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Chapter Chapter 3. व्यावसायिक पर्यावरण Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study

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Chapter Chapter 3. व्यावसायिक पर्यावरण Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 3 - CBSE Study

कक्षा 12 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 3. व्यावसायिक पर्यावरण को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पेज 3 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 3. व्यावसायिक पर्यावरण

3. पेज 3

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भारतीय आर्थिक वातावरण का बदलता स्वरूप

 भारत सरकार ने जुलाई 1991 से देश को आर्थिक संकट से उबरने के लिए औए देश की आर्थिक विकास की गति को तीव्र करने की लिए आर्थिक सुधार की नीति को अपनाया | जिसका मुख्य केंद्र उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण रहा |

(1) उदारीकरण : उदारीकरण से अभिप्राय व्यवसाय व उद्योगों को विभिन्न प्रकार के प्रतिबंधों से मुक्त कराना हैं | जैसे - लाइसेंस की अनिवार्यता से, कर दरों के कमी, आयात-निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाना आदि |

(2) निजीकरण :  निजीकरण से अभिप्राय सार्वजनिक क्षेत्रों की भूमिका को कम कर निजी क्षेत्रों की भूमिका में बढ़ोतरी करना हैं | इसकी विशेषताएं ;

(i) सरकार का राजकोषीय बोझ कम करना |

(ii) आर्थिक गति को तेज करना |

(iii) सरकारी कोषों में वृद्धि करना |

(iv) बीमार सार्वजनिक इकाईयों को निजी हाथों में सौपना |

(3) वैश्वीकरण : वैश्वीकरण से अभिप्राय अन्तर्राट्रीय स्तर पर वस्तुओं अथवा सेवाओं, रीती-रिवाजों, भाषा, संस्कृति और पहनावों के विनिमय से हैं |

नई आर्थिक सुधार में उठाय गए विभिन्न कदम

(1) नई औद्योगिक नीति : (i) निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों की भूमिक को निश्चित करना | (ii) उद्योगों को कई लाइसेंसों व प्रतिबंधों से मुक्त करना | (iii) विदेशी निवेश को बढ़ावा देना |

(2) नई व्यापार निजी : इसके अंतर्गत विदेशी व्यापार को नियंत्रित करने से संबंधित निर्णय लिए गए | जैसे - कई पुराने प्रतिबंधों को हटाना |

(3) राजकोषीय सुधार : सरकार की आय व व्यय से संबंधित नीतियाँ राजकोषीय नीति कहलाती हैं | जब सरकार का व्यय उसके आय से अधिक होता हैं तो व्यय व आय का यह अंतर राजकोषीय घाट कहलाता हैं जिसको पूरा करने के लिए राजकोषीय सुधार किये जाते हैं |

(4) मौद्रिक सुधार : इसके अंतर्गत मुद्रा की पूर्ति से संबंधित निर्णय लिए जाते हैं |

(5) पूंजी बाज़ार सुधार : पूंजी बाज़ार से अभिप्राय प्रतिभूतियों के क्रय-विक्रय से हैं | पूंजी बाज़ार की नियंत्रित करने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की स्थापना की गई हैं

(6) मूल्य नियंत्रण को समाप्त करना : सरकार द्वारा अनेक उत्पादों पर से मूल्य नियंत्रण को हटाया गया और कई वस्तुओं की आयात पर भी नियंत्रण लगाया गया |

 

 

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