Chapter Chapter 11. विपणन Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Business Study All Chapters:
Chapter 11. विपणन
3. पेज 3
मूल्य मिश्रण
मूल्य मिश्रण से अभिप्राय वस्तुओं अथवा सेवाओं के मूल्य निर्धारण से हैं |
किसी वस्तु के मूल्य निर्धारण के समय निम्न बाते ध्यान रखी जाती हैं ;
(i) उत्पादन लागत : वस्तुओं के मूल्य निर्धारण के समय वस्तु के कच्चे माल की लागत को ध्यान में रखा जाता हैं |
(ii) बाजार माँग : मूल्य निर्धारण के समय वस्तु की बाजार में माँग का भी गहन अध्ययन किया जाता हैं |
(iii) क्रेता की क्रय शक्ति : एक वस्तु के मूल्य निर्धारण के समय, बाजार के ग्राहकों की क्रय शक्ति को ध्यान में रखा जाता हैं |
(iv) प्रतियोगी फर्में : प्रतियोगी फर्मों की वस्तु के मूल्य पर विचार करके, अन्य प्रतियोगी अपनी वस्तु का मुल्य निर्धारित करता हैं |
(v) कंपनी उद्येश्य : एक कंपनी को किसी वस्तु के मूल्य का निर्धारण करते समय कंपनी के उद्येश्यों को भी ध्यान में रखना चाहिए | यदि कंपनी का उद्येश्य अधिक लाभ कमान है, तो उसे वस्तु की कीमत अधिक रखनी चाहिए परन्तु यदि कंपनी का उद्येश्य अधिक बिक्री करना है, तो उसे वस्तु का मूल्य कम रखना चाहिए |
(vi) विपणन विधि : यदि कंपनी की विपणन विधि अधिक खर्चीली हैं तो उसे वस्तु की अधिक कीमत रखनी चाहिए | विपरीत परिस्थिति में कम कीमत रखनी चाहिए |
संवर्द्धन मिश्रण
संवर्द्धन मिश्रण से अभिप्राय विक्रेता द्वारा उपभोक्ताओं को उत्पाद की जानकारी देना और उत्पाद को खरीदने के लिए प्रेरित करना हैं |
संवर्द्धन मिश्रण के विभिन्न तत्व
(i) विज्ञापन : विज्ञापन द्वारा उपभोक्ताओं को वस्तु की जानकारी दी जाती हैं और वस्तु को खरीदने के लिए विभिन्न प्रकार के विज्ञापन (जैसे : रेडियो, पत्रिकाओं, पोस्टर, सामाचार- पत्र आदि ) द्वारा खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता हैं |
(ii) वैयक्तिक विक्रेय : इस विधि में क्रेता- विक्रेता प्रत्यक्ष रूप से आमने-सामने होते हैं | विक्रेता द्वारा वस्तु की विशेषता बताकर क्रेता को उसे खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता हैं |
(iii) विक्रय संवर्द्धन : इसके अंतर्गत उपभोक्ताओं को वस्तु खरीदने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए जाते है ; जैसे :- उपहार देना, कीमत में छूट, सैम्पल बांटना, आदि |
(iv) प्रचार अथवा लोक प्रसिद्धि : इसके अंतर्गत ग्राहकों को किसी विशेष उत्पाद की जानकरी दी जाती हैं | जिसमें उत्पादक की ओर से कोई प्रयास नहीं होता हैं | जैसे :- किसी पत्रिका द्वारा स्वंय किसी वस्तु का प्रचार करना |
स्थान मिश्रण
स्थान मिश्रण से अभिप्राय उन सभी निर्णयों के योग से है जो वस्तु को उत्पादक से उपभोक्ता तक उपलब्ध करने में किए जाते हैं | जैसे :- वस्तुओं को सही समय पर, सही स्थान पर, सही मात्रा में उपलब्ध करना |
स्थान मिश्रण में शामिल होने वाले निर्णय ;
(i) विपणन माध्यम
(ii) भौतिक विपणन
(A) विपणन माध्यम : विपणन माध्यम से अभिप्राय उन माध्यम से है जिससें होकार वस्तुएं उत्पादक से उपभोक्ता तक पंहुचाई जाती हैं | जैसे :- थोक विक्रेता, फुटकर विक्रेता, व एजेंट आदि |
वितरण माध्यम के प्रकार अथवा स्तर
(i) प्रत्यक्ष माध्यम अथवा शून्य- स्तरीय माध्यम : इसके अंतर्गत वस्तुओं को उत्पादक से सीधे उपभोक्ता को बेच जाता हैं | जैसे :- फुटकर विक्रेता द्वारा स्वयं वस्तुएं बेचना, डाक द्वारा, और इंटरनेट द्वारा वस्तुएं बेचना आदि |
(ii) अप्रत्यक्ष माध्यम : इस माध्यम के द्वारा वस्तुओं को उत्पादक से उपभोक्ता तक पंहुचानें जाने के लिए एक या अधिक माध्यमों का सहारा लिए जाता हैं | जैसे :- थोक विक्रेता का, फुटकर विक्रेता का, एजेंट आदि का सहारा लिया जाता हैं |
अप्रत्यक्ष माध्यम के प्रकार ;
(a) एक-स्तरीय माध्यम
(b) द्वि- स्तरीय माध्यम
(c) त्रि- स्तरीय माध्यम
वितरण माध्यम के चयन को प्रभावित करने वाले घटक
(1) उत्पाद संबंधित घटक
(a) यदि उत्पाद की प्रति इकाई लागत अधिक हैं तो सस्ता वितरण माध्यम को चुनना चाहिए | परन्तु यदि वस्तु की लागत कम है तो अधिक श्रेष्ठ माध्यम को चुनना बेहतर होगा |
(b) नाशवान वस्तुओं के लिए कम-से-कम माधयमों वाला वितरण माध्यम का चयन करना चाहिए |
(c) तकनीकी प्रकृति की वस्तुओं को सीधे निर्माता से उपभोक्ता को उबलब्ध करना चाहिए |
(2) कंपनी से संबंधित घटक
(a) जिस कंपनी की ख्याति बाजार में अधिक अच्छी हैं उसे वितरण माध्यमों पर आश्रित नहीं होना चाहिए |
(b) यदि कोई कंपनी अपने वितरण माध्यम पर नियंत्रण रखना चाहती हैं तो उसे प्रत्यक्ष स्तरीय वितरण माध्यम का चयन करना चाहिए |
(c) किसी कंपनी का वितरण माध्यम का चयन उसके वित्तीय व्यवस्था पर भी निर्भर करती हैं | अर्थात यदि कोई कंपनी का वित्त व्यवस्था मज़बूत है तो वह अधिक माध्यमों का सहारा ले सकता हैं |
(3) प्रतिस्पर्धात्मक घटक : एक कंपनी प्रतिस्पर्धात्मक घटक के अनुसार दो नीतियों का चयन कर सकती हैं ;
(i) कंपनी प्रतियोगी कंपनी के अनुसार वितरण माध्यम का चयन कर सकता हैं |
(ii) अथवा प्रतियोगी से अलग वितरण माध्यम का चयन कर सकती हैं |
(4) बाजार संबंधित घटक
(i) यदि किसी कंपनी के ग्राहकों की संख्या अधिक हैं तो वितरण माध्यमों का उपयोग करना बेहतर होगा | परन्तु यदि कंपनी के ग्राहक कम हैं तो कंपनी द्वारा प्रत्यक्ष स्तरीय वितरण का सहारा लेना बेहतर होगा |
(ii) यदि किसी बाजार के क्रेताओं को अधिक माल उधार पर क्रय करने की आदत हैं और निर्माता उधार बिक्री की स्थिति में नहीं हैं तो मध्यस्थों का सहारा लिया जाना चाहिए |
(iii) यदि किसी वस्तु का बाजार बहुत बड़ा हैं तो वस्तुओं को दूर-दूर तक फ़ैलाने के लिए मध्यस्थों की मदद ली जनि चाहिए |
(5) वातावरणीय घटक
(i) मंदी की स्थिति में कंपनी द्वारा छोटी वितरण माध्यमों का उपयोग कर चाहिए | इससे लागत में कमी होगी |
(ii) कंपनी के वितरण माध्यम पर सरकारी नीतियों का भी प्रभाव पड़ता है ; जैसे :- दवाइयों की पूर्ति केवल लाइसेंसधारियों द्वारा ही की जा सकती हैं |
(B) भौतिक वितरण : भौतिक वितरण से अभिप्राय वस्तुओं के परिवहन, भण्डारण, स्टॉक मात्रा व आदेश प्रक्रिया से संबंधित निर्णय लेने से हैं |
भौतिक वितरण के तत्व
(i) परिवहन
(ii) स्टॉक मात्रा
(iii) भण्डारण
(iv) आदेश प्रक्रिया |
(1) परिवहन : परिवहन से अभिप्राय उस क्रिया से है जिसके द्वारा वस्तुओं को एक स्थान से दूसरें स्थान पर ले जाया जाता हैं | किसी वस्तु की कीमत तभी अधिक होती हैं जब वह परिवहन क्रिया द्वारा सही स्थान पर सही मात्रा में उपलब्ध हो |
परिवहन के माध्यमों का चयन करते समय निम्न तत्वों को ध्यान में रखना चाहिए ;
(i) गति, (ii) लागत, (iii) निर्भरता, (iv) सुरक्षा, और (v) क्षमता आदि |
(2) स्टॉक मात्रा : स्टॉक से अभिप्राय कच्चे माल, अर्द्धनिर्मित माल, और तैयार माल के कुल योग से हैं | किसी कंपनी की वितरण व्यवस्था उसके स्टिक मात्रा पर निर्भर करती हैं अर्थात किसी कंपनी में स्टॉक की मात्रा न ही बेहत अधिक होनी चाहिए और न ही बेहत कम | कंपनी में व्यवस्थित स्टॉक की मात्रा होनी चाहिए |
(3) भण्डारण : प्रायः वस्तु के निर्माण और बिक्री में कुछ समय का अंतर देखा जाता हैं इस बीच वस्तु को विभिन्न प्रकार की क्षति से बचने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखने की आवश्यकता होती हैं जो भण्डारण द्वारा पूर्ण की जाती हैं |
भण्डारण की आवश्यकता ;
(i) सही समय पर वस्तु उपलब्ध कराने में मददगार हैं |
(ii) वस्तु के निर्माण तथा बिक्री तक वस्तुओं की सुरक्षा करना |
(iii) वस्तुओं का अलग- अलग स्थान पर सुपुर्द कराने में मददगार हैं |
(4) आदेश प्रक्रिया : आदेश प्रक्रिया से अभिप्राय ग्राहक के माल के आदेश कि पूर्ति के समय में अपनाई जाने वाली क्रियाओं से हैं | जैसे :-
(i) ग्राहक द्वारा बिक्रीकर्ता को आदेश देना |
(ii) बिक्रीकर्ता द्वारा आदेश कम्पनी को भेजना |
(iii) आदेश की प्रविष्टि करना |
(iv) ग्राहक की वित्तीय व्यवस्था को जाचं |
(v) स्टॉक जाचं और सूची बनाना |
(vi) आदेश की पूर्ति करना |
(vii) भुगतान प्राप्त करना |