Chapter इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत Class 6 Social Science CBSE notes in hindi Chapter Review and Key Points - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 6 English Medium Social Science All Chapters:
इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत
1. Chapter Review and Key Points
अध्याय 4. इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत
इतिहास हमें अतीत की घटनाओं, मानव जीवन और समाज के विकास को समझने में सहायता करता है। समय-रेखा और विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों की सहायता से हम अतीत की घटनाओं का क्रम तथा मानव जीवन में हुए परिवर्तनों को समझ सकते हैं।
इतिहास क्या है?
- इतिहास – मानव के अतीत का अध्ययन है।
- इतिहास हमें वर्तमान समाज को समझने में सहायता करता है।
- इतिहास अतीत और वर्तमान के बीच संबंध स्थापित करता है।
- मानव इतिहास पृथ्वी के बहुत लंबे इतिहास का केवल एक छोटा भाग है।
अतीत का अध्ययन कौन करते हैं?
| विशेषज्ञ |
अध्ययन का क्षेत्र |
| भू-विज्ञानी |
पृथ्वी के भौतिक स्वरूप, मिट्टी, पत्थर, पर्वत, नदियाँ और महासागर आदि का अध्ययन |
| जीवाश्म विज्ञानी |
प्राचीन पौधों, पशुओं और मानवों के जीवाश्मों का अध्ययन |
| मानव विज्ञानी |
मानव समाजों और संस्कृतियों का अतीत से वर्तमान तक अध्ययन |
| पुरातत्त्व विज्ञानी |
मानव, पौधों और पशुओं द्वारा छोड़े गए भौतिक अवशेषों का अध्ययन |
जीवाश्म
- जीवाश्म – प्राचीन जीव-जंतुओं या पौधों के अवशेष अथवा उनके पदचिह्न, जो मिट्टी या शिलाओं की परतों के बीच सुरक्षित पाए जाते हैं।
- जीवाश्म हमें बहुत पुराने जीवों और उनके जीवन के बारे में जानकारी देते हैं।
इतिहास में समय की गणना
- अलग-अलग समाजों और संस्कृतियों में समय की गणना की अलग-अलग प्रणालियाँ रही हैं।
- आज विश्वभर में सामान्यतः ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग किया जाता है।
- भारत में धार्मिक एवं सांस्कृतिक अवसरों के लिए विभिन्न पारंपरिक तिथिपत्रों का भी उपयोग होता है।
सा.सं. और सा.सं.पू.
- सा.सं. – सामान्य संवत; अंग्रेजी में इसे Common Era (CE) कहा जाता है।
- सा.सं.पू. – सामान्य संवत पूर्व; अंग्रेजी में इसे Before Common Era (BCE) कहा जाता है।
- सा.सं. की तिथियाँ आगे की दिशा में बढ़ती हैं।
- सा.सं.पू. की तिथियाँ अतीत की ओर जाते हुए घटती जाती हैं।
ग्रेगोरियन कैलेंडर
- ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग आज विश्वभर में होता है।
- एक सामान्य वर्ष में 365 दिन होते हैं।
- एक वर्ष में 12 महीने होते हैं।
- सामान्यतः प्रत्येक चार वर्ष में एक अधिवर्ष होता है।
- शताब्दी वर्ष तभी अधिवर्ष होता है जब वह 400 से विभाजित हो सके।
- उदाहरण – 2000 अधिवर्ष था, जबकि 1800 और 1900 अधिवर्ष नहीं थे।
समय-रेखा
- समय-रेखा – ऐसी रेखा जिस पर ऐतिहासिक घटनाओं को उनकी तिथियों और क्रम के अनुसार दर्शाया जाता है।
- समय-रेखा से घटनाओं का कालक्रम समझना आसान होता है।
- समय-रेखा की सहायता से यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-सी घटना पहले और कौन-सी बाद में हुई।
- पाठ की समय-रेखा में मानव सभ्यता के आरंभ से वर्तमान तक की यात्रा को दर्शाया गया है।
वर्ष, दशक, शताब्दी और सहस्राब्दी
| समय की इकाई |
अर्थ |
| वर्ष |
12 महीनों का समय |
| दशक |
10 वर्षों का कालखंड |
| शताब्दी |
100 वर्षों का कालखंड |
| सहस्राब्दी |
1000 वर्षों का कालखंड |
शताब्दी
- शताब्दी – 100 वर्षों का कालखंड।
- 21वीं शताब्दी 2001 से 2100 तक है।
- ईसा पूर्व की शताब्दियों की गणना समय में पीछे की ओर की जाती है।
सहस्राब्दी
- सहस्राब्दी – 1000 वर्षों का कालखंड।
- तीसरी सहस्राब्दी 2001 से 3000 तक है।
- ईसा पूर्व की सहस्राब्दियों की गणना भी समय में पीछे की ओर की जाती है।
ईसा पूर्व और सामान्य संवत के बीच वर्षों की गणना
- ग्रेगोरियन कैलेंडर में वर्ष 0 नहीं है।
- सा.सं.पू. और सा.सं. के बीच वर्षों की गणना करते समय दोनों संख्याओं को जोड़कर 1 घटाया जाता है।
- सूत्र – सा.सं.पू. की तिथि + सा.सं. की तिथि − 1
- उदाहरण – 2 सा.सं.पू. से 2 सा.सं. तक = 2 + 2 − 1 = 3 वर्ष।
पंचांग
- पंचांग भारतीय पारंपरिक तिथिपत्रों में से एक है।
- यह सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से संबंधित खगोलीय आँकड़ों को दर्शाता है।
- पंचांग का उपयोग त्योहारों की तिथियों, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, सूर्योदय और सूर्यास्त आदि के निर्धारण में किया जाता है।
इतिहास के स्रोत
- इतिहास का स्रोत – कोई स्थान, व्यक्ति, लेख या वस्तु जिसके माध्यम से अतीत की घटना या कालखंड की जानकारी प्राप्त की जा सके।
- इतिहासकार अतीत को समझने के लिए अनेक प्रकार के स्रोतों का उपयोग करते हैं।
- कभी-कभी अलग-अलग स्रोत एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।
- कभी-कभी स्रोतों में विरोधी जानकारी भी मिल सकती है।
- ऐसी स्थिति में इतिहासकार यह तय करते हैं कि किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाए।
पुरातात्त्विक स्रोत
- टीले और पुरास्थल
- मानव, पशु तथा पौधों के अवशेष
- उपकरण और हथियार
- मूर्तियाँ और आभूषण
- स्मारक
- सिक्के
- ताम्रपत्र
- मिट्टी के बर्तन और खिलौने
- निवास स्थान और शवाधान
- शिलालेख
- उत्खनन से प्राप्त वस्तुएँ
साहित्यिक स्रोत
- पांडुलिपियाँ
- लोक साहित्य
- वेद और इतिहास
- कविता और नाटक
- ऐतिहासिक लेख
- कहानियों के संग्रह
- यात्रा-वृत्तांत
- ऐतिहासिक वृत्तांत
- वंशावली
- वैज्ञानिक एवं तकनीकी लेख
- भारतीय साहित्य और विदेशी विवरण
कलात्मक स्रोत
- चित्रकला
- मूर्ति कला
- शिल्प और अन्य कलात्मक वस्तुएँ
आधुनिक इतिहास के स्रोत
- आधुनिक इतिहास के अध्ययन में समाचार-पत्र महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं।
- हाल के दशकों की घटनाओं के अध्ययन में टेलीविजन और इंटरनेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग किया जा सकता है।
इतिहासकार की भूमिका
- इतिहासकार अतीत का अध्ययन करता है और उसके विषय में लिखता है।
- इतिहासकार विभिन्न स्रोतों से जानकारी एकत्र करता है।
- वह अलग-अलग स्रोतों की तुलना करके अतीत का पुनर्निर्माण करने का प्रयास करता है।
- इतिहास के पुनर्निर्माण में पुरातत्त्व विज्ञानी, मानव विज्ञानी, परालेखशास्त्री, साहित्य एवं भाषा विशेषज्ञ तथा वैज्ञानिक भी योगदान देते हैं।
मानव इतिहास का प्रारंभ
- आधुनिक मानव अर्थात होमो सेपियंस लगभग 3,00,000 वर्ष पूर्व पृथ्वी पर रह रहे हैं।
- मानव इतिहास पृथ्वी के इतिहास की तुलना में बहुत छोटा है।
- प्रारंभिक मानव को प्रकृति से अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
आदिमानव का जीवन
- आदिमानव सामान्यतः समूहों या टोलियों में रहते थे।
- वे मुख्यतः आखेटक और खाद्य संग्राहक थे।
- वे खाने योग्य पौधों और फलों का संग्रह करते तथा पशुओं का आखेट करते थे।
- वे भोजन और आश्रय की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते थे।
- वे अस्थायी शिविरों, शैलाश्रयों और गुफाओं में रहते थे।
आदिमानव और अग्नि
- आदिमानव ने अग्नि का उपयोग करना सीखा।
- अग्नि ने उनके जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाया।
प्रारंभिक उपकरण
- आदिमानव पत्थर से विभिन्न उपकरण बनाते थे।
- पत्थर की कुल्हाड़ियाँ, ब्लेड और नुकीले तीर उनके उपकरणों में शामिल थे।
- उन्नत उपकरणों ने आखेट और दैनिक जीवन को सरल बनाया।
शैल-चित्र
- गुफाओं और शैलाश्रयों में पाए गए चित्र आदिमानव के जीवन की जानकारी देते हैं।
- इन चित्रों में पशुओं और मानवों के विभिन्न दृश्य दिखाई देते हैं।
- कुछ शैल-चित्रों में सरल आकृतियाँ और प्रतीक भी पाए जाते हैं।
आदिमानव के आभूषण
- समय के साथ आदिमानव ने पत्थर और मनकों की मालाएँ बनानी शुरू कीं।
- पशुओं के दाँतों से पेंडेंट जैसे आभूषण भी बनाए जाते थे।
- कभी-कभी इन वस्तुओं का दूसरे समूहों के साथ आदान-प्रदान भी किया जाता था।
हिम युग
- पृथ्वी की जलवायु में लंबे समय में अनेक परिवर्तन हुए हैं।
- एक समय पृथ्वी का बहुत बड़ा भाग बर्फ से ढका हुआ था, जिसे हिम युग कहा गया।
- पाठ के अनुसार हिम युग लगभग 1,00,000 वर्ष पूर्व से 12,000 वर्ष पूर्व तक रहा।
- जलवायु गर्म होने पर बर्फ का कुछ भाग पिघला और नदियों में जल की मात्रा बढ़ी।
कृषि और स्थायी निवास की शुरुआत
- जलवायु में सुधार के बाद कई क्षेत्रों में मनुष्यों ने एक स्थान पर बसना शुरू किया।
- उन्होंने अनाज उगाना आरंभ किया।
- गाय और बकरी जैसे जानवरों का घरेलकरण शुरू हुआ।
- भोजन की उपलब्धता बढ़ने से मानव समूहों का आकार भी बढ़ा।
- लोग प्रायः नदियों के किनारे बसने लगे।
- नदियों के किनारे जल के साथ-साथ उपजाऊ मिट्टी भी उपलब्ध थी।
गाँवों और समुदायों का विकास
- समय के साथ मानव समुदाय अधिक जटिल होते गए।
- सरदार या मुखिया सामुदायिक कल्याण के लिए उत्तरदायी होते थे।
- प्रारंभिक समुदायों में भूमि पर सामुदायिक रूप से कृषि की जाती थी।
- छोटी बस्तियाँ धीरे-धीरे बड़े गाँवों में बदलने लगीं।
- गाँवों में भोजन, वस्त्र और उपकरणों जैसी वस्तुओं का आदान-प्रदान होने लगा।
- कुछ गाँव आगे चलकर छोटे कस्बों में परिवर्तित हुए।
तकनीकी विकास
- मृद्भांड और मिट्टी की वस्तुएँ बनाने की तकनीक विकसित हुई।
- धातुओं के उपयोग की शुरुआत हुई।
- पहले तांबे और बाद में लोहे का उपयोग किया गया।
- धातुओं के उपयोग से टिकाऊ उपकरण, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ और आभूषण बनाना आसान हुआ।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
| शब्द |
अर्थ |
| इतिहास |
मानव के अतीत का अध्ययन। |
| जीवाश्म |
प्राचीन जीव-जंतुओं या पौधों के सुरक्षित अवशेष अथवा पदचिह्न। |
| समय-रेखा |
ऐसी रेखा जिस पर घटनाओं को तिथियों और क्रम के अनुसार दर्शाया जाता है। |
| दशक |
10 वर्षों का कालखंड। |
| शताब्दी |
100 वर्षों का कालखंड। |
| सहस्राब्दी |
1000 वर्षों का कालखंड। |
| इतिहास का स्रोत |
अतीत की जानकारी प्राप्त करने वाला स्थान, व्यक्ति, लेख या वस्तु। |
| इतिहासकार |
अतीत का अध्ययन करने और उसके विषय में लिखने वाला व्यक्ति। |
| पल्ली |
छोटी बस्ती अथवा छोटा गाँव। |
महत्वपूर्ण अंतर
| आधार |
सा.सं. |
सा.सं.पू. |
| अर्थ |
सामान्य संवत |
सामान्य संवत पूर्व |
| समय की दिशा |
आगे की ओर |
अतीत की ओर |
त्वरित पुनरावृत्ति
- इतिहास मानव के अतीत का अध्ययन है।
- समय-रेखा ऐतिहासिक घटनाओं के क्रम को समझने में सहायता करती है।
- दशक = 10 वर्ष, शताब्दी = 100 वर्ष और सहस्राब्दी = 1000 वर्ष।
- ग्रेगोरियन कैलेंडर में वर्ष 0 नहीं है।
- इतिहास के स्रोत पुरातात्त्विक, साहित्यिक, कलात्मक, मौखिक तथा आधुनिक स्रोत हो सकते हैं।
- इतिहासकार अनेक स्रोतों की तुलना करके अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं।
- आदिमानव मुख्यतः आखेटक और खाद्य संग्राहक थे।
- आदिमानव समूहों, शैलाश्रयों और गुफाओं में रहते थे।
- अग्नि और पत्थर के उपकरणों ने आदिमानव के जीवन को सरल बनाया।
- शैल-चित्र आदिमानव के जीवन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
- बाद में मानव ने कृषि, पशुपालन और स्थायी निवास की शुरुआत की।
- छोटी बस्तियाँ विकसित होकर गाँव और कुछ गाँव आगे चलकर कस्बों में परिवर्तित हुए।
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