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Chapter Chapter 2. दो ध्रुवीयता का अंत Class 12 Political Science-I CBSE notes in hindi सोवियत संघ का विघटन - CBSE Study

Chapter Chapter 2. दो ध्रुवीयता का अंत Political Science-I Class 12 cbse notes सोवियत संघ का विघटन in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 2. दो ध्रुवीयता का अंत Class 12 Political Science-I CBSE notes in hindi सोवियत संघ का विघटन - CBSE Study

कक्षा 12 Political Science-I के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 2. दो ध्रुवीयता का अंत को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक सोवियत संघ का विघटन को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Political Science-I में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Political Science-I All Chapters:

Chapter 2. दो ध्रुवीयता का अंत

3. सोवियत संघ का विघटन

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सोवियत संघ का विघटन 


  • शीतयुद्ध के प्रतीक 1961 में बनी बर्लिन की दीवार को 9 नवंबर 1989 को जनता द्वारा तोड़ दिया गया।
  • 25 दिसम्बर 1991 को सोवियत संघ का विघटन हो गया।
  • बर्लिन की दीवार पूँजीवादी दुनिया और साम्यवादी दुनिया के बीच विभाजन का प्रतीक थी।
  • मार्च 1990 लिथुआनिया स्वतंत्रता की घोषणा करने वाला पहला गणराज्य बना | 
  • जून 1990 में रुसी संसद ने सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता घोषित की |
  • जून 1991 में येल्तसिन का कम्युनिस्ट पार्टी से इस्तीफा और रूस के राष्ट्रपति बने |
  • 25 दिसंबर 1991 में गोर्वाचेव ने सोवियत संघ के राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दिया और इसी के साथ सोवियत संघ का अंत हो गया | 

सोवियत संघ का जन्म : 1917 की रुसी बोल्वेशिक क्रांति के बाद समाजवादी सोवियत गणराज्य संघ (U.S.S.R) अस्तित्व में आया | 

दो-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था : द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शीतयुद्ध का दौर चला | इस दौरान विश्व के अधिकांश देश या तो अमरीका के साथ दिखाई देते थे या सोवियत रूस के साथ अर्थात विश्व दो गुटों में बंटा हुआ था | इसलिए इसे दो ध्रुवीय विश्व व्यवस्था कहा जाता है | 

सोवियत अर्थव्यस्था प्रणाली की विशेषताएँ : 

(i) सोवियत प्रणाली पूंजीवादी व्यवस्था का विरोध तथा समाजवाद के आदर्शों से प्रेरित थी।
(ii) सोवियत प्रणाली में नियोजित अर्थव्यवस्था थी। 
(iii) न्यूनतम जीवन स्तर की सुविधा
(iv) बेरोजगारी न होना।
(v) उन्नत संचार प्रणाली।
(vi) मिल्कियत का प्रमुख रूप राज्य का स्वामित्व था तथा भूमि और अन्य उत्पादक संपदाओं पर स्वामित्व होने के अलावा नियंत्रण भी राज्य का ही था।
(vii) उत्पादन के साधनों पर राज्य का नियंत्रण था। उपभोक्ता-उद्योग भी बहुत उन्नत था और पिन

से लेकर कार तक सभी चीजों का उत्पादन वहाँ होता था।

(viii) सोवियत संघ के पास ऊर्जा संसाधन के विशाल भंडार थे, जिनमें खनिज, तेल, लोहा और इस्पात तथा मशीनरी प्रमुख हैं |

सोवियत राजनितिक प्रणाली की विशेषताएँ :

(i) कम्यूनिस्ट पार्टी का दबदबा था जो साम्यवादी शासन प्रणाली के आधार पर एकक्षत्र शासन करती थी ।

(ii) सोवियत राजनितिक प्रणाली समाजवादी व्यवस्था पर आधारित थी जहाँ समाज में संतुलन बनाये रखा जाता था |

(iii) किसी अन्य पार्टी या शासन प्रणाली को कोई मान्यता नहीं थी |

(vi) सोवियत प्रणाली पूँजीवाद, निजी स्वामित्व और मुक्त व्यापार के विरुद्ध थी | 

(v) इस प्रणाली ने अपने नागरिकों को न्यूनतम जीवन स्तर की सुविधा प्रदान की थी | 

दूसरी दुनिया : पूर्वी यूरापे के देशों को समाजवादी प्रणाली की तर्ज पर ढाला गया था, इन्हें ही समाजवादी खेमे के देश या दूसरी दुनिया कहा गया।

सोवियत संघ का विघटन : सन् 1991 के दिसम्बर में येल्तसिन के नेतृत्व में सोवियत संघ के तीन बडे़ गणराज्य रूस, यूक्रेन और बेलारूस ने सोवियत संघ की समाप्ति की घोषणा की। इसके साथ ही निम्न घटनाएँ हुई |

(i) कम्युनिस्ट पार्टी प्रतिबंधित हो गई |

(ii) परवर्ती सोवियत गणराज्यों ने पूँजीवाद तथा लोकतंत्र को अपना आधार बनाया |

(iii) स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रकुल (कॉमनवेल्थ ऑव इंडिपेंडेंट स्टेट्स) का गठन |

(iv) रूस को सोवियत संघ का उत्तराध्किारी राज्य स्वीकार किया गया।

(v) रूस को सुरक्षा परिषद् में सोवियत संघ की सीट मिली।

(vi) सोवियत संघ ने जो अंतर्राष्ट्रीय करार और संधियाँ की थीं उन सब को निभाने का जिम्मा अब रूस का था।

(vii) सोवियत संघ के विघटन के बाद के समय में पूर्ववर्ती गणराज्यों के बीच एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश का दर्जा रूस को मिला।

सोवियत संघ में कम्युनिस्ट शासन की कमियाँ : सोवियत संघ पर कम्युनिस्ट पार्टी ने 70 सालों तक शासन किया और यह पार्टी अब जनता के जवाबदेह नहीं रह गई थी। इसकी  निम्नलिखित कमियाँ थी |

(i) कम्युनिस्ट शासन में सोवियत संघ प्रशासनिक और राजनितिक रूप से गतिरुद्ध हो चूका था |

(ii) भारी भ्रष्टाचार व्याप्त था और गलतियों को सुधारने में शासन व्यवस्था अक्षम थी |

(iii) विशाल देश में केन्द्रीयकृत शासन प्रणाली थी |

(iv) सत्ता का जनाधार खिसकता जा रहा था | कम्युनिष्ट पार्टी में कुछ तानाशाह प्रकृति के नेता भी थे जिनकों जनता से कोई सरोकार नहीं था |

(v) ‘पार्टी’ के अधिकारीयों को आम नागरिक से ज्यादा विशेषाधिकार मिले हुए थे। 

सोवियत संघ के विघटन का कारण : 

1. नागरिकों की राजनीतिक और आर्थिक आंकाक्षाओं को पूरा न कर पाना।

2. सोवियत प्रणाली पर नौकरशाही का शिकंजा।
3. सोवियत संघ पर कम्यूनिस्ट पार्टी का अंकुश।
4. संसाधनों का अधिकतम उपयोग परमाणु हथियारों पर।
5. प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में पश्चिम के मुकाबले पीछे रहना।
6. रूस की प्रमुखता थी और अन्य क्षेत्रों की जनता अक्सर उपेक्षित और दमित महसूस करती थी।।
7. गोर्बाचेव द्वारा किए गए सुधारों का विरोध होना।
8. अर्थव्यवस्था गतिरूद्ध व उपभोक्ता वस्तुओं की कमी।
9. राष्ट्रवादी भावनाओं और सम्प्रभुता की इच्छा का उभार।

सोवियत संघ के विघटन का तात्कालिक और अंतिम कारण : 

राष्ट्रीयता और संप्रभुता के भावों का उभार सोवियत संघ के विघटन का अंतिम और सर्वाधिक तात्कालिक कारण था | रूस और बाल्टिक गणराज्य (एस्टोनिया, लताविया और लिथुआनिया), उक्रेन तथा जार्जिया जैसे देश इस तरह के राष्ट्रीयता और संप्रभुता के भावों से गुजर रहे थे |  

सोेवियत संघ के विघटन के परिणाम:

1. सोेवियत संघ के विघटन के साथ ही शीतयुद्ध का संघर्ष समाप्त हो गया।
2. एक ध्रुवीय विश्व अर्थात् अमरीकी वर्चस्व का उदय । 
3. दो महाशक्तियों के बीच हथियारों की होड़ की समाप्ति |
4. सोवियत खेमे का अंत और 15 नए देशों का उदय।
5. रूस सोवियत संघ का उत्तराधिकारी बना।
6. विश्व राजनीति में शक्ति संबंध परिवर्तित हो गए।
7. समाजवादी विचारधारा पर प्रश्नचिन्ह या पूँजीवादी उदारवादी व्यवस्था का वर्चस्व।

हथियारों की होड़ की कीमत :

(i) सोवियत संघ ने हथियारों की होड़ में अमरीका को कड़ी टक्कर दी परन्तु प्रोद्योगिकी और बुनियादी ढाँचे के मामले में वह पश्चिमी देशों से पिछड़ गया | 

(ii) उत्पादकता और गुणवता के मामले में वह पश्चिम के देशों से बहुत पीछे छूट गया।

सोवियत संघ में सुधार के लिए मिखाइल गोर्बाचेव की भूमिका :

(i) पश्चिमी देशों की बराबरी के लिए सुचना और प्रोद्योगिकी में सुधार |

(ii) सोवियत संध को लोकतांत्रिक रूप दिया अर्थात लोकतंत्रीकरण की निति चलाई |

(iii) सोवियत संघ का विघटन तो हुआ परन्तु तेजी से आर्थिक और राजनितिक सुधार हुए |

(iv) जनता को स्वतंत्राता का स्वाद मिला और वे कम्युनिस्ट पार्टी के पुरानी रंगत वाले शासन में नहीं जाना चाहते थे।

(v) अमरीका के साथ हथियारों की होड़ पर रोक लगाईं |

(vi) अफगानिस्तान और पूर्वी यूरोप से सेना वापस बुलाई |

(vii) शीतयुद्ध समाप्त किया और जर्मनी के एकीकरण में सहायक भूमिका | 

जोजेफ स्टॅलिन और सोवियत गणराज्य के निर्माण में भूमिका :

ये लेलिन के उतराधिकारी थे | इन्होने 1924 से 1953 तक सोवियत संघ का नेतृत्व किया | इन्ही के कार्यकाल में सोवियत संघ मजबूत हुआ | 

इनके द्वारा किया गया कार्य :

(i) औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया |

(ii) खेती का बलपूर्वक सामुहिकरण किया |

(iii) दुसरे विश्वयुद्ध में जीत का श्रेय इन्ही का है |

(iv) 1930 के दशक में भयानक आतंक और पार्टी के अंदर अपने विरोधियों के कुचलने का आरोप है | 

 

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