Chapter ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग Class 9 Science Exploration CBSE notes in hindi ध्वनि तरंगें - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 9 English Medium Science Exploration All Chapters:
ध्वनि तरंगें अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
4. ध्वनि तरंगें
अध्याय 10. ध्वनि तरंगें—अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग
ध्वनि के संचरण के लिए भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है। अब हम समझेंगे कि माध्यम के भीतर ध्वनि किस प्रकार आगे बढ़ती है, माध्यम के कण किस प्रकार कंपन करते हैं, संपीडन और विरलन कैसे बनते हैं तथा ध्वनि तरंगों में ऊर्जा का स्थानांतरण किस प्रकार होता है।
ध्वनि तरंगें (Sound Waves)
परिभाषा: माध्यम में उत्पन्न होने वाला वह विक्षोभ जो ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाता है, तरंग कहलाता है। ध्वनि का संचरण माध्यम में तरंग के रूप में होता है।
जब कोई ध्वनि स्रोत कंपन करता है, तो उसके आसपास के माध्यम के कण भी कंपन करने लगते हैं। ये कण अपने निकट के कणों को प्रभावित करते हैं और इस प्रकार विक्षोभ एक स्थान से दूसरे स्थान तक आगे बढ़ता है।
ध्वनि तरंग यांत्रिक तरंग है
परिभाषा: जिस तरंग के संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है, उसे यांत्रिक तरंग (Mechanical Wave) कहते हैं।
ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है क्योंकि इसके संचरण के लिए ठोस, द्रव या गैस जैसे भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है। निर्वात में ध्वनि संचरित नहीं हो सकती।
ध्वनि तरंग में माध्यम के कणों की गति
ध्वनि तरंग के संचरण के दौरान माध्यम के कण तरंग के साथ लगातार आगे नहीं बढ़ते। वे अपनी माध्य स्थिति के आसपास कंपन करते हैं और अपने निकट के कणों को यह विक्षोभ प्रदान करते हैं। इस प्रकार ऊर्जा आगे बढ़ती है, जबकि माध्यम के कण अपने स्थान के आसपास ही दोलन करते हैं।
महत्त्वपूर्ण: ध्वनि तरंग के संचरण में ऊर्जा का स्थानांतरण होता है, माध्यम के कणों का स्थायी स्थानांतरण नहीं होता।
माध्यम के कण और ध्वनि का संचरण
माध्यम के कण सामान्य परिस्थितियों में भी तापीय ऊर्जा के कारण यादृच्छिक गति करते रहते हैं। जब ध्वनि तरंग माध्यम से गुजरती है, तो इन कणों के कंपन में अस्थायी वृद्धि होती है। तरंग के गुजर जाने के बाद कण अपनी सामान्य यादृच्छिक गति की ओर लौट आते हैं।
संपीडन और विरलन
संपीडन (Compression)
परिभाषा: ध्वनि तरंग के उस क्षेत्र को संपीडन कहते हैं जहाँ माध्यम के कण एक-दूसरे के अपेक्षाकृत पास होते हैं और वहाँ माध्यम का घनत्व औसत घनत्व से अधिक होता है।
जब ध्वनि स्रोत आगे की ओर कंपन करता है, तो वह अपने सामने के माध्यम के कणों को पास-पास कर देता है। इससे उच्च घनत्व वाला क्षेत्र बनता है, जिसे संपीडन कहते हैं। इसे सामान्यतः C से प्रदर्शित किया जाता है।
विरलन (Rarefaction)
परिभाषा: ध्वनि तरंग के उस क्षेत्र को विरलन कहते हैं जहाँ माध्यम के कण एक-दूसरे से अपेक्षाकृत दूर होते हैं और वहाँ माध्यम का घनत्व औसत घनत्व से कम होता है।
जब ध्वनि स्रोत पीछे की ओर गति करता है, तो उसके आसपास के माध्यम के कणों के बीच दूरी बढ़ जाती है। इससे निम्न घनत्व वाला क्षेत्र बनता है, जिसे विरलन कहते हैं। इसे सामान्यतः R से प्रदर्शित किया जाता है।
संपीडन और विरलन का क्रम
ध्वनि तरंग के संचरण के दौरान संपीडन और विरलन एक के बाद एक बनते रहते हैं। इस प्रकार माध्यम में उच्च और निम्न घनत्व वाले क्षेत्रों का क्रम बनता है। यही क्रम ध्वनि तरंग के आगे बढ़ने का आधार है।
सरल क्रम:
संपीडन → विरलन → संपीडन → विरलन → संपीडन
संपीडन और विरलन में अंतर
| आधार | संपीडन | विरलन |
|---|---|---|
| कणों की स्थिति | कण पास-पास होते हैं | कण दूर-दूर होते हैं |
| घनत्व | औसत घनत्व से अधिक | औसत घनत्व से कम |
| दाब | अधिक | कम |
| प्रतीक | C | R |
ध्वनि तरंगों के प्रकार
यांत्रिक तरंगों को माध्यम के कणों के कंपन की दिशा और तरंग के संचरण की दिशा के आधार पर मुख्यतः दो प्रकारों में समझा जाता है—अनुदैर्ध्य तरंगें और अनुप्रस्थ तरंगें।
अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal Wave)
परिभाषा: जिस तरंग में माध्यम के कणों का कंपन तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर होता है, उसे अनुदैर्ध्य तरंग कहते हैं।
ध्वनि तरंग अनुदैर्ध्य तरंग का उदाहरण है। इसमें माध्यम के कण तरंग के आगे बढ़ने की दिशा के समानांतर आगे-पीछे कंपन करते हैं। संपीडन और विरलन इसी प्रकार की तरंग में बनते हैं।
अनुप्रस्थ तरंग (Transverse Wave)
परिभाषा: जिस तरंग में माध्यम के कणों का कंपन तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत होता है, उसे अनुप्रस्थ तरंग कहते हैं।
अनुप्रस्थ तरंग में माध्यम के कण ऊपर-नीचे या दाएँ-बाएँ कंपन कर सकते हैं, जबकि तरंग आगे की दिशा में संचरित होती है। इसमें शिखर (Crest) और गर्त (Trough) जैसे क्षेत्र दिखाई देते हैं।
अनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ तरंगों में अंतर
| आधार | अनुदैर्ध्य तरंग | अनुप्रस्थ तरंग |
|---|---|---|
| कणों के कंपन की दिशा | तरंग की दिशा के समानांतर | तरंग की दिशा के लंबवत |
| मुख्य क्षेत्र | संपीडन और विरलन | शिखर और गर्त |
| उदाहरण | ध्वनि तरंग | उपयुक्त माध्यम में अनुप्रस्थ यांत्रिक तरंग |
ध्वनि अनुदैर्ध्य तरंग क्यों है?
ध्वनि के संचरण के दौरान माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर आगे-पीछे कंपन करते हैं। इस कारण माध्यम में क्रमशः संपीडन और विरलन उत्पन्न होते हैं। इसलिए ध्वनि को अनुदैर्ध्य तरंग कहा जाता है।
भूकंपीय तरंगें
भूकंप के कारण पृथ्वी के भीतर से होकर चलने वाली तरंगों को भूकंपीय तरंगें (Seismic Waves) कहते हैं। ये अनुदैर्ध्य या अनुप्रस्थ दोनों प्रकार की हो सकती हैं। अनुदैर्ध्य भूकंपीय तरंगें भूकंप-लेखी द्वारा सबसे पहले पहचानी जाने वाली तरंगें होती हैं।
ध्वनि तरंगों की ऊर्जा
ध्वनि ऊर्जा का रूप है
परिभाषा: कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ध्वनि भी ऊर्जा का एक रूप है क्योंकि ध्वनि अपने संचरण के दौरान माध्यम में ऊर्जा का स्थानांतरण कर सकती है।
जब कोई ध्वनि स्रोत कंपन करता है, तो वह अपने आसपास के माध्यम में ऊर्जा स्थानांतरित करता है। माध्यम के कण कंपन करते हैं और अपने निकट के कणों से संपर्क के माध्यम से ऊर्जा को आगे स्थानांतरित करते हैं।
क्रियाकलाप — ध्वनि से अनाज के दानों की गति
एक चौड़े मुँह वाले पात्र पर सेलोफेन या रबड़ की पतली शीट को तानकर बाँधिए। शीट पर कुछ अनाज के दाने समान रूप से फैला दीजिए। अब शीट को छुए बिना उसके पास किसी धातु की प्लेट पर प्रहार करके तेज ध्वनि उत्पन्न कीजिए।
ध्वनि उत्पन्न होने पर शीट पर रखे अनाज के दाने गति करने या उछलने लगते हैं। इसका कारण यह है कि ध्वनि वायु के माध्यम से शीट तक पहुँचकर उसमें कंपन उत्पन्न करती है और शीट के कंपन के कारण अनाज के दाने गति करते हैं।
निष्कर्ष: इस क्रियाकलाप से स्पष्ट होता है कि ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है और ध्वनि स्रोत अपने आसपास के माध्यम में ऊर्जा स्थानांतरित करता है।
ध्वनि के संचरण में ऊर्जा का स्थानांतरण
ध्वनि के संचरण के दौरान माध्यम के कण अपने निकट के कणों से संपर्क करते हैं। एक कण में उत्पन्न कंपन उसके पड़ोसी कणों को प्रभावित करता है और इस प्रकार ऊर्जा एक कण से दूसरे कण तक आगे बढ़ती जाती है।
इस प्रक्रिया में माध्यम के कण ध्वनि स्रोत से श्रोता तक लगातार आगे नहीं जाते। वे अपनी माध्य स्थिति के आसपास कंपन करते हैं और ऊर्जा को आगे स्थानांतरित करते हैं।
ध्वनि स्रोत और माध्यम के बीच ऊर्जा का संबंध
ध्वनि स्रोत जितनी अधिक ऊर्जा माध्यम को प्रदान करता है, माध्यम के कणों में उतने ही अधिक कंपन उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए ध्वनि के उत्पादन में स्रोत के कंपन और ऊर्जा का महत्वपूर्ण संबंध होता है।
माइक्रोफोन और स्पीकर
माइक्रोफोन: माइक्रोफोन ध्वनि ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने में सहायता करता है। जब हम माइक्रोफोन के सामने बोलते या गाते हैं, तो उसमें लगी पतली झिल्ली, जिसे डायफ्राम (Diaphragm) कहते हैं, ध्वनि तरंगों के अनुरूप कंपन करती है। ये कंपन विद्युत संकेतों में परिवर्तित हो जाते हैं।
स्पीकर: स्पीकर माइक्रोफोन के विपरीत कार्य करता है। विद्युत संकेत स्पीकर के भीतर लगे शंकु या डायफ्राम को कंपन कराते हैं, जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है।
ऊर्जा रूपांतरण:
माइक्रोफोन: ध्वनि ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा
स्पीकर: विद्युत ऊर्जा → ध्वनि ऊर्जा
ध्वनि तरंग के बारे में मुख्य बातें
- ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है।
- ध्वनि के संचरण के लिए भौतिक माध्यम आवश्यक है।
- ध्वनि तरंग अनुदैर्ध्य तरंग का उदाहरण है।
- ध्वनि में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं।
- ध्वनि तरंग में संपीडन और विरलन बनते हैं।
- संपीडन में माध्यम का घनत्व औसत घनत्व से अधिक होता है।
- विरलन में माध्यम का घनत्व औसत घनत्व से कम होता है।
- ध्वनि के संचरण में ऊर्जा का स्थानांतरण होता है, माध्यम के कणों का स्थायी स्थानांतरण नहीं।
- अनुप्रस्थ तरंग में कणों का कंपन तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत होता है।
- ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है।
- माइक्रोफोन ध्वनि ऊर्जा को विद्युत संकेतों में बदलता है।
- स्पीकर विद्युत संकेतों के आधार पर ध्वनि उत्पन्न करता है।
Our Concept Builder
ध्वनि तरंग को समझने का सबसे आसान तरीका है—कंपन → माध्यम के कणों में कंपन → संपीडन और विरलन → ऊर्जा का स्थानांतरण। कण स्वयं ध्वनि स्रोत से श्रोता तक नहीं जाते; वे अपनी स्थिति के आसपास कंपन करते हैं और ऊर्जा को आगे के कणों तक पहुँचाते हैं।
Exam Booster
- ध्वनि किस प्रकार की तरंग है? — यांत्रिक तथा अनुदैर्ध्य तरंग।
- अनुदैर्ध्य तरंग में कण किस दिशा में कंपन करते हैं? — तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर।
- संपीडन क्या है? — अधिक घनत्व वाला क्षेत्र जहाँ माध्यम के कण पास-पास होते हैं।
- विरलन क्या है? — कम घनत्व वाला क्षेत्र जहाँ माध्यम के कण दूर-दूर होते हैं।
- ध्वनि तरंग में कौन-से क्षेत्र बनते हैं? — संपीडन और विरलन।
- अनुप्रस्थ तरंग में कण किस दिशा में कंपन करते हैं? — तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत।
- ध्वनि के संचरण में क्या स्थानांतरित होता है? — ऊर्जा।
- क्या माध्यम के कण ध्वनि के साथ आगे बढ़ते हैं? — नहीं, वे अपनी माध्य स्थिति के आसपास कंपन करते हैं।
- ध्वनि ऊर्जा का कौन-सा रूप है? — ऊर्जा का एक रूप।
- माइक्रोफोन का मुख्य कार्य क्या है? — ध्वनि ऊर्जा को विद्युत संकेतों में बदलना।
- स्पीकर का मुख्य कार्य क्या है? — विद्युत संकेतों से ध्वनि उत्पन्न करना।