Chapter 3. धातु और अधातु Class 10 Science CBSE notes in hindi Properties of Ionic Compounds (आयनिक यौगिकों के गुण) - CBSE Study
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CBSE NOTES:
Class 10 English Medium Science All Chapters:
3. धातु और अधातु
3. Properties of Ionic Compounds (आयनिक यौगिकों के गुण)
Formation of Ions and Ionic Compounds (आयनों तथा आयनिक यौगिकों का निर्माण)
अधिकांश धातुएँ तथा अधातुएँ रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान करके आयनों (Ions) का निर्माण करती हैं। धातुएँ सामान्यतः इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (Cation) बनाती हैं, जबकि अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (Anion) बनाती हैं। धातु एवं अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनने वाले यौगिकों को आयनिक अथवा विद्युत संयोजी यौगिक कहा जाता है।
Reaction of Metals and Non-metals (धातुओं तथा अधातुओं की अभिक्रिया)
अधिकांश धातुएँ अपने सबसे बाहरी कोश (Outermost Shell) के इलेक्ट्रॉनों को त्यागकर धनात्मक आयन (Positive Ion) बनाती हैं। दूसरी ओर, अधिकांश अधातुएँ अपना अष्टक (Octet) पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करती हैं तथा ऋणात्मक आयन (Negative Ion) बनाती हैं।
इस प्रकार धातु एवं अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है, जिसके परिणामस्वरूप विपरीत आवेश वाले आयन बनते हैं। इन आयनों के बीच उपस्थित विद्युतस्थैतिक आकर्षण बल उन्हें एक-दूसरे से बाँधकर आयनिक यौगिक का निर्माण करता है।
Cation and Anion (धनायन एवं ऋणायन)
धनायन (Cation) तथा ऋणायन (Anion) को समझने के लिए किसी तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) तथा उसकी संयोजकता (Valency) को समझना आवश्यक है।
धनायन (Cation)
जब कोई परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों का त्याग करता है, तब उसमें प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों से अधिक हो जाती है। परिणामस्वरूप उस पर धनात्मक आवेश आ जाता है और वह धनायन (Cation) कहलाता है।
ऋणायन (Anion)
जब कोई परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करता है, तब उसमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से अधिक हो जाती है। परिणामस्वरूप उस पर ऋणात्मक आवेश आ जाता है और वह ऋणायन (Anion) कहलाता है।
Valency (संयोजकता)
किसी परमाणु के सबसे बाहरी कोश (Outermost Shell) में उपस्थित संयोजक इलेक्ट्रॉनों (Valence Electrons) की संख्या को उसकी संयोजकता (Valency) कहते हैं।
संयोजकता यह बताती है कि कोई परमाणु रासायनिक अभिक्रिया के दौरान कितने इलेक्ट्रॉनों का त्याग, ग्रहण अथवा साझाकरण (Sharing) कर सकता है।
उदाहरण : सोडियम (Na)
सोडियम (Na) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न प्रकार है—
सोडियम परमाणु में तीन कोश होते हैं तथा सबसे बाहरी कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है। यह एक इलेक्ट्रॉन आसानी से त्यागा जा सकता है, इसलिए सोडियम की संयोजकता 1 होती है।
Valence Electrons (संयोजक इलेक्ट्रॉन)
यदि किसी परमाणु के सबसे बाहरी कोश में 1, 2, 3 या 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, तो सामान्यतः वे रासायनिक अभिक्रिया के दौरान त्यागे या साझे किए जा सकते हैं। इसलिए इन तत्वों की संयोजकता क्रमशः 1, 2, 3 तथा 4 होती है।
यदि सबसे बाहरी कोश में 5, 6 या 7 इलेक्ट्रॉन हों, तो ये इलेक्ट्रॉन सामान्यतः त्यागे नहीं जाते। ऐसे परमाणु अपना अष्टक (Octet) पूरा करने के लिए क्रमशः 3, 2 या 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं।
| सबसे बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉन | अष्टक पूरा करने हेतु आवश्यक इलेक्ट्रॉन |
|---|---|
| 5 | 8 − 5 = 3 |
| 6 | 8 − 6 = 2 |
| 7 | 8 − 7 = 1 |
Electronic Configuration of Elements (तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास)
किसी परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉन विभिन्न ऊर्जा स्तरों अथवा कोशों (Shells) में व्यवस्थित रहते हैं। इन कोशों को K, L, M तथा N आदि नामों से दर्शाया जाता है। किसी तत्व के इलेक्ट्रॉनों का इन कोशों में वितरण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) कहलाता है।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की सहायता से किसी तत्व की संयोजकता (Valency), अभिक्रियाशीलता (Reactivity) तथा आयन बनाने की क्षमता को आसानी से समझा जा सकता है।
Electronic Configuration Table (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास सारणी)
| तत्व का प्रकार | तत्व | परमाणु संख्या | K | L | M | N |
|---|---|---|---|---|---|---|
| निष्क्रिय गैसें (Noble Gases) | हीलियम (He) | 2 | 2 | — | — | — |
| नियॉन (Ne) | 10 | 2 | 8 | — | — | |
| आर्गन (Ar) | 18 | 2 | 8 | 8 | — | |
| धातुएँ (Metals) | सोडियम (Na) | 11 | 2 | 8 | 1 | — |
| मैग्नीशियम (Mg) | 12 | 2 | 8 | 2 | — | |
| एलुमिनियम (Al) | 13 | 2 | 8 | 3 | — | |
| पोटैशियम (K) | 19 | 2 | 8 | 8 | 1 | |
| कैल्शियम (Ca) | 20 | 2 | 8 | 8 | 2 | |
| अधातुएँ (Non-metals) | नाइट्रोजन (N) | 7 | 2 | 5 | — | — |
| ऑक्सीजन (O) | 8 | 2 | 6 | — | — | |
| फ्लोरीन (F) | 9 | 2 | 7 | — | — | |
| फॉस्फोरस (P) | 15 | 2 | 8 | 5 | — | |
| सल्फर (S) | 16 | 2 | 8 | 6 | — | |
| क्लोरीन (Cl) | 17 | 2 | 8 | 7 | — |
Understanding Electronic Configuration (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को समझना)
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास यह दर्शाता है कि किसी परमाणु के विभिन्न कोशों में कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं। सबसे बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ही यह निर्धारित करती है कि वह तत्व इलेक्ट्रॉन त्यागेगा, ग्रहण करेगा अथवा साझा करेगा।
उदाहरण के लिए, सोडियम (Na) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। इसके सबसे बाहरी कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए यह आसानी से एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर स्थिर अष्टक (Stable Octet) प्राप्त कर लेता है।
इसी प्रकार क्लोरीन (Cl) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है। इसके सबसे बाहरी कोश में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए इसे अपना अष्टक पूरा करने के लिए केवल एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।
Formation of Sodium Cation and Chloride Anion (सोडियम धनायन एवं क्लोराइड ऋणायन का निर्माण)
सोडियम (Na) तथा क्लोरीन (Cl) के बीच होने वाली अभिक्रिया यह समझने का सबसे सरल उदाहरण है कि धातु एवं अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण किस प्रकार आयनों का निर्माण करता है। सोडियम एक धातु है, जबकि क्लोरीन एक अधातु है। दोनों की इलेक्ट्रॉनिक संरचना अलग-अलग होने के कारण उनकी इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने या त्यागने की प्रवृत्ति भी भिन्न होती है।
Formation of Sodium Cation (Na+)
सोडियम परमाणु (Na) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 होता है। इसके सबसे बाहरी (M) कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है।
स्थिर अष्टक (Stable Octet) प्राप्त करने के लिए सोडियम अपने सबसे बाहरी कोश का एक इलेक्ट्रॉन आसानी से त्याग देता है। इलेक्ट्रॉन त्यागने के बाद उसका L कोश सबसे बाहरी कोश बन जाता है, जिसमें आठ इलेक्ट्रॉन उपस्थित रहते हैं।
सोडियम परमाणु के नाभिक (Nucleus) में 11 प्रोटॉन होते हैं। इलेक्ट्रॉन त्यागने के बाद इलेक्ट्रॉनों की संख्या 10 रह जाती है। परिणामस्वरूप प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों से एक अधिक हो जाती है, जिससे सोडियम पर एक धनात्मक आवेश आ जाता है। इस प्रकार सोडियम धनायन (Na+) का निर्माण होता है।
Formation of Chloride Anion (Cl−)
क्लोरीन (Cl) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 होता है। इसके सबसे बाहरी कोश में सात इलेक्ट्रॉन उपस्थित रहते हैं।
स्थिर अष्टक प्राप्त करने के लिए क्लोरीन को केवल एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। जब क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तब उसके सबसे बाहरी कोश में आठ इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं और उसका अष्टक पूर्ण हो जाता है।
क्लोरीन के नाभिक में 17 प्रोटॉन होते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के बाद उसके पास कुल 18 इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं। इस कारण इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से एक अधिक हो जाती है और उस पर एक ऋणात्मक आवेश उत्पन्न हो जाता है। इस प्रकार क्लोराइड ऋणायन (Cl−) बनता है।
Electron Transfer Between Sodium and Chlorine (सोडियम एवं क्लोरीन के बीच इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण)
जब सोडियम तथा क्लोरीन परस्पर अभिक्रिया करते हैं, तब सोडियम अपना एक संयोजक इलेक्ट्रॉन क्लोरीन को दे देता है। इस प्रकार सोडियम धनायन (Na+) तथा क्लोराइड ऋणायन (Cl−) का निर्माण होता है।
विपरीत आवेश वाले ये दोनों आयन एक-दूसरे को विद्युतस्थैतिक आकर्षण (Electrostatic Force of Attraction) द्वारा आकर्षित करते हैं। यही आकर्षण बल दोनों आयनों को एक साथ बाँधकर आयनिक बंध (Ionic Bond) का निर्माण करता है।
Ionic Compounds (आयनिक यौगिक)
जब किसी धातु से इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण किसी अधातु की ओर होता है, तब धातु धनायन (Cation) तथा अधातु ऋणायन (Anion) का निर्माण करती है। इन विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच उत्पन्न विद्युतस्थैतिक आकर्षण बल (Electrostatic Force of Attraction) उन्हें एक साथ बाँधकर आयनिक यौगिक (Ionic Compounds) अथवा विद्युत संयोजी यौगिक (Electrovalent Compounds) का निर्माण करता है।
दूसरे शब्दों में, धातु से अधातु की ओर इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण द्वारा बनने वाले यौगिकों को आयनिक यौगिक कहते हैं। इन यौगिकों में धनायन एवं ऋणायन एक-दूसरे से आयनिक बंध (Ionic Bond) द्वारा जुड़े रहते हैं।
Properties of Ionic Compounds (आयनिक यौगिकों के गुण)
आयनिक यौगिकों में धनायनों एवं ऋणायनों के बीच प्रबल विद्युतस्थैतिक आकर्षण बल पाया जाता है। इसी कारण इनके भौतिक तथा रासायनिक गुण सामान्य सहसंयोजी (Covalent) यौगिकों से भिन्न होते हैं।
1. Physical Nature (भौतिक प्रकृति)
आयनिक यौगिक सामान्यतः ठोस (Solid) होते हैं तथा धनात्मक एवं ऋणात्मक आयनों के बीच प्रबल आकर्षण बल के कारण अपेक्षाकृत कठोर (Hard) होते हैं।
ये यौगिक सामान्यतः भंगुर (Brittle) होते हैं। इन पर अधिक दबाव डालने पर ये छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं।
2. Melting and Boiling Points (गलनांक एवं क्वथनांक)
आयनिक यौगिकों के गलनांक (Melting Point) तथा क्वथनांक (Boiling Point) सामान्यतः बहुत अधिक होते हैं।
इसका कारण यह है कि धनायनों तथा ऋणायनों के बीच उपस्थित प्रबल विद्युतस्थैतिक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए अधिक मात्रा में ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
3. Solubility (विलेयता)
अधिकांश आयनिक अथवा विद्युत संयोजी यौगिक जल (Water) में घुलनशील होते हैं, जबकि मिट्टी का तेल (Kerosene), पेट्रोल तथा अन्य कार्बनिक विलायकों (Organic Solvents) में सामान्यतः अघुलनशील होते हैं।
4. Conduction of Electricity (विद्युत का चालन)
किसी विलयन में विद्युत का चालन आवेशित कणों (Charged Particles) की गति के कारण होता है। जब किसी आयनिक यौगिक को जल में घोला जाता है, तब वह धनायनों एवं ऋणायनों में विघटित हो जाता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर ये आयन विपरीत आवेश वाले इलेक्ट्रोडों की ओर गति करते हैं, जिससे विद्युत का चालन संभव हो जाता है।
ठोस अवस्था (Solid State) में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि उनकी कठोर क्रिस्टलीय संरचना (Rigid Crystal Structure) के कारण आयन स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर पाते।
लेकिन द्रवित (Molten State) अथवा जलीय विलयन (Aqueous Solution) में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन करते हैं। ऐसा इसलिए संभव होता है क्योंकि ऊष्मा अथवा जल की उपस्थिति में आयन स्वतंत्र रूप से गति करने लगते हैं।
| अवस्था | विद्युत का चालन | कारण |
|---|---|---|
| ठोस अवस्था (Solid State) | नहीं | आयन स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर सकते। |
| द्रवित अवस्था (Molten State) | हाँ | आयन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। |
| जलीय विलयन (Aqueous Solution) | हाँ | धनायन एवं ऋणायन स्वतंत्र रूप से गति करते हैं। |