Chapter जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi किसी अज्ञात जीव का वर्गीकरण कैसे करें - CBSE Study
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जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण
11. किसी अज्ञात जीव का वर्गीकरण कैसे करें
अध्याय 12. जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण
इस अध्याय में हमने जीवों की विविधता, उनके वर्गीकरण के आधार, पाँच-जगत वर्गीकरण, पादप और जन्तु जगत के प्रमुख समूह, वर्गीकरण की पदानुक्रमिक व्यवस्था तथा वैज्ञानिक नामकरण का अध्ययन किया। अब इन सभी अवधारणाओं को एक साथ जोड़कर समझते हैं कि किसी अज्ञात जीव की पहचान और वर्गीकरण किस प्रकार किया जा सकता है।
किसी अज्ञात जीव का वर्गीकरण कैसे करें?
परिभाषा: किसी अज्ञात जीव की कोशिका संरचना, संगठन, पोषण, शरीर की बनावट और अन्य विशेषताओं का क्रमबद्ध अध्ययन करके उसे उचित वर्ग में रखना वैज्ञानिक वर्गीकरण कहलाता है।
किसी नए जीव को केवल उसके आकार, रंग या आवास के आधार पर वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए। वैज्ञानिक कई महत्वपूर्ण विशेषताओं को एक साथ देखते हैं।
पहला चरण — कोशिका का प्रकार
सबसे पहले यह देखा जाता है कि जीव की कोशिका प्रोकैरियोटिक है या यूकैरियोटिक।
- वास्तविक केंद्रक अनुपस्थित: जीव को मोनेरा की दिशा में रखा जा सकता है।
- वास्तविक केंद्रक उपस्थित: जीव यूकैरियोटिक समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
दूसरा चरण — कोशिकाओं की संख्या
इसके बाद देखा जाता है कि जीव एककोशिकीय है या बहुकोशिकीय।
- मुख्यतः एककोशिकीय: मोनेरा या प्रोटिस्टा जैसे समूहों की संभावना हो सकती है।
- बहुकोशिकीय: फंजाई, प्लांटी या एनिमेलिया जैसे समूहों की विशेषताओं की जाँच की जाती है।
तीसरा चरण — पोषण की विधि
यह देखा जाता है कि जीव अपना भोजन स्वयं बनाता है या किसी अन्य स्रोत से प्राप्त करता है।
- स्वपोषी: प्रकाश संश्लेषण या अन्य प्रक्रियाओं द्वारा अपना भोजन बनाता है।
- विषमपोषी: भोजन के लिए अन्य जीवों या कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर रहता है।
केवल पोषण के आधार पर वर्गीकरण करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि अलग-अलग समूहों के जीवों में समान पोषण विधि पाई जा सकती है।
चौथा चरण — कोशिका भित्ति
यूकैरियोटिक जीवों में कोशिका भित्ति की उपस्थिति और उसकी प्रकृति भी महत्वपूर्ण संकेत देती है। उदाहरण के लिए पादपों में मुख्यतः सेलुलोज की कोशिका भित्ति होती है, जबकि कवकों में काइटिन की कोशिका भित्ति पाई जाती है।
पाँचवाँ चरण — शरीर संगठन
बहुकोशिकीय जीवों में यह देखा जाता है कि उनका शरीर किस स्तर तक संगठित है।
कोशिकीय संगठन → ऊतक संगठन → अंग संगठन → अंग-तंत्र संगठन
जैसे-जैसे संगठन अधिक जटिल होता है, जीव की संरचना और कार्यों में अधिक विशिष्टीकरण दिखाई देता है।
पादप की पहचान कैसे करें?
यदि कोई जीव बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक और मुख्यतः स्वपोषी है, तो उसके पादप जगत से संबंधित होने की संभावना होती है। इसके बाद उसकी जड़, तना, पत्ती, संवहनी ऊतक, बीज, पुष्प और फल जैसी विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है।
- थैलस जैसा सरल शरीर: थैलोफाइटा।
- सरल स्थलीय शरीर + जनन के लिए जल: ब्रायोफाइटा।
- वास्तविक जड़, तना, पत्ती + संवहनी ऊतक: टेरिडोफाइटा।
- बीज लेकिन फल के अंदर आवरित नहीं: जिम्नोस्पर्म।
- पुष्प + फल + आवृत बीज: एंजियोस्पर्म।
जन्तु की पहचान कैसे करें?
यदि कोई जीव बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक और विषमपोषी है तथा उसमें जन्तु-जगत की विशेषताएँ पाई जाती हैं, तो उसके शरीर संगठन और पृष्ठरज्जु की उपस्थिति या अनुपस्थिति का अध्ययन किया जाता है।
पृष्ठरज्जु नहीं है
यदि पृष्ठरज्जु अनुपस्थित है, तो जीव नॉन-कॉर्डेटा के विभिन्न समूहों में रखा जा सकता है।
पोरीफेरा → नाइडेरिया → प्लैटीहेल्मिन्थीस → नेमाटोडा → ऐनेलिडा → आर्थ्रोपोडा → मोलस्का → एकाइनोडर्मेटा
पृष्ठरज्जु है
यदि जीवन की किसी अवस्था में पृष्ठरज्जु पाई जाती है, तो जीव कॉर्डेटा से संबंधित हो सकता है। पूर्ण विकसित कशेरुकियों में कशेरुक दंड या रीढ़ की हड्डी पाई जाती है।
मत्स्य → उभयचर → सरीसृप → पक्षी → स्तनधारी
वर्गीकरण के लिए एक से अधिक विशेषताएँ क्यों आवश्यक हैं?
किसी जीव की केवल एक विशेषता उसके वास्तविक संबंधों को स्पष्ट नहीं कर सकती। उदाहरण के लिए, दो जीव दोनों एककोशिकीय हो सकते हैं, लेकिन एक प्रोकैरियोटिक और दूसरा यूकैरियोटिक हो सकता है। इसी प्रकार दो जीव समान पोषण विधि रखते हुए भी उनकी कोशिका संरचना पूरी तरह अलग हो सकती है।
इसलिए वैज्ञानिक वर्गीकरण में कोशिका संरचना, कोशिकाओं की संख्या, पोषण, शरीर संगठन, कोशिका भित्ति, जनन, पारिस्थितिकीय भूमिका और अन्य विशेषताओं को एक साथ देखा जाता है।
वर्गीकरण और विकास के बीच संबंध
वर्गीकरण जीवों के बीच समानताओं और भिन्नताओं को समझने में सहायता करता है। अधिक समान विशेषताएँ रखने वाले जीवों के बीच निकट संबंध हो सकते हैं। इस प्रकार वर्गीकरण पृथ्वी पर जीवन के इतिहास और जीवों के विकास को समझने में सहायता करता है।
नई वैज्ञानिक जानकारी मिलने पर वर्गीकरण प्रणालियों में संशोधन किया जा सकता है। इसलिए वैज्ञानिक वर्गीकरण एक विकासशील प्रक्रिया है।
जीवों की विविधता और पारिस्थितिक संतुलन
किसी पारिस्थितिक तंत्र में अलग-अलग जीव अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं। पौधे उत्पादक के रूप में भोजन और ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं। जन्तु उपभोक्ता के रूप में आहार जाल का हिस्सा बनते हैं। कवक और कुछ जीवाणु अपघटक के रूप में मृत पदार्थों को विघटित करके पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में सहायता करते हैं।
इस प्रकार जीवों की विविधता पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन और स्थायित्व में योगदान देती है।
जैव विविधता संरक्षण और वर्गीकरण
वर्गीकरण से विभिन्न जीवों की पहचान और उनके पारिस्थितिक संबंधों को समझने में सहायता मिलती है। इससे संकटग्रस्त और स्थानिक जातियों की पहचान करके उनके संरक्षण की योजना बनाने में भी सहायता मिलती है।
संगाई हिरण और फुमडिस का उदाहरण दिखाता है कि किसी जीव के संरक्षण के लिए उसके विशिष्ट पर्यावास का संरक्षण भी आवश्यक है। पर्यावास के नष्ट होने से उससे संबंधित जीवों की संख्या और पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
पूरे अध्याय का वर्गीकरण मानचित्र
जीवजगत
↓
पाँच-जगत वर्गीकरण
↓
मोनेरा → प्रोटिस्टा → फंजाई → प्लांटी → एनिमेलिया
↓
प्लांटी
थैलोफाइटा → ब्रायोफाइटा → टेरिडोफाइटा → जिम्नोस्पर्म → एंजियोस्पर्म
↓
एनिमेलिया
नॉन-कॉर्डेटा → पोरीफेरा → नाइडेरिया → प्लैटीहेल्मिन्थीस → नेमाटोडा → ऐनेलिडा → आर्थ्रोपोडा → मोलस्का → एकाइनोडर्मेटा
↓
कॉर्डेटा → प्रोटोकॉर्डेटा + वर्टिब्रेटा
↓
वर्टिब्रेटा → मत्स्य → उभयचर → सरीसृप → पक्षी → स्तनधारी
Concept Builder
जीवों की विविधता → पहचान की आवश्यकता → वर्गीकरण
वर्गीकरण → कोशिका संरचना + संगठन + पोषण + अन्य विशेषताएँ
प्रोकैरियोटिक → मोनेरा
मुख्यतः एककोशिकीय यूकैरियोटिक → प्रोटिस्टा
विषमपोषी + काइटिन कोशिका भित्ति → फंजाई
मुख्यतः स्वपोषी + सेलुलोज कोशिका भित्ति → प्लांटी
बहुकोशिकीय + विषमपोषी → एनिमेलिया
पृष्ठरज्जु → कॉर्डेटा
कशेरुक दंड → वर्टिब्रेटा
वर्गीकरण → पहचान + संबंध + जीवन का इतिहास + संरक्षण
Exam Booster
- किसी अज्ञात जीव का वर्गीकरण करते समय सबसे पहले किन बातों का अध्ययन करना चाहिए? — उसकी कोशिका संरचना, कोशिकाओं की संख्या, पोषण की विधि और अन्य प्रमुख संरचनात्मक विशेषताओं का।
- क्या केवल आवास के आधार पर वैज्ञानिक वर्गीकरण किया जा सकता है? — नहीं, क्योंकि अलग-अलग संरचना और विकासात्मक संबंध वाले जीव एक ही आवास में रह सकते हैं।
- क्या केवल पोषण के आधार पर वर्गीकरण पर्याप्त है? — नहीं, क्योंकि अलग-अलग जीवों में समान पोषण विधि हो सकती है।
- पादपों को थैलोफाइटा से एंजियोस्पर्म तक अलग करने में कौन-सी विशेषताएँ महत्वपूर्ण हैं? — शरीर संगठन, संवहनी ऊतक, बीज, पुष्प और फल जैसी विशेषताएँ।
- जन्तुओं को नॉन-कॉर्डेटा और कॉर्डेटा में बाँटने का मुख्य आधार क्या है? — पृष्ठरज्जु की उपस्थिति या अनुपस्थिति।
- कशेरुकियों की पहचान किस आधार पर की जाती है? — कशेरुक दंड या रीढ़ की हड्डी की उपस्थिति से।
- वर्गीकरण जैव विविधता संरक्षण में कैसे सहायक है? — यह जीवों की पहचान, उनके संबंधों और संकटग्रस्त या विशेष पर्यावास से जुड़े जीवों को समझने में सहायता करता है।
- वर्गीकरण प्रणालियों में परिवर्तन क्यों हो सकते हैं? — नई वैज्ञानिक खोजों और जीवों के बारे में प्राप्त नई संरचनात्मक तथा आनुवंशिक जानकारी के कारण।
- संगाई हिरण का उदाहरण क्या बताता है? — किसी जीव के संरक्षण के लिए उसके विशिष्ट प्राकृतिक पर्यावास का संरक्षण भी आवश्यक है।
- पाँच-जगत वर्गीकरण की सबसे महत्वपूर्ण बात क्या है? — इसमें जीवों को केवल बाहरी रूप के आधार पर नहीं, बल्कि कोशिका संरचना, संगठन, पोषण और पारिस्थितिकीय भूमिका जैसे कई आधारों पर समझा जाता है।
Topic Lists Page Wise:
- 1. Chapter Review and Key Points
- 2. जैव विविधता
- 3. जैव विविधता का विकास और जीवों का वर्गीकरण
- 4. जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास
- 5. पाँच-जगत वर्गीकरण
- 6. जगत प्लांटी
- 7. जगत एनिमेलिया
- 8. कशेरुकी जीव
- 9. वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति
- 10. प्रोटोकॉर्डेटा
- 11. किसी अज्ञात जीव का वर्गीकरण कैसे करें
- 12. Assignments - What Have You Learned?