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Chapter Chapter 9. व्यावसायिक वित्त Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study

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Chapter Chapter 9. व्यावसायिक वित्त Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study

कक्षा 12 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 9. व्यावसायिक वित्त को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पेज 3 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 9. व्यावसायिक वित्त

3. पेज 3

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वित्तीय नियोजन

व्यवसाय के लिए कोषो की आवश्यकता का अनुमान लगाने तथा कोषो के स्त्रोतों को निर्धारित करने की प्रक्रिया को वित्तीय नियोजन कहते है |

वित्तीय नियोजन प्रक्रिया -

1. वित्तीय उद्देश्यों का निर्धारण करना |

2. वित्तीय नीतियों व नियमो का निर्माण करना |

3. वित्तीय आवश्यकता का पूर्वानुमान लगाना |

4. वित के वैकल्पिक स्रोतों का विकास करना |

5. सर्वोत्तम विकल्प का चयन करना |

6. वित्तीय योजनाओ एवं नीतियों का क्रियान्वयन करना |

वित्तीय नियोजन के महत्व -

वित्तीय नियोजन के महत्व अथवा भूमिका

1. संभावित परिस्थितियो का सामना करने में सहायक : वित्तीय नियोजन के अंतर्गत विभिन्न व्यावसायिक परस्थितियो का पूर्वानुमान लगाया जाता है | इसी आधार पर विभिन्न वित्तीय योजनाए तैयार की जाती है |

2. समन्वय में सहायक :  यह विभिन्न व्यावसायिक क्रियाओ , जैसे - विक्रय , क्रय, उत्पादन, वित, आदि से समन्वय स्थापित करने में सहायक है |

3. वित की बर्बादी पर रोक में सहायता : वितीय नियोजन के आभाव में वित्तीय संसाधनों की बर्बादी हो सकती है |इसका कारण व्यावसायिक व्यवहारों की पेचीदगी है, किसी विशेष व्यावसायिक व्यवहार के लिए आवश्यकता से बहुत अधिक अथवा बहुत कम अनुमान लगाना | इस तरह की बर्बादी को वित्तीय नियोजन के माध्यम से रोका जा सकता है |

4. वर्तमान को भविष्य से जोड़ने में सहायक : यह वर्तमान को भविष्य से जोड़ने में प्रयत्न करता है | ऐसा करके , भावी अनिश्चितताओ के जोखिम को कम करने में सहायता प्राप्त होती है |

5. विनियोग तथा वित निर्णयों में संबंध स्थापित करने में सहायक : इसके अंतर्गत अंशपूंजी व ऋणपूंजी का मिश्रण इस ढंग से किया जाता है पूंजी लागत न्यूनतम आए |

6. वित्तीय नियंत्रण : वित्तीय नियोजन में सभी वित्तीय क्रियाओ पर पूर्ण नियंत्रण रखा जाता है | इसके अंतर्गत वित्तीय निष्पादन के प्रमाप निर्धारित किये जाते है ;वास्तविक निष्पादन की प्रमाप से तुलना की जाती है; विचलन व उसके कारणों की खोज की जाती है |

वित्तीय नियोजन के उद्देश्य -

वित्तीय नियोजन निम्नलिखित उद्देश्य प्राप्ति के लिए किया जाता है :-

1. समय पर वित उपलब्धि को सुनिश्चित करना : वित्तीय नियोजन का प्रथम उद्देश्य समय पर वित उपलब्ध करवाना है | इसके अंतर्गत दीर्घकालीन व अल्पकालीन वित्तीय अवश्यकताओ का अनुमान लगाया जाता है | तथा इसके बाद देखा जाता है की किन स्त्रोतों से वित प्राप्त किया जा सकता है |

2. वित का उपयुक्त शेष सुनिश्चित करना : यह सुनिश्चित किया जाता है की कभी भी रोकड़ शेष आवश्यकताओ से बहुत अधिक अथवा कम न हो | रोकड़ शेष का आवश्यकता से अधिक व कम होना हानिकारक है |

 

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