Chapter जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi जैव विविधता - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण
2. जैव विविधता
अध्याय 12. जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण
पृथ्वी पर सूक्ष्म जीवों से लेकर विशाल वृक्षों और जटिल जन्तुओं तक जीवन अनेक रूपों में पाया जाता है। जीवों की इस विविधता को समझना और उसका संरक्षण करना पृथ्वी के संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
जैव विविधता (Biodiversity)
परिभाषा: पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जीवों और उनके बीच पाई जाने वाली विविधता को जैव विविधता कहते हैं।
पृथ्वी पर जीवों की संख्या, उनके आकार, संरचना, जीवन-शैली, आवास और कार्यों में बहुत अधिक विविधता पाई जाती है। प्रत्येक जीव पारिस्थितिक तंत्र में अपनी विशेष भूमिका निभाता है।
समुद्रों में पाए जाने वाले सूक्ष्मदर्शीय शैवाल ऑक्सीजन के निर्माण में योगदान देते हैं। कवक और जीवाणु मृत पत्तियों तथा अन्य जैव पदार्थों का अपघटन करके पोषक तत्वों को मिट्टी में वापस पहुँचाते हैं। पक्षी, मधुमक्खियाँ और चमगादड़ पुष्पों के परागण में सहायता करते हैं। पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से भोजन बनाते हैं।
जैव विविधता का महत्त्व
जैव विविधता पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखने और पृथ्वी को जीवों के लिए अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विभिन्न जीवों के बीच पारस्परिक संबंध पारिस्थितिक तंत्र के सुचारु संचालन में सहायता करते हैं।
- ऑक्सीजन: सूक्ष्मदर्शीय शैवाल और पौधे ऑक्सीजन के निर्माण में योगदान देते हैं।
- अपघटन: कवक और जीवाणु मृत जैव पदार्थों का अपघटन करते हैं और पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में सहायता करते हैं।
- परागण: पक्षी, मधुमक्खियाँ और चमगादड़ अनेक पुष्पीय पौधों के परागण में सहायता करते हैं।
- भोजन: पौधे अनेक जीवों के लिए भोजन और ऊर्जा का प्रमुख स्रोत हैं।
- पारिस्थितिक संतुलन: जीवों के बीच पारस्परिक संबंध पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखने में सहायता करते हैं।
- मानव जीवन: मनुष्य भोजन, आवास, औषधि और आजीविका के लिए जैव विविधता पर निर्भर हैं।
फसल विविधता और खाद्य सुरक्षा
कृषक लंबे समय से विभिन्न उपयोगी गुणों वाली फसलों की अनेक किस्मों को संरक्षित करते रहे हैं। इनमें सूखा सहन करने, कीटों का प्रतिरोध करने और कम पोषक तत्वों वाली मिट्टी में भी उगने जैसे गुण हो सकते हैं।
फसलों में विविधता होने से किसी एक रोग, कीट या प्रतिकूल परिस्थिति के कारण पूरी फसल के नष्ट होने का जोखिम कम होता है। इसलिए फसल विविधता खाद्य सुरक्षा को मजबूत करती है।
फसल विविधता → जोखिम में कमी → खाद्य सुरक्षा में वृद्धि
भारत की जैव विविधता
परिभाषा: भारत के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में पाए जाने वाले जीवों, पौधों और उनके आवासों की विविधता को भारत की जैव विविधता कहा जा सकता है।
भारत के प्राकृतिक परिदृश्य में बहुत अधिक विविधता है। उत्तर में पर्वत, पश्चिम में मरुस्थल, पूर्वोत्तर में वर्षावन, दक्षिण में पठार तथा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की लंबी तटरेखाएँ पाई जाती हैं।
इन क्षेत्रों की मिट्टी, तापमान और वर्षा की परिस्थितियाँ अलग-अलग हैं। इसलिए यहाँ विभिन्न प्रकार के आवास विकसित हुए हैं, जो अनेक प्रकार की जीव जातियों को आश्रय देते हैं।
स्थानिक जातियाँ (Endemic Species)
परिभाषा: ऐसी जीव जातियाँ जो प्राकृतिक रूप से विश्व के किसी विशेष क्षेत्र में ही पाई जाती हैं और अन्य स्थानों पर स्वाभाविक रूप से नहीं मिलतीं, स्थानिक जातियाँ कहलाती हैं।
भारत में कई ऐसी जातियाँ पाई जाती हैं जो विशेष क्षेत्रों तक सीमित हैं। उदाहरण के रूप में नीलगिरि तहर, सिंहपुच्छी वानर, नेपेन्थीस खासियाना और नीलकुरिंजी का उल्लेख किया गया है।
जैव विविधता हॉटस्पॉट
परिभाषा: ऐसे क्षेत्र जहाँ बड़ी संख्या में स्थानिक जातियाँ पाई जाती हैं और जहाँ आवासों की अत्यधिक क्षति हुई है, जैव विविधता हॉटस्पॉट कहलाते हैं।
हॉटस्पॉट क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध होते हैं। इनका संरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि ये अनेक जीवों को आश्रय देते हैं और पारिस्थितिक तंत्र तथा आहार जाल को बनाए रखने में सहायता करते हैं।
भारत से संबंधित प्रमुख वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट में पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा, हिमालय और सुंडालैंड शामिल हैं। सुंडालैंड में निकोबार द्वीप समूह भी शामिल है।
जैव विविधता और मानव जीवन
मानव जीवन प्रकृति और जैव विविधता से गहराई से जुड़ा हुआ है। भोजन, औषधियाँ, आवास और आजीविका जैसी अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति जैव विविधता से होती है।
जैव विविधता का संरक्षण केवल वन्य जीवों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि उन पारिस्थितिक तंत्रों और संसाधनों की रक्षा करना भी है जिन पर मानव समाज निर्भर करता है।
Concept Builder
जीवों की विविधता → जैव विविधता
जैव विविधता → पारिस्थितिक संतुलन + भोजन + औषधि + आजीविका
विभिन्न आवास → विभिन्न जीव जातियाँ
विशेष क्षेत्र में सीमित जाति → स्थानिक जाति
स्थानिक जातियाँ + अत्यधिक आवासीय क्षति → जैव विविधता हॉटस्पॉट
फसल विविधता → फसल नष्ट होने का जोखिम कम → खाद्य सुरक्षा मजबूत
Exam Booster
- जैव विविधता क्या है? — पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जीवों और उनके बीच की विविधता को जैव विविधता कहते हैं।
- जैव विविधता क्यों महत्वपूर्ण है? — यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और मानव सहित अनेक जीवों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करती है।
- कवक और जीवाणु जैव विविधता में क्या भूमिका निभाते हैं? — वे मृत जैव पदार्थों का अपघटन करके पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में सहायता करते हैं।
- परागणकारी जीवों के दो उदाहरण दीजिए। — मधुमक्खी और चमगादड़।
- मनुष्य जैव विविधता पर किन आवश्यकताओं के लिए निर्भर हैं? — भोजन, आवास, औषधि और आजीविका के लिए।
- स्थानिक जाति क्या है? — जो जाति प्राकृतिक रूप से किसी विशेष क्षेत्र में ही पाई जाती है।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट क्या है? — स्थानिक जातियों से समृद्ध और अत्यधिक आवासीय क्षति वाले क्षेत्र को जैव विविधता हॉटस्पॉट कहते हैं।
- भारत से संबंधित चार जैव विविधता हॉटस्पॉट लिखिए। — पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा, हिमालय और सुंडालैंड।
- फसल विविधता खाद्य सुरक्षा में कैसे सहायक है? — विभिन्न किस्मों के कारण किसी एक रोग या प्रतिकूल परिस्थिति से पूरी फसल के नष्ट होने का जोखिम कम होता है।
- भारत में जैव विविधता अधिक होने का एक कारण क्या है? — भारत में पर्वत, मरुस्थल, वर्षावन, पठार और लंबी तटरेखाओं जैसे विविध आवास पाए जाते हैं।
Topic Lists Page Wise:
- 1. Chapter Review and Key Points
- 2. जैव विविधता
- 3. जैव विविधता का विकास और जीवों का वर्गीकरण
- 4. जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास
- 5. पाँच-जगत वर्गीकरण
- 6. जगत प्लांटी
- 7. जगत एनिमेलिया
- 8. कशेरुकी जीव
- 9. वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति
- 10. प्रोटोकॉर्डेटा
- 11. किसी अज्ञात जीव का वर्गीकरण कैसे करें
- 12. Assignments - What Have You Learned?