Chapter Chapter 11. विपणन Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 2 - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Business Study All Chapters:
Chapter 11. विपणन
2. पेज 2
विपणन प्रबंध दर्शन
विपणन प्रबंध दर्शन में निम्निलिखित पाँच विचारधाराएँ शामिल होती हैं ;
(i) उत्पादन विचारधारा : इसके अंतर्गत एक कंपनी यह सुनिश्चित करती हैं कि उसके द्वारा उत्पादित वस्तुएं सही समय पर, सही स्थान पर, सही मूल्य पर, उसके ग्राहकों को उपलब्ध हो | कंपनी अपने उत्पाद की प्रति इकाई लागत कम करने के लिए बड़े स्तर पर उत्पादन करती हैं |
(ii) उत्पाद विचारधारा : उत्पाद विचारधारा के अंतर्गत कंपनी अपने उत्पाद की गुणवत्ता को अधिकतम करती हैं ताकि अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को उस निश्चित उत्पाद को लेने के लिए प्रेरित किया जा सकें | क्योंकि ग्राहक अच्छी गुणवत्ता की वस्तुओं को लेने के लिए अधिक प्रेरित होते हैं |
(iii) बिक्री विचारधारा : कंपनी जो इस विचार का अनुसरण करती हैं उनका यह मानना होता है कि वस्तु खरीदी नहीं जाती बल्कि उन्हें बेचा जाता हैं | दूसरें शब्दों में ग्राहकों को वस्तुएं खरीदने के लिये प्रेरित किया जाता हैं |
(iv) विपणन विचारधारा : इस विचारधारा के अंतर्गत कंपनियाँ इस मान्यता को मानती हैं कि सफलता केवल उपभोक्ता की संतुष्टि के द्वारा ही प्राप्त की जा सकती हैं | इसलिए कंपनी वस्तुओं का उत्पादन उपभोक्ताओं के अनुकूल करती है न कि उपभोक्ताओं की इच्छाओं को वस्तुओं के अनुकूल ढालने की कोशिश करती हैं | इससें उपभोक्ता संतुष्टि में वृद्धि होती हैं |
(v) सामाजिक विपणन विचारधारा : इस विचारधारा की यह मान्यता हैं कि कंपनियों के द्वारा केवल उपभोक्ता की संतुष्टि को पूरा करने से बात नहीं बनती, कंपनी का समाज के प्रति भी दायित्व बनता हैं की वह समाज की भलाई के लिए कुछ कार्य करें | जैसे : प्रदूषण को कम करने के लिए समाज में जागरूकता फैलान |
विभिन्न प्रबंध विपणन दर्शनों का तुलनात्मक अध्ययन
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अंतर का आधार |
उत्पादन विचारधारा |
उत्पाद विचारधारा |
बिक्री विचारधारा |
विपणन विचारधारा |
सामाजिक विपणन विचारधारा |
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(1) केन्द्र बिन्दु |
उत्पादन की मात्रा पर |
उत्पाद की गुणवत्ता पर |
ग्राहकों को आकर्षित करना |
उपभोक्ताओं की संतुष्टि पर |
उपभोक्ता कल्याण |
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(2) साधन |
संतुलित मूल्य व आसान उपलब्धि |
उत्पाद में सुधार |
विज्ञापन, व्यक्तिगत विक्रय, विक्रय संवर्द्धन |
विपणन क्रियाएं |
विपणन क्रियाएं सामाजिक कल्याण के साथ |
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(3) समाप्ति |
अधिकतम उत्पाद एवं लाभ द्वारा समाप्ति |
उत्पाद की गुणवत्ता द्वारा लाभ |
अधिकतम बिक्री द्वारा लाभ |
उपभोक्ता संतुष्टि द्वारा लाभ |
उपभोक्ता संतुष्टि एवं सामाजिक कल्याण से लाभ |
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विपणन मिश्रण : अवधारणा
विपणन मिश्रण से अभिप्राय विपणन क्रियाओं को सफलतापुर्वक करने के लिए बनाई गई नीतियां अर्थात् उत्पाद, संवर्द्धन, स्थान और मूल्य के योग से हैं |
विपणन मिश्रण के तत्व
(1) उत्पाद मिश्रण
(2) संवर्द्धन मिश्रण
(3) स्थान मिश्रण
(4) मूल्य मिश्रण
उत्पाद मिश्रण
उत्पाद से अभिप्राय किसी भौतिक वस्तु से हैं | जैसे टीवी, फ़्रिज, बर्तन और मोबाईल इत्यादि |
उत्पाद मिश्रण से अभिप्राय उत्पाद से संबंधित लिए जाने वाले निर्णयों के योग से हैं | जैसे :- वस्तु की पैकेगिंग, लेबलिंग, ब्रांडिग, रंग, डिजाइन, किस्म, आकार, आदि के निर्णय से हैं | यह निर्णय ग्राहक को वस्तु की ओर आकर्षित करने में अहम् भूमिका निभाता हैं |
उत्पाद मिश्रण के मुख्य तत्व
(i) नामकरण/ब्राण्डिंग
(ii) लेबलिंग
(iii) पैकेजिंग
(1) नामकरण/ब्राण्डिंग : इसके द्वारा बाजार में किसी वस्तु की एक विशेष पहचान बनाई जाती हैं | ब्राण्डिंग के अंतर्गत वस्तु को एक विशेष शब्द, चिन्ह, रंग, दिया जाता हैं | जो उसे बाजार में अन्य वस्तुओं से एक अलग पहचान देती हैं |
एक अच्छे ब्रांड के गुण
(i) एक अच्छे ब्रांड की यह विशेषता हैं कि ब्रांड शब्द संक्षिप्त हो |
(ii) ब्रांड शब्द बोलने में सरल हो |
(iii) ब्रांड नाम वस्तु के गुण को बतलाएं |
(iv) ब्रांड नाम सबसे भिन्न हो |
ब्राण्डिंग के कार्य
(i) ब्रांड नाम एक वस्तु को अन्य वस्तुओं से अलग पहचानने में मदद करता हैं |
(ii) यह एक तरह से वस्तु का विज्ञापन करता हैं |
(iii) एक अलग ब्रांड नाम एक वस्तु का अगल मूल्य निर्धारित करने में मदद करता हैं |
(iv) ब्राण्डिंग नई वस्तु को बाजार से परिचित में मदद करता हैं |
(v) ब्राण्डिंग क्वालिटी को सुनिश्चित करती है तथा ग्राहक का विश्वास में वृद्धि करती हैं |
(2) लेबलिंग : इसके अंतर्गत वस्तु के लिए लिबल तैयार कियें जातें हैं | जिसमें वस्तु से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाती हैं | जैसे :- वस्तु का नाम, बनाने की विधि, उत्पादन की तिथि, उत्पादन की अंतिम तिथि, मूल्य, बैच नम्बर आदि |
लेबलिंग के प्रकार
(i) ब्रांड लेबल : जिस पर केवल वस्तु के ब्रांड का नाम लिखा जाता हैं |
(ii) श्रेणी लेबल : जिस पर वस्तु की क्वालिटी को निश्चित करने वाले शब्द व अंक लिखे जाते हैं |
(iii) विवरणात्मक लेबल : इस पर वस्तु के विवरण की जानकारी दी जाती हैं | जैसे :- वस्तु का नाम, किस्म, बैच नम्बर, प्रयोग की विधि आदि |
लेबलिंग के कार्य
(i) लेबलिंग वस्तु की जानकारी देती हैं |
(ii) लेबलिंग वस्तु व ब्रांड की पहचान करता हैं |
(iii) लेबलिंग वस्तु की श्रेणी की जानकरी देता हैं | अर्थात् वस्तु की गुणवत्ता की जानकारी देता हैं |
(iv) लेबलिंग एक ओर महत्वपूर्ण कार्य करता है कि यह वस्तु से संबंधित आवश्यक व क़ानूनी रूप से अनिवार्य चेतावनी भी देता हैं |
(v) यह वस्तु के संवर्द्धन में भी सहायक हैं |
पैकेजिंग : पैकेजिंग से अभिप्राय एक ऐसे आवरण से है जो उत्पाद को परिवहन व अन्य परिस्थितियों में होने वाली क्षति से बचाता हैं |
पैकेजिंग के स्तर
(i) प्राथमिक पैकेजिंग - यह पैकेज के उत्पाद के सबसे निकट होता हैं | जैसे :- माचिस की डिबिया, टूथ पेस्ट का ट्यूब आदि |
(ii) द्वितीयक पैकेजिंग - यह पैकेज उत्पाद के प्रयोग करने तक उसकी अतिरिक्त देखभाल करता हैं | जैसे :- टूथ पेस्ट का गत्ते का बॉक्स |
(iii) परिवहन पैकेजिंग - यह पैकेज उत्पाद के परिवहन, संग्रहण के लिए आवश्यक होता हैं | जैसे :- एक बड़े गत्ते का पैकेट जिसमें 50 टूथ पेस्ट के ट्यूब रखे गए हैं |
पैकेजिंग के कार्य
(i) पैकेजिंग उत्पाद को एक पहचान देता हैं : जैसे :- कॉलगेट के पैकेट से ही उसकी पहचान की जाती हैं |
(ii) पैकेजिंग उत्पाद की टूट-फूट, नमी, कीड़ें-मकोड़ों, और अन्य क्षति से बचाव करती हैं |
(iii) पैकेजिंग परिवहन को सरल बनाती हैं, पैकेट वस्तु को एक स्थान से दूसरें तक ले जाने और ले आने को सरल बनाता हैं |
(iv) पैकेजिंग वस्तुओं का संवर्द्धन में भी मदद करता हैं |