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Chapter इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत Class 6 Social Science CBSE notes in hindi इतिहास के स्रोत - CBSE Study

Chapter इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत Social Science Class 6 cbse notes इतिहास के स्रोत in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

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Chapter इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत Class 6 Social Science CBSE notes in hindi इतिहास के स्रोत - CBSE Study

कक्षा 6 Social Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक इतिहास के स्रोत को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Social Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 6 English Medium Social Science All Chapters:

इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत

3. इतिहास के स्रोत

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अध्याय 4. इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत

इतिहास के स्रोत

  • इतिहास का स्रोत – कोई स्थान, व्यक्ति, लेख या वस्तु जिसके माध्यम से हम अतीत की किसी घटना या कालखंड की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • इतिहासकार अतीत को समझने के लिए अनेक प्रकार के स्रोतों का उपयोग करते हैं।
  • एक ही ऐतिहासिक घटना के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए कई स्रोतों का अध्ययन किया जा सकता है।
  • इतिहास के स्रोत कभी एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और कभी अलग-अलग जानकारी देते हैं।

पुरातात्त्विक स्रोत

  • टीले और पुरास्थल।
  • मानव, पशु तथा पौधों के अवशेष।
  • उपकरण और हथियार।
  • मूर्तियाँ और आभूषण।
  • स्मारक।
  • सिक्के।
  • ताम्रपत्र।
  • मिट्टी के बर्तन और खिलौने।
  • निवास स्थान और शवाधान।
  • शिलालेख।
  • उत्खनन से प्राप्त वस्तुएँ।

साहित्यिक स्रोत

  • पांडुलिपियाँ।
  • लोक साहित्य।
  • वेद एवं इतिहास।
  • कविता एवं नाटक।
  • ऐतिहासिक लेख।
  • कहानियों के संग्रह।
  • यात्रा-वृत्तांत।
  • ऐतिहासिक वृत्तांत।
  • वंशावली।
  • भारतीय साहित्य।
  • विदेशी विवरण।
  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी लेख।

कलात्मक स्रोत

  • चित्रकला इतिहास की जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत हो सकती है।
  • मूर्ति कला और अन्य कलात्मक वस्तुएँ भी अतीत के बारे में जानकारी देती हैं।
  • शैल-चित्र प्रारंभिक मानव जीवन के अध्ययन में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

मौखिक स्रोत

  • लोककथाएँ और मौखिक परंपराएँ अतीत की जानकारी का स्रोत हो सकती हैं।
  • एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चली आ रही कथाएँ और परंपराएँ स्थानीय इतिहास को समझने में सहायता कर सकती हैं।

आधुनिक इतिहास के स्रोत

  • समाचार-पत्र आधुनिक इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं।
  • टेलीविजन और इंटरनेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग हाल के दशकों की घटनाओं के अध्ययन में किया जा सकता है।
  • आधुनिक इतिहास में उपलब्ध स्रोतों की संख्या प्राचीन इतिहास की तुलना में अधिक हो सकती है।

इतिहासकार और स्रोतों का अध्ययन

  • इतिहासकार विभिन्न स्रोतों से जानकारी एकत्र करते हैं।
  • वे एक ही विषय से संबंधित अनेक स्रोतों की तुलना करते हैं।
  • यदि स्रोतों में विरोधी जानकारी मिले, तो इतिहासकार यह तय करने का प्रयास करते हैं कि किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाए।
  • इस प्रकार इतिहासकार अध्ययन किए जा रहे कालखंड के इतिहास का पुनर्निर्माण करते हैं।

इतिहास के पुनर्निर्माण में अन्य विशेषज्ञों का योगदान

विशेषज्ञ योगदान
पुरातत्त्व विज्ञानी प्राचीन भौतिक अवशेषों का अध्ययन।
परालेखशास्त्री प्राचीन अभिलेखों को पढ़ने और समझने में सहायता।
मानव विज्ञानी मानव समाज और संस्कृतियों का अध्ययन।
साहित्य एवं भाषा विशेषज्ञ साहित्य और भाषाई स्रोतों को समझने में सहायता।
वैज्ञानिक जलवायु, उत्खनन सामग्री, आनुवंशिकी आदि के वैज्ञानिक अध्ययन में योगदान।

वैज्ञानिक अध्ययन और इतिहास

  • वैज्ञानिक अध्ययनों ने इतिहास के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • प्राचीन जलवायु का अध्ययन अतीत की परिस्थितियों को समझने में सहायता करता है।
  • उत्खनन से प्राप्त सामग्री का रासायनिक अध्ययन भी उपयोगी है।
  • प्राचीन मानव की आनुवंशिकी का अध्ययन भी इतिहास को समझने में नया दृष्टिकोण देता है।

मानव इतिहास का प्रारंभ

  • आधुनिक मानव अर्थात होमो सेपियंस लगभग 3,00,000 वर्ष पूर्व से पृथ्वी पर रह रहे हैं।
  • मानव का इतिहास पृथ्वी के इतिहास की तुलना में बहुत छोटा है।
  • प्रारंभिक मानव को प्रकृति से अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

आदिमानव का जीवन

  • आदिमानव एक-दूसरे की सहायता करने के लिए समूहों या टोलियों में रहते थे।
  • वे मुख्यतः आखेटक और खाद्य संग्राहक थे।
  • वे खाने योग्य पौधों और फलों का संग्रह करते थे।
  • वे पशुओं का आखेट करते थे।
  • भोजन और आश्रय की खोज उनके जीवन का महत्वपूर्ण भाग था।

आदिमानव के निवास

  • आदिमानव अस्थायी शिविरों में रहते थे।
  • वे शैलाश्रयों और गुफाओं का भी उपयोग करते थे।
  • उनका जीवन प्राकृतिक पर्यावरण पर बहुत अधिक निर्भर था।

अग्नि का उपयोग

  • आदिमानव ने अग्नि का उपयोग करना सीखा।
  • अग्नि ने उनके जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाया।
  • अग्नि का उपयोग प्रारंभिक मानव जीवन में एक महत्वपूर्ण विकास था।

पत्थर के उपकरण

  • आदिमानव पत्थरों से विभिन्न प्रकार के उपकरण बनाते थे।
  • पत्थर की उन्नत कुल्हाड़ियाँ और ब्लेड बनाए गए।
  • नुकीले तीर और अन्य उपकरण भी बनाए जाते थे।
  • उपकरणों के निर्माण ने आखेट और दैनिक जीवन को सरल बनाया।

शैल-चित्र

  • दुनिया की सैकड़ों गुफाओं में शैल-चित्र पाए गए हैं।
  • शैल-चित्रों में प्रारंभिक मानव जीवन के विभिन्न पहलू दिखाई देते हैं।
  • कुछ चित्र सरल आकृतियों और प्रतीकों के हैं।
  • कुछ चित्रों में मानवों और पशुओं के दृश्य दिखाई देते हैं।
  • शैल-चित्र आदिमानव के जीवन को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

आदिमानव के आभूषण

  • समय के साथ आदिमानव ने पत्थर और मनकों की मालाएँ बनानी शुरू कीं।
  • पशुओं के दाँतों से पेंडेंट जैसे आभूषण भी बनाए गए।
  • कुछ वस्तुओं का दूसरे समूहों के साथ आदान-प्रदान भी किया जाता था।

मरणोपरांत जीवन की धारणाएँ

  • प्रारंभिक मानव के प्राकृतिक तत्वों को लेकर कुछ निश्चित विश्वास थे।
  • उनके बीच मृत्यु के बाद के जीवन को लेकर भी कुछ धारणाएँ रही होंगी।

हिम युग

  • पृथ्वी की जलवायु में लंबे समय में अनेक परिवर्तन हुए हैं।
  • एक समय पृथ्वी का बहुत बड़ा भाग बर्फ से ढका हुआ था।
  • इस अवधि को हिम युग कहा जाता है।
  • पाठ के अनुसार हिम युग लगभग 1,00,000 वर्ष पूर्व से 12,000 वर्ष पूर्व तक रहा।
  • बाद में जलवायु गर्म होने लगी और हिम का कुछ भाग पिघल गया।
  • बर्फ के पिघलने से नदियों में जल की मात्रा बढ़ी और जल बाद में समुद्रों में समाहित हुआ।

कृषि की शुरुआत

  • जलवायु के गर्म होने के बाद मानव के लिए रहने योग्य परिस्थितियों में सुधार हुआ।
  • विश्व के कई भागों में मनुष्यों ने एक स्थान पर बसना शुरू किया।
  • उन्होंने अनाज उगाना आरंभ किया।
  • कृषि के कारण भोजन की उपलब्धता बढ़ी।

पशुओं का घरेलकरण

  • मनुष्यों ने गाय, बकरी आदि जानवरों का घरेलकरण शुरू किया।
  • पशुपालन ने मानव के भोजन और जीवन-यापन को अधिक स्थिर बनाया।
  • भोजन की अधिक उपलब्धता के कारण मानव समूहों का आकार बढ़ने लगा।

नदियों के किनारे बस्तियाँ

  • प्रारंभिक कृषक समुदाय प्रायः नदियों के किनारे बसने लगे।
  • नदियों के किनारे जल आसानी से उपलब्ध था।
  • नदी के किनारे की मिट्टी अधिक उपजाऊ होती थी।
  • उपजाऊ मिट्टी ने अनाज उगाने को आसान बनाया।

समुदायों का विकास

  • समय के साथ मानव समुदाय अधिक जटिल होते गए।
  • सरदार या मुखिया लोगों के कल्याण के लिए उत्तरदायी होते थे।
  • समुदाय के लोग सामूहिक रूप से सामुदायिक कल्याण के लिए कार्य करते थे।
  • प्रारंभिक समुदायों में भूमि पर सामुदायिक रूप से कृषि की जाती थी।

पल्ली से गाँव तक

  • पल्ली छोटी बस्ती अथवा छोटा गाँव होता है।
  • समय के साथ छोटी बस्तियाँ बड़े गाँवों में परिवर्तित होने लगीं।
  • गाँव भोजन, वस्त्र और उपकरण जैसी वस्तुओं के आदान-प्रदान के केंद्र बनने लगे।
  • धीरे-धीरे गाँवों में संप्रेषण और आवागमन की व्यवस्था विकसित हुई।
  • कुछ गाँव आगे चलकर छोटे कस्बों में परिवर्तित हो गए।

मृद्भांड और मिट्टी की वस्तुएँ

  • समय के साथ मनुष्यों ने मृद्भांड और मिट्टी की अन्य वस्तुएँ बनाना सीखा।
  • मिट्टी के बर्तनों ने दैनिक जीवन में अनेक उपयोगी सुविधाएँ प्रदान कीं।

धातुओं का उपयोग

  • मानव ने धीरे-धीरे धातुओं का उपयोग करना शुरू किया।
  • पहले तांबे और बाद में लोहे के उपयोग की तकनीक विकसित हुई।
  • धातुओं से टिकाऊ उपकरण बनाना आसान हुआ।
  • दैनिक उपयोग की वस्तुएँ और आभूषण भी धातुओं से बनाए जाने लगे।

मानव समाज में परिवर्तन

  • आखेट और खाद्य संग्रह से कृषि और पशुपालन की ओर परिवर्तन हुआ।
  • घुमंतू जीवन से स्थायी निवास की ओर बढ़ने की प्रक्रिया शुरू हुई।
  • छोटी बस्तियाँ विकसित होकर गाँवों और कस्बों में बदलने लगीं।
  • वस्तुओं के आदान-प्रदान और तकनीकी विकास से समाज अधिक जटिल होता गया।
  • इन प्रारंभिक विकासों ने आगे चलकर सभ्यता के उदय में योगदान दिया।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

शब्द परिभाषा
इतिहास का स्रोत कोई स्थान, व्यक्ति, लेख या वस्तु जिससे अतीत की जानकारी प्राप्त होती है।
इतिहासकार अतीत का अध्ययन करने और उसके विषय में लिखने वाला व्यक्ति।
आखेटक शिकार करके भोजन प्राप्त करने वाला व्यक्ति।
खाद्य संग्राहक प्रकृति से खाने योग्य पौधों, फलों आदि का संग्रह करने वाला व्यक्ति।
शैल-चित्र चट्टानों या गुफाओं की शिलाओं पर बनाए गए प्राचीन चित्र।
घरेलकरण जंगली पशुओं को मानव उपयोग और पालन के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया।
पल्ली एक छोटी बस्ती अथवा छोटा गाँव।
कल्याण स्वास्थ्य, समृद्धि और भलाई।

महत्वपूर्ण अंतर

आधार आखेटक एवं खाद्य संग्राहक कृषक एवं पशुपालक
भोजन शिकार और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों पर निर्भर कृषि और पालतू पशुओं पर अधिक निर्भर
जीवन भोजन और आश्रय की खोज में घूमते थे एक स्थान पर बसने लगे
मुख्य गतिविधि आखेट और खाद्य संग्रह कृषि और पशुपालन

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • इतिहास के स्रोत अतीत को समझने में सहायता करते हैं।
  • पुरातात्त्विक स्रोतों में उपकरण, हथियार, सिक्के, मूर्तियाँ, स्मारक और शिलालेख आदि शामिल हैं।
  • साहित्यिक स्रोतों में पांडुलिपियाँ, लोक साहित्य, वेद, कविता, नाटक, यात्रा-वृत्तांत और ऐतिहासिक वृत्तांत आदि शामिल हैं।
  • आधुनिक इतिहास में समाचार-पत्र, टेलीविजन और इंटरनेट जैसे स्रोत उपयोगी हैं।
  • इतिहासकार विभिन्न स्रोतों की तुलना करके अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं।
  • आधुनिक मानव अर्थात होमो सेपियंस लगभग 3,00,000 वर्ष पूर्व से पृथ्वी पर रह रहे हैं।
  • आदिमानव मुख्यतः आखेटक और खाद्य संग्राहक थे।
  • आदिमानव समूहों, अस्थायी शिविरों, शैलाश्रयों और गुफाओं में रहते थे।
  • अग्नि और पत्थर के उपकरणों ने प्रारंभिक मानव जीवन को सरल बनाया।
  • शैल-चित्र प्रारंभिक मानव जीवन के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।
  • जलवायु में सुधार के बाद कृषि और पशुओं का घरेलकरण शुरू हुआ।
  • कृषि के विकास के साथ मानव ने स्थायी निवास की दिशा में कदम बढ़ाया।
  • नदियों के किनारे की उपजाऊ मिट्टी ने कृषि को बढ़ावा दिया।
  • छोटी बस्तियाँ विकसित होकर गाँव और कुछ गाँव छोटे कस्बों में बदल गए।
  • पहले तांबे और बाद में लोहे के उपयोग से टिकाऊ उपकरण बनाना आसान हुआ।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • इतिहास के स्रोत → अतीत की जानकारी देने वाले स्थान, व्यक्ति, लेख या वस्तुएँ।
  • पुरातात्त्विक स्रोत → सिक्के, उपकरण, मूर्तियाँ, स्मारक, शिलालेख आदि।
  • साहित्यिक स्रोत → पांडुलिपियाँ, वेद, लोक साहित्य, कविता, नाटक आदि।
  • आधुनिक स्रोत → समाचार-पत्र, टीवी, इंटरनेट आदि।
  • इतिहासकार → स्रोतों का अध्ययन करके अतीत का पुनर्निर्माण करता है।
  • आदिमानव → मुख्यतः आखेटक और खाद्य संग्राहक।
  • आदिमानव के निवास → अस्थायी शिविर, शैलाश्रय और गुफाएँ।
  • महत्वपूर्ण विकास → अग्नि, पत्थर के उपकरण, शैल-चित्र और आभूषण।
  • हिम युग → पृथ्वी का बड़ा भाग बर्फ से ढका हुआ था।
  • कृषि → मानव के स्थायी निवास की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन।
  • पशुपालन → गाय, बकरी आदि का घरेलकरण।
  • स्थायी बस्तियाँ → छोटी बस्तियाँ → गाँव → छोटे कस्बे।
  • धातु → पहले तांबा, बाद में लोहा।
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