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Chapter Chapter 1. प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 2 - CBSE Study

Chapter Chapter 1. प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व Business Study Class 12 cbse notes पेज 2 in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter Chapter 1. प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व Class 12 Business Study CBSE notes in hindi पेज 2 - CBSE Study

कक्षा 12 Business Study के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण Chapter 1. प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक पेज 2 को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Business Study में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 12 English Medium Business Study All Chapters:

Chapter 1. प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व

2. पेज 2

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प्रबन्ध की प्रकृति - 

1. प्रबन्ध कला के रूप में - प्रबंध की कला के रूप में विशेषताएं निम्न है -

(क) सैध्दान्तिक ज्ञान - कला हमेशा सैध्दान्तिक ज्ञान पर आधारित होता है | अतः प्रबन्ध कला है क्योंकि कला की ही तरह प्रबंध के विभिन्न क्षेत्रो में साहित्य तथा अध्ययन सामग्री उपलब्ध है |

(ख) व्यक्तिगत प्रयोग - सभी लोग अलग - अलग प्रकार से काम करते है क्योंकि सभी के काम करने का तरीका अलग - अलग होता है | इसलिए कला एक व्यक्तिगत अवधारणा है तथा प्रबन्ध भी |

(ख) अभ्यास एवं सृजनशीलता - कला अभ्यास तथा सृजनशीलता पर आधारित होते है | किसी भी व्यक्ति की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है की उसने कितना अभ्यास किया है | जिस प्रकार कला को अभ्यास तथा अनुभव द्वारा सुधरा जा सकता है इसी प्रकार प्रबन्ध को भी अभ्यास तथा अनुभव द्वारा सुधारा जा सकता है |

2. प्रबन्ध विज्ञानं के रूप में - प्रबंध की विज्ञान के रूप में विशेषताएं निम्न है -

(क) व्यवस्थित ज्ञान समूह - प्रबन्ध का विज्ञान की तरह ही व्यवस्थित ज्ञान समूह है | इनके सिधांत कारण तथा परिणाम के बीच सम्बंध प्रकट करते है जो सिधान्तो, अभ्यासों तथा प्रयोगों पर आधारित होते है |

(ख) प्रशिक्षण पर आधारित सिधांत - वैज्ञानिक सिधांत कई वर्षो क शोध, परीक्षण, प्रयोग तथा अवलोकन के बाद प्राप्त होते है उसी तरह प्रबन्ध के सिधांत भी प्राप्त होते है | अतः विज्ञान की तरह ही प्रबन्ध में भी प्रशिक्षण पर आधारित सिधांत है |

(ग) व्यापक वैधता - वैज्ञानिक सिधांत सत्य पर आधारित होते है तथा सभी लोगो द्वारा स्वीकृत होते है इसी प्रकार प्रबन्ध के सिधांत भी सत्य पर आधारित होते है | इसलिए ये व्यापक रूप से वैध्य होते है |

3. पेशे के रूप में - प्रबंध की पेशे के रूप में विशेषताएं निम्न है -

(क) भलीभांति परिभाषित ज्ञान समूह - सभी पेशे भलीभांति परिभाषित ज्ञान समूह पर आधारित होते है | क्योंकि अलग - अलग पेशे के लिए अलग ज्ञान तथा अलग शिक्षा होती है जिसे काफी लम्बे समय की पढाई के बाद प्राप्त किया जाता है |

(ख) प्रतिबंधित प्रवेश - पेशे में हर कोई आसानी से प्रवेश नहीं ले सकता है क्योंकि इसमें प्रवेश प्रतिबंधित होता है केवल परीक्षा या शैक्षणिक योग्यता द्वारा ही प्रवेश संभव है |

(ग) सेवा उद्देश्य - प्रबन्ध की तरह ही पेशे का मुख्य उद्देश्य सेवा उद्देश्य होता है क्योंकि इसमें ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान की जाती है |

(घ) नैतिक आचार संहिता - सभी पेशे की अपनी एक अलग नैतिक आचार संहिता होती है जिसका पालन हर पेशेवर को अवश्य करना होता है |

नोट - प्रबंध के लिए किसी भी प्रकार की विशेष डिग्री तथा प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होती है तथा न हीं किसी प्रकार की नैतिक आचार संहिता का पालन करना होता है | प्रबन्ध पेशे की सभी विशेषताओं को पूरा नहीं करता इसी लिए प्रबन्ध पेशा है परन्तु पूरी तरह नहीं |

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