Chapter जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi कशेरुकी जीव - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण
8. कशेरुकी जीव
अध्याय 12. जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण
कशेरुकी जन्तुओं में कशेरुक दंड अर्थात रीढ़ की हड्डी पाई जाती है। यह शरीर को आंतरिक सहारा देती है और मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु जैसे महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा करती है। कशेरुकी जन्तुओं को उनके आवास, देहावरण और जनन के व्यापक प्रतिरूपों के आधार पर पाँच प्रमुख वर्गों में बाँटा जाता है।
कशेरुकी (Vertebrates)
परिभाषा: ऐसे कॉर्डेट जन्तु जिनमें कशेरुक दंड या रीढ़ की हड्डी पाई जाती है, कशेरुकी कहलाते हैं।
कशेरुक दंड एक आंतरिक कंकालीय संरचना है। यह शरीर को सहारा देती है तथा मस्तिष्क और मेरुरज्जु जैसे महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा करती है। इसके कारण शरीर का आकार अधिक बड़ा हो सकता है और प्रभावी गति तथा जटिल अंग-तंत्रों का विकास संभव होता है।
कशेरुकी जन्तुओं में उन्नत संवेदना और समन्वित व्यवहार जैसी विशेषताएँ भी दिखाई देती हैं।
कशेरुकियों के पाँच प्रमुख वर्ग
कशेरुकी → मत्स्य (Pisces) → उभयचर (Amphibia) → सरीसृप (Reptilia) → पक्षी (Aves) → स्तनधारी (Mammalia)
इन पाँच समूहों का वर्गीकरण उनके पर्यावास, देहावरण और जनन के व्यापक प्रतिरूपों के आधार पर किया जाता है।
मत्स्य (Pisces) — जलीय कशेरुकी
परिभाषा: जल में रहने वाले कशेरुकी जन्तुओं को सामान्यतः मत्स्य या मछलियों के समूह में रखा जाता है।
मछलियों के शरीर की संरचना जलीय जीवन के अनुकूल होती है। इनके पंख जल में तैरने और दिशा बदलने में सहायता करते हैं, जबकि गलफड़े जल से ऑक्सीजन प्राप्त करने में सहायता करते हैं।
- मुख्यतः जलीय वातावरण में रहती हैं।
- पंख तैरने और गति करने में सहायता करते हैं।
- गलफड़े श्वसन में सहायता करते हैं।
- शरीर की संरचना जल में गति के लिए अनुकूलित होती है।
उभयचर (Amphibia)
परिभाषा: ऐसे कशेरुकी जन्तु जो अपने जीवन-चक्र में जल और स्थल दोनों वातावरणों से जुड़े होते हैं, उभयचर कहलाते हैं।
उभयचर जल और स्थल के बीच जीवन की विशेष अनुकूलता प्रदर्शित करते हैं। इनके जीवन की विभिन्न अवस्थाओं में पर्यावरण और श्वसन की आवश्यकताएँ बदल सकती हैं।
मुख्य विचार: उभयचर जल और स्थल दोनों वातावरणों से संबंधित जीवन-शैली का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
सरीसृप (Reptilia)
परिभाषा: मुख्यतः स्थलीय जीवन के लिए अनुकूलित कशेरुकी जन्तुओं के समूह को सरीसृप कहते हैं।
सरीसृप स्थलीय वातावरण में जीवन के लिए विभिन्न संरचनात्मक अनुकूलन प्रदर्शित करते हैं। इनके शरीर की विशेषताएँ उन्हें अपेक्षाकृत शुष्क वातावरण में रहने में सहायता करती हैं।
उदाहरण: साँप, छिपकली और मगरमच्छ जैसे जन्तु सरीसृप समूह से संबंधित हैं।
पक्षी (Aves)
परिभाषा: पंखों और उड़ान के लिए अनुकूलित शरीर संरचना वाले कशेरुकी जन्तुओं को पक्षी कहते हैं।
पक्षियों में पंख और हल्की, खोखली हड्डियाँ उड़ान में सहायता करती हैं। इनके शरीर की संरचना उड़ान और विभिन्न पर्यावरणों में जीवन के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होती है।
- पंख उड़ने में सहायता करते हैं।
- खोखली हड्डियाँ शरीर को अपेक्षाकृत हल्का बनाने में सहायता करती हैं।
- शरीर उड़ान के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होता है।
स्तनधारी (Mammalia)
परिभाषा: ऐसे कशेरुकी जन्तुओं के समूह को स्तनधारी कहते हैं जिनमें मादा के शरीर में स्तन ग्रंथियाँ पाई जाती हैं, जो शिशुओं के पोषण में सहायता करती हैं।
स्तनधारियों में विभिन्न प्रकार के संरचनात्मक और कार्यात्मक अनुकूलन पाए जाते हैं। स्तन ग्रंथियाँ शिशुओं की उत्तरजीविता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मुख्य विशेषता: मादा स्तनधारियों की स्तन ग्रंथियाँ शिशुओं के पोषण में सहायता करती हैं।
कशेरुकी जन्तुओं में अनुकूलन
परिभाषा: पर्यावरण की परिस्थितियों में जीवित रहने और अपनी जीवन-प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक चलाने में सहायता करने वाली संरचनात्मक विशेषताओं को अनुकूलन कहा जाता है।
वर्तमान जन्तु विविधता लंबे समय में शरीर की संरचना में हुए परिवर्तनों का परिणाम है। अलग-अलग वातावरण में रहने वाले जन्तुओं में ऐसी विशेषताएँ विकसित हुई हैं जो उन्हें विशेष परिस्थितियों में जीवित रहने में सहायता करती हैं।
मछलियों का अनुकूलन
पंख: जल में तैरने और गति करने में सहायता करते हैं।
गलफड़े: जल से ऑक्सीजन प्राप्त करने में सहायता करते हैं।
पक्षियों का अनुकूलन
पंख: उड़ान में सहायता करते हैं।
खोखली हड्डियाँ: शरीर को हल्का बनाने में सहायता करती हैं और उड़ान के लिए उपयोगी होती हैं।
ऊँट का अनुकूलन
वसा का संचय: ऊँट के शरीर में वसा का संचय उसके मरुस्थलीय वातावरण में उत्तरजीविता से संबंधित एक विशेष संरचनात्मक/शारीरिक अनुकूलन को दर्शाता है।
ध्रुवीय भालू का अनुकूलन
मोटा फर: ध्रुवीय भालू का मोटा फर ठंडे वातावरण में शरीर को अनुकूल बनाए रखने में सहायता करता है।
स्तनधारियों का अनुकूलन
स्तन ग्रंथियाँ: मादा स्तनधारियों में स्तन ग्रंथियाँ शिशुओं के पोषण में सहायता करती हैं और उनकी उत्तरजीविता को बेहतर बनाती हैं।
अनुकूलन और पर्यावरण
अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियाँ जीवों की संरचना पर अलग-अलग चुनौतियाँ उत्पन्न करती हैं। जल में रहने वाली मछली, उड़ने वाले पक्षी, मरुस्थल में रहने वाला ऊँट और ठंडे प्रदेश का ध्रुवीय भालू अपने-अपने वातावरण के अनुसार अलग-अलग विशेषताएँ प्रदर्शित करते हैं।
इससे स्पष्ट होता है कि जन्तुओं की विविधता केवल उनके आकार या रूप में अंतर नहीं है, बल्कि विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में उत्तरजीविता से जुड़ी संरचनात्मक और कार्यात्मक विशेषताओं की विविधता भी है।
कशेरुकी वर्गों का त्वरित तुलनात्मक अध्ययन
| वर्ग | मुख्य पर्यावरण | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|
| मत्स्य | जल | पंख और गलफड़े |
| उभयचर | जल एवं स्थल | दोनों वातावरणों से संबंधित जीवन |
| सरीसृप | मुख्यतः स्थल | स्थलीय जीवन के लिए अनुकूलन |
| पक्षी | स्थल/वायु | पंख और खोखली हड्डियाँ |
| स्तनधारी | विभिन्न वातावरण | स्तन ग्रंथियाँ |
Concept Builder
कॉर्डेटा → पृष्ठरज्जु
कशेरुकी → कशेरुक दंड/रीढ़ की हड्डी
मत्स्य → जल → पंख + गलफड़े
उभयचर → जल + स्थल
सरीसृप → मुख्यतः स्थल → स्थलीय अनुकूलन
पक्षी → पंख + खोखली हड्डियाँ → उड़ान
स्तनधारी → स्तन ग्रंथियाँ → शिशु पोषण
पर्यावरणीय चुनौती → संरचनात्मक/कार्यात्मक विशेषता → अनुकूलन → उत्तरजीविता
Exam Booster
- कशेरुकी किसे कहते हैं? — जिन जन्तुओं में कशेरुक दंड या रीढ़ की हड्डी होती है, उन्हें कशेरुकी कहते हैं।
- कशेरुक दंड का क्या महत्त्व है? — यह शरीर को आंतरिक सहारा देती है और मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु जैसे महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा करती है।
- कशेरुकी जन्तुओं के पाँच प्रमुख वर्ग लिखिए। — मत्स्य, उभयचर, सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी।
- मछलियों के पंख किस कार्य में सहायता करते हैं? — जल में तैरने और गति करने में।
- मछलियाँ जल में श्वसन कैसे करती हैं? — गलफड़ों की सहायता से।
- उभयचर किस प्रकार के वातावरण से जुड़े होते हैं? — जल और स्थल दोनों से।
- पक्षियों की खोखली हड्डियाँ किस प्रकार उपयोगी हैं? — वे शरीर को हल्का बनाने और उड़ान में सहायता करती हैं।
- पक्षियों के पंख किस कार्य में सहायता करते हैं? — उड़ान में।
- ऊँट में पाया जाने वाला कौन-सा अनुकूलन मरुस्थलीय जीवन से संबंधित है? — शरीर में वसा का संचय।
- ध्रुवीय भालू का मोटा फर किस प्रकार उपयोगी है? — यह ठंडे वातावरण में उत्तरजीविता में सहायता करता है।
- स्तनधारियों की प्रमुख विशेषता क्या है? — मादा स्तनधारियों में स्तन ग्रंथियाँ पाई जाती हैं, जो शिशुओं के पोषण में सहायता करती हैं।
- अनुकूलन क्या है? — ऐसी संरचनात्मक या कार्यात्मक विशेषता जो किसी जीव को अपने पर्यावरण में जीवित रहने में सहायता करती है।
Topic Lists Page Wise:
- 1. Chapter Review and Key Points
- 2. जैव विविधता
- 3. जैव विविधता का विकास और जीवों का वर्गीकरण
- 4. जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास
- 5. पाँच-जगत वर्गीकरण
- 6. जगत प्लांटी
- 7. जगत एनिमेलिया
- 8. कशेरुकी जीव
- 9. वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति
- 10. प्रोटोकॉर्डेटा
- 11. किसी अज्ञात जीव का वर्गीकरण कैसे करें
- 12. Assignments - What Have You Learned?