Chapter 10. गुरुत्वाकर्षण Class 9 Science CBSE notes in hindi दाब और प्रणोद - CBSE Study
कक्षा 9 Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 10. गुरुत्वाकर्षण को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक दाब और प्रणोद को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।
CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science All Chapters:
10. गुरुत्वाकर्षण
4. दाब और प्रणोद
अध्याय 10. गुरुत्वाकर्षण
प्रणोद (Thrust) : किसी वस्तु कि सतह पर लम्बवत लगने बल को प्रणोद कहते हैं |
- प्रणोद का प्रभाव उस क्षेत्रफल पर निर्भर है जिस पर कि वह लगता है |
- किसी वस्तु पर लगने वाला प्रणोद का परिमाण (magnitude) उस सतह के क्षेत्रफल पर निर्भर करता है जिस सतह से वस्तु संपर्क में रहता है |
प्रणोद का S.I मात्रक वही होता है जो बल का होता है अर्थात kgms-2 या N (न्यूटन) है |
दाब (Pressure): प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले प्रणोद को दाब कहते है |
दाब = प्रणोद/क्षेत्रफल
दाब का S.I मात्रक N/m2 या Nm-2 है | इसे वैज्ञानिक ब्लैस पास्कल के सम्मान में, दाब के मात्रक को पास्कल कहा जाता है | तथा इसे Pa से व्यक्त किया जाता है |
- किसी वस्तु के ऊपर लगने वाले प्रणोद यदि कम क्षेत्रफल से लगता है तो दाब बढ़ता है और अधिक क्षेत्रफल से लगता है तो दाब कम हो जाता है |
यही कारण है कि किलों के सिरे नुकीले होते है, चाकू कि धार तेज होती है, भवनों कि नींव चौड़ी होती है और स्कूल बैग की पट्टियाँ चौड़ी बनाई जाती है |
मुख्य बिंदु:
(i) समान परिणाम के बलों का भिन्न-भिन्न क्षेत्रफलों पर भिन्न-भिन्न प्रभाव होता है | इसलिए समान प्रणोद का अलग-अलग प्रभाव हो सकता है |
उदाहरण : एक लकड़ी का गुटका मेज पर रखा है | लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान 5 kg है तथा इसकी विमाएँ 40 cm x 20 cm x 10 cm है | लकड़ी के तुकडे द्वारा मेज पर लगने वाले दाब ज्ञात कीजिए | यदि इनकी निम्नलिखित विमाओं की सतह मेज पर रखी जाती है |
(a) 20 cm x 10 cm
(b) 40 cm x 20 cm
हल:
लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान = 5 kg
तथा इसकी विमाएँ = 40 cm x 20 cm x 10 cm
मेज की सतह पर लगने वाला प्रणोद (भार) F = m x g
= 5 kg x 9.8 ms-2
= 49 kg ms-2 (N)
जब लकड़ी 20 cm x 10 cm की सतह पर राखी जाती है तब-
सतह का क्षेत्रफल = 20 cm x 10 cm
= 200 cm2 = 0.02 m2
दाब = प्रणोद/क्षेत्रफल
= 49 N/0.02 m2
= 2450 N m-2
जब लकड़ी 40 cm x 20 cm की सतह पर राखी जाती है तब प्रणोद तो सामान ही रहता है -
क्षेत्रफल = 40 cm x 20 cm
= 800 cm2 = 0.08 m2
दाब = प्रणोद/क्षेत्रफल
= 49 N/0.08 m2
= 612.5 N m-2
अत: सतह 20 cm x 10 cm द्वारा लगाया गया दाब = 2450 N m-2
और सतह 40 cm x 20 cm द्वारा लगाया गया दाब = 612.5 N m-2
इस उदाहरण से स्पष्ट देख सकते है कि किसी वस्तु के ऊपर लगने वाले प्रणोद यदि कम क्षेत्रफल से लगता है तो दाब बढ़ता है और अधिक क्षेत्रफल से लगता है तो दाब कम हो जाता है |