Chapter जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi जगत एनिमेलिया - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण
7. जगत एनिमेलिया
अध्याय 12. जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण
जन्तु जगत में बहुकोशिकीय, विषमपोषी और यूकैरियोटिक जीव शामिल होते हैं। जन्तुओं का वर्गीकरण मुख्यतः उनकी शरीर संरचना और पृष्ठरज्जु की उपस्थिति या अनुपस्थिति जैसे आधारों पर किया जाता है। पृष्ठरज्जु के आधार पर जन्तुओं को नॉन-कॉर्डेटा और कॉर्डेटा में बाँटा जाता है।
जगत एनिमेलिया (Animalia)
परिभाषा: बहुकोशिकीय, विषमपोषी और यूकैरियोटिक जन्तुओं के समूह को एनिमेलिया या जन्तु जगत कहते हैं।
- जन्तु बहुकोशिकीय होते हैं।
- इनकी कोशिकाएँ यूकैरियोटिक होती हैं।
- ये विषमपोषी होते हैं और भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।
- अधिकांश जन्तुओं में गति करने की क्षमता होती है।
- अधिकांश जन्तु उद्दीपन के प्रति तीव्र प्रतिक्रिया करते हैं।
- इनमें भोजन की खोज, शिकारी से बचने और पर्यावरण के साथ सक्रिय संपर्क बनाए रखने की क्षमता होती है।
पृष्ठरज्जु के आधार पर जन्तुओं का वर्गीकरण
परिभाषा: पृष्ठरज्जु एक लचीली छड़ाकार संरचना है, जो जन्तुओं के शरीर को आंतरिक सहारा प्रदान करती है।
पृष्ठरज्जु की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर जन्तुओं को दो प्रमुख समूहों में बाँटा जाता है।
- नॉन-कॉर्डेटा: जिनमें पृष्ठरज्जु नहीं होती।
- कॉर्डेटा: जिनमें जीवन की किसी अवस्था में पृष्ठरज्जु पाई जाती है।
कॉर्डेटा को आगे प्रोटोकॉर्डेटा और वर्टिब्रेटा में विभाजित किया जाता है।
नॉन-कॉर्डेटा (Non-Chordata)
परिभाषा: ऐसे जन्तु जिनमें पृष्ठरज्जु नहीं होती, नॉन-कॉर्डेटा या अकशेरुकी जन्तु कहलाते हैं।
अकशेरुकी जन्तुओं में शरीर संरचना की बहुत अधिक विविधता पाई जाती है। सरल कोशिकीय संगठन से लेकर जटिल अंग-तंत्र तक इनके शरीर संगठन में क्रमिक विकास दिखाई देता है।
पोरीफेरा (Porifera) — छिद्रधारी जीव
परिभाषा: ऐसे सरल बहुकोशिकीय जलीय जन्तु जिनके शरीर में अनेक छोटे-छोटे छिद्र और नाल पाए जाते हैं, पोरीफेरा कहलाते हैं।
स्पंज पोरीफेरा का प्रमुख उदाहरण है। इनके शरीर में अनेक छिद्र होते हैं जिनसे जल लगातार अंदर आता है। यह जल भोजन के कण और ऑक्सीजन कोशिकाओं तक पहुँचाता है तथा अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता करता है।
- बहुकोशिकीय होते हैं।
- इनमें ऊतक और अंगों का स्पष्ट संगठन नहीं होता।
- शरीर में अनेक छोटे-छोटे छिद्र और नाल होते हैं।
- मुख्यतः जलीय वातावरण में पाए जाते हैं।
- एक ही स्थान पर स्थिर रहते हैं।
उदाहरण: स्पंज।
नाइडेरिया (Cnidaria) — वास्तविक ऊतक वाले जन्तु
परिभाषा: ऐसे जलीय जन्तु जिनमें ऊतक-स्तरीय संगठन तथा शिकार पकड़ने के लिए विशेष कोशिकाएँ पाई जाती हैं, नाइडेरिया कहलाते हैं।
हाइड्रा, जेलीफिश और कोरल नाइडेरिया के उदाहरण हैं। इनमें पोरीफेरा की तुलना में शरीर संगठन अधिक विकसित होता है। ये केवल जल के प्रवाह पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि स्पर्श द्वारा शिकार पकड़ सकते हैं।
- ऊतक-स्तरीय संगठन पाया जाता है।
- विशेषीकृत कोशिकाएँ विशेष कार्य करती हैं।
- शिकार को सक्रिय रूप से पकड़ सकते हैं।
- शरीर में एक ही छिद्र होता है।
- यही छिद्र भोजन के अंतर्ग्रहण और अपशिष्ट निष्कासन दोनों का कार्य करता है।
उदाहरण: हाइड्रा, जेलीफिश और कोरल।
प्लैटीहेल्मिन्थीस (Platyhelminthes) — चपटे कृमि
परिभाषा: चपटे शरीर वाले ऐसे जन्तु जिनमें द्विपार्श्व सममिति और दिशात्मक गति की क्षमता दिखाई देती है, प्लैटीहेल्मिन्थीस कहलाते हैं।
इनका शरीर एक तल द्वारा दो समान भागों में बाँटा जा सकता है। शरीर में सिर और पूँछ तथा आगे और पीछे के भाग स्पष्ट होते हैं। यह शरीर संगठन दिशात्मक गति के बेहतर समन्वय में सहायता करता है।
- शरीर चपटा होता है।
- द्विपार्श्व सममिति पाई जाती है।
- सिर और पूँछ का विभेदन दिखाई देता है।
- विशेषीकृत श्वसन अंग नहीं होते।
- गैसों का आदान-प्रदान शरीर की सतह से हो सकता है।
- कुछ चपटे कृमि परजीवी जीवन-शैली अपनाते हैं।
- परजीवी रूपों में हुक और चूषक पाए जा सकते हैं।
परजीवी कृमियों से बचाव: स्वच्छता बनाए रखना, हाथ अच्छी तरह धोना, भोजन को अच्छी तरह पकाना और स्वच्छ जल का सेवन करना आवश्यक है।
नेमाटोडा (Nematoda) — गोल कृमि
परिभाषा: लंबे और बेलनाकार शरीर वाले ऐसे कृमि जिनके शरीर में दो छिद्र—मुख और गुदा—होते हैं, नेमाटोडा कहलाते हैं।
गोल कृमियों का बेलनाकार शरीर उन्हें मिट्टी, जल या परपोषी के ऊतकों में आसानी से गति करने में सहायता करता है। इनके शरीर में भोजन के प्रवेश और अपशिष्ट के निष्कासन के लिए अलग-अलग छिद्र होते हैं।
- शरीर लंबा और बेलनाकार होता है।
- विभिन्न वातावरणों में पाए जा सकते हैं।
- मिट्टी, जल या परपोषी के शरीर में रह सकते हैं।
- शरीर में दो छिद्र होते हैं—मुख और गुदा।
- कुछ प्रजातियाँ परजीवी होती हैं।
अलग-अलग वातावरण में गति करने के लिए इनका बेलनाकार शरीर उपयोगी होता है।
ऐनेलिडा (Annelida) — खंडित कृमि
परिभाषा: ऐसे जन्तु जिनका बेलनाकार शरीर स्पष्ट खंडों में विभाजित होता है, ऐनेलिडा कहलाते हैं।
केंचुआ ऐनेलिडा का प्रमुख उदाहरण है। इनके शरीर में खंडीभवन पाया जाता है। यह शरीर को अधिक लचीला बनाता है और गति पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करता है। इनमें अंग-तंत्र स्तर का संगठन और देहगुहा भी पाई जाती है।
- शरीर बेलनाकार होता है।
- शरीर अनेक खंडों में विभाजित होता है।
- खंडीभवन गति में सहायता करता है।
- पेशियाँ गति करने में सहायता करती हैं।
- तंत्रिका रज्जु नियंत्रण और समन्वय में सहायता करती है।
- देहगुहा उपस्थित होती है।
उदाहरण: केंचुआ।
आर्थ्रोपोडा (Arthropoda) — संधिपाद जीव
परिभाषा: ऐसे जन्तु जिनके शरीर में खंडित उपांग और कठोर बाह्यकंकाल पाए जाते हैं, आर्थ्रोपोडा कहलाते हैं।
कीट, केकड़े और मकड़ियाँ आर्थ्रोपोडा के उदाहरण हैं। इनके शरीर के विभिन्न खंड अलग-अलग कार्यों के लिए विशिष्ट हो सकते हैं।
- शरीर खंडित होता है।
- संधित उपांग पाए जाते हैं।
- कठोर बाह्यकंकाल उपस्थित होता है।
- बाह्यकंकाल शरीर को सुरक्षा देता है।
- यह जल की हानि को कम करता है।
- यह मांसपेशियों को सहारा प्रदान करता है।
- इससे ये अपेक्षाकृत शुष्क और कठिन वातावरण में भी जीवित रह सकते हैं।
उदाहरण: कीट, केकड़े और मकड़ियाँ।
मोलस्का (Mollusca) — कोमल शरीर वाले जीव
परिभाषा: ऐसे जन्तु जिनका शरीर मुख्यतः कोमल होता है और जिनमें अंग-तंत्र स्तर का संगठन पाया जाता है, मोलस्का कहलाते हैं।
घोंघा, स्क्विड और ऑक्टोपस इस समूह के उदाहरण हैं। कई मोलस्क में कवच विकसित होता है, जो उनके कोमल शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है।
- शरीर कोमल होता है।
- अंग-तंत्र स्तर का संगठन पाया जाता है।
- कई सदस्यों में कवच पाया जाता है।
- शरीर में स्पष्ट सिर और पेशीय पाद पाए जा सकते हैं।
- पर्यावरण के अनुसार शरीर की मूल संरचना में विविध रूपांतरण दिखाई देते हैं।
उदाहरण: घोंघा, स्क्विड और ऑक्टोपस।
एकाइनोडर्मेटा (Echinodermata) — शूलचर्मी जीव
परिभाषा: ऐसे समुद्री जन्तु जिनमें कैल्शियम कार्बोनेट से बना कठोर आंतरिक कंकाल पाया जाता है, एकाइनोडर्मेटा कहलाते हैं।
स्टारफिश और समुद्री अर्चिन इस समूह के उदाहरण हैं। इनमें पृष्ठरज्जु नहीं होती, लेकिन कठोर अंतःकंकाल शरीर को सहारा, सुरक्षा और नियंत्रित गति प्रदान करता है।
- मुख्यतः समुद्री जल में पाए जाते हैं।
- पृष्ठरज्जु अनुपस्थित होती है।
- कैल्शियम कार्बोनेट का कठोर अंतःकंकाल होता है।
- अंतःकंकाल शरीर को सहारा और सुरक्षा देता है।
- यह नियंत्रित गति में भी सहायता करता है।
उदाहरण: स्टारफिश और समुद्री अर्चिन।
अकशेरुकी जन्तुओं में शरीर संगठन का विकास
पोरीफेरा से एकाइनोडर्मेटा तक जाते हुए शरीर संगठन की जटिलता बढ़ती दिखाई देती है। सरल कोशिकीय संगठन से ऊतक, अंग और अंग-तंत्र स्तर तक विकास हुआ। नई संरचनाएँ भोजन ग्रहण करने, गति करने, सुरक्षा प्राप्त करने और विभिन्न पर्यावरणों में जीवित रहने में सहायता करती हैं।
Concept Builder
पोरीफेरा → छिद्र + सरल शरीर संगठन
नाइडेरिया → ऊतक + विशेषीकृत कोशिकाएँ
प्लैटीहेल्मिन्थीस → द्विपार्श्व सममिति + दिशात्मक गति
नेमाटोडा → बेलनाकार शरीर + दो छिद्र
ऐनेलिडा → खंडीभवन + देहगुहा
आर्थ्रोपोडा → संधित उपांग + कठोर बाह्यकंकाल
मोलस्का → कोमल शरीर + अंग-तंत्र संगठन
एकाइनोडर्मेटा → समुद्री जीवन + कठोर अंतःकंकाल
Exam Booster
- एनिमेलिया की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? — बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक और विषमपोषी जन्तु।
- पृष्ठरज्जु के आधार पर जन्तुओं को कितने समूहों में बाँटा जाता है? — नॉन-कॉर्डेटा और कॉर्डेटा।
- पोरीफेरा का प्रमुख उदाहरण क्या है? — स्पंज।
- नाइडेरिया के तीन उदाहरण लिखिए। — हाइड्रा, जेलीफिश और कोरल।
- ब्रायोफाइटा नहीं, बल्कि प्लैटीहेल्मिन्थीस में कौन-सी सममिति पाई जाती है? — द्विपार्श्व सममिति।
- नेमाटोडा में कितने प्रमुख छिद्र होते हैं? — दो—मुख और गुदा।
- ऐनेलिडा की प्रमुख विशेषता क्या है? — शरीर का खंडों में विभाजन या खंडीभवन।
- आर्थ्रोपोडा की पहचान किससे होती है? — संधित उपांग और कठोर बाह्यकंकाल से।
- मोलस्का का एक प्रमुख उदाहरण लिखिए। — घोंघा।
- एकाइनोडर्मेटा में किस प्रकार का कंकाल पाया जाता है? — कैल्शियम कार्बोनेट से बना कठोर अंतःकंकाल।
- अकशेरुकी जन्तुओं में शरीर संगठन किस प्रकार विकसित हुआ? — सरल कोशिकीय संगठन से ऊतक, अंग और फिर अधिक जटिल अंग-तंत्र स्तर तक।
Topic Lists Page Wise:
- 1. Chapter Review and Key Points
- 2. जैव विविधता
- 3. जैव विविधता का विकास और जीवों का वर्गीकरण
- 4. जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास
- 5. पाँच-जगत वर्गीकरण
- 6. जगत प्लांटी
- 7. जगत एनिमेलिया
- 8. कशेरुकी जीव
- 9. वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति
- 10. प्रोटोकॉर्डेटा
- 11. किसी अज्ञात जीव का वर्गीकरण कैसे करें
- 12. Assignments - What Have You Learned?