Chapter द्रव्य का परमाण्विक आधार Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi रासायनिक सूत्र - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
द्रव्य का परमाण्विक आधार
8. रासायनिक सूत्र
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
किसी यौगिक में उपस्थित तत्वों और उनके परमाणुओं की संख्या को संक्षेप में दर्शाने के लिए रासायनिक सूत्र का प्रयोग किया जाता है। इस भाग में हम सहसंयोजी तथा आयनिक यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखने की विधि समझेंगे।
रासायनिक सूत्र (Chemical Formula)
परिभाषा:
किसी यौगिक में उपस्थित विभिन्न तत्वों तथा उनके परमाणुओं या आयनों के सरलतम पूर्णांक अनुपात को प्रतीकों और पादांकों (subscripts) द्वारा दर्शाने वाले संक्षिप्त रूप को रासायनिक सूत्र कहते हैं।
रासायनिक सूत्र क्यों लिखे जाते हैं?
रासायनिक सूत्र किसी यौगिक की संरचना को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करता है। इससे यह पता चलता है कि यौगिक में कौन-कौन से तत्व उपस्थित हैं और उनके परमाणुओं या आयनों की संख्या अथवा सरलतम अनुपात क्या है।
सहसंयोजी यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखना
सूत्र लिखने की विधि:
सहसंयोजी यौगिक का सूत्र लिखते समय उसके घटक तत्वों के प्रतीक तथा उनकी संयोजकताएँ ज्ञात की जाती हैं। इसके बाद संयोजकताओें का तिर्यक (criss-cross) करके उन्हें संबंधित तत्वों के प्रतीकों के बाद पादांक के रूप में लिखा जाता है। :
चरण 1 — तत्वों के प्रतीक लिखना
सबसे पहले यौगिक बनाने वाले दोनों तत्वों के रासायनिक प्रतीक लिखे जाते हैं। उदाहरण के लिए हाइड्रोजन क्लोराइड के लिए H और Cl लिखा जाएगा।
चरण 2 — संयोजकताएँ लिखना
प्रत्येक तत्व की संयोजकता उसके प्रतीक के साथ लिखी जाती है। हाइड्रोजन की संयोजकता 1 तथा क्लोरीन की संयोजकता 1 है।
चरण 3 — संयोजकताओें का तिर्यक करना
एक तत्व की संयोजकता को दूसरे तत्व के प्रतीक के नीचे पादांक के रूप में लिखा जाता है। यदि तिर्यक करने के बाद संयोजकता 1 प्राप्त होती है, तो उसे सामान्यतः सूत्र में नहीं लिखा जाता।
उदाहरण:
- हाइड्रोजन क्लोराइड → HCl
- हाइड्रोजन सल्फाइड → H₂S
- कार्बन टेट्राक्लोराइड → CCl₄
हाइड्रोजन सल्फाइड में H की संयोजकता 1 और S की संयोजकता 2 होने के कारण सूत्र H₂S प्राप्त होता है। कार्बन की संयोजकता 4 तथा क्लोरीन की 1 होने के कारण कार्बन टेट्राक्लोराइड का सूत्र CCl₄ होता है।
आयनिक यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखना
सूत्र लिखने की विधि:
आयनिक यौगिक का सूत्र लिखते समय पहले धनायन का प्रतीक और उसके बाद ऋणायन का प्रतीक लिखा जाता है। इसके बाद उनके आवेशों की संख्याओं का तिर्यक करके उन्हें पादांक के रूप में लिखा जाता है।
चरण 1 — धनायन और ऋणायन के प्रतीक लिखना
सबसे पहले धनायन का प्रतीक तथा उसके बाद ऋणायन का प्रतीक लिखा जाता है। उदाहरण के लिए कैल्सियम क्लोराइड के लिए Ca और Cl लिखा जाएगा।
चरण 2 — आयनों के आवेश लिखना
दोनों आयनों के आवेश ज्ञात किए जाते हैं। कैल्सियम आयन का आवेश Ca²⁺ तथा क्लोराइड आयन का आवेश Cl⁻ है।
चरण 3 — आवेशों का तिर्यक करना
आवेशों की केवल संख्याओं को तिर्यक करके दूसरे आयन के प्रतीक के नीचे पादांक के रूप में लिखा जाता है। इस प्रकार Ca²⁺ और Cl⁻ से CaCl₂ प्राप्त होता है।
चरण 4 — आवेशों का संतुलन
किसी आयनिक यौगिक का अंतिम सूत्र विद्युत रूप से उदासीन होना चाहिए। इसलिए धन एवं ऋण आवेशों को इस प्रकार संतुलित किया जाता है कि पूरी संरचना का कुल आवेश शून्य हो।
मुख्य उदाहरण
- कैल्सियम क्लोराइड: Ca²⁺ और Cl⁻ → CaCl₂
- ऐलुमिनियम ऑक्साइड: Al³⁺ और O²⁻ → Al₂O₃
- मैग्नीशियम ऑक्साइड: Mg²⁺ और O²⁻ → MgO
विशेष ध्यान: यदि तिर्यक विधि से प्राप्त पादांकों में कोई सामान्य गुणनखंड हो, तो उन्हें उसी संख्या से भाग देकर सूत्र को सरलतम अनुपात में लिखा जाता है। उदाहरण के लिए Mg²⁺ और O²⁻ से प्राप्त Mg₂O₂ को 2 से भाग देने पर MgO प्राप्त होता है।
बहुपरमाण्विक आयनों के साथ सूत्र लिखना
जब किसी यौगिक में बहुपरमाण्विक आयन दो या दो से अधिक बार उपस्थित होता है, तब उस आयन को कोष्ठक में लिखा जाता है। कोष्ठक के बाहर दिया गया पादांक बताता है कि वह बहुपरमाण्विक आयन कितनी बार उपस्थित है।
उदाहरण:
- मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड → Mg(OH)₂
- ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड → Al(OH)₃
- ऐलुमिनियम सल्फेट → Al₂(SO₄)₃
- कैल्सियम कार्बोनेट → CaCO₃
महत्त्वपूर्ण नियम: यदि केवल एक बहुपरमाण्विक ऋणायन उपस्थित हो, तो सामान्यतः कोष्ठक की आवश्यकता नहीं होती। उदाहरण के लिए कैल्सियम कार्बोनेट का सूत्र CaCO₃ है। लेकिन Mg(OH)₂ में OH दो बार उपस्थित है, इसलिए कोष्ठक का प्रयोग किया जाता है।
रासायनिक सूत्र लिखते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- तत्वों के सही रासायनिक प्रतीक लिखें।
- संबंधित तत्वों या आयनों की संयोजकता/आवेश सही लिखें।
- आवेशों की केवल संख्याओं का तिर्यक किया जाता है।
- पादांक 1 को सूत्र में नहीं लिखा जाता।
- अंतिम सूत्र में धन और ऋण आवेश संतुलित होने चाहिए।
- सूत्र हमेशा तत्वों या आयनों के सरलतम पूर्णांक अनुपात को दर्शाता है।
- एक से अधिक बहुपरमाण्विक आयन होने पर कोष्ठक का प्रयोग किया जाता है।
- रासायनिक सूत्र में आयनों के आवेश अलग से नहीं लिखे जाते।
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रासायनिक सूत्र लिखने का मूल विचार बहुत सरल है—पहले घटक तत्व या आयन पहचानिए, फिर उनकी संयोजकता अथवा आवेश लिखिए और अंत में उन्हें इस प्रकार संयोजित कीजिए कि यौगिक विद्युत रूप से उदासीन तथा सरलतम अनुपात में हो। आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन के कुल आवेश बराबर होने चाहिए।
Exam Booster
- रासायनिक सूत्र यौगिक में उपस्थित तत्वों और उनके परमाणुओं/आयनों के सरलतम अनुपात को दर्शाता है।
- सहसंयोजी यौगिकों का सूत्र लिखने में संयोजकताओें की क्रिस-क्रॉस विधि उपयोगी है।
- आयनिक यौगिक का सूत्र लिखते समय पहले धनायन और फिर ऋणायन लिखा जाता है।
- अंतिम आयनिक यौगिक का कुल आवेश हमेशा शून्य होना चाहिए।
- Mg²⁺ और O²⁻ से Mg₂O₂ प्राप्त होने पर इसे सरल करके MgO लिखा जाता है।
- Mg(OH)₂ में कोष्ठक इसलिए लगाया गया है क्योंकि OH⁻ आयन दो बार उपस्थित है।
- Al(OH)₃ में 3, तीन OH⁻ आयनों को दर्शाता है।
- Al₂(SO₄)₃ में दो Al³⁺ और तीन SO₄²⁻ आयनों के बीच आवेश संतुलित होता है।
Topic Lists Page Wise:
- 1. Chapter Review and Key Points
- 2. परमाणुओं के संयोजन से नए पदार्थों का निर्माण
- 3. रासायनिक संयोजन के नियम
- 4. डाल्टन का परमाणु सिद्धांत
- 5. रासायनिक आबंध
- 6. सहसंयोजी आबंध
- 7. आयनिक आबंध
- 8. रासायनिक सूत्र
- 9. आण्विक द्रव्यमान और सूत्र इकाई द्रव्यमान
- 10. आयनिक एवं सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म
- 11. Assignments - What Have You Learned?