Chapter 7. जीवों में विविधता Class 9 Science CBSE notes in hindi पादप जगत के जीवों के गुण | थैलोफाइटा | ब्रायोफाइटा | टेरिड़ोंफाइटा | जिम्नोंस्पर्म | एन्जियोंस्पर्म - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science All Chapters:
7. जीवों में विविधता
3. पादप जगत के जीवों के गुण | थैलोफाइटा | ब्रायोफाइटा | टेरिड़ोंफाइटा | जिम्नोंस्पर्म | एन्जियोंस्पर्म
अध्याय 7. जीवों में विविधता
थैलोफाइटा समुह के जीवों के गुण:
(i) इन पौधों की शारीरिक संरचना में विभेदीकरण नहीं पाया जाता है।
(ii) इस वर्ग के पौधें को समान्यतया शैवाल कहा जाता है।
(iii) यह जलीय पौधे होते है।
उदाहरण: यूलोथ्रिक्स, स्पाइरोगाइरा, कारा इत्यादि |
ब्रायोफाइटा समुह के जीवों के गुण:
(i) इस प्रकार के पौधे जलीय तथा स्थलीय दोनों होते हैं, इसलिए इन्हें पादप वर्ग का उभयचर कहा जाता है।
(ii) यह पादप, तना और पत्तों जैसी संरचना में विभाजित होता है।
(iii) इसमें पादप शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक जल तथा दूसरी चीजों के संवहन के लिए विशिष्ट उत्तक नहीं पाए जाते हैं।
उदाहरण: माॅस (फ्रयूनेरिया), मार्वेंफशिया आदि ।
टेरिड़ोंफाइटा समुह के जीवों के गुण:
(i) इस वर्ग के पौधें का शरीर जड़, तना तथा पत्ती में विभाजित होता है।
(ii) जल तथा अन्य पदार्थों वेफ संवहन वेफ लिए संवहन ऊतक भी पाए जाते हैं।
(iii) उदाहरणार्थ- मार्सीलिया, प़फर्न, हाॅर्स-टेल इत्यादि।
(iv) नग्न भ्रूण पाए जाते हैं, जिन्हें बीजाणु (spore) कहते हैं।
(v) इसमें जननांग अप्रत्यक्ष होते हैं।
(vi) इनमें बीज उत्पन्न करने की क्षमता नहीं होती है।
जिम्नोंस्पर्म के जीवों के गुण:
(i) इनमें नग्न बीज पाया जाता हैं।
(ii) ये बहुवर्षिय तथा काष्ठिय पौधे होते है।
उदाहरण: पाइनस तथा साइकस।
एन्जियोंस्पर्म के जीवों के गुण:
(i) इन पौधें के बीज फलों के अंदर ढकें होते हैं।
(ii) इन्हें पुष्पी पादप भी कहा जाता है।
(iii) इनमें भोजन का संचय या तो बीजपत्रों में होता है या फिर भ्रूणपोष में।
क्रिप्टोगैम :
वे जीव जिनमे जननांग प्रत्यक्ष होते हैं तथा इनमें बीज उत्पन्न करने की क्षमता नही होती है । अंत: ये क्रिप्टोगैम कहलाते हैं |
उदाहरण: थैलोंफाईटा, ब्रायोफाईटा एवं टेरीडोफाईटा |
फेनेरोगेम्स :
वे पौधे जिनमें जनन ऊतक पूर्ण विकसित एवं विभेदित होते हैं तथा जनन प्रकिया के पश्चात् बीज उत्पन्न करते हैं, फेनेरोगेम्स कहलाते हैं |
उदाहरण: ज़िम्नोस्पर्म एवं एन्जिओस्पर्म |
ज़िम्नोस्पर्म एवं एन्जिओस्पर्म में अंतर :
| ज़िम्नोस्पर्म | एन्जिओस्पर्म |
|
1. ये नग्न बीज उत्पन्न करते हैं | 2. ये पौधे बहुवर्षीय सादबहर तथा काष्ठीय होते है | 3. इनके बीजों में बीज पत्र नहीं होते हैं | 4. उदाहरण: पाइनस एवं साईकस आदि | |
1. ये फल के अंदर बीज उत्पन्न करते हैं | 2. ये पुष्पी पादप होते हैं | 3. इनके बीज बीज पत्र वाले होते हैं | 4. उदाहरण: पैफियोपेडिलम (एकबीज पत्री) एवं आइपोमिया (द्विबीज पत्री ) | |
एक बीजपत्री तथा द्विबीजपत्री अंतर:
|
एक बीजपत्री |
द्वि बीजपत्री |
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1. इसमें एक बीजपत्र होता है | 2. उदाहरण: पेफियोपेडिलम |
1. इसमें दो बीजपत्र होते हैं | 2. उदाहरण: आइपोमिया |
टेरिडोफाइटा और फैनरोगैम अंतर:
टेरिडोफाइटा -
1. इनमें बीज उत्पन्न करने की क्षमता नही होती है।
2. इनमें जननांग अप्रत्यक्ष होते है ।
3. उदाहरण: टेरीडोफाईटा |
फैनरोगैम -
1. जनन प्रक्रिया के पश्चात् बीज उत्पन्न करते है।
2. जनन उतक पूर्ण विकसित होते हैं ।
3. उदाहरण: ज़िम्नोस्पर्म एवं एन्जिओस्पर्म |
बीजाणु (Spore) : थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा और टेरिडोफाइटा में नग्न भ्रूण पाए जाते हैं, जिन्हें बीजाणु (Spore) कहते हैं।
अर्थात नग्न भ्रूण वाले बीजों को बीजाणु (Spore) कहते हैं।
Topic Lists Page Wise:
- 1. जीवों में विविधता | वर्गीकरण और जैव विकास | वर्गीकरण का आधार
- 2. प्लांटी समूह | वर्गीकरण | प्लांटी जगत के जीवों के लक्षण
- 3. पादप जगत के जीवों के गुण | थैलोफाइटा | ब्रायोफाइटा | टेरिड़ोंफाइटा | जिम्नोंस्पर्म | एन्जियोंस्पर्म
- 4. एनिमेलिया (जन्तु जगत) | जीवों का गुण (features) | वर्गीकरण का आधार | नोटोकॉर्ड
- 5. कशेरुकी (वर्टीब्रेटा) | समान्य लक्षण | वर्गीकरण | जीवों के गुण | पक्षी एवं स्तनधारी में अंतर
- 6. द्वि-नाम पद्धति | द्वि-नाम पद्धति के लाभ | बाह्य कंकाल | अंत: कंकाल
- 7. Assignment