Chapter ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi पराश्रव्य तथा अवश्रव्य तरंगें - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
9. पराश्रव्य तथा अवश्रव्य तरंगें
अध्याय 10. ध्वनि तरंगें—अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
मानव कान केवल एक निश्चित सीमा की आवृत्ति वाली ध्वनि को ही सुन सकता है। इस सीमा से कम या अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों के भी विज्ञान, चिकित्सा, उद्योग और प्राकृतिक घटनाओं में महत्वपूर्ण उपयोग हैं।
पराश्रव्य तथा अवश्रव्य तरंगें
परिभाषा: मानव की श्रवण सीमा से बाहर की आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को अवश्रव्य (Infrasonic) और पराश्रव्य (Ultrasonic) तरंगों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
मानव की श्रवण सीमा
सामान्य मानव कान लगभग 20 Hz से 20 kHz तक की आवृत्ति वाली ध्वनि को सुन सकता है। इस सीमा को मानव श्रव्य परिसर (Human Audible Range) कहते हैं।
- 20 Hz से कम: अवश्रव्य तरंगें
- 20 Hz से 20 kHz: मानव के लिए श्रव्य ध्वनि
- 20 kHz से अधिक: पराश्रव्य तरंगें
अवश्रव्य तरंगें
परिभाषा: 20 Hz से कम आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को अवश्रव्य तरंगें (Infrasonic Waves) कहते हैं। मनुष्य सामान्यतः इन तरंगों को सुन नहीं सकता।
अवश्रव्य तरंगों की आवृत्ति बहुत कम होती है, लेकिन वे लंबी दूरी तक गमन कर सकती हैं। इसी कारण प्राकृतिक घटनाओं और वायुमंडलीय गतिविधियों के अध्ययन में इनका उपयोग किया जाता है।
अवश्रव्य तरंगों के प्रमुख उपयोग
- भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं का पता लगाने में उपयोग किया जाता है।
- ज्वालामुखी विस्फोट से संबंधित गतिविधियों का अध्ययन करने में उपयोगी हैं।
- तेज झंझावातों का पता लगाने में इनका उपयोग किया जा सकता है।
- इनकी लंबी दूरी तक यात्रा करने की क्षमता के कारण वायुमंडल और पृथ्वी से संबंधित घटनाओं की निगरानी में उपयोगी हैं।
पराश्रव्य तरंगें
परिभाषा: 20 kHz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Waves) कहते हैं। मनुष्य सामान्यतः इन्हें सुन नहीं सकता।
पराश्रव्य तरंगों की उच्च आवृत्ति और वस्तुओं से परावर्तित होने की क्षमता के कारण इनका उपयोग चिकित्सा, उद्योग और तकनीकी उपकरणों में किया जाता है।
पराश्रव्य तरंगों के प्रमुख उपयोग
- चिकित्सा में: शरीर के अंदर के अंगों का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए अल्ट्रासोनोग्राफी में उपयोग किया जाता है।
- गुर्दे की पथरी: गुर्दे की पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने में पराश्रव्य तरंगों का उपयोग किया जाता है, जिससे उन्हें शरीर से बाहर निकालना आसान हो सके।
- उद्योग में: अल्ट्रासोनिक वेल्डिंग में उपयोग किया जाता है।
- सफाई में: संवेदनशील मशीनों के छोटे या कठिन भागों की सफाई के लिए उपयोग किया जाता है।
- औद्योगिक परीक्षण: धातु के खंडों के अंदर छिपे दोषों का पता लगाने में उपयोग किया जाता है।
- स्थान निर्धारण: परावर्तित पराश्रव्य तरंगों की सहायता से वस्तुओं की स्थिति और दूरी ज्ञात की जा सकती है।
प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण
परिभाषा: परावर्तित ध्वनि तरंगों की सहायता से किसी वस्तु की स्थिति, दूरी या दिशा का पता लगाने की क्षमता को प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण (Echolocation) कहते हैं।
इस प्रक्रिया में ध्वनि तरंगें किसी वस्तु से टकराकर वापस आती हैं। वापस आने वाली ध्वनि के आधार पर वस्तु की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
चमगादड़ द्वारा प्रतिध्वनि स्थान निर्धारण
चमगादड़ निशाचर जीव हैं और अंधेरे में उड़ते समय पराश्रव्य तरंगों का उपयोग करके अपने आसपास की वस्तुओं तथा शिकार का पता लगा सकते हैं।
चमगादड़ पराश्रव्य तरंगों के छोटे-छोटे स्पंद उत्सर्जित करते हैं। ये तरंगें आसपास की वस्तुओं से टकराकर परावर्तित होती हैं। चमगादड़ इन परावर्तित तरंगों को ग्रहण करके बाधाओं और शिकार की स्थिति का अनुमान लगाते हैं।
ध्वनि का उत्सर्जन → वस्तु से टकराना → ध्वनि का परावर्तन → परावर्तित ध्वनि का ग्रहण → वस्तु की स्थिति का पता
अन्य जीवों में उपयोग
चमगादड़ों के अतिरिक्त डॉल्फिन, व्हेल तथा कुछ पक्षी भी दिशा-निर्धारण और शिकार के लिए प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण का उपयोग करते हैं।
सोनार (SONAR)
पूरा नाम: Sound Navigation and Ranging
परिभाषा: सोनार एक ऐसी तकनीक है जिसमें पराश्रव्य तरंगों को जल में भेजकर उनके परावर्तन का विश्लेषण किया जाता है और जल के भीतर स्थित वस्तुओं की दूरी, दिशा तथा स्थिति का पता लगाया जाता है।
सोनार की कार्यप्रणाली
सोनार उपकरण जल में पराश्रव्य तरंगों का संकेत भेजता है। ये तरंगें जल के भीतर किसी वस्तु से टकराकर वापस लौटती हैं। वापस आने में लगे समय और ध्वनि की चाल की सहायता से वस्तु की दूरी ज्ञात की जाती है।
पराश्रव्य तरंग भेजना → वस्तु से परावर्तन → संकेत वापस आना → समय मापना → दूरी ज्ञात करना
सोनार के उपयोग
- समुद्र के भीतर पनडुब्बियों का पता लगाने में।
- डूबे हुए जहाजों के अवशेषों का पता लगाने में।
- समुद्र के भीतर स्थित वस्तुओं की दूरी ज्ञात करने में।
- समुद्र की गहराई मापने में।
- जल के भीतर वस्तुओं की दिशा और स्थिति का पता लगाने में।
सोनार से दूरी ज्ञात करने का सूत्र
सोनार संकेत वस्तु तक जाकर वापस लौटता है, इसलिए मापे गए समय में संकेत द्वारा तय की गई दूरी वस्तु की वास्तविक दूरी की दोगुनी होती है।
वस्तु की दूरी = (ध्वनि की चाल × कुल समय) ÷ 2
d = vt/2
जहाँ d वस्तु की दूरी, v माध्यम में ध्वनि की चाल तथा t संकेत के जाने और वापस आने का कुल समय है।
उदाहरण
समुद्री जल में भेजा गया एक सोनार संकेत 0.90 सेकंड के बाद वापस लौटता है। समुद्री जल में ध्वनि की चाल 1530 m/s है। वस्तु की दूरी ज्ञात कीजिए।
दिया गया:
v = 1530 m/s
t = 0.90 s
सूत्र:
d = vt/2
हल:
d = (1530 × 0.90)/2
d = 1377/2
d = 688.5 m
अतः वस्तु की दूरी 688.5 m है।
ध्वनि आधारित चौकसी
दूरनियंत्रित यान और विमान अपने मोटरों तथा इंजनों से विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न करते हैं। जब वे दिखाई नहीं देते, तब भी उनके द्वारा उत्पन्न विशिष्ट ध्वनि को ध्वनि संवेदकों की सहायता से पहचाना जा सकता है।
इस प्रकार की विधि को ध्वनि आधारित चौकसी कहा जाता है। इसका उपयोग रक्षा और बचाव के लिए वाय क्षेत्र के पर्यवेक्षण में किया जा सकता है।
Concept Builder
20 Hz से कम → अवश्रव्य → प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन
20 Hz–20 kHz → मानव श्रव्य परिसर → सामान्य श्रव्य ध्वनि
20 kHz से अधिक → पराश्रव्य → चिकित्सा, उद्योग, सोनार और स्थान निर्धारण
Echolocation: परावर्तित ध्वनि की सहायता से वस्तु की स्थिति ज्ञात करना।
SONAR: जल में पराश्रव्य तरंगों के परावर्तन से वस्तुओं की दूरी और स्थिति ज्ञात करना।
Exam Booster
- मानव की श्रवण सीमा क्या है? — लगभग 20 Hz से 20 kHz।
- अवश्रव्य तरंगें किसे कहते हैं? — 20 Hz से कम आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को।
- पराश्रव्य तरंगें किसे कहते हैं? — 20 kHz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को।
- पराश्रव्य तरंगों का चिकित्सा में एक उपयोग लिखिए। — अल्ट्रासोनोग्राफी तथा गुर्दे की पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ने में।
- Echolocation क्या है? — परावर्तित ध्वनि तरंगों की सहायता से वस्तु का स्थान ज्ञात करना।
- चमगादड़ अंधेरे में वस्तुओं का पता कैसे लगाते हैं? — पराश्रव्य तरंगें भेजकर उनकी परावर्तित तरंगों का उपयोग करते हैं।
- SONAR का पूरा नाम क्या है? — Sound Navigation and Ranging।
- SONAR में किस प्रकार की तरंगों का उपयोग होता है? — पराश्रव्य तरंगों का।
- SONAR का मुख्य सिद्धांत क्या है? — ध्वनि तरंगों के परावर्तन का सिद्धांत।
- SONAR से दूरी ज्ञात करने का सूत्र क्या है? — d = vt/2
- SONAR का उपयोग कहाँ किया जाता है? — समुद्र में पनडुब्बियों, डूबे जहाजों, समुद्र की गहराई और अन्य जलमग्न वस्तुओं का पता लगाने में।
- डॉल्फिन और व्हेल किस प्रकार ध्वनि का उपयोग करती हैं? — दिशा-निर्धारण और शिकार का पता लगाने के लिए प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण में।