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Chapter Chapter 5. संगठन Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 4 - CBSE Study

Chapter Chapter 5. संगठन Business Study Class 12 cbse notes पेज 4 in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 5. संगठन Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 4 - CBSE Study

कक्षा 12 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 5. संगठन को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पेज 4 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 5. संगठन

4. पेज 4

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अधिकार व उत्तरदायित्व में अंतर

अंतर का आधार

अधिकार

उत्तरदायित्व

(i) अर्थ

निर्णय लेने की शक्ति होती हैं |

अधिकार सहित सुपुर्द किए गए कार्य का निष्पादन |

(ii) उत्पति

औपचारिक पद के कारण

अधिकारी-अधीनस्थ सम्बन्ध के कारण

(iii) प्रवाह

ऊपर से नीचे की ओर

नीचे से ऊपर की ओर

 

उत्तरदायित्व व जवाबदेही में अंतर

अंतर का आधार

  उत्तरदायित्व

जवाबदेही

(i) अर्थ

कार्य का निष्पादन

वरिष्ठ को किए गए कार्य के लिए जवाब देना |

(ii) उत्पति

अधिकारी-अधीनस्थ संबंध के कारण

अधिकार सौंपे जाने के कारण

(iii) दूसरों को सौंपना

उत्तरदायित्व को दूसरों को सौंपा जा सकता हैं |

जवाबदेही को दूसरों को सौंपा नहीं जा सकता हैं |

 

अधिकार अंतरण की प्रक्रिया

(i) उत्तरदायित्व सौंपना : अधिकार अंतरण की क्रिया का पहल चरण उत्तरदायित्व का सौंपना हैं | प्रायः कोई भी अधिकारी इतना सक्षम नहीं होता की वह अपने सभी कार्यों को सफ़लता पूर्वक पूर्ण कर सकें इसलिए वे अपने सम्पूर्ण कार्य का बंटवारा करता हैं | मुख्य कार्य को अपने पास रख, अतिरिक्त कार्यों को कर्मचारियों में में विभाजित कर देते हैं | जो की कर्मचारियों की योग्यता के अनुसार विभाजित किए जाते हैं |

(ii) अधिकार प्रदान करना : अधिकार अंतरण के दूसरें चरण में सौंपे गए कार्य को पूर्ण करने के लिए कर्मचारियों को अधिकार प्रदान किए जाते हैं जिससें की कर्मचारी ठीक समय पर उचित निर्णय ले सकें |

(iii) जवाबदेही निश्चित करना : यह अधिकार अंतरण की आखिरी प्रक्रिया हैं जिसमें कर्मचारियों की जवाबदेही निश्चित की जाती हैं | इस चरण में कर्मचारियों को अपने द्वारा निष्पादित कार्य के लिए एक विशेष अधिकारी को जवाब देना पड़ता हैं अर्थात किए गए कार्य का स्पष्टीकरण देना |

अधिकार अंतरण का महत्व

(i) प्रभाव पूर्ण प्रबंध : प्रभावपूर्ण का अर्थ है-उद्येश्यों का सफलतापूर्वक प्राप्त होना | अधिकार अंतरण की प्रक्रिया से प्रबंधकों पर सामान्य कार्यों का कार्यभार कम होता हैं | जिससें वे मुख्य कार्यों पर अधिक ध्यान केन्द्रित कर पाते हैं और संगठन के उद्येश्य को सफ़लता से प्राप्त कर पाते हैं |

(ii) कर्मचारी विकास : अधिकार अंतरण से कर्मचारी के विकास को प्रोत्साहन मिलता हैं | क्योंकि अधिकार अंतरण की प्रक्रिया से कर्मचारी निर्णय लेने के काबिल बनते हैं | जिससें वे भविष्य में भी कठिन समय में सही निर्णय के योग्य बनाते हैं |

(iii) कर्मचारीयों का अभिप्रेरण : जब अधिकारी द्वारा अधीनस्थों को कार्य सौंपे जाते हैं तो कर्मचारी इस स्थिति का लाभ उठाते हुए अपनी योग्यता व कुशलता का बेहतर प्रदर्शन करते हैं | जिससें संगठन में उनकी पहचान बनती हैं और उनके कार्य संतुष्टि में वृद्धि होती हैं |   

(iv) अधिकारी-अधीनस्थ संबंधों का आधार : अधिकारी अंतरण अधिकारी-अधीनस्थ को स्थापित करने का कार्य करता हैं | किसी संगठन में अधिकारी-अधीनस्थ में अच्छे व्यावसायिक सम्बन्ध उस व्यवसाय की सफ़लता को निश्चित करता हैं |

(v) विकास में सहायक : अधिकार अंतरण की प्रक्रिया से केवल कर्मचारियों का ही नहीं अपितु सम्पूर्ण संगठन का विकास होता हैं | पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध योग्य कर्मचारी से संगठन में विस्तार, आधुनिकीकरण व विविधिकरण में मदद मिलती हैं |

विकेंद्रीकरण

विकेंद्रीकरण से अभिप्राय संगठन की छोटी-से छोटी क्रियाओं के , जितना व्यवहारिक को सकें, अधिकार व दायित्व का वितरण करने से हैं |

विकेंद्रीकरण की विशेषताएं

(i) अधिकार अंतरण का विस्तृत रूप

(ii) अधीनस्थों की भूमिका को महत्व देना

(iii) यह सम्पूर्ण संगठन में लागू होने वाली प्रक्रिया हैं |

(iv) अधिकारीयों के कार्यभार को कम करता हैं

(v) इसमें अधिकार के साथ-साथ जवाबदेही का भी हस्तांतरण भी होता हैं |

विकेंद्रीकरण का महत्व

(i) अधीनस्थों में पहल क्षमता का विकास : विकेंद्रीकरण के अंतर्गत बड़ी मात्रा में अधिकारों का हस्तांतरण किया जाता हैं | अधिकार कर्मचारियों को सोचने व कुछ नया करने की क्षमता देता हैं | जिससें उनमें पहल क्षमता का भी विकास होता हैं |

(ii) शीघ्र निर्णयन : विकेंद्रीकरण कर्मचारियों को शीघ्र निर्णय लेने के योग्य बनता हैं क्योंकि जब  कर्मचारियों को कार्य सौंपा जाता हैं तो उन्हें कई स्थितियों में शीघ्र निर्णय लेने पड़ता हैं जिससें वे शीघ्र निर्णय ले पाने के काबिल बन पाते हैं |

(iii) बेहतर नियंत्रण : क्योंकि विकेंद्रीकरण में हर स्तर पर कार्य का मूल्यांकन किया जाता हैं और जवाबदेही भी निश्चित की जाती हैं इससे संगठन में सभी क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण रहता हैं |

अधिकार अंतरण और विकेंद्रीकरण में अंतर

अंतर का आधार

अधिकार अंतरण

विकेंद्रीकरण

(i) प्रकृति

यह सभी प्रकार के संगठनों के लिए आवश्यक हैं |

यह सभी प्रकार के संगठनों के लिए आवश्यक नहीं हैं |

(ii) स्थिति

कार्य विभाजन के बाद की जाने वाली प्रक्रिया

उच्च प्रबंधकों द्वारा बनाए गई नीतियों का परिणाम

(iii) उद्येश्य

अधिकारीयों के कार्यभार को कम करना

संगठन में सत्ता का फैलाव करना

(iv) क्षेत्र

इसका क्षेत्र सीमित हैं |

इसका क्षेत्र व्यापक हैं |

 
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