कि वह शारीरिक रूप से तंदुरुस्त हो और अधिक परिश्रमि हो |

(ii) एक अच्छा विक्रेयकर्ता अपने ग्राहकों से मित्रीपूर्ण व सहनशीलता के साथ व्यवहार करता हैं |

(iii) एक अच्छे विक्रेयकर्ता को अपने उत्पाद की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए | ताकि वह ग्राहकों को उत्पाद के बारें में सभी आवश्यक सूचना दे सकें |

(iv) विक्रेयकर्ता को अपने व्यवहार में ईमानदारी व कुशलता को लाना चाहिए |

(v) विक्रेयकर्ता को उपभोक्ता के साथ विनम्रता के व्यवहार करता चाहिए |

(vi) विक्रेयकर्ता में उपभोक्ता को प्रोत्साहित करके उनके विश्वास को जितने की क्षमता होनी चाहिए |

विज्ञापन एवं व्यक्तिगत विक्रय में अंतर

              

अंतर का आधार

         विज्ञापन                        

व्यक्तिगत विक्रय

 

(1)प्रारूप            

यह अव्यक्तिगत है

यह संवर्द्धन का व्यक्तिगत प्रारूप हैं |                                         

(2) समय

विज्ञापन के द्वारा कम समय में अधिक लोगों को वस्तु जानकारी दी जा सकती हैं |

इसके द्वारा अधिक समय में केवल कुछ लोगों को वस्तु की जानकारी दी जा सकती हैं |

(3) पंहुच

विज्ञापन की पंहुच अधिक लोगों तक होती हैं |

इसकी पंहुच कम लोगों तक होती हैं |

(4) लागत

विज्ञापन प्रक्रिया कम खर्चीली हैं |

व्यक्तिगत विक्रय अधिक खर्चीली प्रक्रिया हैं |

(5) माध्यम

विज्ञापन के अंतर्गत टीवी, रेडियो और समाचार-पत्र आदि माध्यमों का उपयोग किया जाता हैं |

इसमें केवल व्यक्तिगत विक्रेता ही माध्यम होता हैं |

 

(6) प्रतिपुष्टि

विज्ञापन में तुरंत प्रतिपुष्टि नहीं प्राप्त होती हैं |

व्यक्तिगत विक्रय में तुरंत प्रतिपुष्टि प्राप्त होती हैं |

(7) लोचकता

विज्ञापन में लोचकता का अभाव होता हैं |

यह लोचकता पूर्ण होता हैं |

(8) भूमिका

यह ग्राहक में वस्तु के प्रति रूचि उत्पन्न करता हैं |

यह वस्तु को खरीदने के लिए प्रेरित करता हैं |

 

विक्रय संवर्द्धन

विक्रय संवर्द्धन से अभिप्राय उस प्रक्रियाओं से है जो क्रेता को वस्तुएं तुरंत क्रय करने के लिए प्रेरित करती है; जैसे छूट, कटौती, गिफ्ट, लक्की ड्रा, और नमूने आदि |

विक्रय संवर्द्धन की विधियाँ

(1) छूट : वस्तुओं को घटें हुए मूल्यों पर बेचना |

(2) वापसी : उत्पाद मूल्य का कुछ अंश, खरीद का प्रमाण दिखाकर ग्राहक को वापस कर दिया जाता हैं |

(3) कटौती : उत्पाद को उसके सूचित मूल्य से कम मूल्य पर बेचना कटौती कहलाता हैं | जैसे :-किसी दीवार घड़ी को 40% की कटौती पर बेचना |

(4) मात्रा गिफ्ट : इसके अंतर्गत उत्पाद की ही कुछ मात्रा गिफ्ट के रूप में दी जाती हैं |

(5) लक्की ड्रा : इसके अंतर्गत निश्चित समय के अंदर माल खरीदने वाले क्रेताओं में से विजेताओं को उपहार बांटे जाते हैं | विजेताओं का चयन ड्रा के माध्यम से होता हैं |

(6) उत्पाद संयोग : इस विधि के अंतर्गत मुख्य उत्पाद के साथ कोई अन्य उत्पाद गिफ्ट के रूप में दिया जाता हैं | जैसे :- कॉलगेट टूथ पेस्ट के टूथ ब्रश फ्री |

(7) तत्काल ड्रा एवं उपहार देना : इसके अंतर्गत किसी वस्तु को खरीदने पर उसी समय एक कार्ड खुरचने के लिए कहा जाता हैं ओर उस पर लिखी वस्तु उपहार में दी जाती हैं |

(8) प्रयोग करने योग्य लाभ : इसके अंतर्गत विक्रेता की ओर से क्रेताओं को कूपन  बांटें जाते हैं | जो क्रेता को अन्य ख़रीद पर कूपन में लिखे मूल्य जितनी छूट प्रदान करती हैं |

(9) 0% पर पूरा वित्त प्रदान करना : इस विधि के द्वारा वस्तु को बिना ब्याज के किस्तों में उपलब्ध कराया जाता हैं |

(10) नमूने : इसमें उपभोक्ताओं को वस्तु के नमूने बांटें जाते हैं | ताकि वे वस्तुओं को खरीदने के लिए प्रेरित हो |

(11) प्रतियोगिताएं : कुछ कम्पनियाँ अपने उत्पाद को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन करने हैं, और विजेता को ईनाम दिया जाता हैं |

प्रचार/जन-संपर्क/सार्वजनिक संबंध

प्रचार/जन-संपर्क/सार्वजनिक सम्बन्ध से अभिप्राय उस सन्देश प्रवाह से है जो बिक्री रहित होता हैं | जिसका प्रवाह व्यवसाय से ग्राहकों की ओर होता हैं |

सार्वजनिक सम्बन्ध की विशेषताएं

(1) व्यवसाय द्वारा जनता से अच्छे सार्वजनिक सम्बन्ध स्थापित करना, व्यवसाय को जनता का सहयोग प्रदान करता हैं |

(2) अच्छे सार्वजनिक सम्बन्ध एक व्यवसाय के सभी पक्षकारों ( जैसे :- ग्राहक, कर्मचारी, अंशधारी, पूर्तिकर्ता आदि ) की संतुष्टि में वृद्धि करता हैं |

(3) एक व्यवसाय को अपने संबंधित पक्षकारों से अच्छे सम्बन्ध स्थापित करने की आवश्यकता होती हैं | ताकि व्यवसाय लम्बे समय तक जीवित रहें सकें |

(4) यदि एक व्यवसाय अपने साख को अच्छा रखना चाहता है तो उसे अपने पक्षकारों से लागातार संवाद करते रहना चाहिए |

(5) आज के समय में जन सम्पर्क भी एक विशिष्ट क्रिया बन चुका हैं जिसके लिए प्रत्येक बड़े संगठन सार्वजनिक सम्बन्ध विभाग की स्थापना करते हैं |

सार्वजनिक सम्बन्ध स्थापित करने की विधियाँ 

(1) घटनाएँ : कम्पनियाँ समय-साम्य पर घटनाओं के रूप में कई सम्मलेन जैसे :- नए कार्यालय, फैक्टरी भवन, आदि के उद्धघाटन का आयोजन करना |

(2) सामाचार : कम्पनिओं द्वारा समय-समय पर कई सूचनाएं सार्वजनिक सम्बन्ध विभाग को दी जाती हैं जो की उसके द्वारा सामाचार पत्र में छपवाये जाते हैं | इससे जनता को कंपनी के बारें में  जानकारियाँ प्राप्त होती रहती हैं |

(3) भाषण : सार्वजनिक सम्बन्ध विभाग के अधिकारीयों द्वारा कंपनी के विभिन्न पक्षकारों को कंपनी के प्रगति से अवगत किया जाता हैं |

(4) सार्वजनिक सेवा क्रियाएं : कंपनी सार्वजनिक सेवा क्रियाओं से जुड़ कर जनता की संतुष्टि में वृद्धि करने का कार्य करता हैं | जिससें जनता के बीच कंपनी की छवि में सुधार होता हैं |

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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