Chapter जनन: जीवन की निरंतरता Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi अलैंगिक जनन - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
जनन: जीवन की निरंतरता
3. अलैंगिक जनन
अध्याय 11. जनन — जीवन की निरंतरता
अलैंगिक जनन जनन की अपेक्षाकृत सरल विधि है। इसमें नए जीव के निर्माण के लिए सामान्यतः केवल एक जनक की आवश्यकता होती है। यह अनेक एककोशिकीय जीवों, सरल बहुकोशिकीय जीवों तथा अनेक पौधों में पाया जाता है।
अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
परिभाषा: वह जनन जिसमें नए जीव के निर्माण में केवल एक जनक भाग लेता है और नर तथा मादा युग्मकों के संलयन की आवश्यकता नहीं होती, अलैंगिक जनन कहलाता है।
अलैंगिक जनन में उत्पन्न संतति सामान्यतः अपने जनक के आनुवंशिक रूप से समान होती है। इसलिए इसमें उत्पन्न संततियों में जनक के समान गुण पाए जाते हैं।
अलैंगिक जनन की प्रमुख विशेषताएँ
- इसमें सामान्यतः केवल एक जनक भाग लेता है।
- नर और मादा युग्मकों के संलयन की आवश्यकता नहीं होती।
- उत्पन्न संतति सामान्यतः आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है।
- यह अपेक्षाकृत सरल और तेज जनन विधि है।
- अनुकूल परिस्थितियों में जीवों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
- यह जीवाणु, अमीबा, यीस्ट, हाइड्रा, स्पंज तथा अनेक पौधों में पाया जाता है।
पौधों में कायिक प्रवर्धन
परिभाषा: जब पौधे के कायिक अर्थात वृद्धि करने वाले भागों से नए पौधे विकसित होते हैं, तो इस प्रकार के अलैंगिक जनन को कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) कहते हैं।
अनेक पौधे बीज के बिना अपने विद्यमान भागों से नए प्ररोह और जड़ें विकसित कर सकते हैं। आलू और अदरक के भूमिगत तनों से, मनीप्लांट और गन्ने के तने की कटिंग से तथा ब्रायोफिलम की पत्तियों पर बनने वाले छोटे पादपकों से नए पौधे विकसित हो सकते हैं।
कायिक प्रवर्धन के उदाहरण
- आलू – भूमिगत तने से नए पौधे।
- अदरक – भूमिगत तने से नए पौधे।
- मनीप्लांट – तने की कटिंग से।
- गन्ना – तने की कटिंग से।
- ब्रायोफिलम – पत्तियों पर बनने वाले छोटे पादपकों से।
कृषि में कायिक प्रवर्धन का महत्त्व
अलैंगिक जनन से उत्पन्न पौधे आनुवंशिक रूप से समान होते हैं। इसी प्राकृतिक प्रक्रिया को वैज्ञानिकों और बागवानी विशेषज्ञों ने उपयोगी तकनीकों में विकसित किया है। कर्तन, कलम बाँधना, परतन और ऊतक संवर्धन जैसी विधियों से पौधों का प्रभावी तथा बड़े स्तर पर प्रवर्धन किया जा सकता है।
- वांछित गुणों वाले पौधों का बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा सकता है।
- एक समान गुणों वाले पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
- कृषि और बागवानी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलती है।
- उच्च उपज वाली पौध किस्मों के प्रवर्धन में उपयोगी है।
कर्तन (Cutting)
परिभाषा: पौधे के तने या प्ररोह के उपयुक्त भाग को काटकर उससे नया पौधा विकसित करने की विधि को कर्तन कहते हैं।
कर्तन के लिए पौधे की उपयुक्त शाखा या प्ररोह लिया जाता है। उसके निचले भाग की पत्तियाँ हटाकर उसे खाद मिली मिट्टी में लगाया जाता है। नियमित पानी और अनुकूल परिस्थितियों में उस कर्तन से नया पौधा विकसित हो सकता है।
कर्तन की सामान्य प्रक्रिया
- स्वस्थ प्ररोह या शाखा की कर्तन तैयार की जाती है।
- कर्तन के निचले भाग की पत्तियाँ हटा दी जाती हैं।
- कर्तन को खाद मिली मिट्टी में लगाया जाता है।
- इसे नियमित रूप से पानी दिया जाता है।
- उपयुक्त परिस्थितियों में नया पौधा विकसित होता है।
कलम बाँधना (Grafting)
परिभाषा: दो उपयुक्त पौधों के भागों को जोड़कर एक पौधे के रूप में विकसित करने की विधि को कलम बाँधना (Grafting) कहते हैं।
इस विधि में एक स्वस्थ आधार पौधा लिया जाता है और किसी अन्य वांछित किस्म के पौधे की स्वस्थ कलम उसके तने पर लगाए गए चीरे में स्थापित की जाती है। जोड़ को तब तक सुरक्षित रखा जाता है जब तक कलम अच्छी तरह स्थापित न हो जाए।
कलम बाँधने की सामान्य प्रक्रिया
- एक स्वस्थ आधार पौधा और वांछित गुणों वाली कलम चुनी जाती है।
- आधार पौधे की टहनी पर चीरा लगाया जाता है।
- दूसरे पौधे की कलम को उस चीरे में स्थापित किया जाता है।
- जोड़ को कपड़े या रैपिंग फिल्म से सुरक्षित किया जाता है।
- नियमित पानी देकर दोनों भागों की वृद्धि का अवलोकन किया जाता है।
कलम बाँधने की आधुनिक तकनीक किसानों को अधिक उपज देने वाले फलदार पौधों के उत्पादन में सहायता कर सकती है।
परतन (Layering)
परिभाषा: पौधे की किसी लचीली शाखा के एक भाग को मिट्टी में दबाकर उसमें जड़ें विकसित करने और बाद में उसे जनक पौधे से अलग करके नया पौधा बनाने की विधि को परतन कहते हैं।
परतन की प्रक्रिया
- किसी पेड़ या झाड़ी की लचीली और पतली शाखा चुनी जाती है।
- शाखा के बीच के भाग को मिट्टी के नीचे दबाया जाता है।
- दबे हुए भाग को नियमित पानी दिया जाता है।
- लगभग 10–15 दिनों बाद उस भाग में जड़ें विकसित हो सकती हैं।
- जड़ें बनने के बाद शाखा को जनक पौधे से अलग कर दिया जाता है।
- अलग किया गया भाग नए पौधे के रूप में विकसित होता है।
नींबू जैसे पौधों में परतन विधि का प्रयोग किया जा सकता है।
ऊतक संवर्धन (Tissue Culture)
परिभाषा: पौधे के उपयुक्त ऊतक या वृद्धि-भाग से नियंत्रित परिस्थितियों में नए पौधे विकसित करने की तकनीक को ऊतक संवर्धन कहते हैं।
ऊतक संवर्धन ने पौधों के प्रवर्धन में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। उदाहरण के रूप में केले की खेती में पौधों के प्ररोह शीर्ष से बड़े स्तर पर स्वस्थ पादपक तैयार किए जा सकते हैं। यह तकनीक विषाणु-संक्रमित पौधों को हटाने में सहायता करती है और उच्च उपज सुनिश्चित करने में उपयोगी हो सकती है। यह पौधों में अलैंगिक जनन का एक उदाहरण है।
यीस्ट में मुकुलन
परिभाषा: जनक कोशिका के शरीर पर एक छोटा उभार या मुकुल बनकर उससे नया जीव विकसित होने की प्रक्रिया को मुकुलन (Budding) कहते हैं।
यीस्ट में जनक कोशिका से छोटे गोलाकार मुकुल निकलते हैं। मुकुल बढ़ता है और विकसित होकर नया जीव बन सकता है। इस प्रकार यीस्ट में अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है।
हाइड्रा में मुकुलन
हाइड्रा जैसे सरल बहुकोशिकीय जीव में जनक शरीर के किसी विशेष स्थान पर बार-बार कोशिका विभाजन से एक छोटा उभार बनता है। यह उभार मुकुल कहलाता है। मुकुल बढ़कर विकसित होता है और बाद में जनक से अलग होकर स्वतंत्र रूप से जीवन जी सकता है। हाइड्रा में एक साथ कई मुकुल भी विकसित हो सकते हैं।
कवक में बीजाणु निर्माण
परिभाषा: बीजाणुओं के निर्माण द्वारा नए जीव उत्पन्न करने की अलैंगिक जनन विधि को बीजाणु निर्माण (Spore Formation) कहते हैं।
कवक में बीजाणु थैली जैसी संरचना या कवक तंतुओं की फूली हुई संरचना पर बन सकते हैं। बीजाणु बहुत बड़ी संख्या में बनते हैं। वे हल्के और सामान्यतः एककोशिकीय होते हैं तथा वायु धाराओं के साथ आसानी से फैल सकते हैं। नमी और पोषक तत्व मिलने पर वे शीघ्र अंकुरित होकर नए जीव विकसित कर सकते हैं।
उदाहरण: राइजोपस और ऐस्पर्जिलस जैसे कवकों में बीजाणु निर्माण देखा जा सकता है।
बीजाणु निर्माण का महत्त्व
कवक बीजाणुओं द्वारा तेजी से फैल सकते हैं। कुछ कवक कार्बनिक अपशिष्टों और प्रदूषकों के अपघटन में उपयोगी होते हैं तथा कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं और प्रतिजैविकों के उत्पादन में भी महत्त्वपूर्ण हैं।
अलैंगिक जनन में समसूत्री विभाजन
परिभाषा: वह कोशिका विभाजन जिसमें एक जनक कोशिका से दो संतति कोशिकाएँ बनती हैं और प्रत्येक संतति में जनक कोशिका के समान गुणसूत्र संख्या होती है, समसूत्री विभाजन (Mitosis) कहलाता है।
अध्याय में अध्ययन किए गए अलैंगिक जनन के जीवों में समसूत्री विभाजन प्रमुख प्रक्रिया है। इसके कारण बनने वाली संतति सामान्यतः आनुवंशिक रूप से जनक के समरूप होती है।
क्लोन (Clone)
परिभाषा: अलैंगिक जनन से उत्पन्न ऐसी संततियाँ जो आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती हैं, क्लोन कहलाती हैं।
अलैंगिक जनन में गुणसूत्रों की संख्या और आनुवंशिक जानकारी सामान्यतः समान रहने के कारण संतति जनक के समान होती है। यह प्रक्रिया अनुकूल परिस्थितियों में जीवों की संख्या को तेजी से बढ़ाने में सहायक होती है।
अलैंगिक जनन की प्रमुख विधियाँ — एक नजर में
| विधि | उदाहरण | मुख्य विचार |
|---|---|---|
| कायिक प्रवर्धन | आलू, अदरक, मनीप्लांट, गन्ना, ब्रायोफिलम | कायिक भाग से नया पौधा |
| कर्तन | मनीप्लांट, गन्ना | कटिंग से नया पौधा |
| कलम बाँधना | गुलाब आदि | दो पौधों के उपयुक्त भागों को जोड़ना |
| परतन | नींबू आदि | शाखा के दबे भाग में जड़ें विकसित करना |
| ऊतक संवर्धन | केला | ऊतक से नियंत्रित परिस्थितियों में पौधे विकसित करना |
| मुकुलन | यीस्ट, हाइड्रा | मुकुल से नया जीव |
| बीजाणु निर्माण | राइजोपस, ऐस्पर्जिलस | बीजाणुओं से नए जीव |
Concept Builder
एक जनक → युग्मक संलयन नहीं → अलैंगिक जनन
कायिक भाग → नया पौधा = कायिक प्रवर्धन
कटिंग → नया पौधा = कर्तन
शाखा मिट्टी में दबाना → जड़ें → नया पौधा = परतन
उभार → नया जीव = मुकुलन
बीजाणु → अंकुरण → नया जीव = बीजाणु निर्माण
समसूत्री विभाजन → समान गुणसूत्र संख्या → आनुवंशिक रूप से समान संतति → क्लोन
Exam Booster
- अलैंगिक जनन क्या है? — एक जनक द्वारा बिना युग्मक संलयन के नए जीव उत्पन्न करने की प्रक्रिया।
- कायिक प्रवर्धन क्या है? — पौधे के कायिक भागों से नए पौधे बनने की प्रक्रिया।
- कायिक प्रवर्धन के दो उदाहरण दीजिए। — आलू और अदरक।
- कर्तन क्या है? — पौधे के तने या प्ररोह की कटिंग से नया पौधा विकसित करने की विधि।
- कलम बाँधना क्या है? — दो उपयुक्त पौधों के भागों को जोड़कर नया पौधा विकसित करने की विधि।
- परतन क्या है? — शाखा के एक भाग को मिट्टी में दबाकर जड़ें विकसित करने और बाद में नया पौधा बनाने की विधि।
- ऊतक संवर्धन का एक प्रमुख उपयोग क्या है? — बड़े स्तर पर स्वस्थ पौध तैयार करना, जैसे केले की खेती में।
- यीस्ट में अलैंगिक जनन किस विधि से होता है? — मुकुलन।
- हाइड्रा में कौन-सा अलैंगिक जनन पाया जाता है? — मुकुलन।
- कवक में बीजाणु क्यों उपयोगी हैं? — वे हल्के होते हैं, वायु द्वारा फैल सकते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में नए जीव बना सकते हैं।
- समसूत्री विभाजन क्या है? — ऐसा कोशिका विभाजन जिसमें दो संतति कोशिकाएँ बनती हैं और उनकी गुणसूत्र संख्या जनक कोशिका के समान रहती है।
- क्लोन क्या है? — अलैंगिक जनन से उत्पन्न आनुवंशिक रूप से समान संतति।
Topic Lists Page Wise:
- 1. Chapter Review and Key Points
- 2. जनन और जनन के प्रकार
- 3. अलैंगिक जनन
- 4. लैंगिक जनन
- 5. जंतुओं में लैंगिक जनन
- 6. मानवों में लैंगिक जनन
- 7. जनन स्वास्थ्य
- 8. पुष्पीय पादपों में लैंगिक जनन
- 9. पादप प्रजनन में लैंगिक जनन का महत्त्व
- 10. जन्तुओं में निषेचन की विधियाँ
- 11. शल्य-चिकित्सा द्वारा गर्भनिरोध
- 12. Assignments - What Have You Learned?