Chapter Chapter 8. नियंत्रण Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 2 - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 12 English Medium Business Study All Chapters:
Chapter 8. नियंत्रण
2. पेज 2
नियंत्रण प्रक्रिया :-
1. निष्पादन मानकों का निर्धारण : नियंत्रण में सर्वप्रथम मानकों का निर्धारण किया जाता है जो की व्यवसाय के कर्मचारियों को उनके लक्ष्य से अवगत करते हैं | यह वे मानक होते है जिनकी समीक्षा वास्तविक कार्यों से की जाती है जिनका अंतर विचलन कहलाता है, का पता लगाया जाता हैं | प्रमाप मात्रा, किस्म, समय, लागत, आदि में निर्धारित किए जा सकते हैं |
2. वास्तविक निष्पादन की मापन : नियंत्रण के दूसरें चरण में वास्तविक कार्यों का मापन किया जाता हैं | वास्तविक कार्यों का मापन निर्धारित कार्यों के आधार पर किया जाता है | जिससें प्रबंधक यह निर्णय लेता है कि कार्य नियोजन के अनुसार किया जा रहा है अथवा नहीं |
3. वास्तविक निष्पादन की मानकों से तुलना : इस चरण में वास्तविक कार्यों की तुलना प्रमापित कार्यों से की जाती हैं और विचलनों का पता लगाया जाता हैं | नकारात्मक विचलनों की स्थिति में कारणों का पता लगाया जाता है ताकि भविष्य में इस प्रकार की गलती को दोहराय न जाए |
4. विचलन विश्लेषण : नियंत्रण के इस चरण में विचलनों का विश्लेषण किया जाता हैं अर्थात क्या प्रमाप प्राप्त हो सकें, क्या विचलन स्वीकार्य है, क्या प्रमाप स्वीकार्य है और क्या प्रमाप का पुनर्निर्माण की आवश्यकता है आदि का पता लगाना |
5. सुधारात्मक कार्यवाही करना : इसमें विचलनों व उनके कारणों का पता कर सुधारात्मक कार्यवाही की जाती हैं | इस चरण का उद्येश्य वास्तवित कार्य को प्रमापित कार्य के अनुकूल बनाना हैं | इसकें लिए दो कार्य किए जाते हैं ;
(i) वास्तविक कार्य की कमी को दूर करना |
(ii) और उस कमी को भविष्य में न दोहराना |