Chapter जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi पाँच-जगत वर्गीकरण - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण
5. पाँच-जगत वर्गीकरण
अध्याय 12. जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण
पाँच-जगत वर्गीकरण में जीवों को उनकी कोशिका संरचना, संगठन के स्तर, पोषण की विधि और पारिस्थितिकीय भूमिका जैसी विशेषताओं के आधार पर पाँच प्रमुख जगतों में बाँटा जाता है। इस page में मोनेरा, प्रोटिस्टा और फंजाई का अध्ययन करेंगे।
पाँच-जगत वर्गीकरण
परिभाषा: जीवों को मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया पाँच प्रमुख जगतों में बाँटने वाली वर्गीकरण प्रणाली को पाँच-जगत वर्गीकरण कहते हैं।
पाँच-जगत वर्गीकरण में कोशिका का प्रकार, कोशिका संरचना, संगठन का स्तर, पोषण की विधि और पारिस्थितिकीय भूमिका जैसे मानदंडों का उपयोग किया जाता है।
- कोशिका का प्रकार: प्रोकैरियोटिक या यूकैरियोटिक।
- संगठन का स्तर: एककोशिकीय या बहुकोशिकीय।
- कोशिका संरचना: कोशिका भित्ति उपस्थित है या अनुपस्थित तथा कोशिका भित्ति की प्रकृति।
- पोषण की विधि: स्वपोषी या विषमपोषी।
- पारिस्थितिकीय भूमिका: उत्पादक, उपभोक्ता या अपघटक।
जगत मोनेरा (Monera)
परिभाषा: मुख्यतः एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीवों के समूह को मोनेरा जगत कहते हैं।
मोनेरा के जीवों में झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक नहीं होता। जीवाणु, आर्किया और सायनोबैक्टीरिया इस समूह में शामिल किए जाते हैं।
मोनेरा की प्रमुख विशेषताएँ
- मुख्यतः एककोशिकीय होते हैं।
- इनमें प्रोकैरियोटिक कोशिका होती है।
- इनमें झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक नहीं होता।
- ये विभिन्न प्रकार के वातावरण में पाए जा सकते हैं।
- कुछ मोनेरन जीव स्वपोषी होते हैं और कुछ विषमपोषी।
- कुछ जीवाणु लाभदायक होते हैं, जबकि कुछ रोगजनक भी हो सकते हैं।
मोनेरा के उदाहरण
जीवाणु, आर्किया और सायनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल) मोनेरा के प्रमुख उदाहरण हैं।
मोनेरा का महत्त्व
- लाभदायक जीवाणु: लैक्टोबैसिलस और राइजोबियम जैसे जीवाणु उपयोगी कार्य करते हैं।
- अपघटन: कुछ जीवाणु जैव पदार्थों के अपघटन में सहायता करते हैं।
- पोषक चक्रण: जीवाणु पोषक तत्वों के चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- प्रदूषक अपघटन: कुछ जीवाणु तेल, कीटनाशक और वाहित मल जैसे प्रदूषकों को विघटित कर सकते हैं।
- हानिकारक जीवाणु: कुछ जीवाणु रोग उत्पन्न करते हैं।
सायनोबैक्टीरिया का महत्त्व
सायनोबैक्टीरिया प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इनके प्राचीन जीवाश्म स्ट्रोमेटोलाइट्स में पाए गए हैं, जो पृथ्वी पर जीवन के प्राचीन प्रमाणों में शामिल हैं।
जगत प्रोटिस्टा (Protista)
परिभाषा: मुख्यतः एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीवों के समूह को प्रोटिस्टा जगत कहते हैं।
प्रोटिस्टा के जीवों में झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक होता है। ये सामान्यतः सूक्ष्मदर्शीय और अत्यंत विविध होते हैं तथा मुख्यतः जल या नम स्थानों में पाए जाते हैं।
प्रोटिस्टा की प्रमुख विशेषताएँ
- मुख्यतः एककोशिकीय होते हैं।
- इनमें यूकैरियोटिक कोशिका होती है।
- इनमें झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक होता है।
- कुछ प्रोटिस्ट स्वपोषी होते हैं।
- कुछ प्रोटिस्ट विषमपोषी होते हैं।
- ये सामान्यतः जल या नम स्थानों में पाए जाते हैं।
- कुछ प्रोटिस्ट अपघटक के रूप में कार्य करते हैं और पोषक तत्वों के चक्रण में सहायता करते हैं।
प्रोटिस्टा के उदाहरण
अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना और क्लैमाइडोमोनास प्रोटिस्टा के उदाहरण हैं।
प्रोटिस्टा का पारिस्थितिक महत्त्व
प्रोटिस्ट जलीय आहार श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ प्रोटिस्ट ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं, जबकि कुछ छोटे जीवों के भोजन का स्रोत बनते हैं। कुछ अपघटक के रूप में कार्य करके पोषक तत्वों के चक्रण में सहायता करते हैं।
जगत फंजाई (Fungi)
परिभाषा: मुख्यतः बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक, विषमपोषी और काइटिन की कोशिका भित्ति वाले जीवों के समूह को फंजाई जगत कहते हैं।
कवक अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते। वे मृत या सड़ रहे पदार्थों से पोषक तत्वों को महीन तंतुओं के माध्यम से अवशोषित करते हैं। ये तंतु मिलकर कवक जाल (Mycelium) बनाते हैं।
फंजाई की प्रमुख विशेषताएँ
- अधिकांश कवक बहुकोशिकीय होते हैं।
- इनकी कोशिकाएँ यूकैरियोटिक होती हैं।
- इनकी कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है।
- ये विषमपोषी होते हैं।
- ये अवशोषण द्वारा पोषक पदार्थ प्राप्त करते हैं।
- अधिकांश कवक मृत और सड़े-गले पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं।
- कुछ कवक सहजीवी होते हैं और कुछ परजीवी।
- कुछ कवक पौधों और जन्तुओं में रोग उत्पन्न कर सकते हैं।
- कवक सामान्यतः गर्म और नम परिस्थितियों में अच्छी तरह वृद्धि करते हैं।
- कवक लैंगिक और अलैंगिक दोनों प्रकार से जनन कर सकते हैं।
कवक का पारिस्थितिक महत्त्व
कवक महत्वपूर्ण अपघटक हैं। वे जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदलते हैं और पोषक तत्वों को मिट्टी में वापस उपलब्ध कराने में सहायता करते हैं। इससे पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण होता है।
कवक के उदाहरण
- यीस्ट: एककोशिकीय कवक है, लेकिन इसकी कोशिका भित्ति काइटिन की होने के कारण इसे फंजाई में रखा जाता है।
- ब्रेड मोल्ड: सामान्य कवक का उदाहरण है।
- मशरूम: स्थूलदर्शीय कवक है और बीजाणुओं द्वारा जनन करता है।
- एस्पर्जिलस: कुछ प्रजातियों का उपयोग एंजाइम और प्रतिजैविक दवाएँ बनाने में किया जाता है।
- पेनिसिलियम: कुछ प्रजातियाँ प्रतिजैविक दवाओं के निर्माण में उपयोगी हैं।
मोनेरा, प्रोटिस्टा और फंजाई में अंतर
| आधार | मोनेरा | प्रोटिस्टा | फंजाई |
|---|---|---|---|
| कोशिका प्रकार | प्रोकैरियोटिक | यूकैरियोटिक | यूकैरियोटिक |
| कोशिकाओं की संख्या | मुख्यतः एककोशिकीय | मुख्यतः एककोशिकीय | मुख्यतः बहुकोशिकीय |
| केंद्रक | वास्तविक केंद्रक अनुपस्थित | वास्तविक केंद्रक उपस्थित | वास्तविक केंद्रक उपस्थित |
| पोषण | स्वपोषी या विषमपोषी | स्वपोषी या विषमपोषी | विषमपोषी |
| कोशिका भित्ति | उपस्थित या अन्य प्रकार | कुछ में अनुपस्थित/कुछ में सेलुलोज | काइटिन |
Concept Builder
पाँच-जगत → मोनेरा + प्रोटिस्टा + फंजाई + प्लांटी + एनिमेलिया
मोनेरा → एककोशिकीय + प्रोकैरियोटिक + वास्तविक केंद्रक अनुपस्थित
प्रोटिस्टा → मुख्यतः एककोशिकीय + यूकैरियोटिक + वास्तविक केंद्रक उपस्थित
फंजाई → मुख्यतः बहुकोशिकीय + यूकैरियोटिक + विषमपोषी + काइटिन कोशिका भित्ति
कवक → अपघटन → पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण
Exam Booster
- पाँच-जगत वर्गीकरण के प्रमुख आधार क्या हैं? — कोशिका का प्रकार, कोशिका संरचना, संगठन का स्तर, पोषण की विधि और पारिस्थितिकीय भूमिका।
- मोनेरा के जीव किस प्रकार की कोशिका वाले होते हैं? — प्रोकैरियोटिक कोशिका वाले।
- मोनेरा के दो उदाहरण लिखिए। — जीवाणु और सायनोबैक्टीरिया।
- प्रोटिस्टा के जीवों की प्रमुख विशेषता क्या है? — वे मुख्यतः एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव होते हैं।
- प्रोटिस्टा के चार उदाहरण लिखिए। — अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना और क्लैमाइडोमोनास।
- फंजाई की कोशिका भित्ति किसकी बनी होती है? — काइटिन की।
- कवक अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं? — पोषक पदार्थों को अवशोषित करके।
- कवक पारिस्थितिक तंत्र में किस भूमिका के लिए महत्त्वपूर्ण हैं? — अपघटक के रूप में।
- यीस्ट को फंजाई में क्यों रखा जाता है? — क्योंकि इसकी कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है।
- पाँच-जगत में फंजाई को अलग क्यों रखा गया? — क्योंकि कवक पौधों की तरह अचल हो सकते हैं, लेकिन अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते और विषमपोषी पोषण द्वारा भोजन प्राप्त करते हैं।
Topic Lists Page Wise:
- 1. Chapter Review and Key Points
- 2. जैव विविधता
- 3. जैव विविधता का विकास और जीवों का वर्गीकरण
- 4. जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास
- 5. पाँच-जगत वर्गीकरण
- 6. जगत प्लांटी
- 7. जगत एनिमेलिया
- 8. कशेरुकी जीव
- 9. वर्गीकरण की पदानुक्रमिक प्रकृति
- 10. प्रोटोकॉर्डेटा
- 11. किसी अज्ञात जीव का वर्गीकरण कैसे करें
- 12. Assignments - What Have You Learned?