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Chapter जनन: जीवन की निरंतरता Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi पादप प्रजनन में लैंगिक जनन का महत्त्व - CBSE Study

Chapter जनन: जीवन की निरंतरता Science Exploration Class 9 cbse notes पादप प्रजनन में लैंगिक जनन का महत्त्व in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter जनन: जीवन की निरंतरता Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi पादप प्रजनन में लैंगिक जनन का महत्त्व - CBSE Study

कक्षा 9 Science Exploration के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण जनन: जीवन की निरंतरता को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पादप प्रजनन में लैंगिक जनन का महत्त्व को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science Exploration में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:

जनन: जीवन की निरंतरता

9. पादप प्रजनन में लैंगिक जनन का महत्त्व

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अध्याय 11. जनन — जीवन की निरंतरता

पौधों में लैंगिक जनन केवल नए पौधों के निर्माण तक सीमित नहीं है। इससे उत्पन्न आनुवंशिक विभिन्नताओं का उपयोग कृषि में उपयोगी गुणों वाली नई और बेहतर पौध किस्में विकसित करने के लिए किया जाता है।

पादप प्रजनन में लैंगिक जनन का महत्त्व

परिभाषा: पौधों में वांछित गुणों वाली नई और बेहतर किस्में विकसित करने के लिए जनन की प्रक्रिया का वैज्ञानिक उपयोग पादप प्रजनन कहलाता है।

लैंगिक जनन से उत्पन्न आनुवंशिक विभिन्नताएँ पौधों में नए गुणों के विकास का आधार बनती हैं। वैज्ञानिक और कृषक इन विभिन्नताओं का उपयोग अधिक उपज, रोग-प्रतिरोध तथा अन्य उपयोगी गुणों वाली किस्में विकसित करने में करते हैं। 

पादप प्रजनन की प्रमुख विधियाँ

  • वरणात्मक प्रजनन
  • कृत्रिम संकरण
  • आनुवंशिक अभियांत्रिकी

वरणात्मक प्रजनन (Selective Breeding)

परिभाषा: वांछित विशेषताओं वाले पौधों का चयन करके उनके द्वारा अगली पीढ़ी प्राप्त करने की प्रक्रिया को वरणात्मक प्रजनन कहते हैं।

इस विधि में किसान या पादप प्रजनक ऐसे पौधों का चयन करते हैं जिनमें उपयोगी और वांछित गुण पाए जाते हैं। चयनित पौधों का जनन कराया जाता है ताकि उन गुणों को अगली पीढ़ी में प्राप्त किया जा सके। 

वांछित गुणों के उदाहरण

  • अधिक उत्पादन
  • रोगों के प्रति प्रतिरोध
  • अन्य उपयोगी कृषि गुण

कृत्रिम संकरण (Artificial Hybridisation)

परिभाषा: मनुष्य द्वारा चुने हुए पौधों के बीच नियंत्रित रूप से परागण कराकर नई संतति प्राप्त करने की प्रक्रिया को कृत्रिम संकरण कहते हैं।

कृत्रिम संकरण में इच्छित गुणों वाले पौधों का चयन किया जाता है और उनके बीच नियंत्रित परागण कराया जाता है। इससे दोनों पौधों के वांछित गुणों को एक ही संतति में प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। 

कृत्रिम संकरण की मुख्य प्रक्रिया

  • वांछित गुणों वाले पौधों का चयन किया जाता है।
  • चयनित पुष्पों से पुंकेसर हटाए जा सकते हैं।
  • स्व-परागण रोकने के लिए पुष्प को थैली से ढका जाता है।
  • वांछित गुणों वाले पौधे से प्राप्त परागकणों को हाथ से वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित किया जाता है।
  • इस नियंत्रित परागण से वांछित गुणों वाली संतति प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।

आनुवंशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering)

परिभाषा: किसी जीव के DNA में इच्छित आनुवंशिक पदार्थ को शामिल करके उसके गुणों में वांछित परिवर्तन उत्पन्न करने की तकनीक को आनुवंशिक अभियांत्रिकी कहते हैं।

पादप प्रजनन में आनुवंशिक अभियांत्रिकी का उपयोग चुनी हुई किस्मों के DNA में वांछित विशेषताओं से संबंधित आनुवंशिक पदार्थ को शामिल करने के लिए किया जाता है। इससे नई और उपयोगी पौध किस्में विकसित की जा सकती हैं। 

कृषि में आनुवंशिक अभियांत्रिकी का महत्त्व

आनुवंशिक अभियांत्रिकी की सहायता से पौधों में उपयोगी गुणों को विकसित किया जा सकता है। इसके माध्यम से कृषि के लिए अधिक उपयोगी किस्मों के विकास में सहायता मिली है।

  • उच्च उत्पादक किस्में: अधिक फसल उत्पादन प्राप्त करने में सहायक।
  • रोग-प्रतिरोधी किस्में: कुछ रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोध वाली पौध किस्में।
  • नई किस्मों का विकास: वांछित विशेषताओं वाले पौधों के विकास में सहायता।
  • कृषि उत्पादन: फसल उत्पादन में महत्वपूर्ण सुधार लाने में उपयोगी।

लैंगिक जनन और आनुवंशिक विभिन्नता

परिभाषा: एक ही प्रजाति के जीवों में पाए जाने वाले आनुवंशिक गुणों के अंतर को आनुवंशिक विभिन्नता कहा जाता है।

लैंगिक जनन विभिन्नताओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही विभिन्नताएँ पादप प्रजनकों को उपयोगी गुणों वाले पौधों के चयन और नई किस्मों के विकास का अवसर देती हैं।

लैंगिक जनन → आनुवंशिक विभिन्नता → चयन → नई किस्मों का विकास

पौधों में लैंगिक जनन का कृषि संबंध

कृषि में पौधों के जनन का वैज्ञानिक उपयोग करके ऐसी किस्में विकसित की जाती हैं जो किसानों के लिए अधिक उपयोगी हों। वांछित गुणों का चयन, नियंत्रित संकरण और आनुवंशिक अभियांत्रिकी इस दिशा में महत्वपूर्ण साधन हैं। 

Concept Builder

वांछित गुण वाला पौधा → चयन → वरणात्मक प्रजनन

चयनित पौधे → नियंत्रित परागण → कृत्रिम संकरण → नई संतति

वांछित आनुवंशिक पदार्थ → DNA में शामिल करना → आनुवंशिक अभियांत्रिकी

आनुवंशिक विभिन्नता → उपयोगी गुणों का चयन → बेहतर पौध किस्म

Exam Booster

  • पादप प्रजनन क्या है? — वांछित गुणों वाली नई और बेहतर पौध किस्में विकसित करने के लिए जनन का वैज्ञानिक उपयोग।
  • वरणात्मक प्रजनन क्या है? — वांछित विशेषताओं वाले पौधों का चयन करके उनकी संतति प्राप्त करने की प्रक्रिया।
  • कृत्रिम संकरण क्या है? — चुने हुए पौधों के बीच मनुष्य द्वारा नियंत्रित परागण कराकर संतति प्राप्त करना।
  • कृत्रिम संकरण में स्व-परागण कैसे रोका जाता है? — पुष्प के पुंकेसर हटाकर और पुष्प को थैली से ढककर।
  • कृत्रिम संकरण में परागकण कैसे पहुँचाए जाते हैं? — वांछित पौधे के परागकणों को हाथ से वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित किया जाता है।
  • आनुवंशिक अभियांत्रिकी क्या है? — वांछित आनुवंशिक पदार्थ को DNA में शामिल करके उपयोगी गुण विकसित करने की तकनीक।
  • आनुवंशिक अभियांत्रिकी से किस प्रकार की पौध किस्में विकसित की जा सकती हैं? — उच्च उत्पादक और रोग-प्रतिरोधी जैसी उपयोगी किस्में।
  • लैंगिक जनन का पादप प्रजनन में क्या महत्त्व है? — इससे उत्पन्न आनुवंशिक विभिन्नताओं का उपयोग उपयोगी गुणों वाली नई किस्में विकसित करने में किया जा सकता है।
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