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Chapter 6. ऊत्तक Class 9 Science CBSE notes in hindi ऊतक परिभाषा | उत्तक के प्रकार | पादपों में उतकों के प्रकार | स्थायी ऊतक - CBSE Study

Chapter 6. ऊत्तक Science Class 9 cbse notes ऊतक परिभाषा | उत्तक के प्रकार | पादपों में उतकों के प्रकार | स्थायी ऊतक in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 6. ऊत्तक Class 9 Science CBSE notes in hindi ऊतक परिभाषा | उत्तक के प्रकार | पादपों में उतकों के प्रकार | स्थायी ऊतक - CBSE Study

कक्षा 9 Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 6. ऊत्तक को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक ऊतक परिभाषा | उत्तक के प्रकार | पादपों में उतकों के प्रकार | स्थायी ऊतक को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 9 English Medium Science All Chapters:

6. ऊत्तक

1. ऊतक परिभाषा | उत्तक के प्रकार | पादपों में उतकों के प्रकार | स्थायी ऊतक

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Chapter-6. उत्तक

एक ही प्रकार की संरचना और कार्य करने वाले कोशिकाओं के समूह को उत्तक कहते हैं | 

मुख्य बिंदु: 

  • एक कोशिकीय जीवों में, सभी मौलिक कार्य एक ही कोशिका द्वारा किये जाते  हैं | उदाहरण के लिए अमीबा में एक ही कोशिका द्वारा गति, भोजन लेने की क्रिया, श्वसन क्रिया और उत्सर्जन क्रिया संपन्न की जाती है | 
  • बहुकोशिकीय जीवों में लाखों कोशिकाएँ होती हैं | इनमें से अधिकतर कोशिकाएँ कुछ ही कार्यों को संपन्न करने में सक्षम होती  हैं | इन जीवों में भिन्न-भिन्न कार्यों को करने के लिए भिन्न-भिन्न कोशिकाओं का समूह होता हैं | 
  • बहुकोशिकीय जीवों में श्रम विभाजन होता हैं | 
  • शरीर के अन्दर ऐसी कोशिकाएँ जो एक तरह के कार्यों को करने में दक्ष होती है, सदैव एक समूह में होती हैं |
  • एक ही संरचना वाले कोशिकाओं का वह समूह जो शरीर के किसी निश्चित स्थान विशिष्ट कार्य करते है उत्तक कहलाते हैं | 

मनुष्य में:

मांसपेशिय कोशिकाएँ: इसके संकुचन एवं प्रसार से शरीर  में गति होती है |

तंत्रिका कोशिकाएँ : यह संवेदनाओं को मस्तिष्क तक पहुँचाता है और मस्तिष्क से संदेशों को शरीर के एनी भागों तक लाता हैं |

रक्त कोशिकाएँ : यह ऑक्सीजन, भोजन, हारमोंस तथा अपशिष्ट पदार्थों का वहन करता हैं | 

पौधों में :

संवहन उतक भोजन एवं जल का चालन पौधे के एक भाग से दुसरे भाग तक करते हैं |

उत्तक (Tissue): एक ही प्रकार की संरचना और कार्य करने वाले कोशिकाओं के समूह को उत्तक कहते हैं | 

पादप उतक (Plant Tissues):

(i)  पौधे स्थिर होते हैं - वे गति नहीं करते हैं | क्योंकि ये अपना भोजन एक स्थान पर स्थिर रह के ही प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया द्वारा प्राप्त कर लेते हैं | 

(ii) उनके अधिकांश उतक सहारा देने वाले होते है तथा पौधों को संरचनात्मक शक्ति प्रदान करते हैं | 

(iii) अधिकांश पादप ऊतक मृत होते हैं | ये मृत ऊतक जीवित उतकों के समान ही यांत्रिक शक्ति प्रदान करते हैं तथा उन्हें कम अनुरक्षण की आवश्यकता होती है |

(iv) पौधों में वृद्धि कुछ क्षेत्रों में ही सिमित रहती है | 

(v) पौधों में कुछ ऊतक जीवन भर विभाजित होते रहते हैं | ये ऊतक पौधों के कुछ निश्चित भाग में ही होते है | जो ऊतक के विभाजित होने के क्षमता पर आधारित होता है | विभिन्न प्रकार के पादप उतकों को वृद्धि या विभोज्योतक ऊतक और स्थायी ऊतक के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है | 

जंतु ऊतक (Animal Tissues):

(i) दूसरी ओर जंतु भोजन, जोड़ी, और आवास की तलाश में चारों ओर धूमते हैं | 

(ii) पौधों के तुलना में जंतु अधिक ऊर्जा खर्च करते है | 

(iii) उतकों का अधिकांश भाग जीवित होता है | 

(iv) जंतुओं में कोशिकाओं की वृद्धि एकसमान होती है | इसलिए इनमें विभाज्य और अविभाज्य क्षेत्रों की कोई निश्चित सीमा नहीं होती है | 

पादपों में उतकों के प्रकार (Type of Plant Tissue):

(1) विभज्योतक ऊतक (MERISTEMATIC TISSUE) :

पौधों की वृद्धि केवल उनके कुछ निश्चित एवं  विशेष भागों में ही होता है | ऐसा विभाजित होने वाले उतकों के कारण ही होता है ऐसे विभाजित होने वाले ऊतक पौधों के वृद्धि वाले भागों में ही स्थित होते है | इस प्रकार के  ऊतक को विभज्योतक ऊतक कहते है |  

विभज्योतक ऊतक का वर्गीकरण (Classification of Meristematic Tissue):

(A) शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): शीर्षस्थ विभज्योतक पौधों के जड़ एवं तनों के वृद्धि वाले भाग में विद्यमान रहता है तथा यह उनकी लंबाई में वृद्धि करता है  |  

(B) पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem): तने की परिधि या मूल में वृद्धि पार्श्व विभज्योतक के कारण होती है | 

(C) अंतर्विष्ट विभज्योतक (Intercalary meristem): यह पत्तियों के आधार में या टहनी के पर्व (internode) के दोनों ओर उपस्थित होते हैं | 

विभज्योतक ऊतक के गुण (Properties Of Meristematic Tissue):

(i) इस ऊतक की कोशिकाएँ अत्यधिक क्रियाशील होती हैं |

(ii) उनके पास बहुत अधिक कोशिका द्रव्य, पतली कोशिका भित्ति और स्पष्ट केन्द्रक होते हैं  | 

(iii) उनके पास रस्धानियाँ नहीं होती है | 

(2) स्थायी ऊतक (PERMANENT TISSUE):

विभज्योतक ऊतक वृद्धि कर आगे एक विशिष्ट कार्य करती हैं और विभाजित होने की शक्ति खो देती है जिसके फलस्वरूप वे स्थायी ऊतक का निर्माण करती हैं | 

विभज्योतक की कोशिकाएँ विभाजित होकर विभिन्न प्रकार के स्थायी उतकों का निर्माण करती हैं | 

परिभाषा: कोशिकाएँ जो विभेदित होकर विशिष्ट कार्य करती है और आगे विभाजित होने की शक्ति खो देती हैं इस प्रकार की ऊतक को स्थायी ऊतक कहते हैं | 

विभेदीकरण (Differentiation): उतकों द्वारा विशिष्ट कार्य करने के लिए स्थायी रूप और आकार लेने की क्रिया को विभेदीकरण कहते हैं | 

स्थायी ऊतक के प्रकार (Type of permanent tissue):

(A) सरल स्थायी ऊतक (Simple permanent tissue):

ये एक ही प्रकार के कोशिकाओं से बने होते हैं जो एक जैसे दिखाई देते हैं इस प्रकार के ऊतक को सरल स्थायी ऊतक कहते हैं | 

उदाहरण: पैरेंकाइमा, कोलेन्काईमा और स्केरेन्काइमा आदि | 

सरल स्थायी ऊतक के प्रकार (Type of simple permanent tissues):

(1) पैरेंकाइमा (Parenchyma): वे सरल स्थायी ऊतक जिसके कोशिकाओं की कुछ परतें आधारीय पैकिंग का निर्माण करती हैं | इन्हें पैरेंकाइमा ऊतक कहते हैं |

गुण (Features):

(i)  यह पतली कोशिका भित्ति वाली सरल कोशिकाओं का बना होता है | 

(ii) ये जीवित कोशिकाएँ होती है | 

(iii) ये प्राय: बंधन मुक्त होती हैं |

(iv) इस प्रकार के ऊतक की कोशिकाओं के माध्य काफी रिक्त स्थान पाया जाता है |

(v) यह ऊतक भोजन का भण्डारण करता है और पौधों को सहायता प्रदान करता है | 

(vi) जड़ एवं तनों की पैरेंकाइमा पोषक तत्व और जल का भी भण्डारण करती हैं | 

पैरेंकाइमा ऊतक के प्रकार : 

(i) क्लोरेन्काइमा (Chlorenchyma): कुछ अन्य पैरेंकाइमा जिनमें क्लोरोफिल पाया जाता है और ये प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया करती हैं ऐसे पैरेंकाइमा को क्लोरेन्काइमा कहते हैं | 

(ii) एरेनकाईमा (Aerenchyma): जलीय पौधों में पैरेंकाइमा  की कोशिकाओं के मध्य हवा की बड़ी गुहिकाएँ (cavities) होती हैं, जो पौधों को तैरने के लिए उत्प्लावन बल (Buoyancy) प्रदान करती हैं | इस प्रकार के पैरेंकाइमा को एरेनकाईमा कहते हैं | 

(2) कोलेन्काईमा (Collenchyma): This यह एक अन्य प्रकार की सरल स्थायी ऊतक जिसके कारण पौधों में लचीलापन होता है | यह पौधों के विभिन्न भागों  जैसे- पत्ती एवं तना में बिना टूटे  हुए लचीलापन लाता है | ऐसे ऊतक को कोलेन्काइमा कहते है |  

गुण (Features):

(i) यह पौधों के पत्तीयों एवं तनों में लचीलापन लाता है | 

(ii) यह पौधों को यांत्रिक सहायता भी प्रदान करता है |

(iii) इस ऊतक की कोशिकाएँ जीवित, लंबी, और अनियमित ढंग से कोनों पर मोटी होती हैं |

(iv) कोशिकाओं के बीच कम स्थान होता है | 

हम इस ऊतक को एपिडर्मिस के नीचे पर्णवृत में पा सकते हैं | 

(3) स्केरेनकाईमा (sclerenchyma): यह एक अन्य प्रकार का सरल स्थाई ऊतक है  जो पौधों को कठोर एवं मजबूत बनाता है | इस प्रकार के सरल स्थायी ऊतक को स्केरेन्काइमा कहते है | उदाहरण: नारियल के छिलके |

ये ऊतक तने में, संवहन बण्डल के समीप, पत्तों की शिराओं में तथा बीजों और फलों के कठोर छिलके में उपस्थित होता है | 

गुण (Features):

(i) इस ऊतक की कोशिकाएँ मृत होती हैं | 

(ii) ये लंबी एवं पतली होती है क्योंकि इस  ऊतक की भीति लिग्निन के कारण मोटी होती है | 

(iii) ये भित्तियाँ प्राय: इतनी मोटी होती हैं कि कोशिका के भीतर कोई आंतरिक स्थान नहीं होता है | 

(iv) यह पौधों के भागों को मजबूती प्रदान करता है | 

लिग्निन (Lignin):  लिग्निन कोशिकाओं को दृढ बनाने के लिए सीमेंट का कार्य करने वाला एक रासायनिक पदार्थ है | 

पैरेंकाइमा, कोलेन्काईमा और स्क्लेरेन्काइमा के बीच अंतर: 

Differentiation among Parenchyma, collenchymas and Sclerenchyma:

 

           पैरेंकाइमा

         कोलेन्काईमा

          स्क्लेरेन्काइमा

  1. ये जीवित कोशिकाएँ होती हैं |
  2. कोशिका भित्ति पतली होती हैं | 
  3. इनकी कोशिकाओं के बीच काफी रिक्त स्थान होता है | 
  4. यह ऊतक भोजन का भण्डारण करता है और पौधों को सहायता प्रदान करता है | 
  1. ये जीवित कोशिकाएँ होती हैं |
  2. कोशिका भित्ति मोटी होती है |
  3. अंतरकोशिकीय अवकाश उपस्थित होती है | 
  4. यह पौधों यांत्रिक सहायता प्रदान करता है | 
  1. ये मृत कोशिकाएँ होती हैं |
  2. कोशिका भित्ति मोटी होती है |
  3. अंतरकोशिकीय अवकाश अनुपस्थित होती है | 
  4. यह पौधों के भागों को मजबूती प्रदान करता है | 

 

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