Chapter जनन: जीवन की निरंतरता Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi जन्तुओं में निषेचन की विधियाँ - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
जनन: जीवन की निरंतरता
10. जन्तुओं में निषेचन की विधियाँ
अध्याय 11. जनन — जीवन की निरंतरता
जन्तुओं में लैंगिक जनन की विधि उनके आवास, निषेचन के स्थान, अंडों की संख्या तथा भ्रूण के विकास के तरीके के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इन अंतर का सीधा संबंध संतति की उत्तरजीविता से भी है।
जन्तुओं में निषेचन की विधियाँ
बाह्य निषेचन (External Fertilisation)
परिभाषा: जब नर और मादा युग्मकों का संलयन मादा के शरीर के बाहर होता है, तो इसे बाह्य निषेचन कहते हैं।
बाह्य निषेचन सामान्यतः जल में रहने वाले अनेक जन्तुओं में पाया जाता है। मादा जल में अंडे देती है और नर उन अंडों पर शुक्राणु छोड़ता है। जल के माध्यम से शुक्राणु अंडों तक पहुँचते हैं और निषेचन होता है।
उदाहरण: मेंढक और अनेक मछलियाँ।
आंतरिक निषेचन (Internal Fertilisation)
परिभाषा: जब नर और मादा युग्मकों का संलयन मादा के शरीर के अंदर होता है, तो इसे आंतरिक निषेचन कहते हैं।
सरीसृपों, पक्षियों और स्तनधारियों में निषेचन सामान्यतः मादा के शरीर के अंदर होता है। इसमें निषेचित अंडा या विकसित होता भ्रूण बाहरी वातावरण से अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित रहता है।
बाह्य और आंतरिक निषेचन में अंतर
| आधार | बाह्य निषेचन | आंतरिक निषेचन |
|---|---|---|
| निषेचन का स्थान | मादा के शरीर के बाहर | मादा के शरीर के अंदर |
| सामान्य उदाहरण | मछली, मेंढक | सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी |
| युग्मकों की सुरक्षा | कम | अधिक |
| अंडों की संख्या | सामान्यतः अधिक | सामान्यतः कम |
| संतति की उत्तरजीविता | सामान्यतः कम | सामान्यतः अधिक |
अंडों की संख्या और उत्तरजीविता
बाह्य निषेचन करने वाले जन्तु सामान्यतः बड़ी संख्या में अंडे देते हैं। इसका एक कारण यह है कि बहुत-से अंडे जलधाराओं द्वारा नष्ट हो सकते हैं या अन्य जन्तुओं द्वारा खाए जा सकते हैं। इसलिए बड़ी संख्या में अंडे देने से कुछ संततियों के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।
आंतरिक निषेचन में निषेचित अंडा या भ्रूण मादा के शरीर के अंदर अधिक सुरक्षित रहता है। इसलिए ऐसे जन्तुओं में सामान्यतः कम संख्या में अंडे या संतति उत्पन्न होती है, लेकिन उनके जीवित रहने की संभावना अधिक होती है।
विभिन्न जन्तुओं में जनन की तुलना
| जन्तु | आवास | निषेचन | अंडों की संख्या | संतति की उत्तरजीविता |
|---|---|---|---|---|
| मछली | जल | बाह्य | लगभग 100–1,000 | कम |
| मेंढक | जल/भूमि | बाह्य | लगभग 5,000–50,000 | कम |
| छिपकली | भूमि | आंतरिक | लगभग 2–20 | मध्यम |
| पक्षी | जल/भूमि | आंतरिक | लगभग 1–15 | मध्यम से उच्च |
इस तुलना से स्पष्ट होता है कि निषेचन की विधि, अंडों की संख्या और संतति की उत्तरजीविता के बीच संबंध होता है।
अंडे में पीतक (Yolk) का महत्त्व
परिभाषा: अंडे में उपस्थित वह पोषक पदार्थ जो विकासशील भ्रूण को भोजन प्रदान करता है, पीतक (Yolk) कहलाता है।
मछली, उभयचर और अनेक कीट बड़ी संख्या में पीतकयुक्त अंडे देते हैं। इन अंडों में उपस्थित पीतक विकासशील भ्रूण को प्रारंभिक पोषण देता है।
सरीसृपों और पक्षियों के अंडों में भ्रूण के विकास के लिए पर्याप्त पीतक होता है। इससे भ्रूण अंडे के अंदर तब तक पोषण प्राप्त करता है जब तक अंडे से बच्चा बाहर नहीं निकल आता।
लार्वा और कायांतरण
परिभाषा: अंडे से निकलने के बाद विकास की ऐसी अवस्था जिसमें जन्तु वयस्क से अलग दिखाई देता है, लार्वा कहलाती है।
कुछ जन्तुओं में अंडे से निकलने वाला लार्वा स्वयं भोजन प्राप्त करके बढ़ता है। पर्याप्त पोषक पदार्थ जमा होने के बाद उसका रूपांतरण होता है और वह वयस्क जन्तु में विकसित होता है।
उदाहरण
- तितली: अंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क
- मेंढक: अंडा → लार्वा (टैडपोल) → वयस्क
भ्रूण का विकास
भ्रूण का विकास अलग-अलग जन्तुओं में अलग तरीके से होता है। कुछ जन्तुओं में भ्रूण अंडे के अंदर विकसित होता है, जबकि स्तनधारियों में युग्मनज मादा के शरीर के अंदर विकसित होकर भ्रूण और फिर शिशु का रूप लेता है।
- मछली और मेंढक: भ्रूण का विकास अंडे में होता है।
- सरीसृप और पक्षी: भ्रूण अंडे के अंदर विकसित होता है और पीतक से पोषण प्राप्त करता है।
- स्तनधारी: युग्मनज मादा के शरीर के अंदर विकसित होता है।
जन्तुओं में जनन की मूल चुनौती
सभी जन्तुओं के सामने दो प्रमुख चुनौतियाँ होती हैं—नर और मादा युग्मकों का सफल मिलन तथा उत्पन्न संतति का इतना समय तक जीवित रहना कि वह बड़ी होकर स्वयं जनन कर सके। अलग-अलग जन्तुओं ने अपने आवास और जीवन-शैली के अनुसार इन चुनौतियों से निपटने के अलग-अलग तरीके विकसित किए हैं।
Concept Builder
बाह्य निषेचन → शरीर के बाहर → अधिक अंडे → कम सुरक्षा → सामान्यतः कम उत्तरजीविता
आंतरिक निषेचन → शरीर के अंदर → कम अंडे/संतति → अधिक सुरक्षा → सामान्यतः अधिक उत्तरजीविता
पीतक → भ्रूण का पोषण
अंडा → लार्वा → कायांतरण → वयस्क
Exam Booster
- बाह्य निषेचन क्या है? — मादा के शरीर के बाहर नर और मादा युग्मकों का संलयन।
- आंतरिक निषेचन क्या है? — मादा के शरीर के अंदर नर और मादा युग्मकों का संलयन।
- बाह्य निषेचन वाले जन्तु अधिक अंडे क्यों देते हैं? — क्योंकि अनेक अंडे नष्ट हो सकते हैं या अन्य जन्तुओं द्वारा खाए जा सकते हैं।
- आंतरिक निषेचन में संतति के जीवित रहने की संभावना अधिक क्यों होती है? — क्योंकि निषेचित अंडा या भ्रूण अधिक सुरक्षित रहता है।
- पीतक का क्या कार्य है? — यह विकासशील भ्रूण को पोषण देता है।
- लार्वा क्या है? — अंडे से निकलने के बाद विकास की ऐसी अवस्था जो वयस्क से अलग दिखाई देती है।
- तितली के जीवन-चक्र का क्रम लिखिए। — अंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क।
- मछली और मेंढक में कौन-सा निषेचन होता है? — सामान्यतः बाह्य निषेचन।
- पक्षियों में कौन-सा निषेचन होता है? — आंतरिक निषेचन।
- जन्तुओं में जनन की दो मूल चुनौतियाँ क्या हैं? — युग्मकों का सफल मिलन और संतति का जीवित रहकर वयस्क होना।
Topic Lists Page Wise:
- 1. Chapter Review and Key Points
- 2. जनन और जनन के प्रकार
- 3. अलैंगिक जनन
- 4. लैंगिक जनन
- 5. जंतुओं में लैंगिक जनन
- 6. मानवों में लैंगिक जनन
- 7. जनन स्वास्थ्य
- 8. पुष्पीय पादपों में लैंगिक जनन
- 9. पादप प्रजनन में लैंगिक जनन का महत्त्व
- 10. जन्तुओं में निषेचन की विधियाँ
- 11. शल्य-चिकित्सा द्वारा गर्भनिरोध
- 12. Assignments - What Have You Learned?