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Chapter परिवार और समुदाय Class 6 Social Science CBSE notes in hindi परिवार का महत्व और भारतीय समाज में परिवार - CBSE Study

Chapter परिवार और समुदाय Social Science Class 6 cbse notes परिवार का महत्व और भारतीय समाज में परिवार in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter परिवार और समुदाय Class 6 Social Science CBSE notes in hindi परिवार का महत्व और भारतीय समाज में परिवार - CBSE Study

कक्षा 6 Social Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण परिवार और समुदाय को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक परिवार का महत्व और भारतीय समाज में परिवार को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Social Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 6 English Medium Social Science All Chapters:

परिवार और समुदाय

2. परिवार का महत्व और भारतीय समाज में परिवार

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अध्याय 9. परिवार और समुदाय

परिवार मानव समाज की मूल इकाई है। परिवार में प्रेम, देखभाल, सहयोग और जिम्मेदारी के साथ-साथ बच्चों को महत्वपूर्ण जीवन-मूल्य सीखने का अवसर मिलता है।

परिवार का महत्व

  • परिवार मानव समाज की मूल और सबसे प्राचीन इकाई है।
  • परिवार व्यक्ति को प्रेम, सुरक्षा, देखभाल और सहयोग प्रदान करता है।
  • परिवार बच्चों के विकास और उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • परिवार बच्चों को समाज का जिम्मेदार सदस्य बनने के लिए तैयार करता है।

परिवार के प्रकार

परिवार मुख्य विशेषता
संयुक्त परिवार अनेक पीढ़ियाँ एक साथ रहती हैं।
एकल परिवार सामान्यतः एक दंपत्ति और उनकी संतान साथ रहती है।
एकल माता/पिता वाला परिवार अकेली माता या पिता और उनके बच्चे परिवार के रूप में रहते हैं।

संयुक्त परिवार

  • संयुक्त परिवार में दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, भाई-बहन और चचेरे भाई-बहन जैसी कई पीढ़ियाँ साथ रह सकती हैं।
  • परिवार के सदस्य एक-दूसरे की आवश्यकताओं और कठिनाइयों में सहायता करते हैं।
  • बच्चों को परिवार के बुजुर्गों से अनुभव और ज्ञान प्राप्त होता है।
  • बच्चे परिवार की परंपराओं और प्रथाओं को सीखते हैं।

एकल परिवार

  • एकल परिवार में सामान्यतः एक दंपत्ति और उनकी संतान होती है।
  • कभी-कभी परिवार अकेली माता या पिता और उनके बच्चों तक सीमित होता है।
  • आधुनिक जीवन-शैली के कारण कुछ परिवार संयुक्त परिवार से अलग होकर एकल परिवार में रहने लगते हैं।

भारतीय भाषाओं में पारिवारिक संबंध

  • भारतीय भाषाओं में पारिवारिक संबंधों के लिए अनेक विशिष्ट शब्द पाए जाते हैं।
  • हिंदी में बुआ, ताऊ, ताई, चाचा, मौसी, नाना, नानी आदि संबंधों के लिए अलग-अलग शब्द हैं।
  • कुछ भाषाओं में बड़े और छोटे भाई-बहन के लिए भी अलग-अलग शब्द होते हैं।
  • अनेक भारतीय भाषाओं में अंग्रेजी के ‘कजिन’ के लिए कोई एक शब्द नहीं मिलता।
  • कई भारतीय भाषाओं में चचेरे, ममेरे, फुफेरे और मौसेरे भाई-बहनों को भी भाई या बहन के रूप में संबोधित किया जाता है।

परिवार में भूमिकाएँ एवं दायित्व

  • परिवार के सदस्यों के बीच संबंध प्रेम, देखभाल, सहयोग और अंतर्निर्भरता पर आधारित होते हैं।
  • सहयोग का अर्थ है – एक साथ मिलकर काम करना।
  • परिवार के प्रत्येक सदस्य की अन्य सदस्यों के प्रति कुछ भूमिकाएँ और दायित्व होते हैं।
  • माता-पिता बच्चों को खुशहाल व्यक्ति और समाज का जिम्मेदार सदस्य बनाने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
  • बच्चे बड़े होने पर परिवार के अन्य सदस्यों की सहायता करने की जिम्मेदारी निभाते हैं।
  • दैनिक जीवन में भागीदारी से बच्चे जिम्मेदारी और सहयोग करना सीखते हैं।

परिवार – मूल्यों का विद्यालय

  • परिवार बच्चों को अनेक महत्वपूर्ण जीवन-मूल्य सिखाता है।
  • परिवार में बच्चे अहिंसा, दान, सेवा और त्याग जैसे मूल्य सीखते हैं।
  • परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सदस्य अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं का त्याग कर सकते हैं।
  • परिवार की कई परंपराएँ और प्रथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती हैं।

परिवार में सहयोग और साझेदारी

  • परिवार के सदस्य अपनी क्षमता और परिस्थिति के अनुसार एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
  • परिवार में उपलब्ध वस्तुओं और संसाधनों को साझा करने की भावना महत्वपूर्ण है।
  • परिवार के किसी सदस्य के सामने आर्थिक या अन्य कठिनाई आने पर दूसरे सदस्य उसकी सहायता कर सकते हैं।
  • साझेदारी से परिवार के सदस्यों के बीच अपनापन और जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है।

शालिनी के परिवार का उदाहरण

  • शालिनी केरल के एक नगर में अपने परिवार के साथ रहती है।
  • उसके विस्तृत परिवार में उसकी दादी, चाचा-चाची और चचेरी बहन भी साथ रहते हैं।
  • शालिनी के चाचा की नौकरी चली जाने के कारण परिवार को आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ा।
  • शालिनी के माता-पिता ने केवल अपने बच्चों के लिए नहीं, बल्कि चाचा-चाची और उनकी बेटी के लिए भी कपड़े खरीदे।
  • इससे शालिनी ने समझा कि परिवार में सभी एक-दूसरे की सहायता करते हैं और उपलब्ध वस्तुओं को साझा करते हैं।

त्याग और परिवार की भावना

  • परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए व्यक्ति अपनी कुछ इच्छाओं का त्याग कर सकता है।
  • व्यक्तिगत सुविधा से अधिक परिवार के सामूहिक हित को महत्व देना पारिवारिक सहयोग का उदाहरण है।
  • एक सदस्य की कठिनाई को पूरे परिवार की समस्या समझकर सहायता करना परिवार को मजबूत बनाता है।

तेनजिंग के परिवार का उदाहरण

  • तेनजिंग मेघालय के एक गाँव में अपने परिवार के साथ रहता है।
  • उसकी माँ स्थानीय हस्तशिल्प सहकारी संगठन में काम करती हैं।
  • माँ के काम करने के कारण उसके पिता घर की सफाई, सब्जियों के बगीचे की देखभाल और अन्य घरेलू कार्यों में सहायता करते हैं।
  • तेनजिंग के पिता कभी-कभी दादी की भोजन बनाने में भी सहायता करते हैं।
  • उसकी दादी उसे रोचक और ज्ञानवर्धक कहानियाँ सुनाती हैं।
  • उसके दादा पढ़ाई में उसकी सहायता करते हैं और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं।

परिवार में काम की साझेदारी

  • परिवार के घरेलू कार्य केवल किसी एक सदस्य की जिम्मेदारी नहीं होते।
  • परिस्थिति के अनुसार परिवार के अलग-अलग सदस्य घर के कार्यों में योगदान दे सकते हैं।
  • घर के कार्यों में पुरुषों और महिलाओं दोनों की भागीदारी हो सकती है।
  • काम की साझेदारी परिवार में सहयोग और समान जिम्मेदारी की भावना को बढ़ाती है।

परिवार में बुजुर्गों की भूमिका

  • दादा-दादी और अन्य बुजुर्ग बच्चों को अनुभव और ज्ञान प्रदान करते हैं।
  • वे बच्चों को कहानियों के माध्यम से जीवन की समझ और पारिवारिक परंपराओं से परिचित करा सकते हैं।
  • बुजुर्ग परिवार के सामाजिक कार्यों में भी योगदान दे सकते हैं।
  • बच्चों की शिक्षा और देखभाल में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है।

परिवार में निर्णय लेना

  • परिवार के विशेष खर्चों और महत्वपूर्ण मामलों पर सदस्य आपस में चर्चा कर सकते हैं।
  • परिवार में भविष्य की आकस्मिक आवश्यकताओं के लिए बचत करने पर भी विचार किया जाता है।
  • आपसी सलाह से निर्णय लेने से परिवार के सदस्यों की भागीदारी बढ़ती है।

संयुक्त और एकल परिवार – तुलना

संयुक्त परिवार एकल परिवार
अनेक पीढ़ियाँ साथ रह सकती हैं। सामान्यतः दंपत्ति और उनकी संतान साथ रहती है।
परिवार का आकार अपेक्षाकृत बड़ा होता है। परिवार का आकार अपेक्षाकृत छोटा होता है।
बुजुर्गों का साथ और अनुभव मिलता है। बुजुर्ग पीढ़ी कई बार अलग रहती है।
परिवार के सदस्यों के बीच अधिक व्यापक सहयोग हो सकता है। दैनिक जिम्मेदारियाँ कम सदस्यों में बँटती हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

शब्द अर्थ
परिवार मानव समाज की मूल और सबसे प्राचीन इकाई।
संयुक्त परिवार ऐसा परिवार जिसमें अनेक पीढ़ियाँ एक साथ रहती हैं।
एकल परिवार सामान्यतः दंपत्ति और उनकी संतान से बना परिवार।
सहयोग एक साथ मिलकर काम करना और एक-दूसरे की सहायता करना।
अंतर्निर्भरता एक-दूसरे की सहायता और आवश्यकताओं के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होना।
दायित्व किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या कर्तव्य।
परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही प्रथा या व्यवहार।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • परिवार मानव समाज की मूल और सबसे प्राचीन इकाई है।
  • संयुक्त परिवार में अनेक पीढ़ियाँ एक साथ रह सकती हैं।
  • एकल परिवार में सामान्यतः दंपत्ति और उनकी संतान रहती है।
  • परिवार के संबंध प्रेम, देखभाल, सहयोग और अंतर्निर्भरता पर आधारित होते हैं।
  • सहयोग का अर्थ एक साथ काम करना है।
  • परिवार बच्चों को अहिंसा, दान, सेवा और त्याग जैसे मूल्य सिखाता है।
  • परिवार की परंपराएँ और प्रथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ सकती हैं।
  • परिवार के सभी सदस्यों की अपनी-अपनी भूमिकाएँ और दायित्व होते हैं।
  • परिवार में घरेलू कार्यों में सभी सदस्य परिस्थिति के अनुसार योगदान दे सकते हैं।
  • बुजुर्ग परिवार में ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

Quick Revision

  • परिवार → मानव समाज की मूल इकाई।
  • मुख्य आधार → प्रेम + देखभाल + सहयोग + अंतर्निर्भरता।
  • संयुक्त परिवार → अनेक पीढ़ियाँ साथ।
  • एकल परिवार → सामान्यतः दंपत्ति + संतान।
  • परिवार के मूल्य → अहिंसा + दान + सेवा + त्याग।
  • बच्चों की सीख → जिम्मेदारी + भागीदारी + सहयोग।
  • बुजुर्गों की भूमिका → ज्ञान + अनुभव + मार्गदर्शन।
  • घरेलू कार्य → परिवार के सदस्य मिलकर कर सकते हैं।
  • मुख्य संदेश → मजबूत परिवार आपसी प्रेम, सहयोग, जिम्मेदारी और साझेदारी से बनता है।
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