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Chapter 14. प्राकृतिक संसाधन Class 9 Science CBSE notes in hindi प्रदुषण : भूमि (मृदा) प्रदुषण - CBSE Study

Chapter 14. प्राकृतिक संसाधन Science Class 9 cbse notes प्रदुषण : भूमि (मृदा) प्रदुषण in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter 14. प्राकृतिक संसाधन Class 9 Science CBSE notes in hindi प्रदुषण : भूमि (मृदा) प्रदुषण - CBSE Study

कक्षा 9 Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 14. प्राकृतिक संसाधन को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक प्रदुषण : भूमि (मृदा) प्रदुषण को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 9 English Medium Science All Chapters:

14. प्राकृतिक संसाधन

4. प्रदुषण : भूमि (मृदा) प्रदुषण

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प्रदुषण : भूमि (मृदा) प्रदुषण 


मृदा (Soil) : भूमि की उपरी सतह पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है | इसमें कार्बनिक पदार्थ एवं वायु प्रचुर मात्रा में उपस्थित होती है | भूमि की यह सतह मृदा (Soil) कहलाती है |

भूमि/मृदा प्रदुषण (Soil Polution) : मृदा के गुणवता को कम करने वाले अवांछित तत्व या विषैले पदार्थों का मृदा में उपस्थिति भूमि/मृदा प्रदुषण कहलाता है | 

भूमि/मृदा प्रदुषण के कारण : 

(i) मृदा में जैव अनिम्नकरणीय पदार्थों की उपस्थिति 

(ii) पोलीथिन और प्लास्टिक 

(iii) पीडकनाशी और रासायनिक उर्वरक 

मृदा अपरदन (Soil errosion): 

मृदा का सबसे ऊपरी  भाग काफी उपजाऊ एवं ह्यूमस से परिपूर्ण होता है | यह हल्का भी होता है, कई बार ये बहते हुए वायु या जल के साथ एक जगह से दुसरे जगह स्थानांतरित हो जाते है | मृदा का इस प्रकार स्थानांतरित होना मृदा अपरदन कहलाता है | 

मृदा अपरदन का कारण : 

(i) वन विनाश 

(ii) तेज वायु 

(iii) जल का तेज बहाव या बाढ़ जो मृदा के उपरी भाग को अपने साथ बहा ले जाता है | 

मृदा अपरदन रोकने के उपाय : 

(i) पौधो की जड़े मृदा को रोकती है और ये मृदा कणो को बाँधे रखती है ।

(ii) विश्व मे बड़े स्तर पर पेड़ो वृक्षो को काटा जा रहा है । इससे मृदा का अपरदन होता है । उपरिमृदा को हटाने पर मृदा का अपरदन होता है । अंतः अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए । 

उपरी मृदा (Top Soil): मृदा की सबसे उपरी परत जिसमें मृदा के कणों के अतिरिक्त ह्यूमस और सजीव स्थित होते हैं उसे ऊपरी मृदा कहते हैं | 

ह्यूमस (Humus): मृदा के ऊपरी भाग में सड़े-गले जीवों के टुकड़े भी मिले होते हैं, जिसे ह्यूमस (Humus) कहते हैं | 

मृदा के गुण : 

मृदा के गुण जिसमें किसी पौधा का उगना निर्भर करता है :

(i) मृदा में पोषक तत्व की उपस्थिति |

(ii) उपस्थित ह्यूमस की मात्रा |

(iii) उपस्थित ह्यूमस की गहराई | 

मृदा निर्माण की प्रक्रिया : 

1. सूर्य पत्थरो को दिन मे गर्म कर देता है जिससे वे फैलते है तथा वे रात मे ठंडे होकर सिकुड़ते है । अंतः इन पत्थरो मे दरार पड़ जाती है । बड़े पत्थर टूटकर छोटे हो जाते है ।

2. पत्थरों की दरार मे जल भरने पर दरारें अधिक चौड़ी हो जाती है । बहता जल पत्थरो को तोड़ देता है तथा उन्हे अपने साथ बहा ले जाती है । पत्थर आपस मे टकराकर छोटे कणो मे बदल जाती है जिससे मृदा का निर्माण होता है ।

3. तेज वायु भी पत्थरों को तोड़ देती है । तेज हवा बालू को उड़ा कर ले जाती है ।

4. लाइकेन और मॉस चट्टानों की सतह पर उगती है और उनको कमजोर बनाकर महीन कणों में बदल देते हैं। उनकी जड़ों के पास मृदा का निर्माण होता है | 

मृदा निर्माण में सहायक कारक : 

(i) सूर्य की गर्मी 

(ii) पानी का तेज बहाव 

(iii) तेज वायु 

(iv) लाइकेन और मॉस जैसे जीव 

 

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