Chapter 14. प्राकृतिक संसाधन Class 9 Science CBSE notes in hindi प्रदुषण : वायुप्रदुषण - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science All Chapters:
14. प्राकृतिक संसाधन
2. प्रदुषण : वायुप्रदुषण
प्रदुषण (Polution) :
प्रदुषण (Polution) : प्राकृतिक संसाधनों का दूषित होना प्रदुषण कहलाता है |
प्रदुषण के प्रकार :
(i) वायु प्रदुषण (Air Polution) : वायु में हानिकारक पदार्थों की वृद्धि को वायु प्रदुषण कहते हैं |
(ii) जल प्रदुषण (Water Polution) : हानिकारण पदार्थों या अपशिष्टों का जल में मिल जाना जल प्रदुषण कहलाता है |
(iii) भूमि प्रदुषण (Soil Polution) : मृदा के गुणवता को कम करने वाले अवांछित तत्व या विषैले पदार्थों का मृदा में उपस्थिति भूमि प्रदुषण कहलाता है |

वायु प्रदूषकों के नाम :
कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर के ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, फ्लोराइड, सीसा, धूल के कण आदि |
वायु प्रदुषण के हानिकारक प्रभाव :
(i) मनुष्यों में-श्वसन और गुर्दे की बीमारी, उच्च रक्तचाप आँखों में जलन, कैंसर।
(ii) पौधों में-कम वृद्धि, क्लोरोफिल की गिरावट पत्तियों पर रंग के धब्बे।
स्मोग (Smog) : वायु में धुँआ एवं धूल के मिश्रण को स्मोग कहते हैं |
यह वायु प्रदुषण का ही एक प्रकार है जहाँ अधिक वायु प्रदुषण होता है (खासकर शहरों में) स्मोग दिखाई देता है|
धूम कोहरा : वायु या कोहरे में प्रदूषकों का भारी मात्रा में उपस्थिति दृश्यता (Visibility) को कम करता है, इसे धूम कोहरा कहते है |
- वायु में धूम कोहरा की उपस्थिति वायु प्रदुषण की ओर संकेत करता है |
- सर्दियों में वायु के साथ जल भी संधनित होता है तथा उसके साथ कुछ हाइड्रोकार्बन से बने प्रदूषक भी मिले होते है |
वायु प्रदुषण के लिए उत्तरदायी मनुष्य की गतिविधियाँ :
(i) जीवाश्मी ईंधनों का उपयोग वायु प्रदुषण का बहुत बड़ा कारण हैं ये वायु में कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइड जैसे प्रदूषकों को छोड़ते हैं |
(ii) वाहनों द्वारा निकलने वाला धुआं प्रदुषण फैलाता है |
(iii) कारखानों से निकलने वाला विषैला धुआं |
अम्लीय वर्षा : जीवाश्मी ईंधन जब जलते हैं यह ऑक्सीकृत होकर सल्फर-डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन डाइ.ऑक्साइड गैसें बनाती हैं। ये गैसें वायुमण्डल में मिल जाती हैं। वर्षा के समय यह गैसें पानी में घुल कर सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं, जो वर्षा के साथ पृथ्वी पर आता है, जिसे अम्लीय वर्षा कहते हैं।
ग्रीन हाउस प्रभाव (Green House Effect):
वायुमंडल मे उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और जलवाष्प आदि पृथ्वी से परावर्तित होने वाली उष्मीय प्रभाव वाली अवरक्त किरणो को अवशोषित कर लेती है जिससे वायुमंडल का सामान्य तापमान बढ़ जाता है | वायुमंडल के हो जाने को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते है ।
ग्रीन हाउस प्रभाव का कारण :
कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन और जलवाष्प आदि द्वारा सूर्य के अवरक्त किरणों को अवशोषित करना |
ग्रीन हाउस प्रभाव के दुस्प्रभाव :
1. ग्रीन हाउस प्रभाव बढ़ जाता है।
2. वैश्विक ऊष्मीकरण होता है।
3. पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि होती है।
4. चोटियों पर जमी बर्फ ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण वर्ष भर पिघलती रहती है।
ग्लोबल वार्मिंग / वैश्विक उष्मीकरण (Global Warming) :
(i) बाढ़ एवं सूखा का प्रकोप।
(ii) ग्लैशियर पिघलने से समुद्र जल स्तर में वृद्धि ।
(iii) दैनिक तापांतर में वृद्धि ।
ओजोन परत के ह्रास होने के कारण (Reason of Ozone depletion):
(i) ऐरोसॉल या क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (CFC) की क्रिया के कारण
(ii) सुपरसोनिक विमानों में ईंधन के दहन से उत्पन्न पदार्थ
(iii) और नाभिकीय विस्फोट भी ओजोन परत के ह्रास होने के कारण है-