Chapter Chapter 4. नियोजन Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 4 - CBSE Study
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Chapter 4. नियोजन
4. पेज 4
योजनाओं के प्रकार -
1. उद्देश्य - उद्येश्य वह गंतव्य स्थान हैं जहाँ तक पंहुचने के लिए व्यवसाय विभिन्न व्यावसयिक कार्य करता हैं | उद्येश्य की विशेषताएं ;
(i) स्पष्ट हो
(ii) परिणाम से संबंधित होनी चाहिए
(iii) मापने योग्य हो
(iv) प्राप्त करने योग्य होने चाहिए |
2. व्यूह-रचना - व्यूह-रचना से अभिप्राय उस योजन से है जो एक व्यवसाय द्वारा अन्य प्रतियोगी फर्मों का सामना करने के लिए बनाई जाती हैं | इसके आयाम निम्न है;
(i) दीर्घकालीन उद्येश्यों का निर्धारण करना
(ii) उद्येश्य प्राप्ति के लिए विशेष विधि का उपयोग करना
(iii) संगठनात्मक कमियों को दूर करना |
3. नीति - नीति से अभिप्राय उस योजन से है जो कर्मचारियों के कार्य करने को मार्ग प्रशस्त करता हैं | जैसे- किसी कंपनी की नीति है कि सफाई में प्रत्येक व्यकित सहयोग दे | अतः कार्य के दौरान कूड़ा-कचरा इधर-उधर न फैक कर कूड़ेदान में ही डाला जाए |
4. कार्यविधि - कार्यविधि से अभिप्राय किसी कार्य को पूरा करने के लिए अपनाई जाने वाली क्रियाओं के क्रम के निर्धारण से हैं | जैसे - वस्तु की पैकिंग की क्रिया का क्रम निर्धारित करना |
5. नियम - नियम से अभिप्राय उस योजन है जो यह निर्णय लेने में मदद करता हैं कि किसी विशेष परिस्थिति में क्या करना हैं और क्या नहीं करना हैं | जैसे- एक कंपनी यह नियम बनाती है कि कोई भी मामला व विषय निम्न स्तर से उच्च स्तर को सीधे स्थानंतरित नहीं किया जाएगा | यह कार्य केवल सोपनिक श्रृंखला के द्वारा ही संपन्न किया जाएगा |
6. कार्यक्रम - यह एकल उपभोग योजन हैं | जिसकें अंतर्गत क्या कारण है, कैसे करना है, कौन करेगा और कब किया जाना हैं, आदि का निर्धारण किया जाता हैं |
7. बजट - बजट एक पूर्व अनुमान हैं जिसकें अंतर्गत किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक साधानों का पहले से ही निर्धारण कर एक गणनात्मक विवरण तैयार किया जाता हैं | जैसे- किसी नई वस्तु को बनाने के लिए आवश्यक साधन जैसे कच्चा माल, मशीन, आदि का पहले ही ब्योरा तैयार करना |