Chapter ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi मानव द्वारा ध्वनि-बोध - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
7. मानव द्वारा ध्वनि-बोध
अध्याय 10. ध्वनि तरंगें—अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
ध्वनि के भौतिक गुणों को मापा जा सकता है, लेकिन ध्वनि का अनुभव प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। इस भाग में हम समझेंगे कि मनुष्य ध्वनि को किस प्रकार अनुभव करता है और ध्वनि की आवृत्ति तथा आयाम का हमारे श्रवण-बोध पर क्या प्रभाव पड़ता है।
मानव द्वारा ध्वनि-बोध
ध्वनि के आवर्तकाल, तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, आयाम और चाल जैसे भौतिक गुणों को मापा जा सकता है। लेकिन किसी ध्वनि को सुनने और अनुभव करने की प्रक्रिया व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकती है। ध्वनि के मानवीय बोध को सामान्यतः तारत्व (Pitch) और प्रबलता (Loudness) जैसे शब्दों से व्यक्त किया जाता है।
तारत्व (Pitch)
परिभाषा: ध्वनि की आवृत्ति का मानव द्वारा किया जाने वाला बोध तारत्व कहलाता है।
जिस ध्वनि की आवृत्ति अधिक होती है, उसका तारत्व सामान्यतः अधिक अनुभव होता है। इसी प्रकार कम आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व कम अनुभव होता है।
- सीटी और सायरन जैसी तीखी ध्वनियों का तारत्व सामान्यतः अधिक होता है।
- बादलों की गरज और विमान की गर्जना जैसी गंभीर ध्वनियों का तारत्व कम होता है।
- उच्च तारत्व वाली ध्वनि की आवृत्ति सामान्यतः अधिक होती है।
- कम तारत्व वाली ध्वनि की आवृत्ति सामान्यतः कम होती है।
- तारत्व और आवृत्ति के बीच संबंध है, लेकिन दोनों को पूरी तरह समान नहीं माना जाता क्योंकि तारत्व मानव का श्रवण-बोध है।
मनुष्य की आवाज में भी अंतर केवल आवृत्ति के कारण नहीं होता। गले, मुँह और नासा-गुहा से ध्वनि उत्पन्न होने की प्रक्रिया भी आवाज को प्रभावित करती है। किशोरावस्था में लड़कों के स्वर-तंतु लंबे और मोटे हो जाते हैं और सामान्यतः कम कंपन करते हैं, इसलिए उनकी आवाज में अधिक गहराई आ जाती है।
श्रव्यता परिसर
परिभाषा: मनुष्य जिन आवृत्तियों की ध्वनियों को सुन सकता है, उन आवृत्तियों के पूरे परिसर को श्रव्यता परिसर कहते हैं।
मनुष्य सभी प्रकार की ध्वनियों को नहीं सुन सकता। सामान्यतः मनुष्य के लिए श्रव्यता परिसर लगभग 20 Hz से 20,000 Hz (20 kHz) तक होता है। हालांकि यह सीमा प्रत्येक व्यक्ति में थोड़ी अलग हो सकती है और उम्र बढ़ने के साथ सामान्यतः कम होती जाती है।
अवश्रव्य तरंगें
परिभाषा: 20 Hz से कम आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को अवश्रव्य तरंगें (Infrasonic Waves) कहते हैं।
- मनुष्य सामान्यतः अवश्रव्य तरंगों को नहीं सुन सकता।
- हाथी जैसे कुछ जानवर ऐसी निम्न आवृत्ति वाली तरंगों को अनुभव कर सकते हैं।
- इन तरंगों का उपयोग प्राकृतिक घटनाओं के अध्ययन में किया जा सकता है।
पराश्रव्य तरंगें
परिभाषा: 20 kHz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Waves) कहते हैं।
- मनुष्य सामान्यतः पराश्रव्य तरंगों को नहीं सुन सकता।
- कुत्ते, बिल्लियाँ, चमगादड़ और डॉल्फिन जैसी कुछ प्रजातियाँ पराश्रव्य तरंगों को सुन सकती हैं।
- पराश्रव्य तरंगों का विज्ञान, चिकित्सा और तकनीकी क्षेत्रों में अनेक उपयोग हैं।
| ध्वनि का प्रकार | आवृत्ति सीमा | मनुष्य द्वारा श्रवण |
|---|---|---|
| अवश्रव्य | 20 Hz से कम | नहीं |
| श्रव्य | 20 Hz से 20 kHz | हाँ |
| पराश्रव्य | 20 kHz से अधिक | नहीं |
मनुष्य की श्रव्य सीमा आयु और व्यक्ति के अनुसार बदल सकती है। उम्र बढ़ने के साथ उच्च आवृत्तियों को सुनने की क्षमता कम हो सकती है।
प्रबलता (Loudness)
परिभाषा: ध्वनि तरंग के आयाम का मानव द्वारा किया जाने वाला बोध प्रबलता कहलाता है।
ध्वनि का आयाम जितना अधिक होता है, ध्वनि उतनी ही अधिक प्रबल सुनाई देती है। कम आयाम वाली ध्वनि धीमी सुनाई देती है।
- अधिक आयाम → अधिक प्रबल ध्वनि
- कम आयाम → कम प्रबल ध्वनि
- ध्वनि स्रोत से दूर जाने पर ध्वनि की प्रबलता कम होती जाती है।
- प्रबलता श्रोता की श्रवण क्षमता पर भी निर्भर करती है।
ध्यान दें: सामान्य बोलचाल में प्रबलता और तीव्रता शब्दों का अक्सर समान अर्थ में प्रयोग कर लिया जाता है, लेकिन विज्ञान में दोनों अलग हैं। तीव्रता एक मापी जा सकने वाली भौतिक राशि है, जबकि प्रबलता ध्वनि का मानव द्वारा किया गया अनुभव है।
ध्वनि का डेसिबेल स्तर
ध्वनि की प्रबलता को सामान्यतः डेसिबेल (dB) में व्यक्त किया जाता है। ध्वनि का डेसिबेल स्तर बढ़ने पर ध्वनि अधिक प्रबल अनुभव हो सकती है।
- पत्तियों की सरसराहट जैसी बहुत धीमी ध्वनियाँ कुछ dB की हो सकती हैं।
- सामान्य वार्तालाप लगभग 60 dB के आसपास हो सकता है।
- पटाखों जैसी बहुत तेज ध्वनि 100 dB से अधिक हो सकती है।
डेसिबेल स्तर में थोड़ी-सी वृद्धि भी ध्वनि की तीव्रता में बहुत अधिक वृद्धि कर सकती है। इसलिए अत्यधिक तेज ध्वनि से बचना आवश्यक है।
शोर और ध्वनि प्रदूषण
परिभाषा: ऐसी अवांछित या हानिकारक ध्वनि जिसे हम नहीं सुनना चाहते, शोर (Noise) कहलाती है।
ध्वनि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। निर्धारित सीमाओं से अधिक ध्वनि स्तर के संपर्क में विशेष रूप से लंबे समय तक रहने से स्वास्थ्य, नींद और श्रवण क्षमता प्रभावित हो सकती है।
- लंबे समय तक तेज ध्वनि सुनने से सुनने की क्षमता कम हो सकती है।
- लगातार तेज ध्वनि नींद और सामान्य स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
- श्रवण क्षमता की जाँच के लिए श्रवण आलेख का उपयोग किया जा सकता है।
- श्रवण ह्रास वाले व्यक्ति श्रवण सहायक यंत्र का उपयोग कर सकते हैं।
मानव कान द्वारा ध्वनि का बोध
जब ध्वनि हमारे कान में प्रवेश करती है, तो वह कान के अंदर उपस्थित विभिन्न संरचनाओं के माध्यम से विद्युत संकेतों में बदलती है और अंततः मस्तिष्क तक पहुँचती है। मस्तिष्क इन संकेतों को ध्वनि के रूप में अनुभव करता है।
कर्णपटल का कार्य
कर्णपटल (Eardrum): ध्वनि तरंग कान में प्रवेश करने पर कर्णपटल में कंपन उत्पन्न करती है।
कान की छोटी अस्थियों का कार्य
कान की छोटी अस्थियाँ कर्णपटल से प्राप्त कंपनों को आगे पहुँचाती हैं और उन्हें प्रभावी रूप से बढ़ाती हैं।
कर्णावर्त का कार्य
कर्णावर्त (Cochlea) इन कंपनों को विद्युत संकेतों में परिवर्तित करता है। ये विद्युत संकेत मस्तिष्क तक पहुँचते हैं और मस्तिष्क इन्हें ध्वनि के रूप में अनुभव करता है।
इस प्रकार ध्वनि के सुनाई देने की प्रक्रिया में कर्णपटल → कान की छोटी अस्थियाँ → कर्णावर्त → विद्युत संकेत → मस्तिष्क का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
दोनों कानों का महत्त्व
दो कान होने से मस्तिष्क को ध्वनि के स्रोत की दिशा निर्धारित करने में सहायता मिलती है। मस्तिष्क यह तुलना करता है कि ध्वनि किस कान तक पहले पहुँची और दोनों कानों तक पहुँचने वाली ध्वनियों के बीच कितना सूक्ष्म समयांतर है। इसी जानकारी के आधार पर ध्वनि के आने की दिशा का अनुमान लगाया जाता है।
विभिन्न जीवों में ध्वनि का बोध
सभी जीव ध्वनि को मनुष्य की तरह नहीं सुनते। कुछ जीव अपने शरीर के माध्यम से कंपन को अनुभव करते हैं, जबकि कुछ कीटों के शरीर के विशेष भागों पर श्रवण अंग पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, साँप और मछलियाँ अपने शरीर के माध्यम से कंपन का अनुभव कर सकती हैं।
Concept Builder
- तारत्व: आवृत्ति का मानव द्वारा किया गया बोध।
- प्रबलता: आयाम का मानव द्वारा किया गया बोध।
- तीव्रता: ध्वनि ऊर्जा के संचरण से संबंधित मापनीय भौतिक राशि।
- श्रव्य सीमा: लगभग 20 Hz से 20 kHz।
- अवश्रव्य: 20 Hz से कम।
- पराश्रव्य: 20 kHz से अधिक।
- अधिक आवृत्ति: सामान्यतः अधिक तारत्व।
- अधिक आयाम: सामान्यतः अधिक प्रबल ध्वनि।
- प्रबलता की इकाई: डेसिबेल (dB)।
- कर्णपटल: ध्वनि के कारण कंपन करता है।
- कर्णावर्त: कंपन को विद्युत संकेतों में बदलने में सहायता करता है।
Exam Booster
- प्रश्न: तारत्व किस भौतिक राशि से संबंधित है?
उत्तर: आवृत्ति से। - प्रश्न: प्रबलता किससे संबंधित है?
उत्तर: ध्वनि तरंग के आयाम से। - प्रश्न: मनुष्य की सामान्य श्रव्य सीमा क्या है?
उत्तर: लगभग 20 Hz से 20 kHz। - प्रश्न: 20 Hz से कम आवृत्ति वाली तरंगों को क्या कहते हैं?
उत्तर: अवश्रव्य तरंगें। - प्रश्न: 20 kHz से अधिक आवृत्ति वाली तरंगों को क्या कहते हैं?
उत्तर: पराश्रव्य तरंगें। - प्रश्न: ध्वनि की प्रबलता सामान्यतः किस इकाई में व्यक्त की जाती है?
उत्तर: डेसिबेल (dB)। - प्रश्न: अत्यधिक तेज ध्वनि को लंबे समय तक सुनने से क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: श्रवण क्षमता, नींद और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। - प्रश्न: कान में ध्वनि के कारण सबसे पहले कौन-सी प्रमुख झिल्ली कंपन करती है?
उत्तर: कर्णपटल। - प्रश्न: कर्णावर्त का क्या कार्य है?
उत्तर: यह कंपन को विद्युत संकेतों में बदलने में सहायता करता है, जिन्हें मस्तिष्क ध्वनि के रूप में अनुभव करता है। - प्रश्न: क्या प्रबलता और तीव्रता एक ही हैं?
उत्तर: नहीं। तीव्रता मापी जा सकने वाली भौतिक राशि है, जबकि प्रबलता ध्वनि का मानव द्वारा किया गया अनुभव है।