Chapter द्रव्य का परमाण्विक आधार Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi आयनिक आबंध - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
द्रव्य का परमाण्विक आधार
7. आयनिक आबंध
अध्याय 9. द्रव्य का परमाण्विक आधार
सहसंयोजी आबंध में परमाणु इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं, जबकि आयनिक आबंध में इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है। इस भाग में हम समझेंगे कि इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से आयन कैसे बनते हैं, आयनिक आबंध कैसे बनता है तथा आयनिक यौगिकों की प्रमुख विशेषताएँ क्या होती हैं।
आयनिक आबंध (Ionic Bond)
परिभाषा:
विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच उत्पन्न होने वाला स्थिर वैद्युत आकर्षण बल, जो उन्हें एक साथ बाँधे रखता है, आयनिक आबंध (Ionic Bond) कहलाता है।
आयनिक आबंध कैसे बनता है?
जिन परमाणुओं की संयोजकता कोश में चार से कम इलेक्ट्रॉन होते हैं, वे सामान्यतः अपने संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को त्यागकर स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करते हैं। दूसरी ओर, चार से अधिक संयोजकता इलेक्ट्रॉन वाले परमाणु अष्टक पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सकते हैं। इस प्रकार इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण से धनायन और ऋणायन बनते हैं।
धनायन (Cation) का निर्माण
परिभाषा: इलेक्ट्रॉन त्यागने के बाद बनने वाला धनावेशित आयन धनायन कहलाता है।
उदाहरण: सोडियम (Na) के संयोजकता कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है। यह एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करता है और Na⁺ धनायन बनाता है। Na⁺ में 11 प्रोटॉन और 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए इस पर एक इकाई धनावेश होता है।
ऋणायन (Anion) का निर्माण
परिभाषा: इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के बाद बनने वाला ऋणावेशित आयन ऋणायन कहलाता है।
उदाहरण: क्लोरीन के संयोजकता कोश में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपना अष्टक पूरा करता है और Cl⁻ ऋणायन बनाता है।
सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण
सोडियम परमाणु अपना एक संयोजकता इलेक्ट्रॉन क्लोरीन परमाणु को दे देता है। इससे सोडियम Na⁺ तथा क्लोरीन Cl⁻ बन जाता है। दोनों विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच स्थिर वैद्युत आकर्षण उत्पन्न होता है और वे एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। इस प्रकार सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण होता है।
इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण:
Na → Na⁺ + e⁻
Cl + e⁻ → Cl⁻
Na⁺ + Cl⁻ → NaCl
आयन (Ion)
परिभाषा: धनायन और ऋणायन दोनों को सामूहिक रूप से आयन कहा जाता है। धनायन धनावेशित तथा ऋणायन ऋणावेशित होता है।
आयनिक यौगिकों की क्रिस्टल संरचना
आयनिक यौगिक सामान्यतः स्वतंत्र अणुओं के रूप में नहीं पाए जाते। इनके आयन त्रिविमीय (3-D) क्रिस्टल में नियमित और पुनरावृत्त प्रतिरूप में व्यवस्थित होते हैं। इस नियमित व्यवस्था को क्रिस्टल संरचना कहा जाता है।
उदाहरण: सोडियम क्लोराइड (NaCl) की क्रिस्टल संरचना में प्रत्येक Na⁺ आयन छह Cl⁻ आयनों से तथा प्रत्येक Cl⁻ आयन छह Na⁺ आयनों से घिरा होता है। आयनों की इस नियमित व्यवस्था को क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice) द्वारा दर्शाया जाता है।
आयनिक यौगिकों के गुणधर्म
विलेयता: आयनिक यौगिक जैसे सोडियम क्लोराइड और कॉपर सल्फेट सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं, जबकि किरोसिन और पेट्रोल जैसे विलायकों में सामान्यतः अघुलनशील होते हैं।
ठोस अवस्था में विद्युत चालकता: आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि उनके आयन मजबूत आकर्षण बलों के कारण निश्चित स्थानों पर बँधे रहते हैं और स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर सकते।
जलीय विलयन में विद्युत चालकता: जब आयनिक यौगिक जल में घुलते हैं, तो उनके आयन गतिशील हो जाते हैं। इसलिए इनके जलीय विलयन विद्युत का चालन कर सकते हैं।
गलनांक एवं क्वथनांक: आयनिक यौगिकों में आयनों के बीच प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बल होता है। इसलिए इनके गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः अधिक होते हैं।
आयनिक और सहसंयोजी यौगिकों में मुख्य अंतर
| आधार | आयनिक यौगिक | सहसंयोजी यौगिक |
|---|---|---|
| आबंध निर्माण | इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से | इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से |
| संरचना | 3-D क्रिस्टल संरचना बनाते हैं | सामान्यतः स्वतंत्र अणु बनाते हैं |
| जल में घुलनशीलता | प्रायः जल में घुलनशील | अधिकांश प्रायः जल में अघुलनशील |
| विद्युत चालकता | जलीय विलयन में विद्युत का चालन करते हैं | सामान्यतः विद्युत का चालन नहीं करते |
| गलनांक एवं क्वथनांक | सामान्यतः अधिक | सामान्यतः कम |
Our Concept Builder
आयनिक आबंध को समझने का सबसे आसान तरीका है—इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण → आयन का निर्माण → विपरीत आवेशों का आकर्षण → आयनिक आबंध। उदाहरण में Na एक इलेक्ट्रॉन देकर Na⁺ बनता है और Cl वही इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl⁻ बनता है। Na⁺ और Cl⁻ के बीच आकर्षण से NaCl बनता है।
Exam Booster
- आयनिक आबंध इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनता है।
- इलेक्ट्रॉन त्यागने पर धनायन तथा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर ऋणायन बनता है।
- NaCl आयनिक आबंध का प्रमुख उदाहरण है।
- Na → Na⁺ + e⁻ तथा Cl + e⁻ → Cl⁻ आयनिक आबंध निर्माण की प्रमुख प्रक्रियाएँ हैं।
- आयनिक यौगिक सामान्यतः 3-D क्रिस्टल संरचना में पाए जाते हैं।
- ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते।
- जलीय अवस्था में मुक्त आयनों के कारण आयनिक यौगिक विद्युत का चालन करते हैं।
- आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः अधिक होते हैं।
Topic Lists Page Wise:
- 1. Chapter Review and Key Points
- 2. परमाणुओं के संयोजन से नए पदार्थों का निर्माण
- 3. रासायनिक संयोजन के नियम
- 4. डाल्टन का परमाणु सिद्धांत
- 5. रासायनिक आबंध
- 6. सहसंयोजी आबंध
- 7. आयनिक आबंध
- 8. रासायनिक सूत्र
- 9. आण्विक द्रव्यमान और सूत्र इकाई द्रव्यमान
- 10. आयनिक एवं सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म
- 11. Assignments - What Have You Learned?