Your Complete CBSE Learning Hub

Free NCERT Solutions, Revision Notes & Practice Questions

Notes | Solutions | PYQs | Sample Papers — All in One Place

Get free NCERT solutions, CBSE notes, sample papers and previous year question papers for Class 6 to 12 in Hindi and English medium.

Advertise:

Chapter 5. जीवन की मौलिक इकाई Class 9 Science CBSE notes in hindi कोशिका के भाग | कोशिकांग | विसरण | परासरण | कोशिका विभाजन - CBSE Study

Chapter 5. जीवन की मौलिक इकाई Science Class 9 cbse notes कोशिका के भाग | कोशिकांग | विसरण | परासरण | कोशिका विभाजन in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

• Hi Guest! • LoginRegister

Class 6

CBSE Notes

Class 7

CBSE Notes

Class 8

CBSE Notes

Class 9

CBSE Notes

Class 10

CBSE Notes

Class 11

CBSE Notes

Class 12

CBSE Notes

Chapter 5. जीवन की मौलिक इकाई Class 9 Science CBSE notes in hindi कोशिका के भाग | कोशिकांग | विसरण | परासरण | कोशिका विभाजन - CBSE Study

कक्षा 9 Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 5. जीवन की मौलिक इकाई को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक कोशिका के भाग | कोशिकांग | विसरण | परासरण | कोशिका विभाजन को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 9 English Medium Science All Chapters:

5. जीवन की मौलिक इकाई

2. कोशिका के भाग | कोशिकांग | विसरण | परासरण | कोशिका विभाजन

Page 2 of 5

कोशिका के भाग (Parts Of Cell):

(i) प्लाज्मा झिल्ली (Plasma Membrane) : यह कोशिका की सबसे बाहरी परत है जो कोशिका के घटकों को बाहरी पर्यावरण से अलग करती है | प्लाज्मा झिल्ली लचीली होती है और कार्बनिक अणुओं जैसे लिपिड (phospolipids) तथा प्रोटीन के दो परतों से बनी होती है |

कोशिका झिल्ली का लचीलापन:  कोशिका झिल्ली का लचीलापन एक कोशिकीय जीव जैसे अमीबा को अपने बाह्य पर्यावरण से अपना भोजन या अन्य पदार्थ ग्रहण करने में सहायता करता है | इसी लचीलापन के कारण अमीबा अपना आकार बदल पाता है और खाद्य पदार्थ को कुटपाद के सहारे निगल जाता है | अमीबा या अन्य एककोशिकीय जीवों में भोजन ग्रहण करने की इस प्रक्रिया को इंडोसाइटोसिस अथवा फैगोसाइटोसिस कहते है | 

कार्य: 

(i) यह कोशिका द्रव्य को बाहरी पर्यावरण से अलग करता है | 

(ii) यह कोशिका की बाहरी तत्वों से रक्षा करता है | 

(iii) कुछ चुने हुए पदार्थो का कोशिका के अंदर या बाहर आने-जाने की क्रिया प्लाज्मा झिल्ली के द्वारा ही होता है | जबकि अन्य पदार्थों की गति को रोकती है | 

(iv) विसरण एवं परासरण की क्रिया इसी झिल्ली के द्वारा होता है | 

प्लाज्मा झिल्ली वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली होती है : 

प्लाज्मा झिल्ली कुछ चुने हुए पदार्थों को ही अंदर अथवा बाहर जाने देती है तथा अन्य पदार्थो की गति को रोकती है | इसलिए कोशिका झिल्ली को वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली भी कहते हैं | 

कुछ चुने हुए पदार्थ जैसे - कार्बन डाइऑक्साइड अथवा ऑक्सीजन कोशिका झिल्ली के आर-पार विसरण प्रक्रिया द्वारा आ-जा सकते है | 

पदार्थों की गति का नियम: पदार्थों की गति उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर होती है | 

विसरण (Diffusion) :  विसरण एक कोशिकाओं में होने वाली प्रक्रिया है जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड एवं ऑक्सीजन जैसे गैसीय पदार्थों के अणुओं का परिवहन वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली के द्वारा होता है |  यह प्रक्रिया विसरण कहलाती है | 

कोशिकाओं में विसरण की प्रक्रिया: CO2 जैसे कोशिकीय अपशिष्ट जब कोशिका में अधिक मात्रा में इक्कठा हो जाती है तो उसकी सांद्रता (concentration) बढ़ जाता है | कोशिका के बाह्य पर्यावरण  में CO2 की सांद्रता कोशिका के अंदर की अपेक्षा कम होती है | जैसे ही कोशिका के अंदर और बाहर CO2 की सांद्रता में अंतर आता है उसी समय उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर विसरण की प्रक्रिया द्वारा कोशिका से CO2 बाहर निकल जाती है | इसी प्रकार कोशिका में ऑक्सीजन O2 की सांद्रता कम हो जाती है और बाहर ऑक्सीजन O2 की सांद्रता बढ़ जाती है तो बाहर से O2 कोशिका में अंदर वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली से विसरण की प्रक्रिया द्वारा कोशिका के अंदर चली जाती है | इस प्रकार कोशिका तथा बाह्य पर्यावरण में गैसों का आदान-प्रदान विसरण की प्रक्रिया द्वारा होता है | 

परासरण (Osmosis): जल के अणुओं की गति वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा हो तो उसे परासरण कहते हैं | 

जिस प्रकार गैसों का आदान-प्रदान विसरण की प्रक्रिया द्वारा होता है | ठीक उसी नियम का पालन परासरण में भी होता है | परासरण में जल के अणुओं की गति भी वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर होता है | 

(ii) केन्द्रक (Nucleus) : केन्द्रक कोशिका का सबसे बड़ा कोशिकांग है जो कोशिका के अंदर पाया जाता है | गुणसूत्र (chromosomes) कोशिका के केन्द्रक में ही पाया जाता है, जो सिर्फ कोशिका विभाजन के समय ही दिखाई देते हैं | 

केन्द्रक झिल्ली : केन्द्रक के चारों ओर दोहरे परत का एक स्तर होता है जिसे केन्द्रक झिल्ली कहते है | केन्द्रक झिल्ली में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं | इन छिद्रों के द्वारा केन्द्रक के अंदर का कोशिकाद्रव्य केन्द्रक के बाहर जा पाता है |  

गुणसूत्र (chromosomes) : गुणसूत्र एक छाडाकार (cilyndrical) संरचना होती है जो कोशिका के केन्द्रक में पाया जाता है, ये कोशिका विभाजन के समय दिखाई देते हैं | गुणसूत्र (क्रोमोसोम) में अनुवांशिक गुण होते हैं जो माता-पिता से DNA (डिऑक्सी राइबो न्यूक्लिक अम्ल) अनु के रूप में अगली संतति में जाते है | 

  • क्रोमोसोम DNA तथा प्रोटीन के बने होते हैं | 
  • DNA अणु में कोशिका के निर्माण व् संगठन की सभी आवश्यक सूचनाएँ होती हैं | 
  • DNA के क्रियात्मक खंड को जीन कहते हैं | 
  • जो कोशिका, कोशिकायें विभाजन की प्रक्रिया में भाग नहीं लेती हैं उसमें यह DNA क्रोमैटीन पदार्थ के रूप में विद्यमान रहता है | 

क्रोमैटीन : क्रोमैटीन पदार्थ धागे की तरह की रचनाओं के एक जाल का पिण्ड होता है | जब कभी भी कोशिका विभाजन होने वाली होती है, तब यह क्रोमोसोम में संगठित हो जाता है | 

कोशिका विभाजन (Cell Division): 

कोशिका विभाजन वह प्रक्रिया है जिसमें एक अकेली कोशिका विभाजित होकर दो नयी कोशिका बनाती है | 

कोशिकीय जनन में केन्द्रक की भूमिका :

  • कोशिका विभाजन के दौरान केन्द्रक भी दो भागों में विभक्त हो जाता है | 
  • नयी कोशिका में जनक कोशिका के ही सभी गुण मौजूद रहते है | 
  • यह कोशिका के विकास एवं परिपक्वन को निर्धारित करता है | 
  • साथ ही साथ सजीव कोशिका की रासायनिक क्रियाओं को भी निर्देशित करता है | 

बैक्टीरिया जैसे कुछ जीवों में केन्द्रक झिल्ली नहीं होती है अत: कोशिका का केन्द्रकीय क्षेत्र बहुत कम स्पष्ट होता है | ऐसे अस्पष्ट केन्द्रक क्षेत्र में केवल क्रोमैटीन पदार्थ होता है | ऐसे क्षेत्र को केन्द्रकाय कहते हैं | 

(A) प्रोकैरियोट जीव : ऐसी जीव जिनकी कोशिकाओं में केन्द्रक झिल्ली नहीं होती उन्हें प्रोकैरियोट जीव कहते है | जैसे - बैक्टीरिया आदि |  

(B) यूकैरियोट जीव : ऐसे जीव जिनकी कोशिकाओं में केन्द्रक झिल्ली होती है उन्हें यूकैरियोट जीव कहते है | जैसे- सभी बहुकोशिकीय जीव | 

केन्द्रक झिल्ली के उपस्थिति के आधार पर कोशिका दो प्रकार के होते हैं : 

(I) प्रोकैरियोटिक कोशिका : जिन कोशिकाओं में केन्द्रक झिल्ली नहीं होती है उन्हें प्रोकैरियोटिक कोशिका कहते है | ऐसी कोशिकाएँ जीवाणुओं में पाई जाती है | 

(II) यूकैरियोटिक कोशिका : जिन कोशिकाओं में केन्द्रक झिल्ली पाई जाती है उन्हें यूकैरियोटिक कोशिका कहते है | शैवाल, एवं अन्य सभी बहुकोशिक जीवों की कोशिका | 

(iii) कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) : कोशिका का वह बड़ा क्षेत्र जो कोशिका झिल्ली से घिरा रहता है तथा एक विशेष प्रकार के तरल पदार्थ से भरा रहता है | कोशिका द्रव्य कहलाता है | कोशिका के इसी भाग में कोशिकांग (organells) पाए जाते हैं | 

कोशिकांग (organells): प्रत्येक कोशिका के जीवद्रव्य में अनेक छोटे- छोटे कोशिका के विशिष्ट घटक पाए जाते है जो कोशिका के लिए विशिष्ट कार्य करते हैं | इन्हें ही कोशिकांग (organells) अर्थात कोशिका अंगक कहते हैं | जैसे - माइटोकांड्रिया, गाल्जी उपकरण, तारक केंद्र, लाइसोसोम, राइबोसोम, तथा रिक्तिका आदि ये सभी कोशिकांग हैं | 

जीवद्रव्य (cytoplasm) : कोशिका द्रव्य तथा केन्द्रक दोनों को मिलाकर जीवद्रव्य कहते हैं | 

सभी कोशिकांग कोशिका के जीवद्रव्य (cytoplasm) में पाए जाते हैं | 

कोशिकांगों का कार्य:

(i) नए पदार्थ का निर्माण करना

(ii) पदार्थों का निष्कासन करना

(iii) कोशिका के लिए उर्जा संचित करना  

अलग-अलग कार्य करने वाली सभी कोशिकाओं में चाहे वे कोई भी कोशिका क्यों न हो कोशिकांग एक ही प्रकार के होते हैं | 

झिल्ली की सार्थकता/उपयोगिता :

वायरस में किसी भी प्रकार की झिल्ली नहीं होती और इसलिए इसमें जीवन के गुण तब तक लक्षित नहीं होते जब तक कि यह किसी सजीव के शरीर में प्रविष्ट करके कोशिका कि मशीनरी का उपयोग कर अपना बहुगुणन नहीं कर लेता | 

Page 2 of 5

Topic Lists Page Wise:

Disclaimer:

This website's domain name has included word "CBSE" but here we clearly declare that we and our website have neither any relation to CBSE and nor affliated to CBSE organisation.