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Chapter पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति Class 6 Social Science CBSE notes in hindi Chapter Review and Key Points - CBSE Study

Chapter पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति Social Science Class 6 cbse notes Chapter Review and Key Points in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति Class 6 Social Science CBSE notes in hindi Chapter Review and Key Points - CBSE Study

कक्षा 6 Social Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक Chapter Review and Key Points को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Social Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 6 English Medium Social Science All Chapters:

पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति

1. Chapter Review and Key Points

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अध्याय 1 – पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति

इस अध्याय में मानचित्र, उसके घटकों, दिशाओं, पैमाने तथा पृथ्वी पर किसी स्थान की सही स्थिति निर्धारित करने के लिए अक्षांश और देशांतर के उपयोग का अध्ययन किया गया है। साथ ही स्थानीय समय, मानक समय और समय क्षेत्रों को भी समझाया गया है।

अध्याय समीक्षा

मानचित्र

मानचित्र किसी क्षेत्र का प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन है, जिसमें स्थानों की स्थिति और वहाँ तक पहुँचने के मार्गों को दर्शाया जाता है। मानचित्र में धरातल को सामान्यतः ऊपर से देखने के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

मानचित्रावली (एटलस)

एटलस मानचित्रों की एक पुस्तक या संग्रह है।

मानचित्र के प्रकार

मानचित्र का प्रकार क्या दर्शाता है?
भौतिक मानचित्र पर्वत, महासागर, नदियाँ आदि प्राकृतिक आकृतियाँ।
राजनैतिक मानचित्र देश, राज्य, सीमाएँ, नगर और राजधानियाँ आदि।
विषयगत मानचित्र किसी विशेष प्रकार की सूचना।

मानचित्र के मुख्य घटक

मानचित्र के तीन मुख्य घटक हैं:

  • दूरी
  • दिशा
  • प्रतीक चिह्न

पैमाना (Scale)

पैमाना मानचित्र पर दिखाई गई दूरी और धरातल पर वास्तविक दूरी के बीच संबंध बताता है। उदाहरण के लिए, यदि 1 सेंटीमीटर मानचित्र पर 500 मीटर वास्तविक दूरी को दर्शाता है, तो पैमाना 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर होगा।

दिशाएँ

चार मुख्य दिशाएँ उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम हैं। इन्हें प्रधान दिशाएँ या चतुर्दिश कहा जाता है।

चार मध्यवर्ती दिशाएँ हैं:

  • उत्तर-पूर्व
  • दक्षिण-पूर्व
  • दक्षिण-पश्चिम
  • उत्तर-पश्चिम

प्रतीक चिह्न

मानचित्र पर वास्तविक वस्तुओं को छोटे-छोटे प्रतीकों द्वारा दर्शाया जाता है। बड़े क्षेत्र के मानचित्र में रेलवे स्टेशन, विद्यालय, सड़क, नदी, तालाब, पुल, डाकघर, पुलिस स्टेशन आदि को दिखाने के लिए प्रतीक चिह्नों का प्रयोग किया जाता है।

ग्लोब

ग्लोब पृथ्वी का गोलाकार मॉडल है। क्योंकि ग्लोब और पृथ्वी का आकार लगभग समान है, इसलिए यह समतल मानचित्र की तुलना में पृथ्वी के आकार और स्थिति का बेहतर प्रतिनिधित्व करता है।

निर्देशांक

निर्देशांक ऐसी संख्यात्मक प्रणाली है जिसकी सहायता से पृथ्वी पर किसी स्थान की सही स्थिति निर्धारित की जाती है। अक्षांश और देशांतर मिलकर किसी स्थान के निर्देशांक बनाते हैं।

अक्षांश

अक्षांश भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की दूरी का माप है। अक्षांश रेखाएँ भूमध्य रेखा के समानांतर पृथ्वी के चारों ओर खींचे गए काल्पनिक वृत्त हैं।

  • भूमध्य रेखा का अक्षांश है।
  • उत्तरी ध्रुव का अक्षांश 90° उत्तर है।
  • दक्षिणी ध्रुव का अक्षांश 90° दक्षिण है।
  • अक्षांशों को डिग्री में मापा जाता है।

भूमध्य रेखा

भूमध्य रेखा पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में बाँटने वाली 0° अक्षांश की काल्पनिक रेखा है। यह सबसे बड़ा अक्षांश वृत्त है।

अक्षांश और जलवायु

भूमध्य रेखा के आसपास सामान्यतः जलवायु गर्म होती है। भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की ओर जाने पर अक्षांश बढ़ता जाता है और जलवायु सामान्यतः ठंडी होती जाती है।

देशांतर

देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम की दूरी का माप है। देशांतर रेखाएँ एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाने वाले काल्पनिक अर्धवृत्त हैं।

  • देशांतर को डिग्री में मापा जाता है।
  • प्रमुख याम्योत्तर का देशांतर है।
  • देशांतर का मान 0° से 180° पूर्व या 180° पश्चिम तक होता है।

प्रमुख याम्योत्तर (Prime Meridian)

प्रमुख याम्योत्तर वह 0° देशांतर रेखा है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदर्भ रेखा माना गया है। यह इंग्लैंड के ग्रिनिच से होकर गुजरती है, इसलिए इसे ग्रिनिच याम्योत्तर भी कहा जाता है।

उज्जयिनी याम्योत्तर

प्राचीन भारत में उज्जयिनी याम्योत्तर का खगोलीय गणनाओं में महत्वपूर्ण स्थान था। यह वर्तमान उज्जैन से होकर गुजरती थी। भारतीय खगोलविद अक्षांश और देशांतर की अवधारणाओं से परिचित थे।

अक्षांश और देशांतर में अंतर

अक्षांश देशांतर
भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की दूरी बताता है। प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम की दूरी बताता है।
अक्षांश रेखाएँ समानांतर वृत्त होती हैं। देशांतर रेखाएँ ध्रुव से ध्रुव तक जाने वाले अर्धवृत्त होती हैं।
भूमध्य रेखा 0° अक्षांश है। प्रमुख याम्योत्तर 0° देशांतर है।

निर्देशांक द्वारा स्थान का निर्धारण

अक्षांश और देशांतर को एक साथ प्रयोग करके पृथ्वी पर किसी स्थान की स्थिति निर्धारित की जाती है। उदाहरण के लिए, किसी स्थान के अक्षांश और देशांतर ज्ञात होने पर उसकी स्थिति को पृथ्वी पर निश्चित किया जा सकता है।

ग्रिड रेखाएँ

ग्लोब पर अक्षांशों के समानांतर और देशांतरों के याम्योत्तर मिलकर एक जाल जैसी संरचना बनाते हैं, जिसे ग्रिड रेखाएँ कहा जाता है। इनकी सहायता से पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति निर्धारित की जाती है।

स्थानीय समय

स्थानीय समय किसी स्थान के देशांतर के आधार पर निर्धारित समय है। पृथ्वी के अलग-अलग देशांतरों पर सूर्य की स्थिति अलग होने के कारण स्थानीय समय भी अलग होता है।

समय और पृथ्वी का घूर्णन

पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 24 घंटे में एक पूरा चक्कर लगाती है। एक पूरा चक्कर 360° का होता है। इसलिए पृथ्वी लगभग 15° प्रति घंटे घूमती है।

देशांतर और समय का संबंध

  • 15° देशांतर का अंतर लगभग 1 घंटे के समय के अंतर के बराबर होता है।
  • पूर्व की ओर जाने पर स्थानीय समय आगे बढ़ता है।
  • पश्चिम की ओर जाने पर स्थानीय समय पीछे होता है।

ग्रिनिच याम्योत्तर और GMT

ग्रिनिच से गुजरने वाली प्रमुख याम्योत्तर को 0° देशांतर माना जाता है। इसे ग्रिनिच मीन टाइम (GMT) के संदर्भ के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

मानक समय

किसी देश या क्षेत्र में समय की एकरूपता बनाए रखने के लिए एक निश्चित समय को मानक समय के रूप में अपनाया जाता है। इससे अलग-अलग स्थानों के स्थानीय समय के कारण होने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सकता है।

भारतीय मानक समय (IST)

भारत में एक मानक समय अपनाया गया है। ग्रिनिच के समय की तुलना में भारतीय मानक समय 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

समय क्षेत्र (Time Zone)

पृथ्वी को समय के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में बाँटा जाता है जिन्हें समय क्षेत्र कहा जाता है। सामान्यतः 15° देशांतर का क्षेत्र लगभग एक घंटे के समय अंतर से संबंधित होता है।

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा प्रमुख याम्योत्तर के लगभग विपरीत 180° देशांतर के पास स्थित है। इसे पार करने पर तिथि में एक दिन का परिवर्तन होता है।

गोलार्ध

रेखा पृथ्वी का विभाजन
भूमध्य रेखा उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध
प्रमुख याम्योत्तर पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

  • मानचित्र – किसी क्षेत्र का प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन।
  • एटलस – मानचित्रों की पुस्तक या संग्रह।
  • पैमाना – मानचित्र की दूरी और वास्तविक दूरी के बीच संबंध।
  • अक्षांश – भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की दूरी का माप।
  • देशांतर – प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम की दूरी का माप।
  • निर्देशांक – अक्षांश और देशांतर द्वारा किसी स्थान की स्थिति निर्धारित करने की प्रणाली।
  • प्रमुख याम्योत्तर – 0° देशांतर की संदर्भ रेखा।
  • स्थानीय समय – किसी स्थान के देशांतर के आधार पर निर्धारित समय।
  • मानक समय – किसी देश या क्षेत्र के लिए अपनाया गया निश्चित समय।
  • समय क्षेत्र – समय के आधार पर पृथ्वी का विभाजन।
  • मुहाना – वह स्थान जहाँ नदी समुद्र में मिलती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • भूमध्य रेखा का अक्षांश 0° है।
  • उत्तरी ध्रुव 90° उत्तर और दक्षिणी ध्रुव 90° दक्षिण पर है।
  • प्रमुख याम्योत्तर 0° देशांतर है।
  • देशांतर का संबंध स्थानीय समय से है।
  • पृथ्वी 24 घंटे में लगभग 360° घूमती है।
  • 15° देशांतर का अंतर लगभग 1 घंटे के समय अंतर के बराबर है।
  • भारत का मानक समय GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।
  • अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग 180° देशांतर पर स्थित है।
  • उज्जयिनी याम्योत्तर का प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान में महत्वपूर्ण स्थान था।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • मानचित्र → स्थानों को समझने और खोजने का साधन
  • पैमाना → मानचित्र की दूरी : वास्तविक दूरी
  • मुख्य दिशाएँ → उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम
  • अक्षांश → भूमध्य रेखा से उत्तर/दक्षिण
  • देशांतर → प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व/पश्चिम
  • अक्षांश + देशांतर → किसी स्थान के निर्देशांक
  • देशांतर → स्थानीय समय
  • 15° देशांतर → लगभग 1 घंटे का समय अंतर
  • 180° के पास → अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा

अध्याय का सार

मानचित्र → दिशा + दूरी + प्रतीक चिह्न → ग्लोब → निर्देशांक → अक्षांश + देशांतर → स्थान की स्थिति → देशांतर से स्थानीय समय → मानक समय → समय क्षेत्र → अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा

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