Chapter स्थलरूप एवं जीवन Class 6 Social Science CBSE notes in hindi स्थलाकृति - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 6 English Medium Social Science All Chapters:
स्थलरूप एवं जीवन
2. स्थलाकृति
अध्याय 3. स्थलरूप एवं जीवन
स्थलरूप
- स्थलरूप – पृथ्वी की सतह के भौतिक स्वरूप को स्थलरूप कहते हैं।
- स्थलरूप लाखों वर्षों में आकार लेते हैं।
- स्थलरूपों का पर्यावरण और मानव जीवन के साथ महत्वपूर्ण संबंध होता है।
- स्थलरूपों को व्यापक रूप से तीन प्रमुख प्रकारों में बाँटा जाता है—पर्वत, पठार और मैदान।
स्थलरूप और जीवन
- विभिन्न स्थलरूपों में अलग-अलग प्रकार की जलवायु पाई जाती है।
- प्रत्येक स्थलरूप में अलग-अलग प्रकार के पेड़-पौधे और जीव-जंतु पाए जाते हैं।
- मनुष्य ने विभिन्न स्थलरूपों के अनुसार स्वयं को ढाला है।
- अलग-अलग स्थलरूपों पर रहने वाले लोगों की संख्या भी अलग-अलग होती है।
- प्रत्येक स्थलरूप मानव जीवन के लिए कुछ अवसर और कुछ चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है।
पर्वत
- पर्वत – आसपास की भूमि से अधिक ऊँचा स्थलरूप पर्वत कहलाता है।
- पर्वतों की पहचान चौड़े आधार, खड़ी ढलान और सँकरे शिखर से की जा सकती है।
- अधिक ऊँचाई वाले कुछ पर्वत हिम से ढके रहते हैं।
- बहुत अधिक ऊँचाई पर हिम स्थायी रूप से जमी रह सकती है।
पहाड़ी
- पहाड़ी – कम ऊँचाई वाला ऊँचा स्थल, जिसकी ढलान कम खड़ी और शिखर अधिक गोलाकार होता है।
- पहाड़ियाँ सामान्यतः पर्वतों की तुलना में कम ऊँची होती हैं।
ऊँचाई
- ऊँचाई – समुद्र तल से किसी वस्तु या स्थान की ऊँचाई को ऊँचाई कहते हैं।
- पर्वत, उड़ते हुए पक्षी, वायुयान या उपग्रह की ऊँचाई समुद्र तल से मापी जा सकती है।
हिम
- बहुत ऊँचे और ठंडे स्थानों पर वर्षण हिम के रूप में हो सकता है।
- हिम जल का ठोस रूप है।
- हिम और ओले जल के ठोस रूप में गिरने के उदाहरण हैं।
वर्षण
- वर्षण – वायुमंडल से भूमि पर किसी भी रूप में जल के गिरने को वर्षण कहते हैं।
- वर्षा, हिमपात और ओले वर्षण के सामान्य रूप हैं।
पर्वत श्रेणी
- पर्वत श्रेणी – आपस में जुड़े हुए या एक-दूसरे के निकट स्थित पर्वतों की लंबी श्रृंखला को पर्वत श्रेणी कहते हैं।
- विश्व के अधिकांश पर्वतों को पर्वत श्रेणियों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- हिमालय – एशिया की प्रमुख पर्वत श्रेणी है।
- आल्प्स – यूरोप की प्रमुख पर्वत श्रेणी है।
- एंडीज़ – दक्षिणी अमेरिका की प्रमुख पर्वत श्रेणी है।
- कुछ पर्वत श्रेणियाँ हजारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं।
विश्व की प्रमुख पर्वत चोटियाँ
| पर्वत चोटी |
स्थिति / विशेषता |
| एवरेस्ट गिरिशृंग |
हिमालय की सबसे ऊँची चोटी और विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी |
| कंचनजंगा गिरिशृंग |
हिमालय की प्रमुख ऊँची चोटी |
| अकोंकागुआ गिरिशृंग |
एंडीज़ पर्वत श्रेणी की सबसे ऊँची चोटी |
| किलिमंजारो गिरिशृंग |
पूर्वी अफ्रीका में स्थित स्वतंत्र पर्वत |
| ब्लांक गिरिशृंग |
आल्प्स का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर |
| अनाईमुडी गिरिशृंग |
दक्षिण भारत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी |
नवीन पर्वत
- हिमालय जैसे ऊँचे और नुकीली चोटियों वाले पर्वत अपेक्षाकृत नवीन पर्वत हैं।
- नवीन पर्वत भी पृथ्वी के इतिहास की दृष्टि से लाखों वर्ष पुराने हो सकते हैं।
- हिमालय की ऊँचाई आज भी बढ़ रही है।
प्राचीन पर्वत
- अरावली पर्वत श्रेणी बहुत पुरानी पर्वत श्रेणियों में से एक है।
- अपरदन के कारण पुराने पर्वतों और पहाड़ियों की चोटियाँ गोलाकार हो सकती हैं।
पर्वतीय वन
- पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले वनों को पर्वतीय वन कहते हैं।
- पर्वतीय वनों में चीड़, फर, स्प्रूस और देवदार जैसे शंकुधारी वृक्ष पाए जाते हैं।
- इन वृक्षों की पत्तियाँ सामान्यतः पतली और नुकीली होती हैं।
- अधिक ऊँचाई पर वृक्षों की जगह घास, काई और लाइकेन उगते हैं।
काई
- काई – छोटा हरा पौधा या वनस्पति, जिसमें फूल और वास्तविक जड़ें नहीं होतीं।
- काई प्रायः मखमली आवरण की तरह फैली हुई दिखाई देती है।
लाइकेन
- लाइकेन – पौधे के समान जीव, जो सामान्यतः चट्टानों, दीवारों या पेड़ों से चिपके हुए पाए जाते हैं।
पर्वतीय जीव-जंतु
- पर्वतों के वन, नदियाँ, झीलें, घास के मैदान और कंदराएँ अनेक जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं।
- हिम तेंदुआ, हिमालयन तहर, याक, भालू और पर्वतीय खरगोश जैसे जीव पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- गोल्डन ईगल, पेरेग्रिन फाल्कन, आइबेक्स और ग्रे फॉक्स भी पर्वतीय क्षेत्रों के जीव हैं।
हिमालय की नदियाँ
- हिमालय से निकलने वाली भारतीय नदियों में गंगा विशालतम नदी है।
- गंगा की अनेक सहायक नदियाँ हैं।
- यमुना और घाघरा हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदियाँ हैं।
- सोन नदी गंगा के मैदान के दक्षिण में स्थित विंध्याचल की श्रेणियों से निकलती है।
पर्वतीय जीवन
- पर्वतीय भूभाग सामान्यतः खड़े ढलानों के साथ ऊबड़-खाबड़ और ऊँचे-नीचे होते हैं।
- पर्वतीय क्षेत्रों की कुछ घाटियों में नियमित रूप से कृषि की जा सकती है।
- ढलानों पर सीढ़ीनुमा खेत बनाकर की जाने वाली कृषि को वेदिका कृषि कहते हैं।
- अनेक पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि की अपेक्षा पशुपालन को अधिक महत्व दिया जाता है।
- पर्यटन पर्वतीय लोगों के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन है।
पर्वतीय पर्यटन
- पर्वतों की स्वच्छ हवा और मनोरम प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
- स्कीइंग, हाइकिंग, पर्वतारोहण और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियाँ पर्वतीय क्षेत्रों में की जाती हैं।
- लोग अनेक शताब्दियों से पर्वतों पर स्थित पवित्र स्थलों की तीर्थयात्रा करते रहे हैं।
- बहुत अधिक पर्यटकों के आने से पर्वतीय पर्यावरण पर दबाव पड़ सकता है।
पर्वतीय जीवन की चुनौतियाँ
| चुनौती |
अर्थ / प्रभाव |
| भूस्खलन |
पर्वतीय भूखंड या चट्टान का अचानक टूटकर गिरना |
| आकस्मिक बाढ़ |
किसी स्थान पर अचानक आने वाली बाढ़ |
| बादल फटना |
अचानक बहुत तेज वर्षा होने की घटना |
| हिमस्खलन |
पर्वत से अचानक हिम का गिरना |
| भारी हिमपात |
अधिक मात्रा में हिम गिरने से उत्पन्न कठिनाई |
| अत्यधिक ठंड |
पर्वतीय क्षेत्रों में जीवन और आवागमन को प्रभावित करने वाली स्थिति |
पर्वत और संस्कृति
- विश्व के अनेक पारंपरिक समुदाय पर्वतों को पवित्र स्थल मानते हैं।
- एवरेस्ट गिरिशृंग की ऊँचाई 8848 मीटर है।
- तिब्बती लोग एवरेस्ट को ‘चोमोलुंगमा’ कहते हैं।
- नेपाल में एवरेस्ट को ‘सागरमाथा’ कहा जाता है।
- कैलाश पर्वत को हिंदू, बौद्ध, जैन और बॉन धर्म के अनुयायी पवित्र मानते हैं।
पठार
- पठार – ऐसी स्थलाकृति जो आसपास की भूमि से ऊँची होती है और जिसकी सतह प्रायः चपटी होती है।
- पठार के कुछ किनारे सीधे ढलान वाले हो सकते हैं।
- पठारों की ऊँचाई कुछ सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक हो सकती है।
तिब्बत का पठार
- तिब्बत का पठार विश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा पठार है।
- इसकी औसत ऊँचाई लगभग 4500 मीटर है।
- अधिक ऊँचाई के कारण इसे ‘विश्व की छत’ कहा जाता है।
- यह पूर्व से पश्चिम दिशा में लगभग 2500 किलोमीटर तक फैला हुआ है।
दक्कन का पठार
- दक्कन का पठार मध्य और दक्षिण भारत में स्थित है।
- यह विश्व के सबसे पुराने पठारों में से एक है।
- यह कई लाख वर्ष पहले ज्वालामुखी की सक्रियता के कारण बना था।
पठार और खनिज
- पठारों में खनिजों के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं।
- इसी कारण पठारों को ‘खनिजों का भंडार-गृह’ कहा जाता है।
- पठारों में खनन एक प्रमुख गतिविधि है।
- पूर्वी अफ्रीका का पठार सोने और हीरे के खनन के लिए प्रसिद्ध है।
- छोटानागपुर पठार में लौह, कोयला और मैंगनीज के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं।
पठार और कृषि
- कई पठारों में चट्टानी मिट्टी पाई जाती है।
- चट्टानी मिट्टी सामान्यतः मैदानी मिट्टी की तुलना में कम उपजाऊ होती है।
- इस कारण कई पठार कृषि के लिए कम अनुकूल होते हैं।
- ज्वालामुखी से बने लावा पठार उपजाऊ हो सकते हैं।
- लावा पठारों में समृद्ध काली मिट्टी पाई जाती है।
पठार और जलप्रपात
- पठारों में अनेक आकर्षक जलप्रपात पाए जाते हैं।
- विक्टोरिया जलप्रपात – दक्षिण अफ्रीका में जाम्बेजी नदी पर स्थित है।
- हुंडरू जलप्रपात – छोटानागपुर पठार में स्वर्णरेखा नदी पर स्थित है।
- जोग जलप्रपात – पश्चिमी घाट में शरावती नदी पर स्थित है।
- नहकालीकाई जलप्रपात – मेघालय के पठारी क्षेत्र में स्थित है और लगभग 340 मीटर की ऊँचाई से गिरता है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
| शब्द |
परिभाषा |
| स्थलरूप |
पृथ्वी की सतह के भौतिक स्वरूप को स्थलरूप कहते हैं। |
| पर्वत |
आसपास की भूमि से अधिक ऊँचा स्थलरूप पर्वत कहलाता है। |
| पहाड़ी |
कम ऊँचाई वाला ऊँचा स्थल, जिसकी ढलान अपेक्षाकृत कम खड़ी और शिखर गोलाकार होता है। |
| पर्वत श्रेणी |
पर्वतों की लंबी श्रृंखला को पर्वत श्रेणी कहते हैं। |
| पर्वतीय वन |
पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले वनों को पर्वतीय वन कहते हैं। |
| पठार |
आसपास की भूमि से ऊँची और प्रायः चपटी सतह वाली स्थलाकृति को पठार कहते हैं। |
| भूस्खलन |
पर्वतीय भूखंड के बड़े भाग या चट्टान के अचानक टूटकर गिरने की घटना। |
| हिमस्खलन |
पर्वत से अचानक हिम के गिरने की घटना। |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- स्थलरूप के तीन प्रमुख प्रकार – पर्वत, पठार और मैदान।
- हिमालय – अपेक्षाकृत नवीन पर्वत श्रेणी।
- अरावली – बहुत पुरानी पर्वत श्रेणी।
- एवरेस्ट गिरिशृंग – विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी।
- तिब्बत का पठार – विश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा पठार।
- तिब्बत का पठार – ‘विश्व की छत’ कहलाता है।
- दक्कन का पठार – भारत के प्राचीन पठारों में से एक।
- पठार खनिजों के प्रचुर भंडार के लिए प्रसिद्ध हैं।
- छोटानागपुर पठार – लौह, कोयला और मैंगनीज के भंडार के लिए महत्वपूर्ण।
- वेदिका कृषि – पर्वतीय ढलानों को सीढ़ीनुमा बनाकर की जाने वाली कृषि।
त्वरित पुनरावृत्ति
- स्थलरूप पृथ्वी की सतह के भौतिक स्वरूप हैं।
- पर्वत ऊँचे और प्रायः खड़ी ढलानों वाले स्थलरूप हैं।
- पठार ऊँचे तथा प्रायः चपटे स्थलरूप हैं।
- पर्वतीय क्षेत्रों में शंकुधारी वृक्ष और अनेक विशिष्ट जीव पाए जाते हैं।
- पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि, पशुपालन और पर्यटन प्रमुख गतिविधियाँ हैं।
- भूस्खलन, बादल फटना और हिमस्खलन पर्वतीय क्षेत्रों की प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
- पठार खनिजों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
- लावा पठारों की मिट्टी कृषि के लिए उपजाऊ हो सकती है।
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