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Chapter जनन: जीवन की निरंतरता Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi लैंगिक जनन - CBSE Study

Chapter जनन: जीवन की निरंतरता Science Exploration Class 9 cbse notes लैंगिक जनन in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter जनन: जीवन की निरंतरता Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi लैंगिक जनन - CBSE Study

कक्षा 9 Science Exploration के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण जनन: जीवन की निरंतरता को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक लैंगिक जनन को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science Exploration में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:

जनन: जीवन की निरंतरता

4. लैंगिक जनन

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अध्याय 11. जनन — जीवन की निरंतरता

अलैंगिक जनन की तुलना में लैंगिक जनन अधिक जटिल प्रक्रिया है। इसमें जनन कोशिकाओं का निर्माण, उनका संलयन और नई संतति का विकास शामिल होता है। लैंगिक जनन के कारण संतति में विभिन्नताएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जो जीवों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

लैंगिक जनन की आवश्यकता

लैंगिक जनन में दो जनकों का आनुवंशिक योगदान होता है। नर और मादा जनन कोशिकाओं के संलयन से नई संतति का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया के कारण संतति में दोनों जनकों के गुणों का संयोजन होता है।

अलैंगिक जनन में उत्पन्न संतति सामान्यतः जनक के समान होती है, जबकि लैंगिक जनन में आनुवंशिक पदार्थ के पुनर्संयोजन के कारण संतति में विभिन्नताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। यही विभिन्नताएँ जीवों को बदलती हुई पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित होने में सहायता कर सकती हैं।

लैंगिक जनन में विभिन्नता

विभिन्नता (Variation): संतति और उसके जनकों अथवा एक ही प्रजाति के विभिन्न सदस्यों के गुणों में दिखाई देने वाले अंतर को विभिन्नता कहते हैं।

लैंगिक जनन के दौरान दो जनकों की आनुवंशिक सामग्री के संयोजन से नई आनुवंशिक संरचनाएँ बन सकती हैं। इसलिए एक ही माता-पिता से उत्पन्न संतानों में भी कुछ गुणों में अंतर दिखाई दे सकता है।

अर्धसूत्री विभाजन

परिभाषा: वह विशेष प्रकार का कोशिका विभाजन जिसमें गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है और अगुणित जनन कोशिकाएँ बनती हैं, अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) कहलाता है।

लैंगिक जनन में अर्धसूत्री विभाजन का विशेष महत्त्व है। इससे बनने वाली जनन कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या मूल कोशिका की तुलना में आधी रहती है।

निषेचन के समय नर और मादा युग्मकों के संलयन से गुणसूत्रों की संख्या फिर से सामान्य हो जाती है। इस प्रकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुणसूत्रों की संख्या बनी रहती है।

अर्धसूत्री विभाजन का महत्त्व

  • जनन कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या आधी करता है।
  • नर और मादा युग्मकों के संलयन के बाद गुणसूत्रों की सामान्य संख्या पुनः स्थापित होती है।
  • लैंगिक जनन के लिए आवश्यक अगुणित युग्मकों के निर्माण में सहायता करता है।
  • आनुवंशिक विभिन्नताओं के निर्माण में योगदान देता है।

युग्मक (Gametes)

परिभाषा: लैंगिक जनन में भाग लेने वाली विशेष जनन कोशिकाओं को युग्मक (Gametes) कहते हैं।

  • नर युग्मक: शुक्राणु
  • मादा युग्मक: अंडाणु

युग्मक अगुणित होते हैं, अर्थात इनमें गुणसूत्रों का एक सेट होता है। निषेचन के समय नर और मादा युग्मक मिलकर द्विगुणित युग्मनज बनाते हैं।

पौधों में लैंगिक जनन

पुष्पीय पौधों में फूल लैंगिक जनन का प्रमुख अंग है। फूल में नर और मादा जनन अंग पाए जाते हैं। नर जनन अंग को पुंकेसर और मादा जनन अंग को स्त्रीकेसर कहते हैं।

पुंकेसर

परिभाषा: फूल का नर जनन अंग पुंकेसर (Stamen) कहलाता है।

पुंकेसर के दो मुख्य भाग होते हैं—

  • तंतु (Filament)
  • परागकोश (Anther)

परागकोश में परागकण बनते हैं। परागकणों में नर जनन कोशिकाएँ होती हैं।

स्त्रीकेसर

परिभाषा: फूल का मादा जनन अंग स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel) कहलाता है।

स्त्रीकेसर के तीन मुख्य भाग होते हैं—

  • वर्तिकाग्र (Stigma)
  • वर्तिका (Style)
  • अंडाशय (Ovary)

अंडाशय के भीतर बीजांड (Ovules) पाए जाते हैं। बीजांड में मादा जनन कोशिका अर्थात अंडाणु पाया जाता है।

परागण

परिभाषा: परागकणों का परागकोश से फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचने की प्रक्रिया को परागण (Pollination) कहते हैं।

परागण लैंगिक जनन की एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक प्रक्रिया है। परागकण अपने आप वर्तिकाग्र तक नहीं पहुँचते; उन्हें वायु, जल, कीट या पक्षियों जैसे विभिन्न माध्यमों की सहायता मिल सकती है।

स्व-परागण

परिभाषा: जब किसी फूल के परागकण उसी फूल या उसी पौधे के उपयुक्त वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, तो इसे स्व-परागण कहते हैं।

पर-परागण

परिभाषा: जब किसी पौधे के फूल के परागकण उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, तो इसे पर-परागण कहते हैं।

पर-परागण में दो अलग पौधों के आनुवंशिक पदार्थ के मिलने की संभावना होने के कारण यह विभिन्नता उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

परागण के माध्यम

  • वायु – हल्के परागकण वायु द्वारा एक फूल से दूसरे फूल तक पहुँच सकते हैं।
  • जल – कुछ जलीय पौधों में जल परागण में सहायता करता है।
  • कीट – मधुमक्खी और तितली जैसे कीट फूलों से परागकण एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकते हैं।
  • पक्षी – कुछ फूलों में पक्षी परागण में सहायता करते हैं।

निषेचन

परिभाषा: नर और मादा युग्मकों के संलयन की प्रक्रिया को निषेचन (Fertilisation) कहते हैं।

पौधों में परागकण वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद उचित परिस्थितियों में आगे बढ़ते हैं। नर जनन कोशिका अंडाशय में स्थित बीजांड तक पहुँचती है और मादा युग्मक के साथ संलयित होती है।

नर और मादा युग्मक के संलयन से युग्मनज (Zygote) बनता है। यही युग्मनज आगे विभाजित होकर भ्रूण के रूप में विकसित होता है।

निषेचन के बाद परिवर्तन

  • निषेचन के बाद युग्मनज बनता है।
  • युग्मनज आगे विभाजित होकर भ्रूण का निर्माण करता है।
  • बीजांड आगे चलकर बीज में विकसित होता है।
  • अंडाशय आगे चलकर फल में विकसित होता है।
  • इस प्रकार निषेचन के बाद फूल के विभिन्न भागों में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं।

Concept Builder

अर्धसूत्री विभाजन → अगुणित युग्मक → परागण → नर युग्मक + मादा युग्मक → निषेचन → युग्मनज → भ्रूण

पुंकेसर → नर जनन अंग → परागकण

स्त्रीकेसर → मादा जनन अंग → बीजांड → अंडाणु

परागण ≠ निषेचन

परागण में परागकण का स्थानांतरण होता है, जबकि निषेचन में नर और मादा युग्मकों का संलयन होता है।

Exam Booster

  • लैंगिक जनन में विभिन्नता क्यों उत्पन्न होती है? — दो जनकों की आनुवंशिक सामग्री के संयोजन के कारण।
  • अर्धसूत्री विभाजन का मुख्य कार्य क्या है? — गुणसूत्रों की संख्या आधी करके अगुणित युग्मकों का निर्माण करना।
  • युग्मक क्या हैं? — लैंगिक जनन में भाग लेने वाली जनन कोशिकाएँ।
  • पुंकेसर क्या है? — फूल का नर जनन अंग।
  • स्त्रीकेसर क्या है? — फूल का मादा जनन अंग।
  • परागण क्या है? — परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण।
  • स्व-परागण और पर-परागण में मुख्य अंतर क्या है? — स्व-परागण में परागकण उसी फूल या उसी पौधे तक पहुँचते हैं, जबकि पर-परागण में वे उसी प्रजाति के दूसरे पौधे तक पहुँचते हैं।
  • निषेचन क्या है? — नर और मादा युग्मकों का संलयन।
  • निषेचन के बाद क्या बनता है? — युग्मनज।
  • बीजांड और अंडाशय का क्या विकास होता है? — बीजांड से बीज और अंडाशय से फल विकसित होता है।
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