Chapter ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi मानव द्वारा ध्वनि-बोध - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
5. मानव द्वारा ध्वनि-बोध
अध्याय 10. ध्वनि तरंगें—अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
ध्वनि के भौतिक गुण जैसे आवर्तकाल, तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, आयाम और चाल को परिभाषित तथा मापा जा सकता है। लेकिन ध्वनि को अनुभव करने का तरीका व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकता है। मानव द्वारा ध्वनि के अनुभव को मुख्यतः तारत्व (Pitch) और प्रबलता (Loudness) जैसे शब्दों से समझाया जाता है।
मानव द्वारा ध्वनि-बोध
तारत्व (Pitch)
परिभाषा: ध्वनि की आवृत्ति का मानवीय बोध तारत्व कहलाता है।
- सीटी या सायरन जैसी तीक्ष्ण और कर्णभेदी ध्वनि का तारत्व सामान्यतः अधिक होता है।
- बादलों की गरज या विमान की गड़गड़ाहट जैसी गंभीर ध्वनि का तारत्व सामान्यतः कम होता है।
- उच्च तारत्व वाली ध्वनियों की आवृत्ति सामान्यतः अधिक होती है।
- कम तारत्व वाली ध्वनियों की आवृत्ति सामान्यतः कम होती है।
- तारत्व और आवृत्ति के बीच सटीक गणितीय संबंध सरल नहीं है।
मानव की श्रवण सीमा
मनुष्य सभी आवृत्तियों की ध्वनियाँ नहीं सुन सकता। सामान्यतः मनुष्य के लिए श्रवण सीमा लगभग 20 Hz से 20,000 Hz (20 kHz) तक होती है। यह सीमा व्यक्ति-विशेष के अनुसार बदल सकती है और आयु बढ़ने के साथ सामान्यतः घटती है।
| ध्वनि का प्रकार | आवृत्ति सीमा | मानव द्वारा श्रवण |
|---|---|---|
| अवश्रव्य (Infrasonic) | 20 Hz से कम | मनुष्य नहीं सुन सकता |
| श्रव्य सीमा | 20 Hz से 20 kHz | मनुष्य सुन सकता है |
| पराश्रव्य (Ultrasonic) | 20 kHz से अधिक | मनुष्य नहीं सुन सकता |
कुछ जानवर पराश्रव्य ध्वनि सुन सकते हैं। कुत्ते, बिल्लियाँ, चमगादड़ और डॉल्फिन पराश्रव्य तरंगों को सुन सकते हैं, जबकि हाथी अवश्रव्य तरंगों को सुन सकते हैं।
प्रबलता (Loudness)
परिभाषा: मनुष्य द्वारा ध्वनि तरंग के आयाम का अनुभव प्रबलता के रूप में किया जाता है।
- अधिक आयाम वाली ध्वनि अधिक तेज सुनाई देती है।
- कम आयाम वाली ध्वनि धीमी सुनाई देती है।
- ध्वनि स्रोत से दूरी बढ़ने पर ध्वनि की प्रबलता सामान्यतः कम होती जाती है।
- प्रबलता श्रोता की श्रवण क्षमता पर निर्भर करती है।
- प्रबलता को सामान्यतः डेसिबेल (dB) में व्यक्त किया जाता है।
तीव्रता और प्रबलता में अंतर
तीव्रता (Intensity) एक मापन योग्य भौतिक राशि है, जबकि प्रबलता (Loudness) ध्वनि के बारे में श्रोता के अनुभव से संबंधित है। इसलिए दोनों शब्दों का सामान्य बातचीत में समान रूप से उपयोग होने पर भी वैज्ञानिक दृष्टि से इनमें अंतर है।
ध्वनि प्रदूषण
अवांछित या हानिकारक ध्वनि को शोर (Noise) कहा जाता है। अत्यधिक ध्वनि स्तर के संपर्क में विशेषकर लंबे समय तक रहने से स्वास्थ्य, नींद और श्रवण क्षमता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक तेज ध्वनि सुनने से सुनने की क्षमता कम हो सकती है।
श्रवण सहायक यंत्र
श्रवण क्षमता कम होने वाले व्यक्ति श्रवण सहायक यंत्र का उपयोग कर सकते हैं। इसमें सामान्यतः माइक्रोफोन, प्रवर्धक (Amplifier) और स्पीकर जैसे घटक होते हैं, जो सुनने में सहायता करते हैं।
मानव कान ध्वनि को कैसे सुनता है?
जब ध्वनि कान में प्रवेश करती है, तो वह कर्णपटल (Eardrum) नामक पतली झिल्ली में कंपन उत्पन्न करती है। कान की छोटी अस्थियाँ इन कंपनों को बढ़ाती हैं। इसके बाद कर्णावर्त (Cochlea) इन कंपनों को विद्युत संकेतों में बदलता है। ये संकेत मस्तिष्क तक पहुँचते हैं और मस्तिष्क इन्हें ध्वनि के रूप में अनुभव करता है।
दो कान होने का लाभ
दोनों कान मस्तिष्क को ध्वनि के स्रोत की दिशा निर्धारित करने में सहायता करते हैं। मस्तिष्क यह तुलना करता है कि किस कान तक ध्वनि पहले पहुँची और दोनों कानों तक पहुँचने वाली ध्वनि के बीच अत्यंत छोटे समयांतर के आधार पर ध्वनि के स्रोत की दिशा का अनुमान लगाता है।
स्वर, मूल आवृत्ति और ध्वनि-गुणता
स्वर (Tone)
एकल आवृत्ति-मान वाली ध्वनि को स्वर कहा जाता है। उदाहरण के लिए, स्वरित्र द्विभुज या सीटी से लगभग एकल आवृत्ति की ध्वनि प्राप्त की जा सकती है।
संगीत का स्वर और मूल आवृत्ति
तानपुरे के तार को छेड़ने या गाने से उत्पन्न संगीत के स्वर में निम्नतम आवृत्ति के साथ उच्चतर आवृत्तियों का संयोजन होता है। निम्नतम आवृत्ति को मूल आवृत्ति (Fundamental Frequency) तथा उच्चतर आवृत्तियों को अधिस्वरक (Overtones) कहा जाता है। इनके संयोजन से समृद्ध और सुखद ध्वनि उत्पन्न होती है।
ध्वनि-गुणता (Timbre)
परिभाषा: अलग-अलग वाद्ययंत्रों द्वारा समान प्रबलता और समान स्वर बजाने पर भी उनकी ध्वनियाँ अलग और विशिष्ट सुनाई देती हैं। ध्वनि की इस विशेषता को ध्वनि-गुणता (Timbre) कहते हैं।
ध्वनि-गुणता वाद्ययंत्र के आकार, पदार्थ और संरचना पर निर्भर करती है। ये कारक अधिस्वरकों के प्रतिरूप और तीव्रता को प्रभावित करते हैं।
अष्टक (Octave)
परिभाषा: ऐसे दो सम स्वरों के बीच का अंतराल जिनमें एक की मूल आवृत्ति दूसरे की मूल आवृत्ति की दो गुनी होती है, अष्टक कहलाता है।
उदाहरण: 200 Hz और 400 Hz की मूल आवृत्तियाँ एक अष्टक का उदाहरण हैं।
भारतीय वाद्ययंत्र और ध्वनि
सारंगी, सितार और वीणा जैसे भारतीय तार वाद्ययंत्रों में विभिन्न आवृत्तियों के संयोजन को समृद्ध बनाने के लिए अतिरिक्त तारों का उपयोग किया जाता है। तबला और मृदंगम जैसे ताल वाद्ययंत्र भी विशिष्ट और समृद्ध ध्वनियाँ उत्पन्न करते हैं।
‘स्याही’ और तबले की ध्वनि
तबला या मृदंगम के ढोल-शीर्ष पटल के केंद्र पर लगाया जाने वाला काला धब्बा ‘स्याही’ कहलाता है। यह पटल के कंपनों को बदलता है और वाद्ययंत्र को विभिन्न प्रकार की समृद्ध ध्वनियाँ उत्पन्न करने में सहायता करता है।
ध्वनि का परावर्तन
परिभाषा: जब ध्वनि तरंगें किसी ठोस या द्रव जैसी बाधा से टकराकर वापस लौटती हैं, तो इस घटना को ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) कहते हैं।
ध्वनि का परावर्तन भी प्रकाश के परावर्तन के समान नियमों का पालन करता है। आपतित ध्वनि, परावर्तित ध्वनि और अभिलंब एक ही तल में होते हैं तथा आपतन और परावर्तन की दिशाएँ अभिलंब के साथ समान कोण बनाती हैं।
ध्वनि के परावर्तन के नियम
- आपतित ध्वनि, परावर्तित ध्वनि और अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
- आपतन कोण और परावर्तन कोण समान होते हैं।
- कठोर और चिकनी सतहें ध्वनि को अच्छी तरह परावर्तित करती हैं।
- मुलायम सतहें ध्वनि को अधिक मात्रा में अवशोषित कर सकती हैं।
- खुरदरी सतहें ध्वनि को विभिन्न दिशाओं में प्रकीर्णित कर सकती हैं।
प्रतिध्वनि (Echo)
परिभाषा: किसी दूर स्थित कठोर सतह से परावर्तित होकर वापस आने वाली ध्वनि, जो मूल ध्वनि से अलग सुनाई देती है, प्रतिध्वनि कहलाती है।
यदि मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के कान तक पहुँचने के बीच कम-से-कम 0.1 सेकंड का समयांतर हो, तो मनुष्य दोनों ध्वनियों को अलग-अलग सुन सकता है।
प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम दूरी
वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s मानने पर 0.1 s में ध्वनि द्वारा तय दूरी:
दूरी = चाल × समय
= 340 × 0.1 = 34 m
यह 34 m ध्वनि द्वारा परावर्तक सतह तक जाकर वापस आने की कुल दूरी है। इसलिए परावर्तक सतह की न्यूनतम दूरी लगभग:
34 ÷ 2 = 17 m
अर्थात स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक सतह लगभग 17 m या उससे अधिक दूर होनी चाहिए, यदि वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s ली जाए।
प्रतिध्वनि का उदाहरण
यदि किसी गलियारे में ताली बजाने के 0.5 s बाद प्रतिध्वनि सुनाई देती है और ध्वनि की चाल 340 m/s है, तो दीवार से दूरी:
दूरी = (v × t) ÷ 2
= (340 × 0.5) ÷ 2 = 85 m
अतः दीवार लगभग 85 m दूर है।
अनुरणन (Reverberation)
परिभाषा: बड़े हॉल या सभागार में ध्वनि का दीवारों और अन्य सतहों से बार-बार परावर्तन होने के कारण स्रोत के बंद होने के बाद भी कुछ समय तक ध्वनि सुनाई देती रहती है। इस घटना को अनुरणन कहते हैं।
जब विभिन्न सतहों से परावर्तित ध्वनियाँ बहुत कम समयांतराल में, लगभग 0.05 सेकंड से कम अंतर में, कान तक पहुँचती हैं, तब अनुरणन का अनुभव होता है।
अनुरणन को नियंत्रित करना
अधिक अनुरणन से भाषण, संगीत और अन्य ध्वनियाँ अस्पष्ट एवं विकृत हो सकती हैं। इसलिए सभागारों में ध्वनि-अवशोषक पैनल, गद्देदार कुर्सियाँ, पर्दे तथा अन्य मुलायम और छिद्रयुक्त सतहों का उपयोग किया जाता है। ये अनावश्यक परावर्तन को कम करती हैं।
पराश्रव्य और अवश्रव्य तरंगें तथा उनके अनुप्रयोग
अवश्रव्य तरंगें (Infrasonic Waves)
परिभाषा: 20 Hz से कम आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को अवश्रव्य तरंगें कहते हैं।
- भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी प्राकृतिक घटनाओं का पता लगाने में उपयोगी।
- तीव्र झंझावातों का पता लगाने में उपयोगी।
- इन तरंगों की आवृत्ति मानव श्रवण सीमा से कम होती है।
पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Waves)
परिभाषा: 20 kHz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को पराश्रव्य तरंगें कहते हैं।
पराश्रव्य तरंगों के अनुप्रयोग
- अल्ट्रासोनोग्राफी: बिना शल्यक्रिया के शरीर के आंतरिक अंगों की छवि प्राप्त करने में उपयोग।
- गुर्दे की पथरी: पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने में उपयोग।
- अल्ट्रासोनिक वेल्डिंग: उद्योगों में उपयोग।
- सफाई: संवेदनशील मशीन के भागों की सफाई में उपयोग।
- औद्योगिक परीक्षण: धातु के खंडों के भीतर छिपे दोषों का पता लगाने में उपयोग।
- स्थान निर्धारण: परावर्तित ध्वनि के आधार पर वस्तुओं का स्थान पता करने में उपयोग।
प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण (Echolocation)
परिभाषा: परावर्तित ध्वनि तरंगों की सहायता से वस्तुओं का स्थान ज्ञात करने की क्षमता को प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण (Echolocation) कहते हैं।
चमगादड़ में प्रतिध्वनि स्थान निर्धारण
चमगादड़ अंधेरे में उड़ते समय पराश्रव्य तरंगों के छोटे-छोटे स्पंद उत्सर्जित करते हैं। ये तरंगें आसपास की वस्तुओं से परावर्तित होकर वापस आती हैं। चमगादड़ इन प्रतिध्वनियों की सहायता से बाधाओं और शिकार की स्थिति का पता लगाते हैं।
डॉल्फिन, व्हेल तथा कुछ पक्षी भी दिशा-निर्धारण और शिकार के लिए प्रतिध्वनि द्वारा स्थान निर्धारण का उपयोग करते हैं।
सोनार (SONAR)
SONAR का अर्थ Sound Navigation and Ranging है। मनुष्यों ने प्रतिध्वनि स्थान निर्धारण के सिद्धांत का उपयोग जल के भीतर वस्तुओं की खोज के लिए सोनार में किया है।
सोनार में पराश्रव्य तरंगों को जल में भेजा जाता है। किसी वस्तु से परावर्तित होकर लौटने वाली तरंगों का विश्लेषण करके वस्तु की दूरी, दिशा और गति का पता लगाया जा सकता है। इसका उपयोग पनडुब्बियों और जहाजों के अवशेषों का पता लगाने में किया जाता है।
सोनार से दूरी ज्ञात करने का सूत्र
सोनार तरंग वस्तु तक जाकर वापस आती है, इसलिए दी गई दूरी ज्ञात करने के लिए कुल समय का आधा समय लिया जाता है।
वस्तु की दूरी = (ध्वनि की चाल × कुल समय) ÷ 2
सोनार का उदाहरण
यदि समुद्री जल में ध्वनि की चाल 1530 m/s है और सोनार संकेत 0.90 s में वापस आता है, तो वस्तु तक पहुँचने का समय:
0.90 ÷ 2 = 0.45 s
अतः दूरी:
दूरी = 1530 × 0.45 = 688.5 m
इसलिए वस्तु की दूरी 688.5 m है।
ध्वनि के आधुनिक अनुप्रयोग
- सोनार द्वारा समुद्र के भीतर वस्तुओं की खोज।
- चमगादड़ द्वारा शिकार और बाधाओं का पता लगाना।
- चिकित्सा में अल्ट्रासोनोग्राफी।
- गुर्दे की पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ना।
- औद्योगिक वेल्डिंग और सफाई।
- धातु के भीतर छिपे दोषों की पहचान।
- दूरस्थ स्थानों और प्राकृतिक घटनाओं के अध्ययन में ध्वनि का उपयोग।
- दूर से आने वाले विमानों और ड्रोन की ध्वनि पहचानकर निगरानी में सहायता।
परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु
- तारत्व: आवृत्ति का मानवीय बोध।
- प्रबलता: ध्वनि के आयाम का मानवीय बोध।
- श्रव्य सीमा: लगभग 20 Hz से 20 kHz।
- अवश्रव्य: 20 Hz से कम।
- पराश्रव्य: 20 kHz से अधिक।
- ध्वनि-गुणता: समान स्वर और प्रबलता वाली ध्वनियों में अंतर पहचानने का गुण।
- अष्टक: ऐसी दो मूल आवृत्तियाँ जिनमें एक दूसरी की दो गुनी हो।
- परावर्तन: बाधा से टकराकर ध्वनि का वापस लौटना।
- प्रतिध्वनि: परावर्तित ध्वनि का मूल ध्वनि से अलग सुनाई देना।
- प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम समयांतर: 0.1 s।
- 340 m/s पर प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम दूरी: लगभग 17 m।
- अनुरणन: अनेक परावर्तनों के कारण ध्वनि का स्रोत बंद होने के बाद भी कुछ समय तक सुनाई देना।
- SONAR: Sound Navigation and Ranging।
- SONAR में प्रयुक्त तरंग: पराश्रव्य तरंग।
- SONAR दूरी सूत्र: दूरी = (चाल × कुल समय) ÷ 2।
- Echolocation: परावर्तित ध्वनि की सहायता से वस्तु का स्थान ज्ञात करना।