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Chapter जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास - CBSE Study

Chapter जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Science Exploration Class 9 cbse notes जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास - CBSE Study

कक्षा 9 Science Exploration के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science Exploration में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:

जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण

4. जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास

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अध्याय 12. जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण

जीवों की विशाल विविधता को व्यवस्थित करने के लिए वैज्ञानिकों ने समय-समय पर अलग-अलग वर्गीकरण प्रणालियाँ विकसित कीं। नई वैज्ञानिक जानकारी और सूक्ष्मदर्शी तकनीक में सुधार के साथ इन प्रणालियों में भी परिवर्तन होता गया।

जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास

जीवों के वर्गीकरण की प्रारंभिक प्रणालियाँ मुख्यतः उनके बाहरी रूप, आवास और दिखाई देने वाले गुणों पर आधारित थीं। बाद में कोशिका संरचना, पोषण तथा अन्य वैज्ञानिक विशेषताओं को भी वर्गीकरण का आधार बनाया गया।

अरस्तू की वर्गीकरण प्रणाली

परिभाषा: जीवों को उनके आवास और बाहरी स्वरूप के आधार पर समूहों में बाँटने वाली प्रारंभिक प्रणाली को अरस्तू की वर्गीकरण प्रणाली कहा जाता है।

लगभग चौथी शताब्दी सामान्य संवत् पूर्व में अरस्तू ने जीवों को मुख्यतः उनके आवास के आधार पर स्थल, जल और वायु के समूहों में बाँटा। उन्होंने जीवों के बाहरी स्वरूप को भी ध्यान में रखा।

इस प्रणाली की मुख्य सीमा यह थी कि यह मुख्यतः आसानी से दिखाई देने वाली बाहरी विशेषताओं पर आधारित थी। इसलिए यह जीवों की वास्तविक जैविक समानताओं और अंतर को पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पाती थी। 

द्विजगत प्रणाली (Two-Kingdom Classification)

परिभाषा: सभी जीवों को प्लांटी और एनिमेलिया दो जगतों में बाँटने वाली वर्गीकरण प्रणाली को द्विजगत प्रणाली कहते हैं।

18वीं शताब्दी में जीवों को दो प्रमुख समूहों में बाँटने की प्रणाली प्रस्तुत की गई। इसमें सभी जीवों को प्लांटी (पादप जगत) और एनिमेलिया (जंतु जगत) में रखा गया।

प्लांटी

इस समूह में ऐसे जीव रखे गए जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर सामान्यतः गमन नहीं करते और अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।

एनिमेलिया

इस समूह में ऐसे जीव रखे गए जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर गमन करते हैं और भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। 

द्विजगत प्रणाली की सीमाएँ

द्विजगत प्रणाली के सामने कई समस्याएँ थीं। अमीबा, पैरामीशियम और जीवाणु जैसे जीवों को केवल पौधे या जन्तु के रूप में रखना कठिन था।

अमीबा और पैरामीशियम गतिशील होते हैं, लेकिन वे एककोशिकीय और विषमपोषी होते हैं। दूसरी ओर पौधे और अधिकांश जन्तु बहुकोशिकीय होते हैं। इसलिए केवल गमन और पोषण के आधार पर इन सभी जीवों का सही वर्गीकरण संभव नहीं था। 

प्रोटिस्टा जगत का समावेश

परिभाषा: मुख्यतः एककोशिकीय सूक्ष्मजीवों को रखने के लिए जोड़ा गया तीसरा जगत प्रोटिस्टा कहलाया।

द्विजगत प्रणाली की सीमाओं को दूर करने के लिए एक नया जगत प्रोटिस्टा जोड़ा गया। इसमें मुख्यतः एककोशिकीय सूक्ष्मजीवों को रखा गया। इससे अमीबा और पैरामीशियम जैसे जीवों को पौधों और जन्तुओं से अलग समूह में रखने की सुविधा मिली। 

मोनेरा जगत का समावेश

परिभाषा: ऐसे एककोशिकीय जीव जिनमें झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक नहीं होता, उन्हें मोनेरा जगत में रखा गया।

सूक्ष्मदर्शी तकनीक में सुधार होने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि अमीबा जैसे जीवों में झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक होता है, जबकि जीवाणुओं में ऐसा केंद्रक नहीं होता। इसलिए दोनों प्रकार के एककोशिकीय जीवों में महत्वपूर्ण अंतर पाया गया।

इस अंतर के आधार पर जीवाणुओं को मोनेरा नामक अलग जगत में रखा गया। इससे चार-जगत वर्गीकरण प्रणाली अस्तित्व में आई—मोनेरा, प्रोटिस्टा, प्लांटी और एनिमेलिया। 

फंजाई को अलग जगत का दर्जा

परिभाषा: कवक जैसे विषमपोषी जीवों को अलग समूह में रखने वाली वर्गीकरण व्यवस्था में फंजाई एक स्वतंत्र जगत है।

मशरूम जैसे कवक पौधों की तरह सामान्यतः एक स्थान पर रहते हैं, लेकिन वे पौधों की तरह अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते। वे विषमपोषी होते हैं और अवशोषण द्वारा पोषक पदार्थ प्राप्त करते हैं। कुछ कवक मृत और सड़े-गले पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं, जबकि कुछ सहजीवी या परजीवी होते हैं।

इन विशेषताओं के कारण कवकों को पौधों से अलग करके एक स्वतंत्र जगत फंजाई में रखा गया। 

पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली

परिभाषा: जीवों को मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया पाँच जगतों में बाँटने वाली प्रणाली को पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली कहते हैं।

कवकों को अलग जगत में रखने के बाद पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली अस्तित्व में आई। इसमें जीवों को उनकी कोशिका संरचना, पोषण और अन्य विशेषताओं के आधार पर पाँच प्रमुख जगतों में व्यवस्थित किया गया।

  • मोनेरा — मुख्यतः एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीव।
  • प्रोटिस्टा — मुख्यतः एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव।
  • फंजाई — मुख्यतः विषमपोषी कवक।
  • प्लांटी — मुख्यतः स्वपोषी पादप।
  • एनिमेलिया — मुख्यतः बहुकोशिकीय विषमपोषी जन्तु।

अध्याय के अनुसार रॉबर्ट एच. व्हिटेकर ने वर्ष 1969 में पाँच-जगत प्रणाली में जीवों को मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया में समूहित किया। 

वर्गीकरण प्रणालियों का क्रम

वर्गीकरण प्रणाली मुख्य विशेषता वर्ष
अरस्तू की प्रणाली आवास और बाहरी स्वरूप के आधार पर वर्गीकरण लगभग चौथी शताब्दी सामान्य संवत् पूर्व
द्विजगत प्रणाली प्लांटी और एनिमेलिया 1758
तीन-जगत प्रणाली प्रोटिस्टा को शामिल किया गया 1866
चार-जगत प्रणाली मोनेरा, प्रोटिस्टा, प्लांटी और एनिमेलिया 1938
पाँच-जगत प्रणाली मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया 1969

वर्गीकरण प्रणालियों का यह विकास दर्शाता है कि नई वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त होने पर जीवों को समझने और वर्गीकृत करने के तरीके भी अधिक विकसित होते गए। 

Concept Builder

अरस्तू → आवास और बाहरी स्वरूप

द्विजगत → प्लांटी + एनिमेलिया

तीन जगत → प्लांटी + एनिमेलिया + प्रोटिस्टा

चार जगत → मोनेरा + प्रोटिस्टा + प्लांटी + एनिमेलिया

पाँच जगत → मोनेरा + प्रोटिस्टा + फंजाई + प्लांटी + एनिमेलिया

Exam Booster

  • अरस्तू ने जीवों का वर्गीकरण किस आधार पर किया? — मुख्यतः आवास और बाहरी स्वरूप के आधार पर।
  • द्विजगत प्रणाली में कौन-कौन से जगत थे? — प्लांटी और एनिमेलिया।
  • द्विजगत प्रणाली की एक प्रमुख सीमा क्या थी? — अमीबा, पैरामीशियम और जीवाणु जैसे एककोशिकीय जीवों को उचित समूह में रखना कठिन था।
  • प्रोटिस्टा जगत क्यों जोड़ा गया? — मुख्यतः एककोशिकीय सूक्ष्मजीवों को अलग समूह में रखने के लिए।
  • जीवाणुओं को मोनेरा में क्यों रखा गया? — उनमें झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक नहीं पाया जाता।
  • कवकों को अलग जगत क्यों बनाया गया? — वे पौधों की तरह अचल हो सकते हैं, लेकिन विषमपोषी होते हैं और अवशोषण द्वारा पोषण प्राप्त करते हैं।
  • पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली में कितने जगत हैं? — पाँच।
  • पाँच-जगत के नाम लिखिए। — मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया।
  • पाँच-जगत वर्गीकरण प्रणाली किसने और कब प्रस्तुत की? — रॉबर्ट एच. व्हिटेकर ने 1969 में।
  • वर्गीकरण प्रणालियों में समय के साथ परिवर्तन क्यों हुए? — नई वैज्ञानिक जानकारी और जीवों की कोशिका संरचना तथा अन्य विशेषताओं की बेहतर समझ विकसित होने के कारण।
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