Chapter आधारभूत लोकतंत्र भाग 1: शासन Class 6 Social Science CBSE notes in hindi Chapter Review and Key Points - CBSE Study
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आधारभूत लोकतंत्र भाग 1: शासन
1. Chapter Review and Key Points
अध्याय 10. आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन
इस अध्याय में हम शासन, सरकार, लोकतंत्र तथा नागरिकों की भूमिका को समझते हैं। इसमें सरकार के तीन अंग और भारत में सरकार के तीन स्तरों की कार्यप्रणाली भी समझाई गई है।
शासन का अर्थ
- शासन – निर्णय लेने की प्रक्रिया, नियमों के विभिन्न समूहों से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना और उनका पालन सुनिश्चित करना शासन कहलाता है।
- समाज में व्यवस्था और सद्भाव बनाए रखने के लिए नियम आवश्यक होते हैं।
- घर, विद्यालय, सड़क और कार्यस्थल आदि सभी जगह अलग-अलग नियम होते हैं।
- कुछ अधिक महत्वपूर्ण नियमों को कानून कहा जाता है।
- नियम और कानून समय के साथ बदले भी जा सकते हैं।
सरकार क्या है?
- सरकार – उन व्यक्तियों के समूह या तंत्र को सरकार कहते हैं जो नियम बनाते हैं और इन नियमों का पालन सुनिश्चित करते हैं।
- सरकार का उद्देश्य समाज में व्यवस्था बनाए रखना और लोगों के लिए आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
- नागरिक भी कानूनों और नियमों के निर्माण तथा उनमें बदलाव के संबंध में अपनी बात रख सकते हैं।
सरकार के तीन अंग
| सरकार का अंग |
मुख्य कार्य |
| विधायिका |
कानून बनाना, पुराने कानूनों में संशोधन करना और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें निरस्त करना। |
| कार्यपालिका |
कानूनों को लागू करना और प्रशासन चलाना। |
| न्यायपालिका |
कानून के उल्लंघन पर निर्णय करना तथा न्याय प्रदान करना। |
विधायिका
- विधायिका वह अंग है जो कानून बनाती है।
- जनता के प्रतिनिधियों की सभा द्वारा कानूनों पर चर्चा की जाती है।
- राष्ट्रीय स्तर पर भारत की विधायिका में लोक सभा और राज्य सभा शामिल हैं।
- राज्य स्तर पर विधान सभा तथा कुछ राज्यों में विधान परिषद भी होती है।
कार्यपालिका
- कार्यपालिका का मुख्य कार्य कानूनों को लागू करना है।
- राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं।
- राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं।
- कार्यपालिका में मंत्री तथा कानूनों को लागू करने वाली विभिन्न एजेंसियाँ भी शामिल होती हैं।
न्यायपालिका
- न्यायपालिका न्यायालयों की प्रणाली है।
- यह निर्णय करती है कि किसी व्यक्ति ने कानून तोड़ा है या नहीं।
- कानून तोड़ने पर उचित कार्रवाई या दंड का निर्णय न्यायपालिका कर सकती है।
- न्यायपालिका कार्यपालिका के निर्णयों और विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों की भी समीक्षा कर सकती है।
शक्तियों का पृथक्करण
- सरकार के तीनों अंगों को एक-दूसरे से पृथक रखा जाता है।
- फिर भी ये तीनों अंग एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और मिलकर कार्य करते हैं।
- इस व्यवस्था को शक्तियों का पृथक्करण कहा जाता है।
- इसका उद्देश्य शासन व्यवस्था में नियंत्रण और संतुलन बनाए रखना है।
- प्रत्येक अंग दूसरे अंग के कार्यों की निगरानी कर सकता है।
सरकार के तीन स्तर
| स्तर |
सरकार |
मुख्य क्षेत्र |
| स्थानीय स्तर |
स्थानीय सरकार |
नगर या ग्राम स्तर |
| राज्य स्तर |
राज्य सरकार |
राज्य स्तर के विषय |
| राष्ट्रीय स्तर |
केंद्र सरकार |
पूरे देश से संबंधित विषय |
बाढ़ की स्थिति में सरकार के तीन स्तर
- छोटे क्षेत्र में बाढ़ होने पर स्थानीय प्रशासन स्थिति को संभाल सकता है।
- कई नगरों और गाँवों में बाढ़ फैलने पर राज्य सरकार बचाव दल भेजती है।
- बहुत बड़े क्षेत्र में गंभीर बाढ़ आने पर केंद्र सरकार राहत सामग्री और सेना आदि भेजकर सहायता कर सकती है।
केंद्र सरकार के प्रमुख कार्य
- रक्षा
- विदेशी मामले
- परमाणु ऊर्जा
- संचार
- मुद्रा
- अंतरराज्यीय वाणिज्य
- राष्ट्रीय नीतियों का प्रतिपादन
राज्य सरकार के प्रमुख कार्य
- पुलिस और कानून-व्यवस्था
- जन-स्वास्थ्य
- शिक्षा
- कृषि
- सिंचाई
- स्थानीय सरकार
औपचारिक और वास्तविक कार्यपालिका
- राष्ट्रपति भारत के औपचारिक प्रमुख होते हैं।
- प्रधानमंत्री कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं।
- राज्यपाल राज्य के औपचारिक प्रमुख होते हैं।
- मुख्यमंत्री राज्य की कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं।
डिजिटल तकनीक और शासन
- डिजिटल तकनीक ने लोगों के दैनिक जीवन और सरकारी कार्यप्रणाली को प्रभावित किया है।
- आज धन भेजने के लिए डिजिटल माध्यम उपलब्ध हैं।
- डिजिटल तकनीक के कारण साइबर क्राइम जैसी नई आपराधिक गतिविधियाँ भी सामने आई हैं।
- साइबर अपराधों को रोकने के लिए सरकार नए कानून बना सकती है और कानून लागू करने वाली एजेंसियाँ कार्रवाई करती हैं।
- इस उदाहरण से सरकार के तीनों अंगों के साथ मिलकर काम करने की प्रक्रिया समझी जा सकती है।
लोकतंत्र का अर्थ
- लोकतंत्र का अंग्रेजी शब्द Democracy है।
- Democracy शब्द ग्रीक भाषा के Demos और Kratos से बना है।
- Demos का अर्थ है – लोग।
- Kratos का अर्थ है – शासन प्रणाली, तंत्र या शक्ति।
- इस प्रकार लोकतंत्र का शाब्दिक अर्थ लोक-शासन अर्थात लोगों का शासन है।
जन-प्रतिनिधि आधारित लोकतंत्र
- सभी लोग एक साथ शासन नहीं कर सकते, इसलिए लोग अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।
- चुनाव के माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है।
- राज्य स्तर पर चुने गए प्रतिनिधियों को सामान्यतः विधायक कहा जाता है।
- राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए प्रतिनिधियों में सांसद शामिल होते हैं।
- प्रतिनिधि विधान सभा या लोक सभा में कानूनों और समस्याओं पर चर्चा करते हैं।
प्रत्यक्ष लोकतंत्र
- जब किसी निर्णय में प्रत्येक व्यक्ति सीधे अपनी राय देता है, तो इसे प्रत्यक्ष लोकतंत्र कहा जाता है।
- पाठ में कक्षा के विद्यार्थियों द्वारा मतदान करके पिकनिक का स्थान चुनने का उदाहरण दिया गया है।
- इस प्रक्रिया में प्रत्येक विद्यार्थी सीधे अपनी राय देता है।
आधारभूत या धरातलीय लोकतंत्र
- आधारभूत/धरातलीय लोकतंत्र उस व्यवस्था की ओर संकेत करता है जिसमें सामान्य नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित और सुनिश्चित किया जाता है।
- नागरिक अपने जीवन को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर अपनी बात रख सकते हैं।
- यह लोकतंत्र की उस भावना को दर्शाता है जिसमें नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
- डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म 1931 में रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था।
- वे प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे और भारत के अंतरिक्ष तथा मिसाइल कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उन्हें ‘मिसाइल मैन’ के नाम से भी जाना जाता है।
- उन्होंने 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।
- वे शिक्षा, नई खोज, बड़े सपने देखने और कठिन परिश्रम के लिए युवाओं को प्रेरित करते थे।
महत्वपूर्ण शब्द
| शब्द |
अर्थ |
| शासन |
नियमों और निर्णयों के माध्यम से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना। |
| सरकार |
नियम बनाने और उनका पालन सुनिश्चित करने वाला तंत्र। |
| विधायिका |
कानून बनाने वाला अंग। |
| कार्यपालिका |
कानून लागू करने वाला अंग। |
| न्यायपालिका |
न्यायालयों की प्रणाली जो कानून के उल्लंघन पर निर्णय करती है। |
| लोकतंत्र |
लोगों का शासन। |
| प्रत्यक्ष लोकतंत्र |
जिसमें लोग किसी निर्णय में सीधे भाग लेते हैं। |
| शक्तियों का पृथक्करण |
सरकार के तीन अंगों को अलग-अलग भूमिकाओं में रखना तथा नियंत्रण और संतुलन बनाए रखना। |
महत्वपूर्ण अंतर
| विधायिका |
कार्यपालिका |
न्यायपालिका |
| कानून बनाती है। |
कानून लागू करती है। |
कानून के उल्लंघन पर निर्णय करती है। |
| प्रत्यक्ष लोकतंत्र |
प्रतिनिधि लोकतंत्र |
| लोग किसी निर्णय में सीधे भाग लेते हैं। |
लोग अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। |
| पाठ में कक्षा द्वारा मतदान का उदाहरण दिया गया है। |
भारत में जनता चुनाव के माध्यम से प्रतिनिधियों का चयन करती है। |
Exam Booster
- शासन: नियमों और निर्णयों के माध्यम से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना।
- सरकार: नियम बनाने और उनका पालन सुनिश्चित करने वाला तंत्र।
- सरकार के तीन अंग: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका।
- शक्तियों का पृथक्करण: सरकार के तीनों अंगों के बीच शक्तियों का विभाजन।
- सरकार के तीन स्तर: स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय।
- लोकतंत्र: लोगों का शासन।
- प्रत्यक्ष लोकतंत्र: नागरिकों द्वारा सीधे निर्णय में भाग लेना।
- प्रतिनिधि लोकतंत्र: जनता द्वारा प्रतिनिधियों का चुनाव करके शासन में भाग लेना।
- भारत: जन-प्रतिनिधि आधारित लोकतंत्र का उदाहरण।
- भारत में मतदान की आयु: 18 वर्ष से ऊपर के भारतीय नागरिकों को चुनाव में मतदान का अधिकार है।
Quick Revision
- व्यवस्था बनाए रखने के लिए समाज में नियम आवश्यक हैं।
- नियमों और निर्णयों के माध्यम से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना शासन कहलाता है।
- सरकार नियम बनाती है और उनका पालन सुनिश्चित करती है।
- विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका कानून लागू करती है और न्यायपालिका न्याय करती है।
- शक्तियों का पृथक्करण शासन में नियंत्रण और संतुलन बनाए रखने में सहायता करता है।
- भारत में सरकार स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय—तीन स्तरों पर कार्य करती है।
- लोकतंत्र का अर्थ लोगों का शासन है।
- भारत में जनता चुनाव के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है।
- आधारभूत लोकतंत्र में सामान्य नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
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