Your Complete CBSE Learning Hub

Free NCERT Solutions, Revision Notes & Practice Questions

Notes | Solutions | PYQs | Sample Papers — All in One Place

Get free NCERT solutions, CBSE notes, sample papers and previous year question papers for Class 6 to 12 in Hindi and English medium.

Advertise:

Chapter 13. विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव Class 10 Science CBSE notes in hindi परिचय - CBSE Study

Chapter 13. विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव Science Class 10 cbse notes परिचय in hindi, all chapters and exercises are covered the ncert latest syllabus 2026 - 27.

• Hi Guest! • LoginRegister

Class 6

CBSE Notes

Class 7

CBSE Notes

Class 8

CBSE Notes

Class 9

CBSE Notes

Class 10

CBSE Notes

Class 11

CBSE Notes

Class 12

CBSE Notes

Chapter 13. विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव Class 10 Science CBSE notes in hindi परिचय - CBSE Study

कक्षा 10 Science के लिए NCERT समाधान नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम और NCERT पाठ्यपुस्तकों के अनुसार सावधानीपूर्वक तैयार किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी प्रत्येक अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझ सकें। इन समाधानों में सभी महत्वपूर्ण 13. विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव को विस्तृत व्याख्या और चरण-दर-चरण उत्तरों सहित शामिल किया गया है, जिससे परीक्षा की बेहतर तैयारी हो सके। प्रत्येक परिचय को सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी मूलभूत सिद्धांतों को आसानी से समझकर अपनी शैक्षणिक उपलब्धि में सुधार कर सकें। यह अध्ययन सामग्री दैनिक गृहकार्य, पुनरावृत्ति अभ्यास तथा वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। सटीक उत्तर, स्पष्ट अवधारणाएँ और व्यवस्थित सामग्री विद्यार्थियों को आत्मविश्वास बढ़ाने तथा परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता करती है। चाहे आप किसी विशेष विषय का पुनरावृत्ति कर रहे हों या पूरे अध्याय की तैयारी कर रहे हों, यह संसाधन Science में पूर्ण सफलता के लिए विश्वसनीय और पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Class 10 English Medium Science All Chapters:

13. विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

1. परिचय

Page 1 of 5

अध्याय 13. विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 


चुम्बक के ध्रुव (The poles of Magnet):

1. उत्तर दिशा की ओर संकेत करने वाले सिरे को उत्तरोमुखी ध्रुव अथवा उत्तर ध्रुव कहते हैं।

2. दूसरा सिरा जो दक्षिण दिशा की ओर संकेत करता है उसे दक्षिणोमुखी ध्रुव अथवा दक्षिण ध्रुव कहते हैं। 

चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field): एक मैगनेट के चारों के क्षेत्र जिसमें चुम्बक का पता लगाया जा सकता है, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है |  

चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines): चुम्बक के चारों ओर बहुत सी रेखाएँ बनती हैं, जो चुम्बक के उतारी ध्रुव से निकल कर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती प्रतीत होती हैं, इन रेखाओं को चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कहते हैं | 

चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की विशेषताएँ (Features of Magnetic Field Lines): 

(i) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में समाहित हो जाती है | 

(ii) चुम्बक के अंदर, चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा इसके दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होता है | 

(iii) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र होती हैं |

(iv) जहाँ चुम्बकीय क्षेत्र रेखाए घनी होती हैं वहाँ चुम्बकीय क्षेत्र मजबूत होता है |

(v) दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक दुसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं | 

धारावाही चालक के चारो ओर चुम्बकीय क्षेत्र :

(Magnetic Fields around the current carrying conductor: 

(i) एक धातु चालक से होकर गुजरने वाली विद्युत धारा इसके चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र बनाता है | 

(ii) जब एक धारावाही चालक को दिक्सूचक सुई के पास और उसके सुई के समांतर ले जाते है तो  विद्युत धारा की बहाव की दिशा दिकसुचक के विचलन की दिशा को उत्क्रमित कर देता है जो कि विपरीत दिशा में होता है | 

(iii) यदि धारा में वृद्धि की जाती है तो दिक्सूचक के विचलन में भी वृद्धि होती हैं |

(iv) जैसे जैसे चालन में धारा की वृद्धि होती है वैसे वैसे दिए गए बिंदु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण भी बढ़ता है |

(v) जब हम एक कंपास (दिक्सूचक) को धारावाही चालक से दूर ले जाते हैं तो सुई का विचलन कम हो जाता है | 

(vi) तार में प्रवाहित विद्युत धारा के परिमाण में वृद्धि होती है तो किसी दिए गए बिंदु पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण में भी वृद्धि हो जाती है।

(vii) किसी चालक से प्रवाहित की गई विद्युत धरा के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र चालक से दूर जाने पर घटता है।

(viii) जैसे-जैसे विद्युत धरावाही सीधे चालक तार से दूर हटते जाते हैं, उसके चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र को निरूपित करने वाले संकेंद्री वृत्तों का साइज़ बड़ा हो जाता है।

दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम (Right hand thumb Rule): 

कल्पना कीजिए कि आप अपने दाहिने हाथ में विद्युत धरावाही चालक को इस प्रकार पकड़े हुए हैं कि आपका अँगूठा विद्युत धरा की दिशा की ओर संकेत करता है, तो आपकी अँगुलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाओं की दिशा में लिपटी होंगी | इस नियम को दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम कहते हैं | 

इस नियम को मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम भी कहते हैं | 

विद्युत धरावाही वृत्ताकार पाश के कारण चुंबकीय क्षेत्र :

Magnetic Field due to a Current through a Circular Loop:

किसी विद्युत धरावाही चालक के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र उससे दूरी के व्युत्क्रम पर निर्भर करता है। इसी प्रकार किसी विद्युत धरावाही पाश के प्रत्येक बिंदु पर उसके चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र को निरूपित करने वाले संकेंद्री वृत्तों का साइज़ तार से दूर जाने पर निरंतर बड़ा होता जाता है  

विद्युत धरावाही वृत्ताकार पाश के कारण चुंबकीय क्षेत्र का गुण:

Properties of magnetic field line of a current through a circular loop: 

(i) वृत्ताकार पाश के केंद्र पर इन बृहत् वृत्तों के चाप सरल रेखाओं जैसे प्रतीत होने लगते हैं। 

(ii) विद्युत धरावाही तार के प्रत्येक बिंदु से उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ पाश के केंद्र पर सरल रेखा जैसी प्रतीत होने लगती हैं। 
(iii) पाश के भीतर सभी चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक ही दिशा में होती हैं।                                

  • किसी विद्युत धरावाही तार के कारण किसी दिए गए बिंदु पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र प्रवाहित विद्युत धरा पर अनुलोमतः निर्भर करता है।
  • यदि हमारे पास n फेरों की कोई कुंडली हो तो उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र परिमाण में एकल फेरों द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की तुलना में n गुना अधिक प्रबल होगा। इसका कारण यह है कि प्रत्येक फेरों में विद्युत धारा के प्रवाह की दिशा समान है, अतः व्यष्टिगत फेरों के चुंबकीय क्षेत्र संयोजित हो जाते हैं।
Page 1 of 5

Topic Lists Page Wise:

Disclaimer:

This website's domain name has included word "CBSE" but here we clearly declare that we and our website have neither any relation to CBSE and nor affliated to CBSE organisation.