Chapter द्रव्य का परमाण्विक आधार Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi आयनिक एवं सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
द्रव्य का परमाण्विक आधार
10. आयनिक एवं सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
आयनिक और सहसंयोजी यौगिक अपने आबंधों की प्रकृति के कारण अलग-अलग भौतिक गुणधर्म प्रदर्शित करते हैं। उनकी विलेयता, विद्युत चालकता तथा गलनांक और क्वथनांक का अध्ययन करके दोनों प्रकार के यौगिकों में अंतर को आसानी से समझा जा सकता है।
आयनिक एवं सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म
विलेयता
आयनिक यौगिक: आयनिक यौगिक जैसे सोडियम क्लोराइड (NaCl) और कॉपर सल्फेट सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं, लेकिन किरोसिन और पेट्रोल जैसे विलायकों में सामान्यतः अघुलनशील होते हैं।
सहसंयोजी यौगिक: अधिकांश सहसंयोजी यौगिक जैसे कपूर और नैफ्थलीन जल में अघुलनशील होते हैं, लेकिन किरोसिन और पेट्रोल जैसे विलायकों में घुल सकते हैं।
ठोस अवस्था में विद्युत चालकता
आयनिक यौगिक: ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते। इसका कारण यह है कि उनके आयन प्रबल आकर्षण बलों के कारण निश्चित स्थानों पर बँधे रहते हैं और स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर सकते।
सहसंयोजी यौगिक: सामान्यतः सहसंयोजी यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि इनमें स्वतंत्र रूप से गति करने वाले आयन उपस्थित नहीं होते। उदाहरण के लिए कपूर और नैफ्थलीन विद्युत का चालन नहीं करते।
जलीय विलयन में विद्युत चालकता
आयनिक यौगिक: जब आयनिक यौगिक जल में घुलते हैं, तो उनके आयन स्वतंत्र रूप से गति करने लगते हैं। इसलिए उनके जलीय विलयन विद्युत का चालन करते हैं। सोडियम क्लोराइड और कॉपर सल्फेट इसके उदाहरण हैं।
सहसंयोजी यौगिक: कुछ सहसंयोजी यौगिक जल में घुल सकते हैं, लेकिन यदि वे विलयन में आयन नहीं बनाते हैं तो विद्युत का चालन नहीं करते। उदाहरण के लिए चीनी जल में घुलती है, लेकिन उसका विलयन विद्युत का चालन नहीं करता।
गलित अवस्था में विद्युत चालकता
आयनिक यौगिक: ठोस अवस्था में आयन निश्चित स्थानों पर बँधे रहते हैं, लेकिन गलित अवस्था में आयन गतिशील हो जाते हैं। इसलिए गलित आयनिक यौगिक विद्युत का चालन कर सकते हैं।
सहसंयोजी यौगिक: सामान्यतः सहसंयोजी यौगिकों में स्वतंत्र आयन नहीं होते, इसलिए उनकी गलित अवस्था में भी विद्युत चालकता सामान्यतः नहीं पाई जाती।
गलनांक एवं क्वथनांक
आयनिक यौगिक: आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन के बीच प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बल होता है। इन आयनों को अलग करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए इनके गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः अधिक होते हैं।
सहसंयोजी यौगिक: अधिकांश सहसंयोजी यौगिकों में अणुओं के बीच आकर्षण अपेक्षाकृत कमजोर होता है। इसलिए इनके गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः कम होते हैं।
आयनिक और सहसंयोजी यौगिकों की तुलना
| गुणधर्म | आयनिक यौगिक | सहसंयोजी यौगिक |
|---|---|---|
| विलेयता | सामान्यतः जल में घुलनशील | अधिकांश जल में अघुलनशील |
| किरोसिन/पेट्रोल में विलेयता | सामान्यतः अघुलनशील | कुछ यौगिक घुलनशील |
| ठोस अवस्था में विद्युत चालकता | नहीं करते | सामान्यतः नहीं करते |
| जलीय विलयन में विद्युत चालकता | आमतौर पर करते हैं | सामान्यतः नहीं करते |
| गलित अवस्था में विद्युत चालकता | कर सकते हैं | सामान्यतः नहीं करते |
| गलनांक एवं क्वथनांक | सामान्यतः अधिक | सामान्यतः कम |
विद्युत चालकता का मुख्य कारण
आयनिक यौगिक: विद्युत का चालन स्वतंत्र रूप से गति करने वाले आयनों के कारण होता है। ठोस अवस्था में आयन गतिशील नहीं होते, जबकि जल में घुलने या गलने पर वे गति कर सकते हैं।
सहसंयोजी यौगिक: अधिकांश सहसंयोजी यौगिकों में स्वतंत्र आयन नहीं होते। इसलिए वे सामान्यतः विद्युत का चालन नहीं करते।
प्रयोग से प्राप्त निष्कर्ष
सोडियम क्लोराइड और कॉपर सल्फेट जैसे आयनिक यौगिकों तथा कपूर, चीनी और नैफ्थलीन जैसे सहसंयोजी पदार्थों की विलेयता और विद्युत चालकता की तुलना करने से स्पष्ट होता है कि रासायनिक आबंध की प्रकृति किसी पदार्थ के भौतिक गुणधर्मों को प्रभावित करती है।
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आयनिक यौगिकों की विद्युत चालकता को याद रखने का आसान तरीका है—आयन बँधे हैं तो चालकता नहीं, आयन स्वतंत्र हैं तो चालकता। ठोस NaCl में आयन अपनी जगह बँधे रहते हैं, इसलिए वह विद्युत का चालन नहीं करता; लेकिन NaCl के जलीय विलयन में आयन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं, इसलिए विलयन विद्युत का चालन करता है।
Exam Booster
- आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते।
- आयनिक यौगिकों के जलीय विलयन विद्युत का चालन करते हैं क्योंकि आयन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं।
- अधिकांश सहसंयोजी यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते।
- चीनी जल में घुलती है, लेकिन उसका विलयन विद्युत का चालन नहीं करता क्योंकि वह आयन नहीं बनाती।
- आयनिक यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः अधिक होते हैं।
- सहसंयोजी यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः कम होते हैं।
- NaCl और CuSO₄ आयनिक यौगिकों के उदाहरण हैं।
- कपूर और नैफ्थलीन सहसंयोजी यौगिकों के उदाहरण हैं।
Topic Lists Page Wise:
- 1. Chapter Review and Key Points
- 2. परमाणुओं के संयोजन से नए पदार्थों का निर्माण
- 3. रासायनिक संयोजन के नियम
- 4. डाल्टन का परमाणु सिद्धांत
- 5. रासायनिक आबंध
- 6. सहसंयोजी आबंध
- 7. आयनिक आबंध
- 8. रासायनिक सूत्र
- 9. आण्विक द्रव्यमान और सूत्र इकाई द्रव्यमान
- 10. आयनिक एवं सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म
- 11. Assignments - What Have You Learned?