Your Complete CBSE Learning Hub

Free NCERT Solutions, Revision Notes & Practice Questions

Notes | Solutions | PYQs | Sample Papers — All in One Place

Get free NCERT solutions, CBSE notes, sample papers and previous year question papers for Class 6 to 12 in Hindi and English medium.

Advertise:

Chapter भारतीय सभ्यता का प्रारंभ Class 6 Social Science CBSE notes in hindi सिन्धु घाटी सभ्यता हड़प्पा नगर-योजना - CBSE Study

Chapter भारतीय सभ्यता का प्रारंभ Social Science Class 6 cbse notes सिन्धु घाटी सभ्यता हड़प्पा नगर-योजना in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

• Hi Guest! • LoginRegister

Class 6

CBSE Notes

Class 7

CBSE Notes

Class 8

CBSE Notes

Class 9

CBSE Notes

Class 10

CBSE Notes

Class 11

CBSE Notes

Class 12

CBSE Notes

Chapter भारतीय सभ्यता का प्रारंभ Class 6 Social Science CBSE notes in hindi सिन्धु घाटी सभ्यता हड़प्पा नगर-योजना - CBSE Study

कक्षा 6 Social Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण भारतीय सभ्यता का प्रारंभ को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक सिन्धु घाटी सभ्यता हड़प्पा नगर-योजना को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Social Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 6 English Medium Social Science All Chapters:

भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

3. सिन्धु घाटी सभ्यता हड़प्पा नगर-योजना

Page 3 of 4

अध्याय 6. भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

नगर-योजना

  • हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगर सुव्यवस्थित नगर-योजना के अनुसार बनाए गए थे।
  • नगरों में चौड़ी सड़कें और गलियाँ बनाई गई थीं।
  • सड़कें सामान्यतः चारों दिशाओं की ओर उन्मुख होती थीं।
  • अधिकांश नगरों के चारों ओर किलेबंदी की गई थी।
  • नगर सामान्यतः दो भागों में विभाजित थे—ऊपरी नगर और निचला नगर।
  • ऊपरी नगर में संभवतः अभिजात वर्ग के लोग रहते थे।
  • निचले नगर में सामान्य लोग रहते थे।
  • कुछ बड़े भवन सामूहिक उद्देश्यों के लिए बनाए गए थे, जैसे गोदाम।
  • भवनों के निर्माण में सामान्यतः ईंटों का प्रयोग किया जाता था।
  • बड़े और छोटे घरों के निर्माण की गुणवत्ता में बहुत अधिक अंतर नहीं मिलता।

मोहनजो-दड़ो का महास्नानागार

  • मोहनजो-दड़ो का महास्नानागार हड़प्पा सभ्यता की प्रसिद्ध संरचनाओं में से एक है।
  • इसका आकार लगभग 12 × 7 मीटर है।
  • ईंटों के ऊपर जलरोधक सामग्री की परत चढ़ाई गई थी।
  • स्नानागार के चारों ओर छोटे-छोटे कमरे बने हुए थे।
  • एक कमरे के अंदर कुआँ भी मिला है।
  • पानी को बाहर निकालने के लिए नाली की व्यवस्था थी।
  • स्नानागार को समय-समय पर स्वच्छ पानी से भरा जाता था।
  • इसके उपयोग के बारे में विभिन्न व्याख्याएँ दी गई हैं, लेकिन निश्चित निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।

जल प्रबंधन

  • हड़प्पावासी जल प्रबंधन और स्वच्छता को बहुत महत्त्व देते थे।
  • घरों में स्नान के लिए अलग स्नानागार होते थे।
  • घर जल-निकास प्रणाली से जुड़े हुए थे।
  • जल-निकास की नालियाँ सामान्यतः सड़कों के नीचे बनाई जाती थीं।
  • मोहनजो-दड़ो में ईंटों से बने कुओं से पानी निकाला जाता था।
  • अन्य क्षेत्रों में तालाब, झरने और मानव निर्मित जलाशय जल के स्रोत रहे होंगे।

धौलावीरा के जलाशय

  • धौलावीरा गुजरात के कच्छ के रण में स्थित है।
  • धौलावीरा में विशाल जलाशयों की एक विकसित प्रणाली मिली है।
  • सबसे बड़े जलाशय की लंबाई लगभग 73 मीटर थी।
  • धौलावीरा में कम-से-कम छह विशाल जलाशय बनाए गए थे।
  • जलाशय पत्थरों और चट्टानों को काटकर भी बनाए गए थे।
  • अधिकांश जलाशय भूमिगत नालियों से जुड़े हुए थे।
  • इनका उद्देश्य जल के संचयन और वितरण में सहायता करना था।

कृषि

  • हड़प्पावासियों की अनेक बस्तियाँ नदियों के किनारे बसी थीं।
  • नदियाँ जल उपलब्ध कराने के साथ आसपास की भूमि को उपजाऊ बनाती थीं।
  • हड़प्पावासी कृषि पर बहुत अधिक निर्भर थे।
  • वे दलहन, सब्जियाँ, जौ, गेहूँ, कुछ मोटे अनाज, बाजरा और कभी-कभी धान उगाते थे।
  • हड़प्पावासी यूरेशिया में कपास उगाने वालों में सबसे प्रारंभिक लोगों में थे।
  • कपास का उपयोग कपड़ा बनाने में किया जाता था।
  • कृषि के लिए हल सहित विभिन्न उपकरणों का प्रयोग किया जाता था।

दलहन

दलहन फसलों की वह श्रेणी है जिसमें सेम, मटर के दाने और विभिन्न प्रकार की दालें शामिल होती हैं।

गाँव और नगर का संबंध

  • गहन कृषि गतिविधियाँ सैकड़ों छोटे ग्रामीण स्थलों और गाँवों द्वारा संचालित होती थीं।
  • नगरों के जीवित रहने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से पर्याप्त कृषि उपज आवश्यक थी।
  • गाँव नगरों को भोजन उपलब्ध कराते थे।
  • इससे गाँव और नगरों के बीच आर्थिक निर्भरता का पता चलता है।

हड़प्पावासियों का भोजन

  • हड़प्पावासी विभिन्न प्रकार के अनाज, दलहन और सब्जियाँ खाते थे।
  • वे जौ, गेहूँ, मोटे अनाज, बाजरा और कभी-कभी धान का उपयोग करते थे।
  • मांस के लिए उन्होंने अनेक पशुओं को पाला।
  • मछलियों के लिए वे नदियों और समुद्रों पर निर्भर रहते थे।
  • मिट्टी के खाना पकाने वाले पात्रों की वैज्ञानिक जाँच से भोजन के अनेक अवशेष मिले हैं।
  • इन अवशेषों में दूध उत्पादों के साथ हल्दी, अदरक और केले के प्रमाण भी मिले हैं।
  • इससे उनके भोजन में विविधता का पता चलता है।

सक्रिय व्यापार

  • हड़प्पावासी अपनी सभ्यता के भीतर और भारत के अन्य क्षेत्रों के साथ व्यापार करते थे।
  • वे भारत के बाहर की सभ्यताओं और संस्कृतियों के साथ भी व्यापार करते थे।
  • वे आभूषण, लकड़ी, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ, संभवतः सोना, कपास और कुछ खाद्य वस्तुएँ निर्यात करते थे।
  • कार्नेलियन के मनके उनके प्रिय आभूषणों में शामिल थे।
  • हड़प्पाई कारीगर कार्नेलियन के मनकों में छेद करने की तकनीक जानते थे।
  • शंख से सुंदर चूड़ियाँ भी बनाई जाती थीं।
  • व्यापार में स्थल मार्ग, नदी मार्ग और समुद्री मार्गों का प्रयोग किया जाता था।

कार्नेलियन के मनके

  • कार्नेलियन लाल रंग का एक पत्थर है।
  • यह गुजरात में पाया जाता था।
  • इससे सुंदर मनके बनाए जाते थे।
  • हड़प्पाई कारीगर मनकों में छेद करके उन्हें धागे में पिरोते थे।

समुद्री व्यापार और लोथल

  • हड़प्पावासियों ने दूर के क्षेत्रों के लिए समुद्री मार्गों का उपयोग किया।
  • यह भारत की प्रथम गहन समुद्री गतिविधि मानी गई है।
  • गुजरात और सिंध के तटीय क्षेत्रों में अनेक हड़प्पाई बस्तियाँ मिली हैं।
  • लोथल गुजरात में स्थित एक छोटी हड़प्पाई बस्ती थी।
  • लोथल में लगभग 217 मीटर लंबा और 36 मीटर चौड़ा विशाल बेसिन मिला है।
  • संभावना है कि इसका उपयोग नावों द्वारा वस्तुओं के आयात और निर्यात के लिए किया जाता था।

हड़प्पाई मुहरें

  • व्यापक व्यापार के लिए व्यापारियों और उनके सामान की पहचान आवश्यक थी।
  • अनेक हड़प्पाई बस्तियों से हजारों छोटी मुहरें मिली हैं।
  • मुहरें सामान्यतः मुलायम पत्थर स्टिऐटाइट से बनाई जाती थीं।
  • मुहरों को गर्म करके कठोर बनाया जाता था।
  • मुहरों पर सामान्यतः विभिन्न जानवरों के चित्र बनाए गए हैं।
  • इन पर लेखन प्रणाली के कुछ संकेत भी मिलते हैं।
  • हड़प्पाई लेखन प्रणाली का अर्थ अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है।
  • मुहरों का संबंध व्यापारिक गतिविधियों से माना जाता है।

धातु विज्ञान

  • हड़प्पावासी तांबे की कलाकारी में कुशल थे।
  • तांबे में टिन मिलाने पर कांस्य धातु बनती है।
  • कांस्य तांबे की तुलना में अधिक कठोर होता है।
  • हड़प्पावासी कांस्य का उपयोग उपकरण और बर्तन बनाने में करते थे।

प्राचीन जीवन

  • पुरातत्त्वविदों को हड़प्पावासियों द्वारा बनाई और उपयोग की गई अनेक वस्तुएँ मिली हैं।
  • इन वस्तुओं से उनके दैनिक जीवन के बारे में जानकारी मिलती है।
  • धौलावीरा से कांस्य दर्पण और पकी मिट्टी के पात्र मिले हैं।
  • पत्थर पर उकेरा गया खेल-बोर्ड भी मिला है।
  • मिट्टी की सीटी भी मिली है।
  • हड़प्पावासी वयस्कों और बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न खेल खेलते थे।
  • भार तौलने के पत्थर और कांस्य की छैनी जैसी वस्तुएँ भी मिली हैं।

सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक वस्तुएँ

  • हड़प्पाई स्थलों से अनेक सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक वस्तुएँ मिली हैं।
  • इनमें छोटी मूर्तियाँ, मुहरें और अन्य कलात्मक वस्तुएँ शामिल हैं।
  • मोहनजो-दड़ो से कांस्य की प्रसिद्ध ‘नर्तकी’ की लघु प्रतिमा मिली है।
  • नमस्ते की मुद्रा में बैठी पकी मिट्टी की मूर्ति भी मिली है।
  • लोथल से एक पात्र मिला है जिस पर प्यासे कौए की कहानी का चित्रण है।
  • इन वस्तुओं से हड़प्पावासियों की कला, जीवन और सांस्कृतिक विचारों की जानकारी मिलती है।

हड़प्पा सभ्यता का ह्रास

  • लगभग 1900 सा.स.पू. के आसपास सिंधु-सरस्वती सभ्यता का ह्रास हुआ।
  • इसके नगर धीरे-धीरे खाली होते गए।
  • लोग बदलते वातावरण में ग्रामीण जीवन-शैली अपनाने लगे।
  • पूर्व की सरकार या प्रशासन के समाप्त होने के संकेत मिलते हैं।
  • हड़प्पावासी छोटी-छोटी बस्तियों में बिखर गए।

हड़प्पा सभ्यता के ह्रास के कारण

  • पहले यह माना जाता था कि युद्ध या आक्रमण के कारण नगरों का विनाश हुआ।
  • लेकिन युद्ध या आक्रमण के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं।
  • हड़प्पावासियों के पास सेना या युद्ध के हथियार होने के प्रमाण भी नहीं मिले।
  • एक प्रमुख कारण जलवायु में परिवर्तन और वर्षा में कमी माना जाता है।
  • लगभग 2200 सा.सं.पू. से जलवायु परिवर्तन के कारण शुष्कता बढ़ी।
  • वर्षा में कमी से कृषि कठिन हुई और नगरों में खाद्य आपूर्ति कम हुई होगी।
  • दूसरा प्रमुख कारण सरस्वती नदी के मध्य बेसिन का सूखना माना गया है।
  • कालीबंगा और बनावली जैसे नगरों को अचानक छोड़ दिया गया।

नगरों का अंत या नई शुरुआत?

  • नगरों के समाप्त होने का अर्थ हड़प्पा संस्कृति का पूर्ण अंत नहीं था।
  • हड़प्पा की संस्कृति और प्रौद्योगिकी का अधिकांश भाग आगे भी बना रहा।
  • लोग ग्रामीण बस्तियों में लौट गए।
  • ग्रामीण जीवन-शैली में भोजन और जल तक अपेक्षाकृत सहज पहुँच थी।
  • इस प्रकार हड़प्पा सभ्यता की कई परंपराएँ आगे की भारतीय सभ्यता में पहुँच गईं।

महत्वपूर्ण शब्द

शब्द अर्थ
जलाशय विशाल प्राकृतिक या कृत्रिम स्थान जहाँ जल का भंडारण किया जाता है।
दलहन सेम, मटर के दाने और दालों जैसी फसलों की श्रेणी।
धातु विज्ञान धातुओं के निष्कर्षण, शुद्धिकरण, मिश्रण तथा उनके गुणों के अध्ययन से संबंधित विज्ञान।
किलेबंदी सुरक्षा के लिए किसी नगर या बस्ती के चारों ओर बनाई गई विशाल दीवार।
अभिजात वर्ग समाज का उच्च वर्ग, जैसे शासक, अधिकारी और प्रशासक।

महत्वपूर्ण अंतर

ऊपरी नगर निचला नगर
संभवतः अभिजात वर्ग के लोग रहते थे। सामान्य लोग रहते थे।
नगर का एक विशिष्ट भाग। नगर का दूसरा प्रमुख भाग।

 

तांबा कांस्य
एक धातु। तांबे में टिन मिलाने से बनने वाली अधिक कठोर धातु।
अपेक्षाकृत नरम। तांबे की तुलना में अधिक कठोर।

 

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • मोहनजो-दड़ो का प्रसिद्ध महास्नानागार लगभग 12 × 7 मीटर का है।
  • धौलावीरा में विशाल जलाशयों की विकसित प्रणाली मिली है।
  • धौलावीरा का सबसे बड़ा जलाशय लगभग 73 मीटर लंबा था।
  • हड़प्पावासी जल प्रबंधन और स्वच्छता को महत्त्व देते थे।
  • लोथल गुजरात में स्थित हड़प्पाई बस्ती है।
  • लोथल में विशाल बेसिन मिला है, जिसका संबंध समुद्री व्यापार से माना जाता है।
  • हड़प्पाई मुहरें मुख्यतः स्टिऐटाइट से बनाई जाती थीं।
  • हड़प्पाई मुहरों पर जानवरों के चित्र और लेखन के संकेत मिलते हैं।
  • तांबे में टिन मिलाने से कांस्य बनता है।
  • हड़प्पावासी कृषि, शिल्प और व्यापार में कुशल थे।
  • लगभग 1900 सा.स.पू. के आसपास इस सभ्यता का ह्रास हुआ।
  • जलवायु परिवर्तन, वर्षा में कमी और सरस्वती नदी के मध्य बेसिन के सूखने को प्रमुख कारणों में माना गया है।
  • युद्ध या आक्रमण को सभ्यता के ह्रास का निश्चित कारण मानने के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • नगर-योजना → चौड़ी सड़कें, गलियाँ, किलेबंदी और व्यवस्थित नगर।
  • महास्नानागार → मोहनजो-दड़ो।
  • विशाल जलाशय → धौलावीरा।
  • समुद्री व्यापार → लोथल।
  • प्रमुख फसलें → जौ, गेहूँ, बाजरा, मोटे अनाज, कभी-कभी धान, दलहन और सब्जियाँ।
  • कपास → कपड़ा बनाने में उपयोग।
  • मुहरें → पहचान और व्यापार से संबंधित।
  • कांस्य → तांबा + टिन।
  • मनोरंजन → खेल-बोर्ड, सीटी और अन्य खिलौने।
  • ह्रास → लगभग 1900 सा.स.पू. के आसपास।
  • प्रमुख कारण → जलवायु परिवर्तन, वर्षा में कमी और सरस्वती नदी के मध्य बेसिन का सूखना।
  • परिणाम → नगरों का ह्रास और ग्रामीण जीवन-शैली की ओर वापसी।
Page 3 of 4

Topic Lists Page Wise:

Disclaimer:

This website's domain name has included word "CBSE" but here we clearly declare that we and our website have neither any relation to CBSE and nor affliated to CBSE organisation.